INTERNATIONAL ORGANIZATIONS
ILO: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का इतिहास, कार्य और भारत
UPSC Prelims एवं Mains | GS-II एवं GS-III | तथ्य, अवधारणाएँ और विश्लेषण
| पूरा नाम | International Labour Organization |
| स्थापना | 1919 |
| मुख्यालय | जिनेवा, स्विट्जरलैंड |
| पहचान | संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसी; त्रिपक्षीय संगठन |
1. ILO का परिचय
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का उद्देश्य काम की दुनिया में सामाजिक न्याय और गरिमा को बढ़ाना है। इसका अध्ययन केवल मजदूरी तक सीमित नहीं है। रोजगार के अवसर, काम की परिस्थितियाँ, श्रमिकों की आवाज और सामाजिक सुरक्षा भी इसके मूल विषय हैं। किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादन बढ़ना महत्वपूर्ण है, लेकिन उस उत्पादन में योगदान देने वाले लोगों का जीवन भी सुरक्षित और सम्मानजनक होना चाहिए।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- ILO सरकारों के साथ नियोक्ताओं और श्रमिकों के प्रतिनिधियों को भी निर्णय प्रक्रिया में स्थान देता है।
- यही त्रिपक्षीय व्यवस्था इसकी सबसे विशिष्ट पहचान है।
- इससे रोजगार संबंधी समस्याओं को कानून बनाने वाली सरकार, काम देने वाले उद्यम और काम करने वाले व्यक्ति—तीनों के दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिलता है।
2. स्थापना और ऐतिहासिक विकास
ILO की स्थापना 1919 में प्रथम विश्व युद्ध के बाद वर्साय संधि के अंतर्गत हुई। इसके पीछे यह विचार था कि स्थायी शांति के लिए सामाजिक न्याय जरूरी है। कठिन कामकाजी परिस्थितियाँ, असुरक्षा और असमानता केवल घरेलू समस्याएँ नहीं रहतीं; उनका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और सामाजिक स्थिरता पर भी पड़ता है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- 1944 की फिलाडेल्फिया घोषणा ने संगठन के उद्देश्यों को व्यापक आधार दिया।
- 1946 में ILO संयुक्त राष्ट्र की पहली विशेषीकृत एजेंसी बना।
- 1969 में इसे नोबेल शांति पुरस्कार मिला।
- परीक्षा में 1919 स्थापना का वर्ष है; 1946 UN प्रणाली से इसके विशेषीकृत संबंध का वर्ष है।
3. त्रिपक्षीय संरचना और प्रमुख अंग
International Labour Conference श्रम मानकों और नीतियों पर विचार करने का प्रमुख मंच है। राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल में सामान्यतः सरकार के दो, नियोक्ताओं का एक और श्रमिकों का एक प्रतिनिधि होता है। प्रतिनिधित्व का यह ढाँचा सरकारी दृष्टिकोण के साथ सामाजिक भागीदारों की स्वतंत्र भूमिका को पहचानता है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- Governing Body कार्यकारी दिशा और कार्यक्रम संबंधी निर्णयों में भूमिका निभाता है।
- International Labour Office स्थायी सचिवालय है, जो अनुसंधान, प्रशासन और तकनीकी सहयोग करता है।
- Conference, Governing Body और Office को एक ही अंग न समझें; इनके कार्य अलग हैं।
4. Decent Work का अर्थ
