INTERNATIONAL ORGANIZATIONS

संयुक्त राष्ट्र (UN)

इतिहास, प्रमुख अंग, कार्य और भारत से संबंध

UPSC Prelims एवं Mains के लिए विस्तृत अध्ययन

स्थापना

24 अक्टूबर 1945

मुख्यालय

न्यूयॉर्क, अमेरिका

प्रमुख अंग

6

सदस्य राज्य

193

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संयुक्त राष्ट्र का परिचय

United Nations (संयुक्त राष्ट्र) देशों के बीच शांति, सुरक्षा, विकास और मानवाधिकारों के लिए सहयोग का वैश्विक संगठन है। इसकी स्थापना द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुई। संगठन का आधार UN Charter है, जो इसके उद्देश्य, सिद्धांत, प्रमुख अंग और सदस्य देशों की जिम्मेदारियाँ तय करता है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • UN को समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राष्ट्रीय संप्रभुता का संबंध महत्वपूर्ण है।
  • सदस्य देश अपनी सरकार, संविधान और घरेलू प्रशासन बनाए रखते हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र उन विषयों पर साझा चर्चा और कार्रवाई का ढाँचा उपलब्ध कराता है जिनका प्रभाव सीमाओं के पार जाता है।
  • युद्ध, विस्थापन, गरीबी, जलवायु परिवर्तन और महामारियाँ इसके उदाहरण हैं।
  • UN स्वयं और व्यापक UN system में भी अंतर है।
  • UNICEF, UNDP जैसे funds तथा programmes, और WHO, UNESCO जैसी specialized agencies के अपने कार्यक्षेत्र, नेतृत्व तथा बजट होते हैं।
  • सभी संस्थाओं को संयुक्त राष्ट्र का “प्रमुख अंग” कहना सही नहीं है।
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स्थापना और इतिहास

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद League of Nations बनाया गया, लेकिन वह दूसरे विश्वयुद्ध को रोक नहीं सका। विश्वयुद्ध के विनाश ने अधिक प्रभावी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की आवश्यकता स्पष्ट की। 1945 के San Francisco सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के Charter का प्रारूप तैयार किया गया।

घटना महत्व
26 जून 1945 San Francisco में UN Charter पर हस्ताक्षर।
24 अक्टूबर 1945 Charter लागू हुआ; संयुक्त राष्ट्र की औपचारिक स्थापना।
51 मूल सदस्य संगठन की शुरुआत सीमित सदस्यता से हुई; भारत संस्थापक सदस्यों में था।
24 अक्टूबर प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जाता है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • हस्ताक्षर और लागू होने की तारीख में अंतर है।
  • Charter पर हस्ताक्षर राजनीतिक तथा कानूनी सहमति का महत्वपूर्ण चरण था; आवश्यक ratification पूरा होने के बाद संगठन अस्तित्व में आया।
  • इसलिए स्थापना की तारीख 24 अक्टूबर 1945 है।
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मुख्यालय, सदस्यता और भाषाएँ

तथ्य विवरण
मुख्यालय न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका
सदस्य देश 193 सदस्य राज्य; सितंबर 2026 में उपलब्ध UN विवरण के अनुसार।
प्रमुख अंग छह
आधिकारिक भाषाएँ अरबी, चीनी, अंग्रेज़ी, फ्रांसीसी, रूसी और स्पेनिश
न्यायिक अंग का स्थान International Court of Justice — द हेग, नीदरलैंड

नए सदस्य के प्रवेश में Security Council की सिफारिश तथा General Assembly का निर्णय आवश्यक होता है। सदस्यता, observer status और किसी UN संस्था में भागीदारी अलग-अलग व्यवस्थाएँ हैं। किसी गैर-सदस्य पर्यवेक्षक की उपस्थिति को पूर्ण सदस्यता के समान नहीं मानना चाहिए।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • UN की छह आधिकारिक भाषाओं का उपयोग दस्तावेजों और बैठकों में बहुभाषी भागीदारी के लिए किया जाता है।
  • किसी भाषा में UN समाचार उपलब्ध होना अपने आप उसे संगठन की आधिकारिक भाषा नहीं बनाता।
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उद्देश्य और आधारभूत सिद्धांत

  • अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा: संघर्ष रोकना, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देना तथा सामूहिक सुरक्षा की व्यवस्था विकसित करना।
  • मैत्रीपूर्ण संबंध: राष्ट्रों के बीच समान अधिकार और आत्मनिर्णय के सिद्धांतों के आधार पर सहयोग।
  • आर्थिक और सामाजिक सहयोग: गरीबी, बीमारी, शिक्षा, मानवीय संकट और विकास संबंधी समस्याओं पर मिलकर काम करना।
  • मानवाधिकार: सभी लोगों की गरिमा और स्वतंत्रताओं का सम्मान बढ़ाना।
  • साझा मंच: इन उद्देश्यों के लिए देशों के प्रयासों का समन्वय करना।

Charter संप्रभु समानता, दायित्वों के सद्भावपूर्वक पालन और शांतिपूर्ण विवाद समाधान पर जोर देता है। बल की धमकी या प्रयोग पर प्रतिबंध तथा घरेलू अधिकारक्षेत्र का सम्मान भी महत्वपूर्ण हैं। फिर भी Charter के अंतर्गत सामूहिक सुरक्षा की शक्तियों को अलग से समझना होता है; संप्रभुता का अर्थ सभी अंतरराष्ट्रीय दायित्वों से छूट नहीं है।

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छह प्रमुख अंग

अंग मुख्य भूमिका
General Assembly सभी सदस्य देशों का विचार-विमर्श और प्रतिनिधित्व वाला मंच।
Security Council अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी।
Economic and Social Council (ECOSOC) आर्थिक, सामाजिक और विकास संबंधी सहयोग का समन्वय।
Trusteeship Council Trust Territories को स्वशासन और स्वतंत्रता की ओर ले जाने की निगरानी; नियमित संचालन निलंबित।
International Court of Justice (ICJ) राज्यों के कानूनी विवाद और अधिकृत निकायों को advisory opinions।
Secretariat महासचिव के नेतृत्व में संगठन का प्रशासनिक और दैनिक कार्य।

छह अंगों के कार्य एक जैसे नहीं हैं। महासभा व्यापक प्रतिनिधित्व देती है, सुरक्षा परिषद संकटों पर निर्णय कर सकती है, ECOSOC विकास कार्य जोड़ता है और न्यायालय कानूनी प्रश्नों को देखता है। इन भूमिकाओं का विभाजन संगठन को अनेक प्रकार के विषयों पर काम करने योग्य बनाता है।

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महासभा: समान प्रतिनिधित्व का मंच

General Assembly में प्रत्येक सदस्य राज्य का एक वोट होता है। यहाँ वैश्विक मुद्दों पर बहस, budget और विभिन्न संस्थागत मामलों पर निर्णय होते हैं। शांति और सुरक्षा, नए सदस्यों का प्रवेश तथा बजट जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों पर उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। अन्य प्रश्न सामान्यतः साधारण बहुमत से तय किए जाते हैं।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • महासभा की कई resolutions सिफारिशी प्रकृति की होती हैं।
  • फिर भी उनका राजनीतिक और नैतिक महत्व हो सकता है क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय राय, मानक और नीति दिशा को व्यक्त करती हैं।
  • इसके साथ बजट तथा संस्थागत निर्णयों की भूमिका भी है; इसलिए सभी resolutions को बिल्कुल समान कानूनी प्रभाव वाला नहीं माना जा सकता।
  • महासभा छोटे और बड़े देशों को समान औपचारिक वोट देती है।
  • इसका लाभ व्यापक भागीदारी है, जबकि चुनौती यह है कि सामूहिक राय को वास्तविक कार्रवाई में बदलने के लिए सदस्य देशों तथा अन्य अंगों का सहयोग चाहिए।
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सुरक्षा परिषद और वीटो

