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BRICS: इतिहास, विस्तार, उद्देश्य, NDB और भारत की भूमिका
UPSC Prelims एवं Mains | GS-II एवं GS-III | तथ्य, अवधारणाएँ और विश्लेषण
| आरंभिक समूह | ब्राजील, रूस, भारत और चीन—BRIC |
| कूटनीतिक सहयोग की शुरुआत | 2006 |
| पहला शिखर सम्मेलन | 2009, येकातेरिनबर्ग |
| दक्षिण अफ्रीका का पहला शिखर सम्मेलन | 2011 |
| स्थायी मुख्यालय | नहीं |
| विकास बैंक | New Development Bank—शंघाई |
1. BRICS क्या है?
BRICS वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मामलों में सहयोग का बहुपक्षीय मंच है। इसके नाम के अक्षर ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अंग्रेजी नामों से जुड़े हैं। विस्तार के बाद भी समूह का प्रचलित नाम BRICS बना हुआ है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- यह मंच वैश्विक शासन में विकासशील देशों की भागीदारी, आर्थिक सहयोग और लोगों के बीच संबंधों पर चर्चा करता है।
- इसे संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसी, एक मुद्रा संघ या सामूहिक रक्षा संधि मानना सही नहीं है।
2. BRIC से BRICS बनने की यात्रा
ब्राजील, रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों का समन्वय 2006 में शुरू हुआ। पहला BRIC नेताओं का शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित हुआ। शुरुआत का वर्ष और पहले शिखर सम्मेलन का वर्ष अलग हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- दक्षिण अफ्रीका को 2010 में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया और उसने 2011 में पहली बार शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
- इसी विस्तार से BRIC के साथ S जुड़ा।
- इसलिए BRICS की पूरी यात्रा को केवल एक वर्ष में समेटना ठीक नहीं है।
3. सदस्यता विस्तार कैसे समझें?
मूल पाँच देशों के बाद समूह का विस्तार हुआ। मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात 2024 के विस्तार से जुड़े, जबकि इंडोनेशिया 2025 में पूर्ण सदस्य बना। विस्तार से समूह का भौगोलिक और आर्थिक दायरा बढ़ा।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- पूर्ण सदस्य, आमंत्रित देश और साझेदार देश अलग श्रेणियाँ हैं।
- केवल निमंत्रण या बैठक में उपस्थिति को पूर्ण सदस्यता का प्रमाण नहीं समझें।
- ब्राज़ील की 2025 अध्यक्षता की आधिकारिक सूची में सऊदी अरब सहित 11 पूर्ण सदस्य दर्ज हैं। सदस्यता के प्रश्न में सूची का स्रोत और संदर्भ वर्ष स्पष्ट रखें।
4. संगठन की कार्यप्रणाली
BRICS का स्थायी मुख्यालय या स्थायी सचिवालय नहीं है। सदस्य देशों के बीच अध्यक्षता बदलती है और अध्यक्ष देश बैठकों तथा एजेंडा के समन्वय में प्रमुख भूमिका निभाता है। शिखर सम्मेलन के अतिरिक्त मंत्री, अधिकारी और विभिन्न कार्यसमूह सहयोग करते हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- सहयोग के तीन व्यापक आयाम हैं—राजनीतिक एवं सुरक्षा संवाद, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग, तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंध।
- साझा घोषणा राजनीतिक सहमति दिखाती है; उसका वास्तविक प्रभाव संबंधित देशों और संस्थाओं के कार्यान्वयन पर निर्भर करता है।
5. न्यू डेवलपमेंट बैंक और BRICS
New Development Bank की स्थापना का समझौता 2014 में हुआ और बैंक 2015 में स्थापित हुआ। इसका मुख्यालय शंघाई है। इसका प्रमुख उद्देश्य बुनियादी ढाँचे और सतत विकास की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देना है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- NDB का मुख्यालय होने का अर्थ यह नहीं है कि BRICS का भी मुख्यालय शंघाई है।