Decent Work का अर्थ ऐसा काम है जो आय के साथ अधिकार, सुरक्षा और सम्मान भी दे। इसके चार स्तंभ रोजगार सृजन, कार्यस्थल पर अधिकार, सामाजिक संरक्षण और सामाजिक संवाद हैं। लैंगिक समानता इन सभी क्षेत्रों से जुड़ी हुई है। SDG 8 में समावेशी आर्थिक वृद्धि, उत्पादक रोजगार और सभी के लिए गरिमापूर्ण काम का संबंध इसी विचार से है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति के पास नौकरी हो, लेकिन वेतन अनियमित हो, दुर्घटना पर सहायता न मिले और शिकायत उठाने का कोई माध्यम न हो, तो केवल नौकरी की संख्या से उसकी स्थिति नहीं समझी जा सकती।
- रोजगार की गुणवत्ता और सुरक्षा को साथ देखना आवश्यक है।
5. मूलभूत सिद्धांत और अधिकार
ILO की 1998 की घोषणा में 2022 में संशोधन हुआ। मूलभूत क्षेत्रों में संगठन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी की स्वतंत्रता, जबरन श्रम का उन्मूलन, बाल श्रम की समाप्ति, रोजगार में भेदभाव का उन्मूलन तथा सुरक्षित और स्वस्थ कामकाजी वातावरण शामिल हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- इन विषयों को याद करते समय केवल पुरानी चार श्रेणियों वाली सूची पर निर्भर न रहें।
- सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण के जुड़ने से सूची में पाँच मूलभूत क्षेत्र हैं।
- किसी विशेष Convention की पुष्टि और सदस्यता से जुड़ी मूलभूत प्रतिबद्धताओं में भी अंतर समझना जरूरी है।
6. Convention और Recommendation
Convention अंतरराष्ट्रीय श्रम मानक का संधि स्वरूप है। किसी देश द्वारा उसकी पुष्टि किए जाने पर संबंधित अंतरराष्ट्रीय दायित्व बनते हैं। Recommendation नीति और व्यवहार के लिए मार्गदर्शन देती है; उसका दर्जा पुष्टि योग्य Convention जैसा नहीं होता। किसी मानक को अपनाना और किसी देश द्वारा उसकी पुष्टि करना दो अलग चरण हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- इस अंतर को एक उदाहरण से समझें।
- अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सुरक्षित कार्यस्थल पर मानक बन सकता है।
- उसके बाद देशों को अपनी राष्ट्रीय प्रक्रिया, कानून और प्रशासनिक क्षमता के संदर्भ में उसे लागू करना पड़ता है।
- अंतरराष्ट्रीय घोषणा से हर कारखाने की परिस्थितियाँ अपने आप नहीं बदलतीं।
7. सामाजिक संवाद और सामाजिक सुरक्षा
सामाजिक संवाद में सरकार, नियोक्ता और श्रमिक जानकारी साझा करते हैं, परामर्श करते हैं और आवश्यकतानुसार समझौते खोजते हैं। इसका उद्देश्य वास्तविक समस्याओं की पहचान और स्वीकार्य समाधान है। प्रभावी संवाद के लिए प्रतिनिधित्व, भरोसा और सही जानकारी जरूरी हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- सामाजिक सुरक्षा बीमारी, मातृत्व, वृद्धावस्था, बेरोजगारी और कार्यस्थल दुर्घटना जैसे जोखिमों से जुड़ सकती है।
- असंगठित काम में लगे लोगों के लिए पहचान, पंजीकरण, योगदान क्षमता और सेवाओं तक पहुँच बड़ी चुनौतियाँ हैं।
- लाभ की घोषणा तथा जरूरत पड़ने पर लाभ वास्तव में मिलना अलग बातें हैं।
8. भारत से संबंध
भारत ILO का संस्थापक सदस्य है। सरकार, नियोक्ता संगठन और श्रमिक संगठन इसके साथ संबंधों में भूमिका निभाते हैं। भारत जैसे बड़े देश के लिए रोजगार सृजन के साथ असंगठित क्षेत्र, कौशल, महिलाओं की भागीदारी और सामाजिक सुरक्षा के प्रश्न विशेष महत्व रखते हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- अंतरराष्ट्रीय अनुभव नीति निर्माण में सहायक हो सकते हैं, लेकिन उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समझना पड़ता है।
