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FAO — खाद्य एवं कृषि संगठन

स्थापना, खाद्य सुरक्षा, प्रमुख रिपोर्टें, कृषि और भारत से संबंध

UPSC Prelims एवं Mains के लिए विस्तृत अध्ययन

स्थापना

16 अक्टूबर 1945

मुख्यालय

रोम, इटली

प्रकृति

UN की विशिष्ट एजेंसी

विश्व खाद्य दिवस

16 अक्टूबर

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FAO का परिचय और स्थापना

FAO का पूरा नाम Food and Agriculture Organization of the United Nations है। हिंदी में इसे संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन कहा जाता है। यह कृषि, खाद्य सुरक्षा, पोषण, मत्स्य पालन, वानिकी और ग्रामीण विकास से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट एजेंसी है। इसकी स्थापना 16 अक्टूबर 1945 को कनाडा के क्यूबेक शहर में हुई थी। वर्तमान मुख्यालय रोम, इटली में है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • द्वितीय विश्वयुद्ध के आसपास भूख, खाद्यान्न की कमी और कृषि उत्पादन की समस्याओं ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता बढ़ाई।
  • FAO का मूल विचार था कि देशों के बीच ज्ञान, आँकड़े और तकनीकी सहयोग साझा करके भोजन और आजीविका की स्थिति सुधारी जा सकती है।
  • स्थापना-स्थान और मुख्यालय अलग हैं: क्यूबेक स्थापना से संबंधित है, जबकि रोम प्रशासनिक मुख्यालय है।
  • भारत 16 अक्टूबर 1945 से इसका सदस्य और संस्थापक सदस्यों में शामिल है।
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भूख मिटाने से आगे: कार्यक्षेत्र का विस्तार

FAO को केवल अनाज उत्पादन बढ़ाने वाली संस्था मानना इसके काम को बहुत सीमित कर देता है। खाद्य व्यवस्था में बीज, भूमि, पानी, किसान, पशुपालक, मछुआरे, परिवहन, भंडारण, प्रसंस्करण, बाजार और उपभोक्ता सभी जुड़े होते हैं। इनमें किसी एक कड़ी की कमजोरी भी भोजन की उपलब्धता या उसकी कीमत प्रभावित कर सकती है।

  • कृषि और ग्रामीण आजीविका: उत्पादन क्षमता, संसाधनों का उचित उपयोग तथा छोटे उत्पादकों की बाजार तक पहुँच।
  • पोषण: पर्याप्त कैलोरी के साथ विविध, सुरक्षित और पोषक भोजन को महत्त्व देना।
  • प्राकृतिक संसाधन: मृदा, जल, वन, जैव विविधता और जलीय संसाधनों का टिकाऊ उपयोग।
  • नीति और ज्ञान: कृषि आँकड़े, खाद्य बाजारों की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और संस्थागत क्षमता निर्माण।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • इसलिए FAO का संबंध अर्थव्यवस्था, भूगोल, पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से एक साथ बनता है।
  • कृषि की सफलता का मूल्यांकन केवल अधिक उपज से नहीं, बल्कि पोषण, आय और संसाधनों की दीर्घकालीन स्थिति से भी किया जाता है।
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खाद्य सुरक्षा के चार पारंपरिक आयाम

खाद्य सुरक्षा का अर्थ ऐसी स्थिति है जिसमें लोगों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पोषक भोजन तक पहुँच हो। इसके चार पारंपरिक आयाम एक-दूसरे के पूरक हैं।

आयाम अर्थ समझने का उदाहरण
उपलब्धता — Availability उत्पादन, भंडार या व्यापार से भोजन मौजूद होना। जिले में पर्याप्त अनाज की आपूर्ति है।
पहुँच — Access व्यक्ति के पास भोजन प्राप्त करने की आर्थिक और भौतिक क्षमता होना। बाजार में अनाज है, लेकिन कम आय वाला परिवार उसे खरीद नहीं पा रहा।
उपयोग — Utilization पोषक भोजन, स्वच्छता, देखभाल और स्वास्थ्य के माध्यम से शरीर को पोषण मिलना। भोजन मिलने के बावजूद अस्वच्छ पानी से बीमारी पोषण को प्रभावित करती है।
स्थिरता — Stability पहले तीन आयामों का समय के साथ बने रहना। सूखा, बेरोजगारी या युद्ध से भोजन की नियमित उपलब्धता बाधित होती है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • राष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन होने पर भी हर परिवार खाद्य सुरक्षित हो, यह आवश्यक नहीं।
  • इसी कारण खाद्य सुरक्षा को केवल उत्पादन का प्रश्न मानकर नहीं समझा जा सकता।
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खाद्य सुरक्षा, पोषण और खाद्य संरक्षण में अंतर

