रक्षा मंत्रालय ने 21 अक्टूबर 2026 को भारतीय सेना के लिए Improved Low Level Light Weight Radar—LLLR-I की खरीद हेतु भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड—BEL के साथ लगभग ₹770 करोड़ का अनुबंध किया। नई दिल्ली में हुए हस्ताक्षर के अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उपस्थित थे।
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार प्रणाली लड़ाकू विमान के आकार के हवाई लक्ष्यों के साथ मिनी और माइक्रो ड्रोन का पता लगाने तथा उनकी निगरानी करने से संबंधित है। हवाई लक्ष्यों की प्राथमिकता निर्धारित करने की क्षमता भी इसमें बताई गई है। यह समाचार सेना की हवाई निगरानी व्यवस्था और स्वदेशी रक्षा खरीद के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
कम ऊँचाई वाले लक्ष्यों की निगरानी क्यों महत्वपूर्ण है?
हवाई खतरे केवल बड़े विमानों तक सीमित नहीं होते। छोटे ड्रोन के कारण निगरानी प्रणालियों को अलग आकार के लक्ष्यों पर ध्यान देना पड़ता है। इस संदर्भ में रडार का काम किसी वस्तु की उपस्थिति और गति संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना है। उससे मिली जानकारी आगे की प्रतिक्रिया के लिए निर्णय लेने में उपयोग की जा सकती है।
पहचान करना, लगातार ट्रैक करना और कार्रवाई करना अलग-अलग कार्य हैं। किसी समाचार में रडार की खरीद की घोषणा को पढ़कर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि वही उपकरण अपने आप प्रत्येक लक्ष्य को नष्ट भी करता है। निगरानी उपकरण व्यापक सुरक्षा व्यवस्था का एक हिस्सा होते हैं।
रडार का मूल विज्ञान और DRDO का उदाहरण
रडार शब्द का विस्तार Radio Detection and Ranging है। सामान्य रूप से यह रेडियो तरंगों की सहायता से वस्तुओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने की तकनीक है। कम ऊँचाई की निगरानी से जुड़े उपकरणों के अध्ययन में पोर्टेबिलिटी, शुरुआती चेतावनी और लक्ष्यों पर नजर रखने की भूमिका जैसे विचार महत्वपूर्ण होते हैं।
DRDO अपनी उत्पाद जानकारी में Bharani Mk-I को दो आयामी Low Level Light Weight Radar के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करता है। उसमें हल्के, ले जाए जा सकने वाले और बैटरी से संचालित ढाँचे की जानकारी दी गई है। यह पृष्ठभूमि समझने के लिए अलग उत्पाद का उदाहरण है; उसके तकनीकी आँकड़ों को नए LLLR-I अनुबंध पर स्वतः लागू नहीं करना चाहिए।
अनुबंध से जुड़े मुख्य तथ्य
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| तारीख | 21 अक्टूबर 2026 |
| खरीदार मंत्रालय | रक्षा मंत्रालय |
| उपयोगकर्ता | भारतीय सेना |
| आपूर्तिकर्ता | BEL |
| अनुबंध मूल्य | लगभग ₹770 करोड़ |
| प्रणाली | Improved Low Level Light Weight Radar |
| घोषित भूमिका | हवाई लक्ष्यों और छोटे ड्रोन की पहचान व निगरानी |
स्वदेशी रक्षा उद्योग से संबंध
विज्ञप्ति इस खरीद को स्वदेशीकरण और छोटे उद्योगों से जुड़े विनिर्माण तंत्र के लिए प्रासंगिक बताती है। ऐसे समाचारों में केवल अनुबंध की राशि याद करने के बजाय मंत्रालय, कंपनी, उपयोगकर्ता बल और उपकरण की भूमिका साथ पढ़ना बेहतर है। इससे रक्षा अर्थव्यवस्था और विज्ञान दोनों विषयों की तैयारी होती है।
परीक्षा में कौन-सी सावधानी रखें?
अनुबंध पर हस्ताक्षर का अर्थ सभी रडारों की आपूर्ति या तैनाती पूरी होना नहीं है। इस विज्ञप्ति से इकाइयों की संख्या, निश्चित आपूर्ति अवधि अथवा पहचान की अधिकतम दूरी का दावा नहीं किया गया है। परीक्षा के लिए सत्यापित जोड़ा याद रखें: LLLR-I—भारतीय सेना—BEL—लगभग ₹770 करोड़। राशि में “लगभग” शब्द बनाए रखना भी जरूरी है।