27 अक्टूबर 2026 को PIB ने Carbon Capture, Utilisation and Storage (CCUS) पर पृष्ठभूमि लेख जारी किया। यह उद्योगों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को अलग करके उपयोग या सुरक्षित भंडारण से जोड़ने की तकनीकी व्यवस्था है। यह किसी नए संयंत्र के उद्घाटन की घोषणा नहीं है।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| पूरा नाम | Carbon Capture, Utilisation and Storage |
|---|---|
| प्रमुख गैस | CO₂ |
| मुख्य चरण | कैप्चर, उपयोग या भंडारण |
| भारत का लक्ष्य | नेट जीरो 2070 |
प्रक्रिया के तीन मुख्य हिस्से
कैप्चर चरण में गैस मिश्रण से CO₂ अलग की जाती है। इसके बाद उसे उपयुक्त रूप में तैयार करके उपयोग या भंडारण स्थल तक पहुँचाया जाता है। उपयोग में कार्बन कुछ उत्पादों का कच्चा माल बन सकता है; भंडारण में उपयुक्त भूगर्भीय संरचनाओं की भूमिका होती है।
उद्योगों के लिए यह चर्चा क्यों जरूरी है?
सीमेंट, इस्पात और अन्य कठिन-उत्सर्जन-घटौती वाले क्षेत्रों में केवल बिजली का स्रोत बदलना हर प्रक्रिया का समाधान नहीं होता। भारत का नेट जीरो लक्ष्य 2070 है। CCUS को नवीकरणीय ऊर्जा और दक्षता सुधार के साथ सहायक विकल्प के रूप में पढ़ना चाहिए।
Static GK: CO₂, कार्बन और नेट जीरो
CO₂ कार्बन डाइऑक्साइड का रासायनिक सूत्र है। इसके एक अणु में एक कार्बन और दो ऑक्सीजन परमाणु होते हैं। “कार्बन” शब्द रोजमर्रा की जलवायु चर्चा में उत्सर्जन का संक्षिप्त संकेत बन जाता है, लेकिन वैज्ञानिक प्रश्न में तत्व और यौगिक का अंतर महत्वपूर्ण है।
नेट जीरो का सामान्य अर्थ उत्सर्जित और हटाई गई ग्रीनहाउस गैसों के बीच संतुलन प्राप्त करना है। इसे हर गतिविधि से बिल्कुल शून्य उत्सर्जन होने का पर्याय न समझें। किसी तकनीक की भूमिका को पूरी ऊर्जा व्यवस्था और उसकी सीमाओं के साथ देखना चाहिए।
कैप्चर क्षमता और वास्तविक लाभ में अंतर
IEA अपने CCUS आँकड़ों में कैप्चर क्षमता का अलग संकेतक रखता है। क्षमता का अर्थ वह मात्रा है जिसे व्यवस्था निर्धारित परिस्थितियों में संभाल सकती है; वास्तविक संचालन और वार्षिक उपलब्धि का प्रमाण अलग चाहिए। किसी घोषित परियोजना को चालू संयंत्र लिख देना भी इसी प्रकार की गलती होगी।
समझने के लिए पानी की टंकी का उदाहरण लें: उसकी भंडारण क्षमता जानने से यह पता नहीं चलता कि पूरे वर्ष कितना पानी वास्तव में भरा गया। इसी तरह तकनीकी क्षमता, उपयोग की दर और वास्तविक परिणामों के बीच अंतर करना जरूरी है।
उपयोग और स्थायी भंडारण एक जैसे क्यों नहीं?
कार्बन को किसी उत्पाद में उपयोग कर लेना अपने आप यह सिद्ध नहीं करता कि वह हमेशा वातावरण से बाहर रहेगा। परिणाम उत्पाद के जीवनचक्र और बाद की प्रक्रियाओं पर निर्भर कर सकता है। इसलिए केवल “कार्बन उपयोग” का नाम देखकर पूर्ण जलवायु लाभ का दावा न करें।
एक अच्छे वैज्ञानिक उत्तर में प्रक्रिया, उपयोगिता, ऊर्जा की जरूरत और निगरानी जैसे पहलुओं को अलग-अलग रखा जाता है। इस दृष्टिकोण से CCUS को न तो चमत्कारी समाधान समझना चाहिए और न एक ही शब्द में खारिज करना चाहिए।
परीक्षा उपयोगी बिंदु
- कार्बन तत्व और कार्बन डाइऑक्साइड यौगिक में अंतर करें।
- कैप्चर क्षमता को वास्तविक वार्षिक कैप्चर न मानें।
- CCUS जलवायु और औद्योगिक तकनीक दोनों से जुड़ा विषय है।