केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को राज्यों के लिए ₹1,09,019 करोड़ की अतिरिक्त कर हस्तांतरण किस्त जारी की। राज्यवार सूची में राजस्थान को ₹6,460 करोड़ दिए गए हैं। यह राशि नियमित मासिक हस्तांतरण के अतिरिक्त है। मंत्रालय के अनुसार आगामी त्योहारों के समय राज्यों को पूंजीगत खर्च तथा विकास और कल्याण संबंधी व्यय के लिए संसाधन उपलब्ध कराना इसका उद्देश्य है।
मुख्य तथ्य एक नज़र में
| घोषणा और जारी करने की तारीख | 31 अक्टूबर 2026 |
|---|---|
| सभी राज्यों की अतिरिक्त किस्त | ₹1,09,019 करोड़ |
| राजस्थान का हिस्सा | ₹6,460 करोड़ |
| वित्त वर्ष में स्थिति | दूसरी अतिरिक्त किस्त |
| सूचना जारी करने वाला मंत्रालय | केंद्रीय वित्त मंत्रालय |
अतिरिक्त किस्त का अर्थ क्या है?
राज्यों को वर्ष के दौरान कर राजस्व में उनकी हिस्सेदारी के अंतर्गत राशि हस्तांतरित की जाती है। नई सूचना में नियमित मासिक किस्त के अलावा एक और किस्त जारी करने की बात है। इसलिए ₹6,460 करोड़ को राजस्थान का पूरे वित्त वर्ष का कुल कर हिस्सा नहीं समझना चाहिए। यह केवल इस विशेष अतिरिक्त वितरण में राज्य के लिए बताई गई राशि है।
वित्त मंत्रालय ने इसे वित्त वर्ष की दूसरी अतिरिक्त किस्त बताया है। अतिरिक्त या अग्रिम भुगतान और कर-वितरण के मूल नियम में बदलाव अलग बातें हैं। इस घोषणा से अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि राज्यों की स्थायी प्रतिशत हिस्सेदारी बदल गई है।
पूंजीगत खर्च और कल्याण व्यय
पूंजीगत व्यय को सामान्यतः ऐसी परिसंपत्तियों के निर्माण या अधिग्रहण से जोड़कर समझा जाता है जिनसे लंबे समय तक लाभ मिल सकता है। सड़क, सार्वजनिक भवन या बुनियादी ढाँचे की परियोजनाएँ इसे समझने के उदाहरण हैं। कल्याण संबंधी खर्च नागरिकों को सेवाएँ और सहायता देने से जुड़ सकता है। वास्तविक खर्च संबंधित बजट और स्वीकृतियों के अनुसार होता है।
नई किस्त मिलने से राज्य के उपलब्ध संसाधनों को सहायता मिलती है, लेकिन केंद्रीय विज्ञप्ति राजस्थान की किसी खास सड़क, अस्पताल या लाभार्थी योजना के लिए अलग आवंटन घोषित नहीं करती। किसी परियोजना का नाम और राशि बताने के लिए उसकी अलग आधिकारिक स्वीकृति देखनी होगी।
Static GK: वित्त आयोग की भूमिका
संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत वित्त आयोग का गठन किया जाता है। आयोग संघ और राज्यों के बीच बाँटे जाने वाले करों के शुद्ध आगम के वितरण तथा राज्यों के बीच उनके हिस्सों के आवंटन पर सिफारिश करता है। यह केंद्र–राज्य वित्तीय संबंधों की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है।
केंद्र और राज्यों के बीच हिस्सेदारी को ऊर्ध्वाधर वितरण तथा राज्यों के आपसी हिस्सों को क्षैतिज वितरण कहा जाता है। दोनों प्रश्न अलग हैं: पहला बताता है कि राज्यों को सामूहिक रूप से कितना हिस्सा मिले, दूसरा कि प्रत्येक राज्य का हिस्सा कितना हो।
कर हस्तांतरण और अनुदान में अंतर
कर हस्तांतरण साझा कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी से संबंधित है। अनुदान वित्तीय सहायता का अलग माध्यम है और उसका उद्देश्य तथा शर्तें संबंधित व्यवस्था पर निर्भर करती हैं। इसलिए हर केंद्रीय भुगतान को किसी योजना का अनुदान कहना सही नहीं है। यह खबर विशेष रूप से कर हस्तांतरण की है।
परीक्षा में राशि, तारीख और संस्था को साथ पढ़ें। राष्ट्रीय कुल राशि तथा राजस्थान की राशि को बदलकर पूछे जाने वाले कथनों से सावधान रहें। राज्य के आर्थिक विकास के विश्लेषण में धन उपलब्ध होना, बजट में प्रावधान और वास्तविक खर्च—इन तीन चरणों को अलग समझना उपयोगी है।
परीक्षा उपयोगी बिंदु
- राजस्थान: अतिरिक्त किस्त में ₹6,460 करोड़।
- सभी राज्यों के लिए कुल: ₹1,09,019 करोड़।
- वित्त आयोग: अनुच्छेद 280।