कॉस्मो क्लासेस • भारतीय इतिहास अभ्यास
1 नवंबर 2026 · नवंबर अभ्यास 01/30
भारतीय इतिहास डेली क्विज़ · 1 नवंबर 2026
10 नए प्रश्नों से अपनी तैयारी परखें। विकल्प चुनें और सही उत्तर, समाधान तथा संबंधित Static GK पढ़ें।
इस अभ्यास में आप क्या पढ़ेंगे?
प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारतीय इतिहास के चुनिंदा प्रश्न। हर समाधान में विषय से जुड़े पाँच अतिरिक्त संदर्भ और महत्वपूर्ण तथ्य दिए गए हैं।
अभ्यास प्रारूप: 10 प्रश्न • सुझाया समय: 10 मिनट • स्तर: मिश्रित
पुरातत्व और प्रागैतिहासिक जीवन
Q.1 कश्मीर के किस नवपाषाण स्थल पर गर्त-आवास, अर्थात जमीन में खोदकर बनाए गए घर, मिले हैं?
सही उत्तर: (ख) बुर्जहोम
समाधान: कश्मीर की ठंडी जलवायु में रहने के लिए गर्त-आवास उपयोगी थे। यहाँ पत्थर और हड्डी के औजार भी मिले हैं।
संबंधित Static GK: पुरातत्व और प्रागैतिहासिक जीवन
| विषय / संदर्भ | ज़रूरी तथ्य |
|---|---|
| भीमबेटका | मध्य प्रदेश ये शैलाश्रय विंध्य क्षेत्र में स्थित हैं। चित्र मानव, पशु और दैनिक गतिविधियों की जानकारी देते हैं। |
| मेहरगढ़ | बलूचिस्तान यह बोलन दर्रे के निकट स्थित है। यहाँ गेहूँ-जौ की खेती और भेड़-बकरी पालन के साक्ष्य मिले हैं। |
| चिरांद | चिरांद गंगा के मैदानी क्षेत्र का यह स्थल कृषि और पशुपालन के विकास को समझने में सहायक है। |
| इनामगाँव | इनामगाँव यह दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व की जीवन-पद्धति के अध्ययन में महत्वपूर्ण है। यहाँ कृषि, पशुपालन और आवास के अवशेष मिले हैं। |
| दाओजली हाडिंग | दाओजली हाडिंग यह ब्रह्मपुत्र घाटी के निकट पहाड़ी क्षेत्र का स्थल है। यहाँ पीसने के पत्थर और मृद्भांड भी मिले हैं। |
और जानें: प्रागैतिहासिक जीवन को समझने के लिए औजार, आवास, भोजन के अवशेष और दफनाने की पद्धति महत्वपूर्ण हैं। एक स्थल से मिली सामग्री पूरे उपमहाद्वीप की एक जैसी जीवन-पद्धति सिद्ध नहीं करती।
आगे पढ़ें: प्रारंभिक जीवन: NCERT / SATHEE
दिल्ली सल्तनत के शासक
Q.2 1206 में दिल्ली में स्वतंत्र तुर्की सत्ता स्थापित करने वाला शासक कौन था?
सही उत्तर: (घ) कुतुबुद्दीन ऐबक
समाधान: मुहम्मद गौरी की मृत्यु के बाद ऐबक ने स्वतंत्र सत्ता स्थापित की। वह पहले गौरी का सेनापति और अधिकारी था।
संबंधित Static GK: दिल्ली सल्तनत के शासक
| विषय / संदर्भ | ज़रूरी तथ्य |
|---|---|
| इल्तुतमिश की मुद्रा | इल्तुतमिश उसने दिल्ली सल्तनत को स्थायित्व दिया। मुद्रा-प्रणाली राजकीय अधिकार और आर्थिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति थी। |
| रजिया सुल्तान | रजिया वह इल्तुतमिश की पुत्री थी। उसके शासन को तुर्क अमीरों के विरोध और दरबारी शक्ति-संघर्ष का सामना करना पड़ा। |
| बलबन | गयासुद्दीन बलबन उसने सामंतों और विद्रोही समूहों पर नियंत्रण तथा शाही गरिमा पर जोर दिया। यह केंद्रीकरण की नीति का भाग था। |
| बाजार-नियंत्रण | अलाउद्दीन खिलजी स्थायी सेना की आवश्यकताओं से जुड़ी मूल्य-नियंत्रण व्यवस्था बनाई गई। बाजार अधिकारियों और निगरानी की भूमिका महत्वपूर्ण थी। |
| राजधानी का प्रयोग | मुहम्मद बिन तुगलक दौलताबाद का दक्कन में केंद्रीय स्थान एक कारण था। प्रशासनिक कठिनाइयों और जनकष्ट के कारण यह प्रयोग सफल नहीं रहा। |
और जानें: दिल्ली सल्तनत में ममलूक, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी राजवंश क्रमशः सत्ता में आए। किसी नीति को उसके शासक और समय से जोड़कर पढ़ना घटनाओं को स्पष्ट करता है।
आगे पढ़ें: दिल्ली सल्तनत: NCERT / SATHEE
यूरोपीय कंपनियाँ और औपनिवेशिक विस्तार
Q.3 1498 में समुद्री मार्ग से कालीकट पहुँचे पुर्तगाली नाविक कौन थे?
