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AIIB: एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक, कार्य और भारत
UPSC Prelims एवं Mains | GS-II एवं GS-III | तथ्य, अवधारणाएँ और विश्लेषण
| पूरा नाम | Asian Infrastructure Investment Bank |
| Articles लागू | दिसंबर 2015 |
| संचालन आरंभ | 16 जनवरी 2016 |
| मुख्यालय | बीजिंग, चीन |
1. AIIB का परिचय
एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक बुनियादी ढाँचे और अन्य उत्पादक क्षेत्रों के लिए वित्त उपलब्ध कराने वाला बहुपक्षीय विकास बैंक है। इसका केंद्र एशिया में टिकाऊ आर्थिक विकास तथा संपर्क को मजबूत करना है। सदस्यता केवल एशियाई देशों तक सीमित नहीं है; क्षेत्र के बाहर के देश भी इसकी व्यवस्था में भाग लेते हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- बुनियादी ढाँचा सड़क और पुल तक सीमित नहीं होता।
- ऊर्जा, पानी, शहरी सेवाएँ और डिजिटल संपर्क भी आर्थिक अवसरों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- किसी सेवा की उपलब्धता के साथ उसकी विश्वसनीयता, लागत और लोगों की पहुँच देखना जरूरी है।
2. स्थापना और संस्थागत पहचान
AIIB के स्थापना संबंधी Articles of Agreement दिसंबर 2015 में लागू हुए और बैंक ने 16 जनवरी 2016 को संचालन शुरू किया। इसका मुख्यालय बीजिंग में है। इसलिए 2015 के कानूनी गठन तथा 2016 के कार्य आरंभ में अंतर समझें।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- AIIB एक बहुपक्षीय बैंक है।
- UN में observer status होना उसे संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसी नहीं बना देता।
- संस्था की पहचान, स्वामित्व और उसके अंतरराष्ट्रीय संबंध अलग प्रश्न हैं।
3. प्रमुख निवेश क्षेत्र
AIIB का काम टिकाऊ बुनियादी ढाँचे, क्षेत्रीय संपर्क और तकनीक समर्थित सेवाओं से जुड़ा है। परिवहन मार्ग, स्वच्छ ऊर्जा, जल व्यवस्था तथा शहरी सेवाएँ इसके विषय हो सकते हैं। अलग परियोजनाओं में सरकारी और निजी क्षेत्र की भूमिका अलग हो सकती है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- उदाहरण के लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन से यात्रा समय घट सकता है और रोजगार तक पहुँच बढ़ सकती है।
- लेकिन लाभ तभी व्यापक होगा जब सेवा नियमित, सुरक्षित और वहनीय हो।
- केवल स्टेशन या वाहन की संख्या सफलता का पर्याप्त माप नहीं है।
4. वित्तीय सहयोग कैसे समझें
बैंक परियोजनाओं और संबंधित निवेशों के लिए विभिन्न वित्तीय साधनों का उपयोग करता है। ऋण और निवेश की शर्तें परियोजना तथा जोखिम के आधार पर होती हैं। कभी अन्य विकास संस्थाओं के साथ सह-वित्तपोषण भी किया जाता है, जिससे संसाधन और अनुभव साझा हो सकते हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- सह-वित्तपोषण का मतलब यह नहीं कि सभी भागीदार एक ही संस्था बन जाते हैं।
- परियोजना तैयारी, निगरानी, पर्यावरणीय आवश्यकताओं और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी रहती है।
5. टिकाऊ अवसंरचना का अर्थ
टिकाऊ अवसंरचना में आर्थिक उपयोगिता के साथ पर्यावरण और समाज पर असर भी देखा जाता है। जलवायु जोखिम सहने की क्षमता, कम प्रदूषण, संसाधनों का कुशल उपयोग और रखरखाव इसके महत्वपूर्ण पहलू हैं। शुरुआत में सस्ती परियोजना यदि बार-बार खराब हो तो दीर्घकाल में महँगी पड़ सकती है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- किसी बिजली परियोजना का मूल्यांकन उत्पादन क्षमता के साथ वास्तविक आपूर्ति और वितरण से करना चाहिए।