- बैंक एक अलग संधि आधारित वित्तीय संस्था है।
- उसकी सदस्यता और BRICS की सदस्यता को एक जैसी सूची मानना भी सही नहीं है।
6. भारत के लिए महत्व
भारत BRIC की मूल सहयोग प्रक्रिया का हिस्सा है। BRICS भारत को वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, विकास वित्त और आर्थिक सहयोग पर अपनी बात रखने का अवसर देता है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- स्वास्थ्य, विज्ञान, डिजिटल विकास, शिक्षा और व्यापार जैसे विषयों में ज्ञान तथा अनुभव साझा किए जा सकते हैं।
- साथ ही सदस्य देशों के हितों में अंतर रहता है।
- भारत की भागीदारी उसके स्वतंत्र राष्ट्रीय निर्णय और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के साथ चलती है।
7. सामान्य भ्रांतियाँ और विश्लेषण
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की चर्चा और साझा मुद्रा जारी होना अलग बातें हैं। किसी प्रस्ताव को लागू व्यवस्था बताने से पहले आधिकारिक निर्णय जाँचना आवश्यक है। BRICS को एक समान राजनीतिक व्यवस्था वाले देशों का समूह भी नहीं कहा जा सकता।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- बड़े विस्तार से प्रतिनिधित्व बढ़ता है, लेकिन सहमति बनाना कठिन भी हो सकता है।
- समूह के महत्व का आकलन केवल सदस्य संख्या से नहीं, बल्कि ठोस सहयोग, वित्तीय परियोजनाओं और सहमतियों के क्रियान्वयन से करना चाहिए।
8. परीक्षा के लिए पुनरावृत्ति
याद रखें: विदेश मंत्री सहयोग—2006; पहला BRIC शिखर सम्मेलन—2009; दक्षिण अफ्रीका की पहली शिखर भागीदारी—2011; NDB समझौता—2014; NDB स्थापना—2015।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- प्रश्न: BRICS का स्थायी मुख्यालय कहाँ है? उत्तर: इसका स्थायी मुख्यालय नहीं है।
- NDB का मुख्यालय? उत्तर: शंघाई।
- क्या सभी साझेदार पूर्ण सदस्य होते हैं? उत्तर: नहीं।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ें
9. UPSC अवधारणाएँ और विश्लेषण
पाठ्यक्रम: GS-II: वैश्विक दक्षिण, बहुपक्षीय संस्थाओं का सुधार और भारत की विदेश नीति।
Global South और संस्थागत सुधार
BRICS का महत्त्व उभरती अर्थव्यवस्थाओं को सामूहिक आवाज देने में है। वैश्विक दक्षिण कोई एकसमान आर्थिक या राजनीतिक इकाई नहीं है। साझा प्रतिनिधित्व की माँग के बावजूद सदस्य देशों की व्यापार, सुरक्षा और विकास प्राथमिकताएँ अलग हैं।
- बहुध्रुवीयता: शक्ति तथा निर्णय के कई केंद्र; हर मुद्दे पर एक जैसा मत नहीं।
- स्थानीय मुद्रा निपटान: लेनदेन में डॉलर पर कुछ निर्भरता घट सकती है।
- साझा मुद्रा: मौद्रिक नीति, भुगतान प्रणाली और संस्थागत समन्वय का बहुत अधिक जटिल प्रश्न। इसे स्थानीय मुद्रा व्यापार के बराबर न रखें।
मंच और बैंक का अंतर
BRICS राजनीतिक-आर्थिक सहयोग का मंच है; NDB परियोजनाओं को वित्त देने वाला अलग विकास बैंक। सदस्यता विस्तार, बैंक की सदस्यता और साझेदार श्रेणी तीन अलग सूचियाँ हैं।
10. भारत के हित, चुनौतियाँ और आगे की राह
नीचे दिए गए मूल्यांकन-बिंदु Mains के लिए विश्लेषण हैं; आधिकारिक तथ्य जहाँ आवश्यक हैं, स्रोत के साथ दिए गए हैं।
विस्तार: लाभ और समन्वय की लागत
- अवसर: विभिन्न क्षेत्रों की भागीदारी, ऊर्जा-उपभोक्ता और उत्पादक देशों का संवाद, विकास वित्त के विकल्प।
- चुनौती: अधिक सदस्यों में सहमति, प्राथमिकताएँ और संसाधन बाँटना कठिन हो सकता है।
- भारत का हित: वैश्विक संस्थाओं में सुधार, दक्षिण-दक्षिण सहयोग और अनेक साझेदारियों के साथ रणनीतिक स्वायत्तता।
- नीतिगत सावधानी: इसे स्वतः पश्चिम-विरोधी सैन्य गठबंधन न मानें; विषय आधारित सहयोग देखें।
तारीख सहित सदस्यता पढ़ें