सही उत्तर: (ख) वास्को द गामा
समाधान: वे अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से होकर आए थे। इससे यूरोप और भारत के बीच प्रत्यक्ष समुद्री व्यापार का नया चरण शुरू हुआ।
संबंधित Static GK: यूरोपीय कंपनियाँ और औपनिवेशिक विस्तार
| विषय / संदर्भ | ज़रूरी तथ्य |
|---|---|
| गोवा | अल्फांसो द अल्बुकर्क गोवा पुर्तगालियों का महत्वपूर्ण राजनीतिक और व्यापारिक केंद्र बना। यह घटना वास्को द गामा के आगमन से बाद की है। |
| ईस्ट इंडिया कंपनी का चार्टर | एलिजाबेथ प्रथम चार्टर से कंपनी को पूर्वी देशों के साथ व्यापार का अधिकार मिला। प्रारंभिक व्यापारिक अधिकार और बाद की क्षेत्रीय सत्ता अलग चरण थे। |
| अंग्रेज-मुगल संपर्क | सर थॉमस रो उसका उद्देश्य अंग्रेज व्यापारियों के लिए सुविधाएँ प्राप्त करना था। राजदूत की भूमिका सैन्य विजय से अलग थी। |
| प्लासी | रॉबर्ट क्लाइव सिराजुद्दौला के विरुद्ध कंपनी की विजय में दरबारी षड्यंत्र महत्वपूर्ण थे। यह बंगाल में कंपनी के प्रभाव का निर्णायक चरण बना। |
| बक्सर | हेक्टर मुनरो विरोधी गठबंधन में मीर कासिम, शुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय थे। विजय ने कंपनी की राजनीतिक स्थिति मजबूत की। |
और जानें: व्यापारिक कंपनियों ने धीरे-धीरे राजनीतिक और राजस्व अधिकार प्राप्त किए। युद्ध, संधि और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच अंतर समझना औपनिवेशिक विस्तार का क्रम स्पष्ट करता है।
आगे पढ़ें: औपनिवेशिक परिवर्तन: NIOS
हड़प्पा सभ्यता का जीवन
Q.4 परिपक्व हड़प्पा सभ्यता का सामान्यतः स्वीकृत काल कौन-सा है?
सही उत्तर: (घ) लगभग 2600–1900 ईसा पूर्व
समाधान: इस चरण में योजनाबद्ध नगर, मानकीकृत भार, मुहरें और विस्तृत व्यापार-जाल प्रमुख थे। प्रारंभिक और उत्तर हड़प्पा चरण इससे अलग हैं।
संबंधित Static GK: हड़प्पा सभ्यता का जीवन
| विषय / संदर्भ | ज़रूरी तथ्य |
|---|---|
| विशाल स्नानागार | बिटुमेन पक्की ईंटों की संरचना को जलरोधक बनाया गया था। इसका उपयोग संभवतः किसी सामुदायिक या अनुष्ठानिक स्नान में होता था। |
| हड़प्पाई मुहरें | सेलखड़ी सेलखड़ी को स्टीटाइट भी कहते हैं। मुहरों पर पशु-आकृतियाँ और छोटे लेख मिलते हैं, लेकिन लिपि का निर्विवाद पाठ उपलब्ध नहीं है। |
| मनका निर्माण | कार्नेलियन कार्नेलियन के मनकों को काटने, घिसने और छेदने के लिए विशेष तकनीकें थीं। कुछ मनकों पर सफेद अलंकरण भी मिलता है। |
| कांस्य ढलाई | मोम-क्षय विधि पहले मोम का रूप बनाया जाता था, फिर साँचे में मोम के स्थान पर पिघली धातु भरी जाती थी। इसे लॉस्ट-वैक्स तकनीक भी कहते हैं। |
| ईंटों का मानकीकरण | 4 : 2 : 1 एक जैसे अनुपात योजनाबद्ध निर्माण और उत्पादन में मानकीकरण का संकेत देते हैं। हर स्थल की प्रत्येक ईंट बिल्कुल समान आकार की नहीं थी। |
और जानें: हड़प्पा सभ्यता के अध्ययन में पुरातात्विक साक्ष्य निर्णायक हैं क्योंकि उसकी लिपि अभी निश्चित रूप से पढ़ी नहीं जा सकी है। इसलिए भवनों और वस्तुओं के कार्य की कुछ पहचान व्याख्या पर आधारित है।
आगे पढ़ें: हड़प्पा सभ्यता: NCERT / SATHEE
मध्यकालीन प्रशासनिक शब्द
Q.5 मुगल राज्य में सीधे शाही खजाने के लिए सुरक्षित राजस्व-क्षेत्र को क्या कहा जाता था?
