पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 27 अक्टूबर 2026 को येरेवन, आर्मेनिया में CBD COP-17 के उच्चस्तरीय सत्र में भारत का वक्तव्य दिया। भारत ने जैव विविधता संरक्षण के लिए पर्याप्त वित्त, क्षमता विकास और तकनीक हस्तांतरण की जरूरत पर जोर दिया।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| सम्मेलन | CBD COP-17 |
|---|---|
| स्थान | येरेवन, आर्मेनिया |
| भारत का वक्तव्य | 27 अक्टूबर 2026 |
| राष्ट्रीय लक्ष्य / संकेतक | 23 / 142 |
भारत के वक्तव्य का मुख्य संदेश
भारत के अनुसार वैश्विक फ्रेमवर्क का क्रियान्वयन राष्ट्रीय परिस्थितियों और प्राथमिकताओं से जुड़ा होना चाहिए। अद्यतन राष्ट्रीय कार्ययोजना में 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य और 142 संकेतक बताए गए हैं। संकेतक लक्ष्यों की प्रगति मापने के साधन हैं।
CBD और COP को समझें
CBD का अर्थ Convention on Biological Diversity, यानी जैव विविधता अभिसमय है। COP का अर्थ Conference of the Parties है। अलग अंतरराष्ट्रीय संधियों की अपनी COP बैठकें होती हैं; इसलिए केवल COP संख्या देखकर उसे जलवायु सम्मेलन मान लेना सही नहीं है।
जैव विविधता का अध्ययन प्रजातियों की गिनती तक सीमित नहीं है। जीवों के भीतर आनुवंशिक अंतर और जंगल, घासभूमि, नदी तथा अन्य पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता भी इसका हिस्सा हैं। पर्यावरण के प्रश्नों में इन स्तरों को उदाहरण सहित समझना उपयोगी होता है।
Static GK: कुनमिंग–मॉन्ट्रियल वैश्विक फ्रेमवर्क
CBD सचिवालय के अनुसार इस फ्रेमवर्क में 2030 तक के लिए 23 कार्रवाई-आधारित वैश्विक लक्ष्य हैं। इसका लक्ष्य 2 क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्रों के कम-से-कम 30 प्रतिशत क्षेत्र को प्रभावी पुनर्स्थापन के अंतर्गत लाने से संबंधित है। लक्ष्य 3 भूमि, अंतर्देशीय जल तथा समुद्री और तटीय क्षेत्रों के कम-से-कम 30 प्रतिशत के प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन से जुड़ा है।
दोनों में “30 प्रतिशत” आने पर भी पुनर्स्थापन और संरक्षण अलग काम हैं। पुनर्स्थापन में बिगड़े पारिस्थितिक कार्यों की बहाली पर ध्यान होता है; संरक्षण में महत्वपूर्ण क्षेत्रों की रक्षा और प्रभावी प्रबंधन शामिल है। संख्या के साथ उसका आधार और लक्ष्य पढ़ना जरूरी है।
राष्ट्रीय और वैश्विक लक्ष्यों में अंतर
वैश्विक फ्रेमवर्क साझा दिशा देता है, जबकि राष्ट्रीय कार्ययोजना देश की परिस्थितियों में उसे लागू करने का रास्ता तय करती है। “23 वैश्विक लक्ष्य” और “23 भारतीय राष्ट्रीय लक्ष्य” की संख्या समान होने से उनके विवरण को बिना पढ़े बिल्कुल एक जैसा नहीं माना जा सकता।
उदाहरण के लिए, किसी विद्यालय का लक्ष्य पानी बचाना हो सकता है। प्रगति जानने के लिए पानी की खपत और रिसाव जैसी मापनीय जानकारी चाहिए। इसी तरह पर्यावरण नीति में लक्ष्य बताता है कि क्या हासिल करना है, और संकेतक बताते हैं कि प्रगति कैसे जाँची जाएगी।
परीक्षा के लिए ध्यान रखने योग्य बातें
समाचार से आयोजन स्थल, संबंधित अभिसमय और भारत का मुख्य पक्ष नोट करें। Static GK में संरक्षण, पुनर्स्थापन और जैव विविधता के स्तर समझें। सम्मेलन में किसी देश का वक्तव्य और सभी देशों का अंतिम सामूहिक निर्णय अलग दस्तावेज होते हैं; इस लेख का आधार भारत का वक्तव्य है।
परीक्षा उपयोगी बिंदु
- CBD की COP को UNFCCC की COP से अलग पहचानें।
- वैश्विक फ्रेमवर्क के लक्ष्य 2 और 3 का अंतर याद रखें।
- लक्ष्य और प्रगति संकेतक अलग अवधारणाएँ हैं।