Security Council में 15 सदस्य होते हैं: पाँच स्थायी और दस अस्थायी। स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका हैं। अस्थायी सदस्य महासभा द्वारा दो वर्ष के लिए चुने जाते हैं। परिषद की संरचना में स्थायी सदस्यता और veto विशेष महत्व रखते हैं।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • गैर-प्रक्रियात्मक निर्णयों में स्थायी सदस्य का नकारात्मक मत निर्णय को रोक सकता है; इसे veto कहा जाता है।
  • स्थायी सदस्य का मतदान से विरत रहना सामान्य व्यवहार में veto के बराबर नहीं है।
  • प्रक्रियात्मक और substantive मामलों के नियमों में अंतर है।
  • परिषद संघर्षों पर चर्चा, प्रतिबंध, शांति अभियानों के mandates और Charter के अनुसार अन्य उपायों पर निर्णय ले सकती है।
  • उसके निर्णयों का प्रभाव संबंधित Charter प्रावधान तथा resolution की भाषा से समझा जाता है।
  • परिषद को सामान्य अंतरराष्ट्रीय चर्चा मंच से अधिक शक्तियाँ मिली हैं, लेकिन राजनीतिक सहमति का अभाव उसके निर्णयों को रोक सकता है।
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ECOSOC और Trusteeship Council

ECOSOC में 54 सदस्य होते हैं, जिन्हें तीन वर्ष के overlapping कार्यकाल के लिए चुना जाता है। इसका क्षेत्र आर्थिक तथा सामाजिक विकास से जुड़ा है। विभिन्न commissions और UN संस्थाओं के काम के बीच सहयोग बढ़ाना इसका महत्वपूर्ण योगदान है। स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता और विकास के प्रश्न परस्पर जुड़े होने के कारण ऐसा समन्वय उपयोगी है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • Trusteeship Council का ऐतिहासिक काम 11 Trust Territories की निगरानी करना था ताकि वे स्वशासन या स्वतंत्रता की ओर बढ़ सकें।
  • अंतिम trust territory Palau की स्वतंत्रता के बाद 1994 में इसका नियमित संचालन निलंबित हो गया।
  • यह Charter में प्रमुख अंग के रूप में बना हुआ है; संचालन निलंबित होने और औपचारिक समाप्ति में अंतर है।
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अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और सचिवालय

ICJ संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है। यह द हेग में स्थित है और इसमें 15 न्यायाधीश नौ वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। राज्यों द्वारा प्रस्तुत कानूनी विवादों का निपटारा तथा अधिकृत UN निकायों एवं specialized agencies को कानूनी प्रश्नों पर advisory opinion देना इसके दो मुख्य कार्य हैं। विवादित मामलों में न्यायालय का अधिकारक्षेत्र सहमति से जुड़ा होता है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • ICJ और International Criminal Court (ICC) अलग संस्थाएँ हैं।
  • ICJ राज्यों के विवादों को देखता है; ICC व्यक्तियों की कुछ गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए आपराधिक जिम्मेदारी से संबंधित है।
  • नाम और शहर समान संदर्भ में आने के कारण इनकी भूमिका को मिलाना आसान है, पर संस्थागत आधार अलग है।
  • Secretariat महासचिव और अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों से बना है।
  • यह बैठकों, दस्तावेजों, कार्यक्रमों तथा अंगों द्वारा दिए गए mandates के प्रशासनिक और तकनीकी कार्य संभालता है।
  • महासचिव की नियुक्ति Security Council की सिफारिश पर General Assembly करती है।
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शांतिरक्षा और सामूहिक सुरक्षा

UN peacekeeping में सदस्य देश सैन्य तथा पुलिस कर्मियों का योगदान करते हैं; संयुक्त राष्ट्र की अपनी स्थायी सेना नहीं है। मिशन का काम उसके mandate पर निर्भर करता है। इसमें ceasefire की निगरानी, नागरिकों की सुरक्षा, राजनीतिक प्रक्रिया को समर्थन और स्थानीय संस्थाओं की मदद शामिल हो सकती है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • शांतिरक्षा और युद्ध में किसी पक्ष की ओर से लड़ना समान बात नहीं हैं।
  • Peacekeeping के संचालन में सहमति, निष्पक्षता और निर्धारित सीमाओं के अंतर्गत बल प्रयोग जैसे सिद्धांत महत्वपूर्ण हैं।
  • दूसरी ओर सामूहिक सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था में Charter के अंतर्गत Security Council के अलग उपाय हो सकते हैं।
  • किसी मिशन की सफलता केवल जवानों की संख्या से तय नहीं होती।
  • राजनीतिक समझौता, स्थानीय सहयोग, स्पष्ट mandate, संसाधन और सुरक्षा वातावरण भी आवश्यक हैं।
  • यदि संघर्ष के कारण बने रहें तो सैन्य उपस्थिति अकेले स्थायी शांति नहीं बना सकती।
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मानवाधिकार और विकास में भूमिका