सही उत्तर: (ग) खालसा
समाधान: इसकी आय सीधे केंद्रीय शासन को जाती थी। जागीर में किसी अधिकारी को राजस्व वसूली का अधिकार दिया जा सकता था।
संबंधित Static GK: मध्यकालीन प्रशासनिक शब्द
| विषय / संदर्भ | ज़रूरी तथ्य |
|---|---|
| सूबा | सूबा प्रांत के नीचे सरकार और परगना जैसी इकाइयाँ थीं। प्रांतीय शासन में सैन्य और राजस्व अधिकारियों की भूमिकाएँ अलग थीं। |
| सरकार | सरकार इस शब्द का यहाँ अर्थ प्रशासनिक क्षेत्र है, आधुनिक ‘सरकार’ संस्था का सामान्य अर्थ नहीं। इसके नीचे परगने होते थे। |
| परगना | परगना कानूनगो और स्थानीय राजस्व कर्मचारी इस स्तर की व्यवस्था में महत्वपूर्ण थे। गाँव उत्पादन और संग्रह का आधार बने रहे। |
| दहसाला / जब्त | दहसाला माप और वर्गीकरण के आधार पर नकद राजस्व निर्धारित किया जाता था। यह व्यवस्था सभी क्षेत्रों में समान रूप से लागू नहीं थी। |
| मीर बख्शी | मीर बख्शी सैन्य सेवाओं और मनसबदारों के अभिलेखों की व्यवस्था से उसका संबंध था। राजस्व मामलों में दीवान की प्रमुख भूमिका थी। |
और जानें: प्रशासनिक पदों का अर्थ समय और राजवंश के अनुसार बदल सकता था। राजस्व, सेना, प्रांत और न्याय से जुड़े शब्दों को उनके कार्य के आधार पर पहचानें।
आगे पढ़ें: मुगल प्रशासन: NCERT / SATHEE
संवैधानिक अधिनियम और प्रशासन
Q.6 बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल बनाने और कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय का प्रावधान करने वाला अधिनियम कौन-सा था?
सही उत्तर: (ख) रेगुलेटिंग एक्ट, 1773
समाधान: यह कंपनी के शासन पर संसदीय नियंत्रण की शुरुआती महत्वपूर्ण कोशिश थी। पहला गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स बना।
संबंधित Static GK: संवैधानिक अधिनियम और प्रशासन
| विषय / संदर्भ | ज़रूरी तथ्य |
|---|---|
| 1784 का अधिनियम | पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 व्यापारिक और राजनीतिक कार्यों पर नियंत्रण की दोहरी व्यवस्था विकसित हुई। ब्रिटिश सरकार का प्रभाव बढ़ा। |
| 1813 का चार्टर | चार्टर एक्ट, 1813 अन्य ब्रिटिश व्यापारियों के लिए भारतीय व्यापार खुला। शिक्षा के लिए धन के प्रावधान का संबंध भी इसी अधिनियम से है। |
| 1833 का चार्टर | चार्टर एक्ट, 1833 कंपनी का व्यापारिक कार्य समाप्त हुआ और वह मुख्यतः प्रशासनिक संस्था बनी। विलियम बेंटिंक पहले गवर्नर-जनरल ऑफ इंडिया बने। |
| 1858 का परिवर्तन | भारत शासन अधिनियम, 1858 भारत सचिव और उसकी परिषद की व्यवस्था बनी। गवर्नर-जनरल ने वायसराय के रूप में क्राउन का प्रतिनिधित्व भी किया। |
| 1861 की परिषदें | भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 यह सीमित सहभागिता थी, व्यापक निर्वाचित लोकतंत्र नहीं। कानून बनाने की प्रक्रिया में चुने हुए विशिष्ट व्यक्तियों को जोड़ा गया। |
और जानें: औपनिवेशिक अधिनियमों ने कंपनी, ब्रिटिश सरकार और भारतीय प्रतिनिधित्व के संबंध बदले। केंद्रीय व्यवस्था, प्रांतीय व्यवस्था और मताधिकार के प्रावधानों को अलग पढ़ना जरूरी है।
आगे पढ़ें: भारतीय विधायिका का विकास: PIB
वैदिक साहित्य और सहायक ग्रंथ
Q.7 ऋचाओं या स्तुतियों का सबसे प्राचीन वैदिक संग्रह कौन-सा है?