Food Security पर्याप्त भोजन तक निरंतर पहुँच का व्यापक प्रश्न है। Food Safety भोजन में हानिकारक सूक्ष्मजीव, रसायन या अन्य जोखिमों से सुरक्षा का विषय है। Nutrition Security भोजन की पोषण गुणवत्ता, देखभाल, स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित है। हिंदी में शब्द मिलते-जुलते लग सकते हैं, लेकिन इनके नीतिगत अर्थ अलग हैं।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • उदाहरण के लिए, किसी परिवार को नियमित रूप से अनाज मिल सकता है, फिर भी उसके भोजन में प्रोटीन, सूक्ष्म पोषक तत्त्व या पर्याप्त विविधता की कमी हो सकती है।
  • दूसरी ओर पौष्टिक भोजन यदि दूषित हो तो स्वास्थ्य का जोखिम बना रहता है।
  • समग्र नीति में पर्याप्त मात्रा, खरीदने की क्षमता, पोषण और स्वच्छता सभी महत्त्वपूर्ण होते हैं।
  • आधुनिक खाद्य व्यवस्था की चर्चा में लोगों की निर्णय-क्षमता तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए व्यवस्था की टिकाऊ प्रकृति को भी महत्त्व दिया जाता है।
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शासन व्यवस्था और निर्णय प्रक्रिया

FAO एक अंतरसरकारी संस्था है। सदस्य देश इसकी नीतिगत दिशा तय करते हैं। इसका प्रमुख निर्णयकारी निकाय Conference है, जिसमें सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व होता है। सामान्यतः सम्मेलन दो वर्ष में आयोजित होता है और संगठन की व्यापक नीति तथा कार्यक्रम संबंधी निर्णयों में भूमिका निभाता है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • Council सम्मेलन के सत्रों के बीच कार्यकारी स्तर पर कार्यक्रमों और प्रशासनिक मामलों की देखरेख करता है।
  • Director-General सचिवालय और संगठन के दैनिक प्रशासन का नेतृत्व करता है।
  • क्षेत्रीय तथा देश कार्यालय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कार्यक्रमों को लागू करने में सहायता देते हैं।
  • इस संरचना का अर्थ है कि FAO नीतिगत मंच और तकनीकी सहयोग संस्था दोनों है।
  • वह देशों की कृषि व्यवस्था का प्रत्यक्ष शासन नहीं चलाता।
  • भूमि नीति, सार्वजनिक वितरण, कृषि सहायता और खाद्य कानून जैसे निर्णय संबंधित सरकारें अपनी संवैधानिक व्यवस्था में लेती हैं।
  • FAO आँकड़ों, अनुभव और विशेषज्ञता के माध्यम से इन प्रक्रियाओं को समर्थन देता है।
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Four Betters और सतत विकास

FAO का Strategic Framework 2022–2031 कृषि-खाद्य व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी, समावेशी, संकट-सहनीय और टिकाऊ बनाने पर केंद्रित है। इसकी दिशा को Four Betters के माध्यम से समझा जाता है।

प्राथमिकता केंद्रीय विचार
Better Production ऐसी उत्पादन व्यवस्था जो दक्षता के साथ छोटे उत्पादकों और संसाधनों की स्थिति पर भी ध्यान दे।
Better Nutrition भूख और कुपोषण कम करने तथा स्वस्थ आहार तक पहुँच बढ़ाने की दिशा।
A Better Environment जलवायु, भूमि, जल और जैव विविधता का संरक्षण करते हुए उत्पादन।
A Better Life गरीबी और असमानता कम करना तथा ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुधारना।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • इन उद्देश्यों का सीधा संबंध SDG 1 — गरीबी उन्मूलन, SDG 2 — शून्य भूख और SDG 10 — असमानताओं में कमी से है।
  • साथ ही जल, जलवायु, जिम्मेदार उपभोग और स्थलीय तथा जलीय पारिस्थितिक तंत्र भी जुड़े हैं।
  • उदाहरणतः सिंचाई की दक्षता बढ़ाने से उत्पादन के साथ पानी और ऊर्जा पर दबाव कम हो सकता है।
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प्रमुख रिपोर्टें और उनका विषय