- छोटे उद्यम, कृषि, शहरी सेवा क्षेत्र और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम की परिस्थितियाँ अलग हो सकती हैं।
- एक ही समाधान सभी श्रमिकों तक समान रूप से नहीं पहुँचता।
9. बदलती दुनिया में चुनौतियाँ
स्वचालन और डिजिटल तकनीक उत्पादकता बढ़ा सकते हैं, साथ ही कौशल की मांग बदल सकते हैं। श्रमिकों के पुनःप्रशिक्षण और परिवर्तन के दौरान आय की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। पर्यावरण के अनुकूल अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव में भी रोजगार और कौशल की नई जरूरतें पैदा होती हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- प्लेटफॉर्म आधारित काम में आय की अनिश्चितता, कार्य समय, पारदर्शिता और सामाजिक संरक्षण पर प्रश्न उठते हैं।
- इनका अध्ययन करते समय किसी सामान्य अंतरराष्ट्रीय चर्चा को भारत के लागू कानून का सीधा विकल्प नहीं मानना चाहिए।
10. परीक्षा के लिए पुनरावृत्ति
ILO = 1919 + जिनेवा + त्रिपक्षीय व्यवस्था। तीन पक्ष सरकार, नियोक्ता और श्रमिक हैं। 1944 फिलाडेल्फिया घोषणा, 1946 UN विशेषीकृत एजेंसी और 1969 नोबेल शांति पुरस्कार महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- अभ्यास: ILO की विशेष पहचान क्या है? उत्तर: त्रिपक्षीय प्रतिनिधित्व।
- Decent Work के चार स्तंभ क्या हैं? उत्तर: रोजगार, अधिकार, सामाजिक संरक्षण और सामाजिक संवाद।
- क्या Recommendation और Convention समान हैं? उत्तर: नहीं, उनकी कानूनी प्रकृति अलग है।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ें
11. UPSC अवधारणाएँ और विश्लेषण
पाठ्यक्रम: GS-II: श्रम अधिकार और संस्थाएँ; GS-III: रोजगार, औपचारिकीकरण एवं सामाजिक सुरक्षा।
काम की संख्या से काम की गुणवत्ता तक
- Decent Work: रोजगार, काम पर अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक संवाद—चार परस्पर जुड़े स्तंभ।
- Tripartism: सरकार, नियोक्ता और श्रमिक प्रतिनिधियों की भागीदारी। International Labour Conference में प्रत्येक सदस्य का प्रतिनिधिमंडल सामान्यतः दो सरकारी, एक नियोक्ता और एक श्रमिक प्रतिनिधि रखता है।
- Convention बनाम Recommendation: Convention के अनुसमर्थन से संबंधित दायित्व उत्पन्न होते हैं; Recommendation मार्गदर्शन देती है। किसी मानक के पारित होने को भारत का स्वतः अनुसमर्थन न मानें।
- 2022 का परिवर्तन: सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण को fundamental principles and rights at work में जोड़ा गया; अब पाँच प्रमुख क्षेत्र हैं।
12. भारत के हित, चुनौतियाँ और आगे की राह
नीचे दिए गए मूल्यांकन-बिंदु Mains के लिए विश्लेषण हैं; आधिकारिक तथ्य जहाँ आवश्यक हैं, स्रोत के साथ दिए गए हैं।
भारत में उपयोग
- अनौपचारिक श्रम: आय की अनिश्चितता, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा की कमी; केवल पंजीकरण से सभी समस्याएँ समाप्त नहीं होतीं।
- Platform work: लचीले अवसरों के साथ आय, एल्गोरिद्मिक नियंत्रण, शिकायत और सामाजिक सुरक्षा के प्रश्न।
- महिला श्रम भागीदारी: सुरक्षित परिवहन, देखभाल सेवाएँ, कौशल और भेदभाव रोकना श्रम नीति से जुड़ा है।
- न्यायसंगत संक्रमण: हरित अर्थव्यवस्था में बदलते काम के लिए पुनःकौशल और प्रभावित श्रमिकों का सहयोग।