- स्थानीय समुदाय की जरूरत, भूमि उपयोग और भविष्य की संचालन लागत वित्तीय विश्लेषण के साथ जुड़े प्रश्न हैं।
6. भारत से संबंध
भारत AIIB के संस्थापक सदस्यों में शामिल है। भारत में बड़े पैमाने पर परिवहन, ऊर्जा और शहरी सेवाओं की जरूरत के कारण विकास वित्त महत्वपूर्ण है। AIIB की परियोजनाओं में भारत की भागीदारी तथा सहयोग का संबंध इन्हीं बुनियादी ढाँचा आवश्यकताओं से है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- अंतरराष्ट्रीय वित्त घरेलू संसाधनों और नीति का पूरक हो सकता है।
- परियोजना चुनने, स्थानीय जरूरत समझने और सेवाओं को लंबे समय तक चलाने की जिम्मेदारी में राष्ट्रीय तथा स्थानीय संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
7. अन्य बैंकों से अंतर और पुनरावृत्ति
AIIB—बीजिंग—2016 में संचालन। ADB—मेट्रो मनीला—1966। NDB—शंघाई—BRICS संस्थापक देशों की पहल। इन संस्थाओं की परियोजनाओं में समान विषय आ सकते हैं, लेकिन उनके समझौते, शासन और इतिहास अलग हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- अभ्यास: AIIB का पूरा नाम क्या है? उत्तर: Asian Infrastructure Investment Bank।
- क्या यह खुदरा बैंक है? उत्तर: नहीं, बहुपक्षीय विकास बैंक है।
- क्या observer status का अर्थ UN specialized agency है? उत्तर: नहीं।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ें
8. UPSC अवधारणाएँ और विश्लेषण
पाठ्यक्रम: GS-II: बहुपक्षीय विकास संस्थाएँ; GS-III: आधारभूत संरचना, निवेश एवं सतत विकास।
बहुपक्षीय बैंक और राष्ट्रीय पहल में अंतर
- AIIB: सदस्य देशों के स्वामित्व वाली संधि आधारित वित्तीय संस्था; केवल एक देश की एजेंसी नहीं।
- BRI से अंतर: Belt and Road Initiative और AIIB अलग व्यवस्थाएँ हैं। किसी परियोजना में भागीदारी से दोनों का कानूनी या संस्थागत विलय नहीं होता।
- पूंजी और मताधिकार: विकास बैंकों में आर्थिक योगदान तथा संस्थागत नियम निर्णय क्षमता को प्रभावित करते हैं; इन्हें सामान्य सभा जैसा एक देश–एक मत मंच न मानें।
- सह-वित्तपोषण: अन्य संस्थाओं के साथ परियोजना वित्त साझा करने से संसाधन और विशेषज्ञता बढ़ सकती है; जवाबदेही तथा लागू मानकों की स्पष्टता जरूरी है।
स्रोत: AIIB के आधिकारिक प्रश्नोत्तर।
9. भारत के हित, चुनौतियाँ और आगे की राह
नीचे दिए गए मूल्यांकन-बिंदु Mains के लिए विश्लेषण हैं; आधिकारिक तथ्य जहाँ आवश्यक हैं, स्रोत के साथ दिए गए हैं।
भारत के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण
- विकास आवश्यकताएँ: परिवहन, शहरी सेवाएँ, ऊर्जा और जलवायु अनुकूल आधारभूत संरचना में दीर्घकालीन वित्त।
- रणनीतिक स्वायत्तता: बैंक में सहयोग और किसी अन्य राष्ट्रीय पहल पर भारत की आपत्ति साथ-साथ रह सकती हैं।
- परियोजना जोखिम: लागत बढ़ना, भूमि और पुनर्वास, पर्यावरणीय क्षति, मुद्रा जोखिम और अपर्याप्त रखरखाव।
- जलवायु अनुकूलता: परियोजना को केवल कम उत्सर्जन वाला बनाना पर्याप्त नहीं; बाढ़, गर्मी और चक्रवात जैसे जोखिमों के प्रति टिकाऊ भी होना चाहिए।
