- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के तरावड़ी, करनाल से देशव्यापी खेत बचाओ अभियान शुरू किया। अभियान की घोषित अवधि 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 है। इसका मुख्य विषय मृदा स्वास्थ्य और खेती में संसाधनों का संतुलित उपयोग है।
अभियान में किसानों तक क्या संदेश पहुँचेगा?
- कृषि मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार वैज्ञानिकों और कृषि संस्थानों को गाँवों में किसानों के साथ संवाद करने के लिए कहा गया है। प्रमुख संदेश हैं—मिट्टी की जरूरत के अनुसार उर्वरक देना, फसल चक्र अपनाना, अवशेष जलाने से बचना और प्राकृतिक खेती के तरीकों को समझना। कृषि विज्ञान केंद्र तथा कृषि विश्वविद्यालय इस संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- शुभारंभ कार्यक्रम में Soil Health Card देखने और प्रयोग के तौर पर सीमित क्षेत्र से प्राकृतिक खेती शुरू करने की अपील की गई। इसे सभी किसानों के लिए एक जैसी अनिवार्य खेती-पद्धति या सुनिश्चित उपज-वृद्धि का वादा नहीं मानना चाहिए। उपयुक्त तरीका मिट्टी, जलवायु, फसल और स्थानीय कृषि परामर्श पर निर्भर करता है।
Soil Health Card क्या बताता है?
- Soil Health Card मिट्टी के परीक्षण पर आधारित रिपोर्ट है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार इसमें 12 मानकों की जानकारी शामिल होती है। इससे किसान समझ सकता है कि मिट्टी में कौन-से पोषक तत्त्व उपलब्ध हैं और किसकी कमी है। केवल फसल का नाम देखकर हर खेत में समान मात्रा में खाद डालना मृदा परीक्षण का विकल्प नहीं है।
| समूह | परीक्षण के मानक |
|---|---|
| मुख्य पोषक तत्त्व | नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K) |
| द्वितीयक पोषक तत्त्व | सल्फर (S) |
| सूक्ष्म पोषक तत्त्व | जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज, बोरॉन |
| अन्य माप | pH, विद्युत चालकता (EC), जैविक कार्बन (OC) |
फसल चक्र और अवशेष प्रबंधन का महत्व
- फसल चक्र का अर्थ एक खेत में अलग-अलग मौसम या चक्रों में नियोजित ढंग से विभिन्न फसलें उगाना है। उदाहरण के लिए, लगातार एक ही प्रकार की फसल लेने के बजाय उपयुक्त दलहनी फसल को चक्र में शामिल किया जा सकता है। इससे पोषण प्रबंधन और फसल विविधीकरण को समझने का अवसर मिलता है। फसल परिवर्तन का निर्णय स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार होता है।
- फसल अवशेष प्रबंधन में खेत से निकलने वाले डंठल और अन्य जैविक पदार्थ को उपयोगी संसाधन मानने का विचार शामिल है। अभियान में खेतों में आग न लगाने पर जोर दिया गया है। अवशेषों का उचित प्रबंधन वायु गुणवत्ता और मृदा संरक्षण दोनों से जुड़ता है; इसलिए यह विषय कृषि और पर्यावरण के पाठ्यक्रमों को एक साथ जोड़ता है।
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| अभियान का शुभारंभ | 22 अक्टूबर 2026 |
| स्थान | तरावड़ी, करनाल, हरियाणा |
| घोषित अंतिम तारीख | 30 नवंबर 2026 |
| मुख्य उद्देश्य | मृदा स्वास्थ्य, संतुलित कृषि पद्धतियाँ और किसान जागरूकता |
| कार्यान्वयन का प्रमुख माध्यम | गाँवों में वैज्ञानिकों और कृषि संस्थानों का संवाद |
परीक्षा में क्या याद रखें?
- मृदा परीक्षण, उर्वरक सब्सिडी और प्राकृतिक खेती अलग अवधारणाएँ हैं। मृदा परीक्षण खेत की स्थिति बताता है; आर्थिक सहायता और खेती की पद्धति के प्रश्न अलग हैं। इस अभियान को नई नकद हस्तांतरण योजना बताना उचित नहीं, क्योंकि यहाँ सत्यापित घोषणा का केंद्र जागरूकता और मृदा संरक्षण है।
- पुनरावृत्ति के लिए KVK का पूरा नाम Krishi Vigyan Kendra, ICAR का पूरा नाम Indian Council of Agricultural Research तथा N–P–K के नाम याद रखें। समाचार की शुरुआत की तारीख और पूरे अभियान की अवधि अलग-अलग लिखें।