FAO की रिपोर्टें कृषि और खाद्य संबंधी वैश्विक प्रवृत्तियों को समझने का आधार देती हैं। नाम में समानता के कारण इनके संक्षिप्त रूप अलग-अलग पहचानना उपयोगी है।

रिपोर्ट पूरा नाम / विषय
SOFI The State of Food Security and Nutrition in the World — भूख, खाद्य असुरक्षा और पोषण।
SOFA The State of Food and Agriculture — कृषि-खाद्य व्यवस्थाओं के आर्थिक और नीतिगत मुद्दे।
SOFIA The State of World Fisheries and Aquaculture — मत्स्य संसाधन और जलीय कृषि।
SOFO The State of the World’s Forests — वन, उनके उपयोग और टिकाऊ प्रबंधन की स्थिति।
SOCO The State of Agricultural Commodity Markets — कृषि वस्तुओं के बाजार और व्यापार।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • SOFI संयुक्त प्रकाशन है, जिसे FAO, IFAD, UNICEF, WFP और WHO मिलकर तैयार करते हैं।
  • इसलिए इसे केवल FAO की अकेली रिपोर्ट कहना अधूरा है।
  • किसी रिपोर्ट का आँकड़ा पढ़ते समय प्रकाशन वर्ष, आँकड़ों की संदर्भ-अवधि और प्रयुक्त संकेतक अलग-अलग देखना चाहिए।
  • अलग संकेतक भूख और पोषण के अलग पहलू मापते हैं।
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FAOSTAT और Food Price Index

FAOSTAT खाद्य एवं कृषि संबंधी अंतरराष्ट्रीय आँकड़ों का प्रमुख डेटाबेस है। इससे उत्पादन, भूमि उपयोग, कृषि व्यापार और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों की तुलना और दीर्घकालीन प्रवृत्तियों का अध्ययन किया जा सकता है। देशों के आँकड़ों की परिभाषा और समयावधि समान होने पर तुलना अधिक उपयोगी होती है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • FAO Food Price Index अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में मासिक बदलाव का संकेतक है।
  • इसमें अनाज, वनस्पति तेल, डेयरी उत्पाद, मांस और चीनी के समूह शामिल होते हैं।
  • समूहों को उनके निर्यात हिस्से के आधार पर भार दिया जाता है।
  • यह भारत की खुदरा खाद्य महँगाई का सूचकांक नहीं है।
  • अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू कीमतों के बीच विनिमय दर, परिवहन लागत, कर, व्यापार नीति, घरेलू फसल और भंडार का प्रभाव आता है।
  • इसलिए विश्व कीमत घटने पर भी किसी देश में उपभोक्ता कीमत तुरंत उसी अनुपात में घटे, यह आवश्यक नहीं।
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Codex Alimentarius और खाद्य मानक

Codex Alimentarius Commission FAO और WHO की संयुक्त खाद्य मानक व्यवस्था का प्रमुख निकाय है। इसकी स्थापना 1963 में हुई। उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा और खाद्य व्यापार में उचित व्यवहार को प्रोत्साहित करना है। Codex में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े मानक, दिशानिर्देश तथा व्यवहार संहिताएँ विकसित की जाती हैं।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • इसके विषयों में खाद्य स्वच्छता, लेबलिंग, संदूषक, खाद्य योजक और कीटनाशक अवशेष जैसे क्षेत्र आते हैं।
  • वैज्ञानिक सलाह के आधार पर मानक विकसित करने से देशों को जोखिमों का आकलन और अपनी खाद्य नियंत्रण व्यवस्था मजबूत करने में सहायता मिलती है।
  • Codex मानक अपने स्वरूप में स्वैच्छिक हैं।
  • किसी देश के घरेलू कानून और विनियमन में उन्हें अपनाने की प्रक्रिया अलग होती है।
  • वे अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार में महत्त्वपूर्ण संदर्भ भी बनते हैं।
  • FAO कृषि और खाद्य व्यवस्था की विशेषज्ञता तथा WHO सार्वजनिक स्वास्थ्य की विशेषज्ञता के माध्यम से इस संयुक्त कार्य को समर्थन देते हैं।
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किसान, जलवायु और टिकाऊ कृषि

