INTERNATIONAL ORGANIZATIONS

यूनेस्को (UNESCO)

शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और विरासत का अंतरराष्ट्रीय सहयोग

UPSC Prelims एवं Mains के लिए विस्तृत अध्ययन

स्थापना

16 नवंबर 1945

संविधान लागू

4 नवंबर 1946

मुख्यालय

पेरिस, फ्रांस

भारत की सदस्यता

4 नवंबर 1946

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यूनेस्को का परिचय

UNESCO का पूरा नाम United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization है। यह संयुक्त राष्ट्र की specialized agency है, जो शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, संचार और सूचना के माध्यम से शांति तथा सहयोग को बढ़ावा देती है। इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • यूनेस्को की पहचान प्रायः World Heritage Sites से की जाती है, लेकिन उसका काम स्मारकों की सूची बनाने से कहीं व्यापक है।
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक सहयोग, सांस्कृतिक विविधता, ज्ञान तक पहुँच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इसके प्रमुख क्षेत्र हैं।
  • संस्था का आधार यह समझ है कि टिकाऊ शांति के लिए लोगों के बीच ज्ञान, संवाद और परस्पर सम्मान आवश्यक हैं।
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स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शिक्षा, संस्कृति और वैज्ञानिक सहयोग को देशों के पुनर्निर्माण तथा भविष्य की शांति से जोड़ा गया। लंदन में आयोजित सम्मेलन के दौरान 16 नवंबर 1945 को UNESCO का संविधान अपनाया गया। आवश्यक अनुमोदन के बाद संविधान 4 नवंबर 1946 को लागू हुआ।

तारीख / स्थान महत्व
16 नवंबर 1945 संविधान अपनाया गया; UNESCO की स्थापना से जुड़ी प्रमुख तारीख।
4 नवंबर 1946 संविधान लागू हुआ।
लंदन संविधान स्वीकार किए जाने का स्थान।
पेरिस संगठन का मुख्यालय।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • स्थापना-स्थान और वर्तमान मुख्यालय अलग हैं।
  • इसी तरह संविधान अपनाने और लागू होने की घटनाएँ अलग समय पर हुईं।
  • यूनेस्को के इतिहास को पढ़ते समय दोनों तारीखें उनकी संबंधित घटना के साथ समझना आवश्यक है।
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उद्देश्य और कार्यक्षेत्र

  • शिक्षा: समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना।
  • प्राकृतिक विज्ञान: वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण और सतत विकास में सहयोग।
  • सामाजिक और मानव विज्ञान: नैतिकता, सामाजिक समावेशन तथा ज्ञान के जिम्मेदार उपयोग पर संवाद।
  • संस्कृति: सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का संरक्षण तथा सांस्कृतिक विविधता को समर्थन।
  • संचार और सूचना: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सूचना तक पहुँच और मीडिया साक्षरता को बढ़ावा देना।

इन क्षेत्रों का संबंध परस्पर जुड़ा है। शिक्षा वैज्ञानिक समझ बढ़ाती है, सांस्कृतिक संवाद सामाजिक विश्वास में मदद करता है और विश्वसनीय जानकारी लोकतांत्रिक भागीदारी को सक्षम बनाती है। इसलिए UNESCO का दृष्टिकोण किसी एक विभाग की सीमाओं तक बँधा नहीं है।

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संगठनात्मक संरचना

निकाय भूमिका
General Conference सदस्य देशों के प्रतिनिधियों वाला सर्वोच्च governing body; सामान्यतः हर दो वर्ष में बैठक।
Executive Board 58 सदस्य राज्यों के प्रतिनिधियों का बोर्ड; कार्यक्रमों की तैयारी और निर्णयों के कार्यान्वयन की निगरानी में भूमिका।
Secretariat Director-General के नेतृत्व में प्रशासनिक और तकनीकी कार्य।

