भारत में सौर और पवन ऊर्जा के विस्तार के साथ बिजली को जरूरत के समय उपयोग करने के लिए संचित रखने का महत्व बढ़ रहा है। इसी संदर्भ में Pumped Storage Hydropower—PSH महत्वपूर्ण तकनीक है।
PIB ने 19 अक्टूबर 2026 को जारी विवरण में बताया कि अगस्त 2026 तक भारत में 10 परियोजनाओं में लगभग 7.43 गीगावॉट परिचालन पंप्ड स्टोरेज क्षमता थी।
पंप्ड स्टोरेज कैसे काम करता है?
इस व्यवस्था में सामान्यतः अलग-अलग ऊँचाई पर दो जलाशय होते हैं।
जब बिजली उपलब्ध हो और तत्काल जरूरत कम हो, तब उसका उपयोग पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय तक पंप करने में किया जाता है। बाद में बिजली की जरूरत होने पर पानी को नीचे छोड़ा जाता है। बहता पानी टरबाइन चलाता है और जनरेटर बिजली पैदा करता है।
इसलिए इसे समझाने के लिए “पानी वाली बड़ी बैटरी” का उदाहरण दिया जाता है। पानी को ऊपर पहुँचाने में पहले ऊर्जा खर्च होती है; यह मुफ्त या अनंत बिजली बनाने की प्रणाली नहीं है।
सौर और पवन ऊर्जा के लिए उपयोगी क्यों?
सौर ऊर्जा का उत्पादन और बिजली की माँग हमेशा एक ही समय पर अधिक नहीं होते। इसी प्रकार पवन ऊर्जा की उपलब्धता भी बदलती रहती है।
ऊर्जा भंडारण उत्पादन और उपयोग के बीच समय का अंतर कम करने में मदद करता है। पंप्ड स्टोरेज जरूरत के अनुसार संचित ऊर्जा उपलब्ध कराकर बिजली व्यवस्था को अधिक लचीला बना सकता है।
भारत की संभावना और वास्तविक क्षमता में अंतर
PIB के अनुसार, भारत में पहचानी गई पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की कुल संभावित क्षमता 345.38 गीगावॉट है। लेकिन पहचानी गई संभावना और चालू क्षमता अलग हैं। किसी स्थल की पहचान का अर्थ यह नहीं कि वहाँ परियोजना बनकर चालू हो चुकी है।
परियोजनाओं के विकास में भूगोल, जल की उपलब्धता, पर्यावरण, निर्माण और बिजली नेटवर्क से जुड़ाव की जाँच आवश्यक होती है।
परीक्षा उपयोगी तथ्य
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| प्रमुख कार्य | ऊर्जा भंडारण |
| मूल व्यवस्था | अलग ऊँचाई पर दो जलाशय |
| बिजली उत्पादन | पानी नीचे बहाकर टरबाइन चलाना |
| भारत की परिचालन क्षमता | लगभग 7.43 GW, अगस्त 2026 |
| महत्वपूर्ण अंतर | संभावित क्षमता ≠ परिचालन क्षमता |
यह विषय नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और बिजली ग्रिड से जुड़े प्रश्नों के लिए उपयोगी है।
आधिकारिक स्रोत
PIB: भारत में पंप्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर