COP31 का आयोजन 9 से 20 नवंबर 2026 तक अंताल्या, तुर्किये में निर्धारित है। 3 नवंबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारत की प्राथमिकताएँ बताईं। 5 नवंबर की स्थिति में यह आगामी सम्मेलन है; इसके अंतिम निर्णय अभी हो चुके नहीं बताए जा सकते। भारत का जोर न्यायसंगत जलवायु कार्रवाई, वित्त और व्यावहारिक समाधान पर रहेगा।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| सम्मेलन | UNFCCC COP31 |
|---|---|
| मेजबान शहर | अंताल्या |
| देश | तुर्किये |
| निर्धारित तारीखें | 9–20 नवंबर 2026 |
| भारत की जानकारी | 3 नवंबर 2026 की प्रेस वार्ता |
| प्रमुख मुद्दे | वित्त, अनुकूलन, तकनीक और न्यायसंगत संक्रमण |
भारत किन बातों पर जोर देगा?
- भारत ने विकासशील देशों के लिए पूर्वानुमेय और सुलभ जलवायु वित्त, अनुकूलन तथा तकनीक हस्तांतरण को महत्वपूर्ण बताया है। राष्ट्रीय परिस्थितियों का सम्मान और देशों द्वारा निर्धारित जलवायु योजनाओं का महत्व भी रेखांकित किया गया है।
- न्यायसंगत संक्रमण के संदर्भ में विकास के अधिकार और सस्ती ऊर्जा तक पहुँच को साथ देखने की बात है। कृषि, खाद्य सुरक्षा और छोटे किसानों की आजीविका भी अनुकूलन से जुड़े मुद्दे हैं। ये भारत की वार्ता प्राथमिकताएँ हैं, पूरे सम्मेलन द्वारा स्वीकार किए गए अंतिम निष्कर्ष नहीं।
Static GK: COP और UNFCCC
- COP का विस्तार Conference of the Parties है। UNFCCC का पूरा नाम United Nations Framework Convention on Climate Change है। जलवायु वार्ता में देशों की सामूहिक बैठकों और उनके राष्ट्रीय कार्यों, दोनों की भूमिका होती है।
- संक्षिप्त नाम को संबंधित संधि के साथ पढ़ना जरूरी है। जैव विविधता की CBD और मरुस्थलीकरण की UNCCD के भी COP होते हैं। केवल COP संख्या देखकर सभी सम्मेलनों को एक ही प्रक्रिया समझना गलत होगा; यहाँ विषय UNFCCC की जलवायु प्रक्रिया है।
पेरिस समझौता और NDC
- पेरिस समझौता 12 दिसंबर 2015 को COP21 में अपनाया गया और 4 नवंबर 2016 को प्रभावी हुआ। इसका लक्ष्य पूर्व-औद्योगिक स्तर के मुकाबले तापवृद्धि को 2°C से काफी नीचे रखना और 1.5°C तक सीमित करने का प्रयास करना है।
- NDC का विस्तार Nationally Determined Contribution है। इसमें देश उत्सर्जन कम करने और जलवायु प्रभावों के प्रति क्षमता बढ़ाने के अपने प्रयास प्रस्तुत करते हैं। पेरिस व्यवस्था में हर पाँच वर्ष पर अधिक महत्वाकांक्षी प्रयासों का चक्र है।
शमन और अनुकूलन का अंतर
- शमन में जलवायु परिवर्तन के कारणों, विशेषकर उत्सर्जन, को सीमित करने का प्रयास होता है। अनुकूलन बदलती जलवायु के प्रभावों से होने वाले नुकसान और जोखिम को कम करने की तैयारी है। स्वच्छ ऊर्जा और ताप-सहनीय सार्वजनिक सुविधाओं को इन दो अलग दृष्टियों से समझा जा सकता है।
- उदाहरण के लिए, किसी शहर में बिजली की बचत वाला परिवहन उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकता है। उसी शहर में गर्मी के दौरान छाया और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था लोगों की संवेदनशीलता घटाने का उपाय हो सकती है। यह अवधारणा समझाने का उदाहरण है, COP31 की घोषित परियोजना नहीं।
समाचार पढ़ते समय क्या अलग रखें?
- वार्ता से पहले घोषित मांग, वार्ता में दिया गया प्रस्ताव और अंत में सर्वसम्मति से बना निर्णय अलग अवस्थाएँ हैं। किसी देश की प्राथमिकता को सभी देशों की सहमति के रूप में लिखना तथ्यात्मक गलती होगी।
- अंतिम परिणाम पर उत्तर लिखने से पहले सम्मेलन समाप्त होने के बाद जारी आधिकारिक दस्तावेज देखें। अभी की तैयारी में स्थान, निर्धारित तारीखें, भारत की प्राथमिकताएँ और पेरिस समझौते की पृष्ठभूमि को एक साथ दोहराना अधिक उपयोगी है।
परीक्षा उपयोगी बिंदु
- COP31: अंताल्या, तुर्किये।
- पेरिस समझौता अपनाया गया: 2015; प्रभावी: 2016।
- NDC में राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान शामिल हैं।
- शमन और अनुकूलन अलग लेकिन पूरक अवधारणाएँ हैं।