सदस्य देश नीतिगत दिशा तय करते हैं, जबकि सचिवालय विशेषज्ञता और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराता है। National Commissions और विभिन्न साझेदार संस्थाएँ राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग का माध्यम बन सकती हैं। वैश्विक निर्णय को स्थानीय कार्यक्रम में बदलने के लिए सरकार, शिक्षा संस्थान, वैज्ञानिक तथा समुदायों की भागीदारी आवश्यक होती है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • World Heritage Committee, General Conference और Executive Board अलग निकाय हैं।
  • किसी सूची में inscription का निर्णय संबंधित convention और committee की प्रक्रिया से होता है; संगठन की हर सूची के नियम एक जैसे नहीं होते।
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शिक्षा और SDG 4

यूनेस्को शिक्षा को समावेशन और सतत विकास का आधार मानता है। SDG 4 गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आजीवन सीखने के अवसरों से संबंधित है। इस क्षेत्र में केवल स्कूलों में नामांकन पर्याप्त नहीं है; सीखने की गुणवत्ता, शिक्षक, सुरक्षित वातावरण, समान अवसर और पीछे रह गए समूहों की पहुँच भी महत्वपूर्ण हैं।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • शिक्षा नीति में आय, लिंग, विकलांगता, भाषा और भौगोलिक दूरी जैसी असमानताओं को पहचानना जरूरी है।
  • किसी स्थान पर स्कूल उपलब्ध हो सकता है, लेकिन प्रशिक्षित शिक्षक, अनुकूल पाठ्यसामग्री या परिवहन न होने से वास्तविक पहुँच सीमित रह सकती है।
  • इसीलिए शिक्षा के परिणाम और अवसर दोनों पर ध्यान दिया जाता है।
  • Global Education Monitoring Report शिक्षा के लक्ष्यों और प्रगति की निगरानी का महत्वपूर्ण प्रकाशन है।
  • इसकी रिपोर्टें शिक्षा में भागीदारी, समानता और व्यवस्था से संबंधित विषयों पर चर्चा करती हैं।
  • अलग editions के आँकड़े पढ़ते समय data year और indicator की परिभाषा देखनी चाहिए।
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विश्व विरासत व्यवस्था

World Heritage Convention, 1972 सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय ढाँचा है। इसका विचार यह है कि कुछ स्थल मानवता के लिए Outstanding Universal Value रखते हैं। ऐसे स्थलों के संरक्षण में राष्ट्रीय प्रयासों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी उपयोगी होता है।

श्रेणी अर्थ
Cultural Heritage ऐतिहासिक, कलात्मक या अन्य सांस्कृतिक महत्व वाले स्मारक, समूह और स्थल।
Natural Heritage विशिष्ट प्राकृतिक, पारिस्थितिक, वैज्ञानिक या सौंदर्य मूल्य वाले स्थल।
Mixed Heritage सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक दोनों प्रकार के आवश्यक मानदंड पूरे करने वाले स्थल।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • किसी स्थल का World Heritage List में होना उसे UNESCO की संपत्ति नहीं बनाता।
  • संबंधित देश की संप्रभुता और संरक्षण की जिम्मेदारी बनी रहती है।
  • अंतरराष्ट्रीय मान्यता के साथ संरक्षण, प्रबंधन और monitoring की जिम्मेदारियाँ भी आती हैं।
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नामांकन और संरक्षण की प्रक्रिया

विश्व विरासत नामांकन संबंधित देश द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। Tentative List, nomination dossier, विशेषज्ञ मूल्यांकन और World Heritage Committee का निर्णय इसके प्रमुख चरण हैं। केवल किसी स्थान का लोकप्रिय पर्यटन स्थल होना inscription के लिए पर्याप्त नहीं है। Outstanding Universal Value और संरक्षण की स्थिति का मूल्यांकन होता है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • World Heritage Centre convention के सचिवालय की भूमिका निभाता है।
  • ICOMOS, IUCN और ICCROM जैसे advisory bodies संबंधित विशेषज्ञता देते हैं।
  • सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक विरासत के मूल्यांकन में अलग प्रकार की विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
  • List of World Heritage in Danger गंभीर खतरे का सामना कर रहे स्थलों पर ध्यान केंद्रित करती है।
  • युद्ध, असंतुलित निर्माण, आपदाएँ और पर्यावरणीय क्षति इसके संदर्भ हो सकते हैं।
  • खतरे की पहचान संरक्षण के लिए सहयोग जुटाने का माध्यम है; इसे केवल पर्यटन प्रचार की सूची नहीं समझना चाहिए।
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अमूर्त सांस्कृतिक विरासत