खेती जलवायु पर निर्भर भी है और भूमि, जल तथा पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित भी करती है। अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, बढ़ता तापमान और कीटों का प्रसार उत्पादन तथा ग्रामीण आय को अस्थिर कर सकता है। टिकाऊ कृषि का उद्देश्य इन जोखिमों से निपटते हुए भोजन उत्पादन और संसाधनों की गुणवत्ता बनाए रखना है।

  • मृदा और जल प्रबंधन: मिट्टी की उर्वरता, जल संचयन और सिंचाई में दक्षता।
  • विविधता: स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसलों और आजीविका के विकल्प बढ़ाना।
  • ज्ञान की पहुँच: मौसम, रोग, बाजार और बेहतर कृषि पद्धतियों की जानकारी।
  • समावेशन: छोटे किसानों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं की सेवाओं तथा अवसरों तक पहुँच।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • किसी तकनीक को केवल प्रति हेक्टेयर उपज के आधार पर श्रेष्ठ घोषित करना पर्याप्त नहीं।
  • उसकी लागत, पानी की आवश्यकता, किसान की आय, जोखिम और स्थानीय पर्यावरण पर प्रभाव का भी आकलन जरूरी है।
  • यही कृषि-खाद्य व्यवस्था को समग्र दृष्टि से देखने का अर्थ है।
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भारत और FAO का संबंध

भारत FAO के संस्थापक सदस्यों में है और सदस्यता की तारीख 16 अक्टूबर 1945 है। भारत में FAO की गतिविधियाँ 1948 से शुरू हुईं। सदस्यता की तारीख और देश में कार्यक्रम संचालन की शुरुआत को अलग समझना चाहिए। भारत का अनुभव खाद्य उत्पादन, छोटे किसानों, ग्रामीण आजीविका और पोषण के बीच जटिल संबंध दिखाता है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • FAO का भारत के साथ सहयोग कृषि और खाद्य व्यवस्था की नीतियों, तकनीकी क्षमता, पर्यावरणीय स्थिरता और ज्ञान साझा करने से जुड़ता है।
  • Country Programming Framework 2023–2027 देश की संयुक्त राष्ट्र सहयोग प्राथमिकताओं से संबद्ध है।
  • भारत के संदर्भ में कृषि विविधीकरण, पोषक आहार, जल की दक्षता, छोटे उत्पादकों की आय, कटाई के बाद होने वाली हानि और जलवायु जोखिम विशेष महत्त्व रखते हैं।
  • भारत केवल सहायता प्राप्त करने वाला देश नहीं; उसका कृषि अनुभव और संस्थागत ज्ञान अन्य विकासशील देशों के साथ सहयोग में भी उपयोगी हो सकता है।
  • FAO के साथ संबंध को इसी दोतरफा ज्ञान और तकनीकी साझेदारी के रूप में समझना अधिक उचित है।
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FAO, WFP और IFAD में अंतर

रोम स्थित तीन प्रमुख खाद्य एवं कृषि संस्थाओं का कार्यक्षेत्र परस्पर जुड़ा है, लेकिन उनकी मुख्य भूमिकाएँ अलग हैं।

