तथ्य-जाँच: 21 अक्टूबर 2026 | विषय: करेंट अफेयर्स
Digital India BHASHINI Division और भारतीय विज्ञान संस्थान—IISc, बेंगलुरु ने सौराष्ट्र भाषा के लिए Text-to-Speech—TTS मॉडल विकसित किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। यह तकनीक लिखित पाठ को कृत्रिम आवाज़ में बदलने में मदद करती है।
घोषणा के अनुसार सौराष्ट्र एक इंडो-आर्यन भाषा है, जिसका प्रयोग मुख्यतः तमिलनाडु के सौराष्ट्र समुदाय में होता है। नए मॉडल पुरुष और महिला आवाज़ के साथ तमिल तथा सौराष्ट्र, दोनों लिपियों के पाठ का समर्थन करते हैं। भाषा और लिपि अलग अवधारणाएँ हैं: एक भाषा को एक से अधिक लिपियों में लिखा जा सकता है।
नए मॉडल की विशेषताएँ
मॉडल VITS आर्किटेक्चर पर आधारित हैं। प्रशिक्षण के लिए IISc की SPIRE Lab में तैयार 28 घंटे से अधिक का भाषण संग्रह उपयोग हुआ है। इसमें एक पुरुष और एक महिला वक्ता की रिकॉर्डिंग तथा दोनों लिपियों में प्रतिलेख शामिल हैं। दो आवाज़ों और दो लिपियों के संयोजन से चार मॉडल बनते हैं।
TTS, speech recognition और translation में अंतर
| तकनीक | क्या करती है? |
|---|---|
| Text-to-Speech | लिखे पाठ को आवाज़ में बदलती है |
| Speech Recognition | बोली गई आवाज़ से शब्द पहचानकर पाठ बनाती है |
| Translation | एक भाषा के अर्थ को दूसरी भाषा में व्यक्त करती है |
| Transliteration | शब्दों का लिपि रूप बदलती है; अर्थ का अनुवाद जरूरी नहीं |
एक उदाहरण लें: किसी छात्र के पास सौराष्ट्र भाषा में लिखा अनुच्छेद है। TTS उसे सुनने योग्य बनाएगा। यदि वही विद्यार्थी बोलकर अनुच्छेद लिखवाना चाहता है तो speech recognition चाहिए। और यदि अनुच्छेद का अर्थ हिंदी में चाहिए तो translation की आवश्यकता होगी। इन सेवाओं को एक ही तकनीक समझने से परीक्षा में भ्रम हो सकता है।
कम डिजिटल संसाधन वाली भाषाओं की चुनौती
भाषा तकनीक के लिए केवल शब्दकोश पर्याप्त नहीं होता। साफ रिकॉर्डिंग, सही पाठ, विविध वाक्य और व्यवस्थित डेटा की आवश्यकता होती है। भारतीय भाषाओं पर ICASSP 2023 में स्वीकृत TTS शोध ने भाषाई विविधता, उपलब्ध संसाधनों और मॉडल प्रशिक्षण की जटिलता पर चर्चा की थी। उस अध्ययन में 13 भाषाओं के मॉडल पर काम हुआ था; उसे नए सौराष्ट्र मॉडल का अलग प्रदर्शन परीक्षण नहीं समझना चाहिए।
इस पृष्ठभूमि से स्पष्ट होता है कि डेटा उपलब्ध कराना भी तकनीकी प्रगति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भाषा में गुणवत्ता वाला संग्रह बनने से आगे अनुसंधान और नए अनुप्रयोग बनाने की संभावना बढ़ती है। हालांकि प्राकृतिक उच्चारण, कठिन शब्द और नए संदर्भों की गुणवत्ता को उपयोग के दौरान अलग से परखना आवश्यक रहेगा।
डिजिटल समावेशन के लिए महत्व
BHASHINI का आधिकारिक मंच भारतीय भाषाओं में सेवाओं और अनुप्रयोगों को उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। स्थानीय भाषा में जानकारी सुनने की सुविधा शिक्षा तथा डिजिटल पहुँच में उपयोगी हो सकती है। उदाहरण के लिए, पाठ पढ़ने में कठिनाई महसूस करने वाला उपयोगकर्ता उसी सामग्री को सुनकर समझ सकता है। यह संभावित उपयोग है, हर संस्थान में सेवा लागू हो जाने का दावा नहीं।
परीक्षा उपयोगी तथ्य
सौराष्ट्र भाषा, IISc बेंगलुरु, BHASHINI और TTS के संबंध को याद रखें। AI से जुड़ा प्रश्न आए तो तकनीक का उद्देश्य पहले लिखें: पाठ को आवाज़ में बदलना। भाषा संरक्षण के उत्तर में डिजिटल सामग्री, शोध के लिए डेटा और स्थानीय भाषा में पहुँच, इन तीन पहलुओं को जोड़ना उपयोगी होगा।