ब्राज़ील की 2025 अध्यक्षता की आधिकारिक घोषणा में इंडोनेशिया के प्रवेश के बाद 11 पूर्ण सदस्य सूचीबद्ध थे, जिनमें सऊदी अरब भी शामिल था। सदस्य, आमंत्रित और साझेदार श्रेणियों को उस स्रोत और समय-संदर्भ के साथ पढ़ें। 6 जनवरी 2025 की घोषणा।
सफलता की कसौटी
केवल GDP और जनसंख्या का संयुक्त आकार पर्याप्त नहीं। वित्तीय परियोजनाएँ, अनुसंधान सहयोग, भुगतान की सुविधा और संकट में समन्वय वास्तविक उपयोगिता दिखाते हैं। बड़े आकार के साथ निर्णय की गुणवत्ता भी महत्त्वपूर्ण है।
11. Prelims अभ्यास: 5 कथन आधारित प्रश्न
ये मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं; UPSC के वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं हैं।
प्रश्न 1
- BRICS का स्थायी मुख्यालय शंघाई में है।
- NDB का मुख्यालय शंघाई में है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: B। BRICS का स्थायी मुख्यालय नहीं है।
प्रश्न 2
- पहला BRIC शिखर सम्मेलन 2009 में हुआ।
- दक्षिण अफ्रीका ने 2011 में पहली बार शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: C। दोनों पड़ाव सही हैं।
प्रश्न 3
- स्थानीय मुद्रा व्यापार साझा मुद्रा के समान है।
- BRICS साझेदार होना स्वतः पूर्ण सदस्यता नहीं है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: B। मुद्रा निपटान और मुद्रा संघ अलग हैं।
प्रश्न 4
- NDB और BRICS की सदस्यता हमेशा समान है।
- NDB बुनियादी ढाँचे एवं सतत विकास को वित्त देता है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: B। बैंक की सदस्यता स्वतंत्र प्रक्रिया है।
प्रश्न 5
- भारत मूल BRIC सहयोग का हिस्सा है।
- BRICS एक सामूहिक रक्षा संधि है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। यह सैन्य गठबंधन नहीं है।
12. Mains अभ्यास और मॉडल उत्तर
उत्तर-लेखन अभ्यास
- 150 शब्द: BRICS विस्तार में प्रतिनिधित्व और प्रभावशीलता के बीच संबंध समझाइए।
- 250 शब्द: भारत के लिए BRICS की उपयोगिता तथा सीमाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- 250 शब्द: स्थानीय मुद्रा व्यापार और साझा मुद्रा के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।
मॉडल उत्तर: भारत के लिए BRICS की उपयोगिता तथा सीमाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
BRICS भारत को वैश्विक शासन में सुधार तथा विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का मंच देता है।
विस्तार से समूह का भौगोलिक आधार और आर्थिक विविधता बढ़ती है।
ऊर्जा, स्वास्थ्य, विज्ञान तथा विकास वित्त में सहयोग के अवसर पैदा होते हैं।
लेकिन सदस्य देशों के राजनीतिक हित समान नहीं हैं; चीन के साथ भारत के मतभेद भी व्यापक सहयोग के साथ मौजूद रह सकते हैं।
इसलिए बड़े आकार को स्वतः एकजुटता नहीं मानना चाहिए।
भारत के लिए उपयोगी नीति मुद्दा आधारित सहयोग, वित्तीय संस्थाओं की जवाबदेही और स्वतंत्र निर्णय पर आधारित होगी।
NDB की परियोजनाओं तथा तकनीकी साझेदारियों को ठोस परिणामों से परखना चाहिए।
स्थानीय मुद्रा प्रयोग उपयोगी विकल्प हो सकता है, लेकिन साझा मुद्रा के लिए कहीं अधिक संस्थागत समन्वय चाहिए।
भारत को BRICS को अन्य साझेदारियों के विरोध में रखने के बजाय बहुपक्षीय विकल्पों और नीति स्वायत्तता के विस्तार के रूप में उपयोग करना चाहिए।
उत्तर सुधारने की जाँच-सूची
- भूमिका में प्रश्न की केंद्रीय अवधारणा स्पष्ट करें।
- तथ्य और अपना विश्लेषण अलग रखें; जहाँ लागू हो, उदाहरण दें।
- लाभ, सीमाएँ और भारत के हितों को संतुलित ढंग से जोड़ें।
- निष्कर्ष में व्यावहारिक सुधार तथा कार्यान्वयन की शर्तें बताएँ।
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