भारत में आर्द्रभूमियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। अक्टूबर 2026 में दो नई आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है।

15 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने घोषणा की कि भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई है।

नए शामिल किए गए स्थलों में चंडीगढ़ की सुखना वेटलैंड (Sukhna Wetland) और उत्तर प्रदेश की सौज झील (Sauj Jheel) शामिल हैं।

नए रामसर स्थलों के बारे में

1. सुखना वेटलैंड – चंडीगढ़

सुखना वेटलैंड चंडीगढ़ में स्थित एक महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि है।

यह शिवालिक पर्वतश्रेणी के निकट स्थित है और स्थानीय जल पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यह क्षेत्र विभिन्न स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों के लिए आवास उपलब्ध कराता है।

सुखना वेटलैंड को रामसर सूची में साइट संख्या 2602 के रूप में शामिल किया गया है।

2. सौज झील – उत्तर प्रदेश

सौज झील उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों में शामिल है।

अक्टूबर 2026 में इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता प्रदान की गई।

इस मान्यता से झील की जैव विविधता, जलीय पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रयासों को प्रोत्साहन मिलने की अपेक्षा है।

रामसर स्थल क्या होते हैं?

रामसर स्थल ऐसी आर्द्रभूमियाँ होती हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारिस्थितिक महत्व के कारण मान्यता प्रदान की जाती है।

इन स्थलों का चयन रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention) के अंतर्गत किया जाता है।

रामसर कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय समझौता है, जिसका उद्देश्य विश्व की आर्द्रभूमियों का संरक्षण और उनके संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है।

आर्द्रभूमियों में झीलें, दलदली क्षेत्र, नदियों से जुड़े जलभराव वाले क्षेत्र, मैंग्रोव और अन्य महत्वपूर्ण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हो सकते हैं।

रामसर कन्वेंशन का इतिहास

रामसर कन्वेंशन को वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था।

यह समझौता वर्ष 1975 में लागू हुआ।

भारत में रामसर कन्वेंशन 1 फरवरी 1982 से प्रभावी हुआ।

प्रत्येक वर्ष 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetlands Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

आर्द्रभूमियों का पर्यावरणीय महत्व

आर्द्रभूमियाँ जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ये अनेक प्रकार के जलपक्षियों, मछलियों, जलीय वनस्पतियों और अन्य जीवों का प्राकृतिक आवास होती हैं।

इसके अलावा आर्द्रभूमियाँ जल की गुणवत्ता बनाए रखने, बाढ़ के प्रभाव को कम करने और स्थानीय जलचक्र को संतुलित रखने में भी सहायक हो सकती हैं।

कई आर्द्रभूमियाँ प्रवासी पक्षियों के लिए विश्राम और प्रजनन स्थल के रूप में कार्य करती हैं।

इस कारण रामसर स्थलों का संरक्षण केवल स्थानीय पर्यावरण ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।

राजस्थान से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

भारत के शुरुआती रामसर स्थलों में राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) भी शामिल था।

राजस्थान की सांभर झील भी एक महत्वपूर्ण रामसर स्थल है।

इसलिए रामसर स्थलों से जुड़े प्रश्न राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेष रूप से उपयोगी हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

महत्वपूर्ण तथ्य विवरण
अक्टूबर 2026 में भारत के कुल रामसर स्थल 103
नया रामसर स्थल सुखना वेटलैंड
संबंधित केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़
दूसरा नया रामसर स्थल सौज झील
संबंधित राज्य उत्तर प्रदेश
रामसर कन्वेंशन 1971
रामसर कन्वेंशन लागू 1975
भारत में प्रभावी 1 फरवरी 1982
विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2 फरवरी
राजस्थान का प्रमुख रामसर स्थल केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान

निष्कर्ष

भारत में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 103 होना आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रयासों से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सुखना वेटलैंड और सौज झील को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलने से इनके पारिस्थितिक महत्व को नई पहचान मिली है।

रामसर कन्वेंशन, इसके इतिहास तथा भारत के प्रमुख रामसर स्थलों से संबंधित जानकारी UPSC, RAS, SSC, Railway और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

Official Sources: Press Information Bureau | Ramsar Convention