2003 Convention का केंद्र Intangible Cultural Heritage का safeguarding है। इसमें जीवित परंपराएँ, प्रदर्शन कलाएँ, सामाजिक व्यवहार, अनुष्ठान, उत्सव, प्रकृति से जुड़े ज्ञान और पारंपरिक शिल्प कौशल जैसे तत्व हो सकते हैं। यह किसी इमारत के संरक्षण से अलग विषय है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • “Safeguarding” का अर्थ परंपरा को संग्रहालय की वस्तु की तरह स्थिर कर देना नहीं है।
  • इसका संबंध समुदायों द्वारा ज्ञान को आगे बढ़ाने, सीखने, अभ्यास और पीढ़ियों के बीच हस्तांतरण से है।
  • समुदाय की भागीदारी और उसके लिए परंपरा का अर्थ केंद्रीय महत्व रखते हैं।
  • भारत के संदर्भ में योग, कोलकाता की दुर्गा पूजा और गुजरात का गरबा ऐसे प्रमुख उदाहरण हैं।
  • किसी परंपरा को सूची में स्थान मिलने से दूसरे समुदायों के सांस्कृतिक व्यवहार पर स्वामित्व का सामान्य दावा स्थापित नहीं हो जाता।
  • इन सूचियों का उद्देश्य सांस्कृतिक विविधता और संरक्षण को बढ़ावा देना है।
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विभिन्न UNESCO सूचियों में अंतर

व्यवस्था मुख्य विषय
World Heritage List सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों का Outstanding Universal Value।
Intangible Cultural Heritage जीवित परंपराएँ, कौशल और सांस्कृतिक व्यवहार।
Memory of the World दस्तावेजी विरासत का संरक्षण और पहुँच।
World Network of Biosphere Reserves मानव और पर्यावरण के संबंध, संरक्षण और सतत विकास।
Creative Cities Network शहरी विकास में रचनात्मकता और संस्कृति का सहयोग।

सभी UNESCO recognitions को “विश्व विरासत स्थल” कहना गलत है। एक नृत्य, पांडुलिपि, शहर की रचनात्मक पहचान और प्राकृतिक भूभाग अलग categories में आ सकते हैं। इनके उद्देश्य और चयन की प्रक्रियाएँ अलग होती हैं।

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Man and the Biosphere Programme

MAB Programme 1971 में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य लोगों और पर्यावरण के बीच संबंधों को बेहतर बनाना तथा जैव विविधता संरक्षण को सतत विकास से जोड़ना है। World Network of Biosphere Reserves इस सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम है।

क्षेत्र सामान्य उद्देश्य
Core area प्रकृति और जैव विविधता का संरक्षण।
Buffer zone संरक्षण के अनुकूल अनुसंधान, शिक्षा और अन्य गतिविधियाँ।
Transition area स्थानीय समुदायों के साथ सतत आर्थिक तथा सामाजिक गतिविधियाँ।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • Biosphere reserve का विचार संरक्षण और आजीविका को साथ लेकर चलता है।
  • स्थानीय लोगों को केवल बाहरी दबाव के रूप में देखने के बजाय उन्हें संरक्षण की प्रक्रिया का भाग बनाना महत्वपूर्ण है।
  • किसी देश द्वारा घोषित सभी biosphere reserves स्वतः UNESCO के विश्व नेटवर्क में शामिल नहीं होते।
  • राष्ट्रीय designation और अंतरराष्ट्रीय recognition अलग चरण हैं।
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दस्तावेजी विरासत और सूचना