संयुक्त राष्ट्र ने मानवाधिकारों की अंतरराष्ट्रीय चर्चा को संस्थागत आधार दिया। 1948 की Universal Declaration of Human Rights ने मानवीय गरिमा और अधिकारों की व्यापक अभिव्यक्ति दी। यह घोषणा और बाद की binding treaties अलग कानूनी रूप हैं। मानवाधिकारों का संरक्षण देशों की जिम्मेदारी, अंतरराष्ट्रीय निगरानी और सामाजिक भागीदारी से जुड़ा है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • विकास के क्षेत्र में 2030 Agenda और Sustainable Development Goals साझा दिशा देते हैं।
  • गरीबी, स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता, जल, ऊर्जा, पर्यावरण और संस्थागत क्षमता एक-दूसरे से जुड़े हैं।
  • UN system की अलग संस्थाएँ इन विषयों पर अपने mandates के अनुसार सहयोग करती हैं।
  • उदाहरण के लिए, किसी आपदा के बाद भोजन, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की जरूरत एक साथ पैदा हो सकती है।
  • अलग संस्थाओं का समन्वय दोहराव कम कर सकता है और लंबे समय की पुनर्बहाली को मदद दे सकता है।
  • सहायता की गुणवत्ता स्थानीय जरूरतों और समुदाय की भागीदारी पर भी निर्भर करती है।
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वित्त व्यवस्था

संयुक्त राष्ट्र के regular budget और peacekeeping budget की व्यवस्थाएँ अलग हैं। सदस्य देशों के assessed contributions निर्धारित नियमों के आधार पर तय होते हैं। विभिन्न funds और programmes में voluntary contributions भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए एक संस्था को मिला दान पूरी UN व्यवस्था की सामान्य उपलब्ध राशि नहीं माना जा सकता।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • वित्तीय देरी का असर स्टाफ, संचालन और मैदान में चल रही गतिविधियों पर पड़ सकता है।
  • बहुत अधिक earmarked धन होने पर किसी विशेष कार्य के बाहर उपयोग की स्वतंत्रता सीमित होती है।
  • स्थिर तथा पूर्वानुमेय वित्त और पारदर्शी परिणाम दोनों संगठन की प्रभावशीलता के लिए आवश्यक हैं।
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भारत और संयुक्त राष्ट्र

भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य है। स्वतंत्रता से पहले की सदस्यता का ऐतिहासिक संदर्भ 1945 की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़ा है। स्वतंत्र भारत ने उपनिवेशवाद के अंत, नस्लभेद के विरोध, विकासशील देशों के हित और बहुपक्षीय सहयोग का समर्थन किया है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • भारत ने UN peacekeeping में लंबे समय से सैन्य और पुलिस कर्मियों का योगदान दिया है।
  • यह भूमिका केवल सैनिक तैनाती नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा, स्थिरता और शांति प्रक्रियाओं से भी जुड़ी है।
  • विभिन्न मिशनों में योगदान का स्तर समय के साथ बदलता है।
  • भारत में UN agencies, funds और programmes राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर सरकार तथा अन्य साझेदारों के साथ काम करते हैं।
  • स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, आजीविका और सतत विकास इसके प्रमुख क्षेत्र हैं।
  • ऐसा सहयोग घरेलू नीति तथा प्रशासन का विकल्प नहीं, बल्कि ज्ञान और क्षमता का सहयोग होता है।
  • भारत Security Council में अधिक प्रतिनिधित्व तथा स्थायी सदस्यता का समर्थक है।
  • सुधार की चर्चा में वर्तमान वैश्विक जनसंख्या, आर्थिक भूमिका, विकासशील देशों की भागीदारी और अफ्रीका के प्रतिनिधित्व जैसे प्रश्न उठते हैं।
  • सदस्यता में बदलाव और veto सुधार पर देशों की अलग प्राथमिकताएँ हैं।
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उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और सुधार