- सुधार: प्रभावी सामाजिक संवाद, सुरक्षा की पोर्टेबिलिटी, निरीक्षण क्षमता और छोटे उद्यमों के लिए अनुपालन सहयोग।
13. Prelims अभ्यास: 5 कथन आधारित प्रश्न
ये मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं; UPSC के वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं हैं।
प्रश्न 1
- ILO की स्थापना 1919 में हुई।
- यह 1946 में UN की विशिष्ट एजेंसी बना।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: C। स्थापना और UN संबंध के वर्ष अलग हैं।
प्रश्न 2
- ILO की संरचना त्रिपक्षीय है।
- श्रमिक और नियोक्ता प्रतिनिधि इसमें भाग लेते हैं।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: C। सरकार तीसरा पक्ष है।
प्रश्न 3
- ILO Recommendation और ratified Convention समान कानूनी प्रकृति रखते हैं।
- किसी Convention का पारित होना सभी देशों का स्वतः अनुसमर्थन है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: D। दोनों प्रक्रियाएँ और मानकों की प्रकृति अलग हैं।
प्रश्न 4
- सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण 2022 में मौलिक सिद्धांतों में जोड़ा गया।
- Decent Work में सामाजिक संवाद भी शामिल है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: C। दोनों तथ्य सही हैं।
प्रश्न 5
- ILO का मुख्यालय जिनेवा में है।
- रोजगार की गुणवत्ता केवल रोजगार की संख्या से पूरी तरह मापी जा सकती है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। आय, सुरक्षा, अधिकार और गरिमा भी महत्त्वपूर्ण हैं।
14. Mains अभ्यास और मॉडल उत्तर
उत्तर-लेखन अभ्यास
- 150 शब्द: ILO की त्रिपक्षीय संरचना का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।
- 250 शब्द: भारत में रोजगार वृद्धि को Decent Work में बदलने की चुनौतियाँ और उपाय बताइए।
- 250 शब्द: Platform economy में सामाजिक सुरक्षा का विस्तार कैसे किया जा सकता है?
मॉडल उत्तर: भारत में रोजगार वृद्धि को Decent Work में बदलने की चुनौतियाँ और उपाय बताइए।
रोजगार वृद्धि तभी समावेशी विकास में बदलती है जब काम सुरक्षित, गरिमापूर्ण और पर्याप्त आय वाला हो।
ILO का Decent Work दृष्टिकोण रोजगार के साथ अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक संवाद को जोड़ता है।
भारत में अनौपचारिकता, कौशल अंतर और कमजोर सुरक्षा कवरेज प्रमुख बाधाएँ हैं।
Platform work ने अवसर बढ़ाए हैं, लेकिन आय अनिश्चितता और जवाबदेही के नए प्रश्न पैदा किए हैं।
नीति को रोजगार सृजन के साथ सुरक्षा की पोर्टेबिलिटी, कौशल और प्रभावी शिकायत निवारण पर बल देना चाहिए।
महिलाओं के लिए देखभाल सेवाएँ और सुरक्षित कार्य परिवेश आवश्यक हैं।
छोटे उद्यमों को अनुपालन में सहयोग तथा श्रमिकों को अधिकारों की जानकारी दी जानी चाहिए।
सरकार, नियोक्ता और श्रमिकों का संवाद आर्थिक दक्षता और सामाजिक न्याय के बीच व्यावहारिक संतुलन स्थापित कर सकता है।
उत्तर सुधारने की जाँच-सूची
- भूमिका में प्रश्न की केंद्रीय अवधारणा स्पष्ट करें।
- तथ्य और अपना विश्लेषण अलग रखें; जहाँ लागू हो, उदाहरण दें।
- लाभ, सीमाएँ और भारत के हितों को संतुलित ढंग से जोड़ें।
- निष्कर्ष में व्यावहारिक सुधार तथा कार्यान्वयन की शर्तें बताएँ।
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