Memory of the World Programme 1992 में शुरू हुआ। इसका विषय पांडुलिपियाँ, अभिलेख और अन्य दस्तावेजी विरासत का संरक्षण तथा सुलभता है। दस्तावेजों के नष्ट होने से इतिहास, भाषाओं और सामाजिक अनुभवों का महत्वपूर्ण प्रमाण खो सकता है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • डिजिटलीकरण पहुँच बढ़ा सकता है, लेकिन वह मूल दस्तावेजों के भौतिक संरक्षण की आवश्यकता समाप्त नहीं करता।
  • सामग्री की प्रामाणिकता, सुरक्षित संग्रहण, भाषा, metadata और दीर्घकालिक digital formats भी महत्वपूर्ण हैं।
  • इस क्षेत्र में पुस्तकालयों, archives, शोधकर्ताओं और समुदायों के बीच सहयोग उपयोगी है।
  • विश्वसनीय सूचना तक पहुँच और मीडिया साक्षरता भी UNESCO के व्यापक कार्य से संबंधित हैं।
  • लोगों को जानकारी पहचानने, उसके संदर्भ को समझने और आलोचनात्मक रूप से उपयोग करने की क्षमता चाहिए।
  • सूचना की उपलब्धता और उसका सही अर्थ समझना दो अलग लेकिन जुड़े पक्ष हैं।
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विज्ञान और तकनीक की नैतिकता

विज्ञान समाज को नई क्षमताएँ देता है, लेकिन उसके उपयोग में नैतिक प्रश्न भी उठते हैं। UNESCO का 2021 का Recommendation on the Ethics of Artificial Intelligence इस दिशा का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें मानव अधिकारों, सामाजिक हित, पारदर्शिता और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग का संदर्भ है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • उदाहरण के लिए, शिक्षा में कोई algorithm निर्णय में मदद कर सकता है, पर यदि उसके data में असमानता हो तो परिणाम भी पक्षपाती हो सकते हैं।
  • इसलिए तकनीक का मूल्यांकन केवल गति या लागत से नहीं, बल्कि समानता, गोपनीयता और जवाबदेही से भी होना चाहिए।
  • Recommendation को अपने आप प्रत्येक देश का लागू घरेलू कानून नहीं माना जाता।
  • यह नीति और सहयोग के लिए मानक दिशा दे सकता है; राष्ट्रीय नियम तथा कार्यान्वयन की व्यवस्था अलग प्रक्रिया से बनती है।
  • अंतरराष्ट्रीय नैतिक मानक और स्थानीय नियमन एक-दूसरे को सहारा दे सकते हैं।
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भारत और UNESCO

भारत 4 नवंबर 1946 से UNESCO का सदस्य है। भारत की शिक्षा, भाषाई विविधता, वैज्ञानिक संस्थाओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण संगठन से संबंध अनेक क्षेत्रों में फैले हैं। इसे केवल पर्यटन के प्रश्न तक सीमित नहीं समझना चाहिए।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • विरासत संरक्षण में राष्ट्रीय संस्थाएँ, राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और समुदाय अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं।
  • UNESCO की मान्यता से ध्यान और सहयोग बढ़ सकता है, लेकिन स्थल की सफाई, रखरखाव, visitor management तथा स्थानीय आजीविका की जिम्मेदारी के लिए घरेलू व्यवस्था आवश्यक होती है।
  • भारत की जीवित परंपराओं को आगे बढ़ाने में कलाकारों, कारीगरों और समुदायों की भूमिका केंद्रीय है।
  • किसी उत्सव की प्रसिद्धि बढ़ने के साथ व्यावसायीकरण, भीड़ और उसके मूल सामाजिक संदर्भ के कमजोर होने का जोखिम भी हो सकता है।
  • संरक्षण में समुदाय की आवाज और सम्मानजनक भागीदारी जरूरी है।
  • शिक्षा में भारत जैसे बड़े तथा विविध देश के लिए गुणवत्ता, भाषा, डिजिटल पहुँच और समावेशन महत्वपूर्ण विषय हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय अनुभव उपयोगी हो सकते हैं, पर उनका स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उपयोग करना आवश्यक है।
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वित्त, चुनौतियाँ और आगे की दिशा