  • संवाद का स्थायी मंच: प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच भी संवाद की संस्था उपलब्ध रहना संघर्ष प्रबंधन में उपयोगी है।
  • वैश्विक मानक: मानवाधिकार, विकास और अंतरराष्ट्रीय कानून की चर्चा को साझा दिशा मिली है।
  • मानवीय सहयोग: अलग संस्थाएँ संकटग्रस्त समुदायों तक सहायता तथा तकनीकी सहयोग पहुँचाती हैं।
  • राजनीतिक बाधा: बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा और veto व्यवस्था सामूहिक निर्णयों को बाधित कर सकती है।
  • कार्यान्वयन की सीमा: नियम तथा resolutions के प्रभाव के लिए राज्यों की इच्छा और क्षमता आवश्यक है।
  • प्रतिनिधित्व की चुनौती: 1945 की शक्ति संरचना और आज की दुनिया के बीच अंतर सुधार की मांग को जन्म देता है।

सुधार का उद्देश्य प्रतिनिधित्व, वित्तीय स्थिरता, पारदर्शिता और समन्वय को मजबूत करना है। अधिक प्रतिनिधि संस्था की वैधता बढ़ सकती है, लेकिन उसे समय पर निर्णय लेने में सक्षम भी होना चाहिए। केवल सीटें बढ़ाना, बिना कार्यप्रणाली और जवाबदेही सुधारे, सभी समस्याओं का समाधान नहीं करेगा।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का संतुलित आकलन उसके mandates, संसाधनों और सदस्य देशों के व्यवहार के साथ करना चाहिए।
  • अंतरराष्ट्रीय संस्था और राष्ट्रीय सरकारें एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
  • विश्वव्यापी समस्याओं का समाधान साझा नियम, भरोसेमंद सहयोग और स्थानीय कार्यान्वयन को जोड़ने से संभव होता है।

15. UPSC अवधारणाएँ और विश्लेषण

पाठ्यक्रम: GS-II: वैश्विक शासन, संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद सुधार और भारत की विदेश नीति।

कानूनी और संस्थागत भेद

  • महासभा और सुरक्षा परिषद: महासभा व्यापक प्रतिनिधित्व का मंच है; सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी रखती है। सभी प्रस्तावों की कानूनी प्रकृति समान नहीं है।
  • ICJ बनाम ICC: ICJ संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है और राज्यों के विवाद तथा अधिकृत सलाहकारी प्रश्न देखता है। ICC अलग संधि आधारित न्यायालय है जो व्यक्तियों की अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़ा है।
  • Peacekeeping: सामान्य सिद्धांतों में पक्षों की सहमति, निष्पक्षता तथा आत्मरक्षा और mandate की रक्षा के अलावा बल का सीमित उपयोग शामिल है। इसे हर परिस्थिति में सैन्य enforcement का पर्याय न समझें।
  • Trusteeship Council: 1994 में नियमित संचालन निलंबित हुआ; अंग को औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया।

16. भारत के हित, चुनौतियाँ और आगे की राह

नीचे दिए गए मूल्यांकन-बिंदु Mains के लिए विश्लेषण हैं; आधिकारिक तथ्य जहाँ आवश्यक हैं, स्रोत के साथ दिए गए हैं।

