राजस्थान सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए "द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026" का मसौदा तैयार करने हेतु एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की घोषणा 22 जून 2026 को की गई, जबकि गठन का निर्णय 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया था। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार एवं पारिवारिक कानूनों में समान कानूनी व्यवस्था विकसित करना है।

समान नागरिक संहिता क्या है

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) एक प्रस्तावित कानूनी व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत सभी नागरिकों के लिए धर्म या समुदाय से परे समान नागरिक कानून लागू किए जाते हैं। इसमें विवाह, तलाक, गोद लेना, भरण-पोषण एवं उत्तराधिकार जैसे पारिवारिक मामले शामिल होते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता का उल्लेख राज्य के नीति-निदेशक तत्वों (DPSP) के अंतर्गत किया गया है, जो राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की सलाह देता है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड भारत का पहला राज्य बना जिसने UCC अधिनियमित किया।

समिति की संरचना और जिम्मेदारियां

इस समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं (जो उत्तराखंड UCC समिति की भी अध्यक्ष रही थीं)। समिति में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, राजस्थान उच्च न्यायालय के अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छाबा, राजकीय विधि महाविद्यालय श्रीगंगानगर के पूर्व प्राचार्य रामस्वरूप अग्रवाल तथा डॉ. शुचि चौहान सदस्य हैं। राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करेंगे। समिति का मुख्य कार्य UCC का प्रारूप तैयार करना एवं विभिन्न हितधारकों से सुझाव प्राप्त करना है।

प्रस्तावित मसौदे की प्रमुख विशेषताएं

  • विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीकरण।
  • बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव।
  • लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण।
  • पैतृक संपत्ति में पुत्र एवं पुत्री को समान अधिकार।

इन प्रस्तावों का उद्देश्य पारिवारिक कानूनों में समानता, लैंगिक न्याय एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

जनसहभागिता और जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि मसौदा तैयार करने से पूर्व व्यापक जनपरामर्श किया जाएगा। समिति विभिन्न संभागीय मुख्यालयों पर बैठकों का आयोजन करेगी तथा नागरिकों से सुझाव हेतु एक ऑनलाइन मंच भी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही सरकार ने आश्वासन दिया है कि जनजातीय समुदायों के रीति-रिवाजों एवं अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा बनाए रखी जाएगी — भारत में अनुसूचित जनजातियों को संविधान की पांचवीं एवं छठी अनुसूची सहित विभिन्न प्रावधानों से विशेष संरक्षण प्राप्त है।

समान नागरिक संहिता: विस्तृत जानकारी एक नज़र में

  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 44 (नीति-निदेशक तत्व)।
  • विषय: विवाह, तलाक, गोद लेना, भरण-पोषण एवं उत्तराधिकार।
  • गोवा: पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 पर आधारित समान नागरिक व्यवस्था पहले से लागू।
  • उत्तराखंड: UCC अधिनियमित करने वाला पहला राज्य (न्यायमूर्ति देसाई समिति)।
  • शाह बानो मामला (1985): सर्वोच्च न्यायालय ने UCC पर टिप्पणी की।
  • राजस्थान: "द राजस्थान UCC, 2026" का मसौदा तैयार करने हेतु समिति गठित।

📌 महत्वपूर्ण तथ्य (Important Things to Remember)

  • 22 जून 2026 — राजस्थान में UCC मसौदा समिति की घोषणा (निर्णय 14 अप्रैल 2026)।
  • अध्यक्ष: न्यायमूर्ति (से.नि.) रंजना प्रकाश देसाई।
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 44 (नीति-निदेशक तत्व)।
  • प्रमुख प्रस्ताव: विवाह/तलाक एवं लिव-इन का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर प्रतिबंध, संपत्ति में समान अधिकार।
  • जनजातीय अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा (पांचवीं एवं छठी अनुसूची) बरकरार।
  • गोवा में UCC जैसी व्यवस्था पहले से लागू; उत्तराखंड UCC अधिनियमित करने वाला पहला राज्य।

🎯 UPSC स्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्र.1: समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है और भारतीय संविधान में इसका क्या स्थान है?
उत्तर: UCC एक ऐसी कानूनी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत सभी नागरिकों के लिए धर्म-निरपेक्ष समान पारिवारिक कानून (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार आदि) लागू होते हैं। संविधान के अनुच्छेद 44 में इसका उल्लेख राज्य के नीति-निदेशक तत्वों के अंतर्गत है, जो वाद-योग्य नहीं है परंतु राज्य को इसे लागू करने का प्रयास करने की सलाह देता है। इसका उद्देश्य कानूनी एकरूपता एवं लैंगिक न्याय है।

प्र.2: UCC के क्रियान्वयन में प्रमुख चुनौतियां क्या हैं?
उत्तर: प्रमुख चुनौतियां हैं — विविध धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों में समन्वय, अल्पसंख्यक एवं जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक स्वायत्तता का संरक्षण, संघवाद एवं राज्य-केंद्र अधिकार क्षेत्र, सामाजिक सहमति का अभाव तथा संवैधानिक प्रावधानों (पांचवीं/छठी अनुसूची) के साथ संतुलन बनाना। अतः व्यापक जनपरामर्श आवश्यक है।

📝 वन डे एग्जाम हेतु 5 MCQs

  1. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद समान नागरिक संहिता से संबंधित है?
    (a) अनुच्छेद 14 (b) अनुच्छेद 21 (c) अनुच्छेद 44 (d) अनुच्छेद 51A
    उत्तर: (c) अनुच्छेद 44
  2. राजस्थान UCC मसौदा समिति की अध्यक्ष कौन हैं?
    (a) न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई (b) न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा (c) शत्रुघ्न सिंह (d) डॉ. शुचि चौहान
    उत्तर: (a) न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई
  3. UCC अधिनियमित करने वाला भारत का पहला राज्य कौन सा है?
    (a) गुजरात (b) उत्तराखंड (c) राजस्थान (d) मध्य प्रदेश
    उत्तर: (b) उत्तराखंड
  4. अनुच्छेद 44 संविधान के किस भाग में आता है?
    (a) मौलिक अधिकार (b) नीति-निदेशक तत्व (c) मौलिक कर्तव्य (d) आपातकालीन प्रावधान
    उत्तर: (b) नीति-निदेशक तत्व
  5. किस राज्य में पुर्तगाली सिविल कोड 1867 आधारित समान नागरिक व्यवस्था लागू है?
    (a) केरल (b) गोवा (c) पुडुचेरी (d) तमिलनाडु
    उत्तर: (b) गोवा

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