- सुधार: खुली खरीद प्रक्रिया, प्रभावित लोगों की भागीदारी, ऋण वहनीयता और निर्माण के बाद सेवा की गुणवत्ता का मूल्यांकन।
10. Prelims अभ्यास: 5 कथन आधारित प्रश्न
ये मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं; UPSC के वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं हैं।
प्रश्न 1
- AIIB का मुख्यालय बीजिंग में है।
- इसने जनवरी 2016 में संचालन शुरू किया।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: C। स्थापना संबंधी समझौते और संचालन प्रारंभ का अंतर ध्यान रखें।
प्रश्न 2
- भारत AIIB का संस्थापक सदस्य है।
- AIIB और BRI एक ही कानूनी संस्था हैं।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। दोनों अलग हैं।
प्रश्न 3
- AIIB में गैर-क्षेत्रीय सदस्य भी हो सकते हैं।
- AIIB संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट एजेंसी है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। यह बहुपक्षीय विकास बैंक है, UN specialized agency नहीं।
प्रश्न 4
- सह-वित्तपोषण में कई संस्थाएँ संसाधन दे सकती हैं।
- सह-वित्तपोषण से जवाबदेही की आवश्यकता समाप्त होती है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। मानकों और जिम्मेदारी का स्पष्ट विभाजन आवश्यक है।
प्रश्न 5
- जलवायु अनुकूल आधारभूत संरचना में जोखिम सहनशीलता महत्त्वपूर्ण है।
- ऋण स्वीकृति परियोजना के सफल संचालन की गारंटी है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। क्रियान्वयन और रखरखाव भी आवश्यक हैं।
11. Mains अभ्यास और मॉडल उत्तर
उत्तर-लेखन अभ्यास
- 150 शब्द: AIIB और BRI के बीच संस्थागत अंतर स्पष्ट कीजिए।
- 250 शब्द: बहुपक्षीय आधारभूत संरचना वित्त में भारत के अवसर और जोखिमों का मूल्यांकन कीजिए।
- 250 शब्द: जलवायु अनुकूल अवसंरचना में विकास बैंकों की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
मॉडल उत्तर: बहुपक्षीय आधारभूत संरचना वित्त में भारत के अवसर और जोखिमों का मूल्यांकन कीजिए।
भारत की आधारभूत संरचना आवश्यकताओं के लिए बहुपक्षीय विकास बैंक वित्त और विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकते हैं।
AIIB में भारत की भागीदारी विकास सहयोग और रणनीतिक स्वायत्तता के साथ संगत है।
परिवहन, जल, शहरी सेवाओं और स्वच्छ ऊर्जा में दीर्घकालीन वित्त आर्थिक उत्पादकता बढ़ा सकता है।
हालांकि बाहरी ऋण अपने आप बेहतर विकास नहीं सुनिश्चित करता।
लागत में वृद्धि, मुद्रा असंतुलन, सामाजिक प्रभाव तथा रखरखाव की कमजोरी लाभ को सीमित कर सकते हैं।
परियोजनाओं का चयन सार्वजनिक आवश्यकता और ऋण वहनीयता के आधार पर होना चाहिए।
पारदर्शी खरीद, प्रभावित समुदायों से संवाद और स्वतंत्र परिणाम मूल्यांकन आवश्यक हैं।
AIIB को BRI का पर्याय मानने के बजाय उसकी अपनी संस्थागत संरचना के आधार पर समझना चाहिए।
भारत को वित्त के विविध स्रोतों का उपयोग करते हुए राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं को केंद्र में रखना चाहिए।
उत्तर सुधारने की जाँच-सूची
- भूमिका में प्रश्न की केंद्रीय अवधारणा स्पष्ट करें।
- तथ्य और अपना विश्लेषण अलग रखें; जहाँ लागू हो, उदाहरण दें।
- लाभ, सीमाएँ और भारत के हितों को संतुलित ढंग से जोड़ें।
- निष्कर्ष में व्यावहारिक सुधार तथा कार्यान्वयन की शर्तें बताएँ।
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