भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने NVS-03 उपग्रह की पहली कक्षा-वृद्धि प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2026 को 16:48 बजे पूरी की। इससे पहले उपग्रह को GSLV-F18 ने 30 अक्टूबर 2026 को 23:51 बजे प्रक्षेपित किया था। यह भारत की क्षेत्रीय उपग्रह नौवहन प्रणाली NavIC की नई पीढ़ी का तीसरा उपग्रह है।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| उपग्रह | NVS-03 |
|---|---|
| प्रक्षेपण यान | GSLV-F18; GSLV की 20वीं उड़ान |
| प्रक्षेपण तारीख | 30 अक्टूबर 2026 |
| पहला कक्षा परिवर्तन | 31 अक्टूबर 2026 |
| प्रथम इंजन संचालन | 2,174.8 सेकंड |
| निर्धारित कक्षीय स्थान | 111.75° पूर्व; आगे की प्रक्रियाएँ बाकी |
प्रक्षेपण के बाद कक्षा क्यों बदली जाती है?
प्रक्षेपण यान ने उपग्रह को लगभग 170.3 × 38,080 किलोमीटर की प्रारंभिक कक्षा में स्थापित किया। यह लंबी दीर्घवृत्ताकार कक्षा है। ऐसी स्थिति में उपग्रह को उसकी नियोजित परिचालन कक्षा की ओर ले जाने के लिए अपने प्रणोदन तंत्र की सहायता से क्रमिक बदलाव किए जाते हैं। इसलिए सफल प्रक्षेपण और अंतिम कक्षा में पहुँच जाना दो अलग उपलब्धियाँ हैं।
पहले कक्षा परिवर्तन के दौरान लिक्विड अपोजी मोटर का संचालन 2,174.8 सेकंड तक हुआ। इसके बाद अनुमानित कक्षा लगभग 5,477.6 × 37,833.4 किलोमीटर रही। ISRO ने उपग्रह की स्थिति सामान्य बताई है।
आगे क्या होना है?
ISRO के अनुसार आगामी दिनों में और कक्षा परिवर्तन करके उपग्रह को 111.75° पूर्व के निर्धारित भू-समकालिक कक्षीय स्थान की ओर ले जाना है। वर्तमान सूचना में पहला चरण पूरा होने की पुष्टि है। उपग्रह को पूरी तरह परिचालन सेवा में घोषित कर देना इस जानकारी से आगे का दावा होगा।
समाचार पढ़ते समय तीन तारीखों का भेद रखें: वास्तविक प्रक्षेपण, कक्षा-वृद्धि और किसी नेता का बधाई संदेश। इस मामले में प्रक्षेपण 30 अक्टूबर को हुआ, जबकि पहला कक्षा परिवर्तन 31 अक्टूबर को हुआ। अगले दिन प्रकाशित बधाई संदेश को प्रक्षेपण की तारीख नहीं मानना चाहिए।
NavIC से क्या सहायता मिलती है?
NavIC भारत की क्षेत्रीय नौवहन व्यवस्था है। इसका सेवा क्षेत्र भारत तथा उसकी भौगोलिक सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक बताया गया है। उपग्रह नौवहन में सटीक समय संकेतों के आधार पर उपयोगकर्ता उपकरण अपनी स्थिति निर्धारित करने में सहायता लेते हैं। इससे समय मापन और स्थिति संबंधी सेवाओं का महत्व स्पष्ट होता है।
NVS श्रृंखला में पुराने L5 और S बैंड के साथ L1 बैंड संकेत भी जोड़ा गया है। अलग संकेत बैंड उपयोगकर्ता उपकरणों और सेवाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। केवल नया बैंड उपलब्ध होने से हर पुराना उपकरण स्वतः सक्षम हो जाए, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
Static GK: परमाणु घड़ी और कक्षीय शब्द
NVS-03 में खरीदी गई घड़ियों के साथ स्वदेशी परमाणु घड़ी भी शामिल है। नौवहन उपग्रह के समय संकेतों की अत्यधिक सटीकता उसकी उपयोगिता का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए परमाणु घड़ी को उपग्रह की समय-संदर्भ तकनीक के रूप में याद रखें।
दीर्घवृत्ताकार पृथ्वी-कक्षा का निकटतम बिंदु उपभू और दूरस्थ बिंदु अपभू कहलाता है। भू-समकालिक कक्षा की परिक्रमण अवधि पृथ्वी के घूर्णन से संबंधित होती है; भूस्थिर कक्षा उसका विशेष रूप है। परीक्षा में GTO, GSO और अंतिम परिचालन स्थिति को एक ही बात मानने से बचें।
परीक्षा उपयोगी बिंदु
- NVS-03: नई पीढ़ी का तीसरा NavIC उपग्रह।
- प्रक्षेपण: 30 अक्टूबर 2026।
- पहला कक्षा परिवर्तन: 31 अक्टूबर 2026।
- नई श्रृंखला का अतिरिक्त संकेत: L1 बैंड।