सही उत्तर: (ग) ऋग्वेद
समाधान: इसमें अग्नि, इंद्र और अन्य देवताओं की स्तुतियाँ हैं। इससे प्रारंभिक वैदिक भाषा और सामाजिक जीवन की जानकारी मिलती है।
संबंधित Static GK: वैदिक साहित्य और सहायक ग्रंथ
| विषय / संदर्भ | ज़रूरी तथ्य |
|---|---|
| सामवेद | सामवेद इसकी अनेक ऋचाएँ ऋग्वेद से ली गई हैं, लेकिन उनका विन्यास अनुष्ठानिक गायन के लिए किया गया है। |
| यजुर्वेद | यजुर्वेद इसकी शुक्ल और कृष्ण परंपराएँ प्रसिद्ध हैं। अनुष्ठान की विधि और मंत्रों का क्रम इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। |
| अथर्ववेद | अथर्ववेद यह वैदिक जीवन के ऐसे पक्षों को सामने रखता है जो केवल बड़े यज्ञों तक सीमित नहीं थे। इसमें शांति और समृद्धि की कामनाएँ भी हैं। |
| ब्राह्मण | ब्राह्मण ग्रंथ ये वैदिक संहिताओं से संबद्ध व्याख्यात्मक ग्रंथ हैं। शतपथ और ऐतरेय इस साहित्य के प्रसिद्ध उदाहरण हैं। |
| आरण्यक | आरण्यक इनमें बाहरी अनुष्ठान के साथ उसके प्रतीकात्मक और चिंतनात्मक अर्थों पर ध्यान मिलता है। ये ब्राह्मण और उपनिषद साहित्य के बीच संबंध बनाते हैं। |
और जानें: वैदिक साहित्य कई स्तरों में विकसित हुआ। संहिताओं, ब्राह्मणों, आरण्यकों और उपनिषदों की विषयवस्तु अलग-अलग है; इन्हें एक ही प्रकार का ग्रंथ मानना उचित नहीं है।
आगे पढ़ें: भारतीय साहित्य: CCRT
मुगल काल की प्रमुख घटनाएँ
Q.8 1527 के खानवा युद्ध में राणा सांगा को किस मुगल शासक ने पराजित किया?
सही उत्तर: (ख) बाबर
समाधान: पानीपत की विजय के बाद यह उत्तर भारत में बाबर की सत्ता के सुदृढ़ीकरण की महत्वपूर्ण घटना थी।
संबंधित Static GK: मुगल काल की प्रमुख घटनाएँ
| विषय / संदर्भ | ज़रूरी तथ्य |
|---|---|
| हुमायूँ का निर्वासन | हुमायूँ इससे पहले 1539 में चौसा की पराजय हुई थी। हुमायूँ ने 1555 में दिल्ली की सत्ता पुनः प्राप्त की। |
| इबादतखाना | अकबर 1575 में स्थापित यह स्थान धार्मिक चर्चा का केंद्र बना। बाद में विभिन्न मतों के विद्वानों को संवाद में शामिल किया गया। |
| जहाँगीर का काल | जहाँगीर उसके काल में चित्रकला में व्यक्तिचित्र और प्रकृति का सूक्ष्म अध्ययन महत्वपूर्ण हुआ। उस्ताद मंसूर प्रसिद्ध चित्रकार था। |
| शाहजहानाबाद | शाहजहाँ पुरानी दिल्ली का यह शाही नगर सत्रहवीं सदी में विकसित हुआ। लाल किला इसकी राजकीय स्थापत्य योजना का केंद्र था। |
| जजिया का पुनर्प्रयोग | औरंगजेब यह उसके शासन की धार्मिक-राजनीतिक नीतियों में चर्चित कदम था। नीतियों को साम्राज्य के व्यापक संघर्षों के संदर्भ में पढ़ना चाहिए। |
और जानें: मुगल इतिहास में युद्धों के साथ प्रशासन, अनुवाद, धार्मिक संवाद और नगर-निर्माण भी महत्वपूर्ण हैं। एक ही शासक की उपलब्धियों को दूसरे शासक के समय में न रखें।
आगे पढ़ें: मध्यकालीन भारत: मुंबई विश्वविद्यालय
गवर्नर-जनरल, वायसराय और नीतियाँ
Q.9 1784 में एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना किस विद्वान ने की?