सुधार का प्रश्न केवल सीटों तक सीमित नहीं

  • प्रतिनिधित्व: विकासशील देशों और अफ्रीका की पर्याप्त भागीदारी संस्था की वैधता को मजबूत कर सकती है।
  • निर्णय क्षमता: विस्तार के साथ प्रभावी कार्रवाई, पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी विचार आवश्यक है।
  • Veto की बाधा: स्थायी सदस्यों के राजनीतिक मतभेद गंभीर संकटों में कार्रवाई सीमित कर सकते हैं।
  • कानूनी प्रक्रिया: Charter के Article 108 के अनुसार संशोधन के लिए महासभा के दो-तिहाई सदस्यों द्वारा अंगीकरण और सदस्य देशों के दो-तिहाई द्वारा अनुसमर्थन आवश्यक है; अनुसमर्थन में सभी स्थायी सदस्य शामिल होने चाहिए।
  • भारत का पक्ष: अधिक प्रतिनिधिक बहुपक्षवाद के साथ शांति स्थापना, विकास सहयोग और Global South की प्राथमिकताओं को जोड़ना।

स्रोत: UN Charter एवं सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली।

17. Prelims अभ्यास: 5 कथन आधारित प्रश्न

ये मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं; UPSC के वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं हैं।

प्रश्न 1

  1. UN के छह प्रमुख अंग हैं।
  2. ICJ का मुख्यालय हेग में है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: C। अन्य प्रमुख संस्थागत स्थानों से अलग याद रखें।

प्रश्न 2

  1. सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं।
  2. सभी 15 सदस्यों को veto प्राप्त है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: A। Veto पाँच स्थायी सदस्यों से संबंधित है।

प्रश्न 3

  1. ICC संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है।
  2. ICJ सामान्यतः व्यक्तियों के आपराधिक मुकदमे चलाता है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: D। ICJ और ICC की प्रकृति अलग है।

प्रश्न 4

  1. Trusteeship Council 1994 में औपचारिक रूप से समाप्त हुआ।
  2. महासभा और सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्ताव समान प्रकृति रखते हैं।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: D। परिषद का संचालन निलंबित हुआ; प्रस्तावों की प्रकृति अलग होती है।

प्रश्न 5

  1. Charter संशोधन के अनुसमर्थन में सभी P5 की सहमति आवश्यक है।
  2. केवल महासभा के साधारण बहुमत से Charter बदला जा सकता है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: A। Article 108 विशेष दो-तिहाई और P5 सहित अनुसमर्थन की शर्त रखता है।

18. Mains अभ्यास और मॉडल उत्तर

उत्तर-लेखन अभ्यास

  1. 150 शब्द: ICJ और ICC के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
  2. 250 शब्द: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता और बाधाओं का मूल्यांकन कीजिए।
  3. 250 शब्द: वैश्विक संकटों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।

मॉडल उत्तर: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता और बाधाओं का मूल्यांकन कीजिए।

सुरक्षा परिषद की संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के शक्ति संतुलन को दर्शाती है, जबकि विश्व की राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं।

विकासशील देशों तथा अफ्रीका का अधिक प्रतिनिधित्व परिषद की वैधता बढ़ा सकता है।

भारत की मांग व्यापक प्रतिनिधिक बहुपक्षवाद से जुड़ी है।

हालांकि सुधार केवल सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए।

निर्णय की प्रभावशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही भी आवश्यक हैं।

स्थायी सदस्यों के हित, क्षेत्रीय मतभेद और veto संबंधी विवाद प्रमुख बाधाएँ हैं।

Charter संशोधन के लिए विशेष बहुमत तथा सभी स्थायी सदस्यों सहित अनुसमर्थन की शर्त परिवर्तन को कठिन बनाती है।

व्यापक गठबंधन निर्माण, कार्यप्रणाली में सुधार और विकासशील देशों के बीच संवाद उपयोगी होंगे।

प्रतिनिधित्व तथा प्रभावशीलता का संतुलन ही परिषद को समकालीन वैश्विक आवश्यकताओं के प्रति अधिक उत्तरदायी बना सकता है।

उत्तर सुधारने की जाँच-सूची

  • भूमिका में प्रश्न की केंद्रीय अवधारणा स्पष्ट करें।
  • तथ्य और अपना विश्लेषण अलग रखें; जहाँ लागू हो, उदाहरण दें।
  • लाभ, सीमाएँ और भारत के हितों को संतुलित ढंग से जोड़ें।
  • निष्कर्ष में व्यावहारिक सुधार तथा कार्यान्वयन की शर्तें बताएँ।

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