संस्था मुख्य भूमिका विशेष पहचान
FAO खाद्य एवं कृषि नीति, मानक, आँकड़े और तकनीकी सहयोग। उत्पादन तथा खाद्य व्यवस्था की संस्थागत क्षमता पर व्यापक कार्य।
WFP खाद्य सहायता और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों तक सहायता पहुँचाना। मानवीय संकट, खाद्य पहुँच और सहायता संचालन में प्रमुख भूमिका।
IFAD ग्रामीण विकास और गरीब ग्रामीण उत्पादकों के लिए विकास वित्त। परियोजनाओं और निवेश से ग्रामीण आजीविका में सुधार।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • व्यवहार में तीनों संस्थाएँ साझेदारी कर सकती हैं।
  • संकटग्रस्त क्षेत्र में तत्काल भोजन की सहायता, किसानों की उत्पादन क्षमता की बहाली और दीर्घकालीन ग्रामीण निवेश की जरूरत एक साथ हो सकती है।
  • फिर भी संगठन की पहचान उसके मुख्य अधिदेश से की जाती है।
  • FAO को केवल खाद्य वितरण एजेंसी अथवा IFAD को वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक जारी करने वाली संस्था नहीं समझना चाहिए।
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विश्व खाद्य दिवस और दीर्घकालीन चुनौतियाँ

विश्व खाद्य दिवस 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह FAO की स्थापना की तारीख से जुड़ा है और भूख, पोषण तथा खाद्य व्यवस्था के प्रति जागरूकता बढ़ाता है। इस अवसर का महत्त्व केवल भोजन की मात्रा तक सीमित नहीं; भोजन उगाने वाले लोगों, संसाधनों और उपभोक्ता व्यवहार पर भी ध्यान जाता है।

व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग

  • वैश्विक खाद्य सुरक्षा के सामने संघर्ष, गरीबी, जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण, मूल्य अस्थिरता और असमान पहुँच जैसी चुनौतियाँ हैं।
  • बेहतर आँकड़े और तकनीकी सलाह आवश्यक हैं, लेकिन उनका प्रभाव राष्ट्रीय संस्थाओं, वित्त, शांति, स्थानीय क्षमता और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर निर्भर करता है।
  • लंबी अवधि में खाद्य व्यवस्था को ऐसा बनाना आवश्यक है जो पर्याप्त भोजन दे, पोषण सुधारे, उत्पादकों की आजीविका बनाए रखे और प्राकृतिक संसाधनों को क्षति पहुँचाए बिना भविष्य की जरूरतों का सामना कर सके।
  • FAO की भूमिका इसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग में है।

14. UPSC अवधारणाएँ और विश्लेषण

पाठ्यक्रम: GS-II: खाद्य एवं पोषण सुरक्षा; GS-III: कृषि, सतत उत्पादन और प्राकृतिक संसाधन।

खाद्य प्रणाली को समग्र रूप में समझें

  • उत्पादन पर्याप्त होना आवश्यक, पर पर्याप्त नहीं: परिवार के पास खरीद क्षमता, सुरक्षित भोजन और स्वास्थ्य सेवाएँ न हों तो अधिक उत्पादन के बावजूद कुपोषण रह सकता है।
  • चार आयाम: availability, access, utilization और stability को उदाहरण से जोड़ें—फसल उत्पादन, आय, पोषक तत्वों का उपयोग और संकट के दौरान निरंतरता।
  • Food safety बनाम Food security: संदूषण से सुरक्षित भोजन और पर्याप्त भोजन तक पहुँच अलग लेकिन संबंधित हैं।
  • Codex Alimentarius: FAO और WHO का संयुक्त खाद्य मानक कार्यक्रम; इसके मानकों को हर देश में अपने आप लागू होने वाला कानून न मानें।

आधिकारिक संदर्भ: FAO।

15. भारत के हित, चुनौतियाँ और आगे की राह

नीचे दिए गए मूल्यांकन-बिंदु Mains के लिए विश्लेषण हैं; आधिकारिक तथ्य जहाँ आवश्यक हैं, स्रोत के साथ दिए गए हैं।

भारत के लिए नीति संबंध

  • फसल विविधीकरण: केवल कैलोरी के बजाय दाल, पोषक अनाज, फल और सब्जियों तक पहुँच पर बल।
  • जलवायु जोखिम: सूखा, गर्मी और बाढ़ उत्पादन तथा कीमतों को प्रभावित करते हैं; मृदा, जल और बीज प्रणाली की क्षमता बढ़ाना जरूरी है।
  • मूल्य शृंखला: भंडारण, शीत शृंखला और बाजार संपर्क खाद्य हानि कम कर सकते हैं; छोटे किसानों की वहनीयता का ध्यान रखें।
  • डेटा का सही उपयोग: FAO Food Price Index अंतरराष्ट्रीय वस्तु कीमतों का संकेतक है; इसे भारत की खुदरा खाद्य महँगाई का समान आँकड़ा न लिखें।
  • विभागीय समन्वय: कृषि, स्वास्थ्य, जल एवं स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा को जोड़ना पोषण परिणामों के लिए आवश्यक है।