UNESCO को सदस्य देशों के assessed contributions और voluntary contributions से वित्त मिलता है। योगदान की स्थिरता, उपयोग की शर्तें और साझेदारों की प्राथमिकताएँ कार्यक्रमों पर प्रभाव डाल सकती हैं। नियमित तथा लचीले संसाधनों से लंबे समय के संरक्षण और शिक्षा कार्यों में निरंतरता मिलती है।

  • संघर्ष और आपदाएँ: विरासत स्थल, स्कूल, अभिलेख और वैज्ञानिक संस्थाएँ क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
  • अत्यधिक पर्यटन: आर्थिक लाभ के साथ संरक्षण पर दबाव और स्थानीय समुदायों की कठिनाइयाँ बढ़ सकती हैं।
  • वित्त की कमी: सूची में शामिल होने के बाद भी पर्याप्त कर्मचारी और प्रबंधन संसाधन चाहिए।
  • डिजिटल असमानता: ऑनलाइन ज्ञान उपलब्ध होने के बावजूद उपकरण, भाषा और कौशल की बाधाएँ बनी रह सकती हैं।
  • विज्ञान में जिम्मेदारी: तकनीकी प्रगति के साथ सामाजिक प्रभाव और नैतिकता का मूल्यांकन आवश्यक है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • प्रभावी सहयोग के लिए वैज्ञानिक संरक्षण, समुदाय की भागीदारी, समावेशी शिक्षा और पारदर्शी संसाधन प्रबंधन को साथ रखना होगा।
  • अंतरराष्ट्रीय recognition तभी दीर्घकालिक लाभ देता है जब स्थानीय संस्थाओं और लोगों की क्षमता मजबूत हो।
  • ज्ञान तथा संस्कृति का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अवसर और सामाजिक स्मृति दोनों बचाता है।

15. UPSC अवधारणाएँ और विश्लेषण

पाठ्यक्रम: GS-I: संस्कृति एवं विरासत; GS-II: शिक्षा और संस्थाएँ; GS-IV: तकनीकी नैतिकता।

UNESCO की अलग व्यवस्थाएँ

  • World Heritage: 1972 Convention के अंतर्गत सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों के Outstanding Universal Value से जुड़ा है। सूची में आने से राष्ट्रीय संप्रभुता UNESCO को हस्तांतरित नहीं होती।
  • Intangible Cultural Heritage: जीवित परंपराएँ, ज्ञान और अभिव्यक्तियाँ; संरक्षण में समुदाय की निरंतर भागीदारी महत्त्वपूर्ण है। इसे केवल स्मारक संरक्षण न समझें।
  • Biosphere Reserve: संरक्षण, सतत उपयोग और सीखने का संबंध; core, buffer और transition क्षेत्रों की भूमिका अलग होती है। हर राष्ट्रीय biosphere reserve स्वतः UNESCO network में नहीं आता।
  • Memory of the World: दस्तावेजी विरासत से संबंधित है; UNESCO की सभी सूचियाँ World Heritage List नहीं हैं।

16. भारत के हित, चुनौतियाँ और आगे की राह

नीचे दिए गए मूल्यांकन-बिंदु Mains के लिए विश्लेषण हैं; आधिकारिक तथ्य जहाँ आवश्यक हैं, स्रोत के साथ दिए गए हैं।

संस्कृति, विकास और नई तकनीक

  • पर्यटन का संतुलन: आय और रोजगार के साथ भीड़, कचरा, निर्माण दबाव तथा स्थानीय आजीविका पर प्रभाव का मूल्यांकन।
  • समुदाय केंद्रित संरक्षण: परंपरा को स्थिर संग्रहालय वस्तु के बजाय जीवित सामाजिक प्रक्रिया समझना; स्थानीय ज्ञान और सहभागिता जरूरी हैं।
  • शिक्षा: पहुँच के साथ समावेशन, सीखने की गुणवत्ता और सांस्कृतिक विविधता।
  • AI नैतिकता: UNESCO की 2021 Recommendation मानव गरिमा, निष्पक्षता, पारदर्शिता और मानवीय निगरानी पर बल देती है; यह स्वयं कोई बाध्यकारी वैश्विक AI संधि नहीं है।
  • भारत के लिए सुधार: विरासत स्थलों की carrying capacity, संरक्षण कौशल, डिजिटलीकरण और स्थानीय लाभ साझाकरण।