सही उत्तर: (क) विलियम जोन्स
समाधान: कलकत्ता की इस संस्था ने भारतीय भाषाओं, इतिहास और प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन को प्रोत्साहित किया। यह ओरिएंटलिस्ट अध्ययन की महत्वपूर्ण संस्था बनी।
संबंधित Static GK: गवर्नर-जनरल, वायसराय और नीतियाँ
| विषय / संदर्भ | ज़रूरी तथ्य |
|---|---|
| सती-प्रतिषेध | विलियम बेंटिंक राजा राममोहन राय जैसे सुधारकों ने इसके विरोध में अभियान चलाया। कानून और सामाजिक सुधार आंदोलनों के बीच संबंध महत्वपूर्ण है। |
| कैनिंग | लॉर्ड कैनिंग उसके समय कंपनी शासन समाप्त हुआ। 1858 की रानी की घोषणा नई औपनिवेशिक शासन-व्यवस्था का महत्वपूर्ण दस्तावेज थी। |
| लिटन और प्रेस | लॉर्ड लिटन इस अधिनियम का लक्ष्य भारतीय भाषाओं के समाचारपत्रों पर नियंत्रण था। अंग्रेजी पत्रों को इसकी समान पाबंदियों में नहीं रखा गया। |
| रिपन | लॉर्ड रिपन स्थानीय निकायों में भारतीय भागीदारी बढ़ाने का प्रयास हुआ। इल्बर्ट बिल विवाद भी उसके शासनकाल में हुआ। |
| बंगाल विभाजन | लॉर्ड कर्जन इस निर्णय के विरुद्ध स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का विस्तार हुआ। 1911 में विभाजन रद्द किया गया। |
और जानें: विभिन्न सुधारों के साथ वायसराय का नाम जोड़ना कालक्रम याद रखने में मदद करता है। सुधार की घोषणा, कानून और वास्तविक क्रियान्वयन कभी-कभी अलग तारीखों में होते हैं।
आगे पढ़ें: राष्ट्रीय आंदोलन: NIOS
महाजनपद और नगर
Q.10 कौशाम्बी किस महाजनपद की राजधानी थी?
सही उत्तर: (ग) वत्स
समाधान: यह यमुना के पास महत्वपूर्ण नगर था। नदी और स्थल मार्गों से जुड़ाव ने इसके व्यापारिक महत्व को बढ़ाया।
संबंधित Static GK: महाजनपद और नगर
| विषय / संदर्भ | ज़रूरी तथ्य |
|---|---|
| अंग—चम्पा | अंग अंग पूर्वी भारत में था। मगध के विस्तार में अंग का अधिग्रहण महत्वपूर्ण रहा। |
| कोसल—श्रावस्ती | कोसल कोसल उत्तर भारत का शक्तिशाली राज्य था। श्रावस्ती बौद्ध परंपरा में भी महत्वपूर्ण नगर है। |
| मगध—राजगृह और पाटलिपुत्र | मगध उपजाऊ भूमि, लौह संसाधन और नदी मार्गों ने मगध की शक्ति बढ़ाई। पाटलिपुत्र गंगा और सोन के निकट रणनीतिक स्थान पर था। |
| अवन्ति—उज्जयिनी | अवन्ति अवन्ति मालवा क्षेत्र का महत्वपूर्ण राज्य था। उज्जयिनी व्यापारिक मार्गों से जुड़ी प्रमुख नगरी थी। |
| गांधार—तक्षशिला | गांधार यह उत्तर-पश्चिम के व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्कों का केंद्र था। भारतीय और मध्य एशियाई मार्ग यहाँ मिलते थे। |
और जानें: छठी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास उत्तर भारत में बड़े राज्य और गण-संघ विकसित हुए। राजधानी, नदी-घाटी और व्यापारिक मार्गों का संबंध इन राज्यों की राजनीतिक शक्ति समझने में उपयोगी है।
आगे पढ़ें: प्रारंभिक राज्य: NCERT / SATHEE