16. Prelims अभ्यास: 5 कथन आधारित प्रश्न

ये मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं; UPSC के वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं हैं।

प्रश्न 1

  1. FAO खाद्य और कृषि से संबंधित UN की विशिष्ट एजेंसी है।
  2. इसका मुख्यालय रोम में है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: C। दोनों तथ्य सही हैं।

प्रश्न 2

  1. खाद्य उपलब्धता बढ़ने से कुपोषण स्वतः समाप्त होता है।
  2. स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएँ पोषण को प्रभावित करती हैं।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: B। उपयोग, पहुँच और स्वास्थ्य भी आवश्यक हैं।

प्रश्न 3

  1. Codex FAO और WHO से जुड़ा है।
  2. Codex मानक अपने आप सभी देशों का घरेलू कानून बन जाते हैं।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: A। देशों की कानूनी प्रक्रियाएँ अलग हैं।

प्रश्न 4

  1. FAO Food Price Index भारत का CPI है।
  2. खाद्य सुरक्षा में समय के साथ स्थिरता भी एक आयाम है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: B। अंतरराष्ट्रीय सूचकांक और घरेलू CPI अलग हैं।

प्रश्न 5

  1. SOFIA मत्स्य और जलीय कृषि से संबंधित रिपोर्ट है।
  2. SOFI खाद्य सुरक्षा और पोषण से संबंधित है।

विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।

उत्तर: C। रिपोर्टों के संक्षिप्त नामों में अंतर याद रखें।

17. Mains अभ्यास और मॉडल उत्तर

उत्तर-लेखन अभ्यास

  1. 150 शब्द: खाद्य सुरक्षा के चार आयाम उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
  2. 250 शब्द: भारत में खाद्य उत्पादन की उपलब्धि को बेहतर पोषण परिणामों में कैसे बदला जा सकता है?
  3. 250 शब्द: सतत खाद्य प्रणाली के निर्माण में FAO की उपयोगिता और सीमाओं का मूल्यांकन कीजिए।

मॉडल उत्तर: भारत में खाद्य उत्पादन की उपलब्धि को बेहतर पोषण परिणामों में कैसे बदला जा सकता है?

खाद्य उत्पादन में वृद्धि भूख से निपटने का आवश्यक आधार है, लेकिन पोषण सुरक्षा के लिए भोजन की गुणवत्ता और परिवारों की पहुँच भी जरूरी है।

आय की कमी, असंतुलित आहार, असुरक्षित जल और बीमारी पोषण परिणामों को कमजोर कर सकते हैं।

इसलिए कृषि नीति को स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना चाहिए।

दालों, पोषक अनाज, फल और सब्जियों की उपलब्धता तथा वहनीयता बढ़ाना उपयोगी होगा।

भंडारण और शीत शृंखला खाद्य हानि घटा सकती हैं।

सार्वजनिक पोषण कार्यक्रमों में विविध आहार, स्थानीय परिस्थितियाँ और गुणवत्ता निगरानी शामिल होनी चाहिए।

FAO के आँकड़े और तकनीकी सहयोग नीति निर्माण में मदद कर सकते हैं, पर स्थानीय कार्यान्वयन की जिम्मेदारी घरेलू संस्थाओं की है।

सफलता का आकलन उत्पादन के साथ आहार विविधता और वास्तविक पोषण सुधार से होना चाहिए।

उत्तर सुधारने की जाँच-सूची

  • भूमिका में प्रश्न की केंद्रीय अवधारणा स्पष्ट करें।
  • तथ्य और अपना विश्लेषण अलग रखें; जहाँ लागू हो, उदाहरण दें।
  • लाभ, सीमाएँ और भारत के हितों को संतुलित ढंग से जोड़ें।
  • निष्कर्ष में व्यावहारिक सुधार तथा कार्यान्वयन की शर्तें बताएँ।

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