स्रोत: UNESCO Recommendation on the Ethics of AI।

17. Prelims अभ्यास: 5 कथन आधारित प्रश्न

ये मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं; UPSC के वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं हैं।

प्रश्न 1

  1. UNESCO का मुख्यालय पेरिस में है।
  2. यह UN की विशिष्ट एजेंसी है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: C। दोनों तथ्य सही हैं।

प्रश्न 2

  1. World Heritage inscription से स्थल की संप्रभुता UNESCO को मिल जाती है।
  2. Tentative List में होना अंतिम inscription के समान है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: D। दोनों दावे गलत हैं।

प्रश्न 3

  1. 1972 Convention सांस्कृतिक और प्राकृतिक विश्व विरासत से जुड़ा है।
  2. 2003 Convention अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: C। दोनों व्यवस्थाएँ अलग याद रखें।

प्रश्न 4

  1. हर राष्ट्रीय biosphere reserve स्वतः UNESCO network में है।
  2. Biosphere reserve में transition zone सतत गतिविधियों से जुड़ सकता है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: B। अंतरराष्ट्रीय मान्यता की अलग प्रक्रिया है।

प्रश्न 5

  1. UNESCO की AI Ethics Recommendation 2021 में अपनाई गई।
  2. यह अपने आप सभी देशों का घरेलू AI कानून बन जाती है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: A। Recommendation और घरेलू बाध्यकारी कानून अलग हैं।

18. Mains अभ्यास और मॉडल उत्तर

उत्तर-लेखन अभ्यास

  1. 150 शब्द: UNESCO की मूर्त और अमूर्त विरासत व्यवस्थाओं का अंतर स्पष्ट कीजिए।
  2. 250 शब्द: विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?
  3. 250 शब्द: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शासन में UNESCO के नैतिक सिद्धांतों की उपयोगिता बताइए।

मॉडल उत्तर: विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?

विरासत स्थल पर्यटन से रोजगार और आय उत्पन्न करते हैं, लेकिन अनियोजित विकास उनकी प्रामाणिकता तथा पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचा सकता है।

संरक्षण और पर्यटन को परस्पर विरोधी मानने के बजाय दीर्घकालीन प्रबंधन में जोड़ना चाहिए।

स्थल की वहन क्षमता, यातायात, कचरा और निर्माण नियमों का वैज्ञानिक निर्धारण आवश्यक है।

स्थानीय समुदायों की भागीदारी तथा लाभ साझाकरण से संरक्षण को सामाजिक आधार मिलता है।

जीवित परंपराओं में समुदाय के ज्ञान और परिवर्तन की क्षमता का सम्मान होना चाहिए।

संरक्षण कौशल, डिजिटल दस्तावेजीकरण और आपदा तैयारी महत्त्वपूर्ण हैं।

UNESCO मान्यता अंतरराष्ट्रीय ध्यान ला सकती है, पर वास्तविक संरक्षण राष्ट्रीय और स्थानीय संस्थाओं की जिम्मेदारी रहती है।

सफलता का माप पर्यटकों की संख्या के साथ विरासत की स्थिति और समुदाय के जीवन की गुणवत्ता भी होना चाहिए।

उत्तर सुधारने की जाँच-सूची

  • भूमिका में प्रश्न की केंद्रीय अवधारणा स्पष्ट करें।
  • तथ्य और अपना विश्लेषण अलग रखें; जहाँ लागू हो, उदाहरण दें।
  • लाभ, सीमाएँ और भारत के हितों को संतुलित ढंग से जोड़ें।
  • निष्कर्ष में व्यावहारिक सुधार तथा कार्यान्वयन की शर्तें बताएँ।

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