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WFP: विश्व खाद्य कार्यक्रम का इतिहास, कार्य और भारत
UPSC Prelims एवं Mains | GS-II एवं GS-III | तथ्य, अवधारणाएँ और विश्लेषण
| पूरा नाम | World Food Programme |
| स्थापना | 1961 |
| मुख्यालय | रोम, इटली |
| नोबेल शांति पुरस्कार | 2020 |
1. WFP का परिचय
विश्व खाद्य कार्यक्रम भूख और खाद्य असुरक्षा से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुँचाने वाली संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख मानवीय संस्था है। यह युद्ध, आपदा तथा अन्य संकटों में जीवन बचाने के साथ समुदायों की दीर्घकालीन क्षमता मजबूत करने पर भी काम करता है। भोजन की कमी केवल उत्पादन से नहीं, बाजार टूटने, आय घटने या लोगों के विस्थापन से भी उत्पन्न हो सकती है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- WFP को कृषि नीति और मानक बनाने वाली FAO से अलग समझें।
- FAO तकनीकी ज्ञान और कृषि-खाद्य प्रणाली पर व्यापक काम करती है, जबकि WFP की विशिष्ट पहचान खाद्य सहायता और संकट के दौरान संचालन से जुड़ी है।
2. स्थापना और प्रमुख पड़ाव
WFP की स्थापना 1961 में संयुक्त राष्ट्र और FAO की पहल से हुई। 1963 में सूडान में इसका पहला विकास कार्यक्रम शुरू हुआ। संस्था का मुख्यालय रोम में है। राहत की प्रारंभिक भूमिका समय के साथ पोषण, स्कूल भोजन और राष्ट्रीय व्यवस्थाओं के सहयोग तक विस्तृत हुई।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- 2020 में WFP को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया।
- पुरस्कार ने भूख से संघर्ष, शांति की परिस्थितियों को बेहतर बनाने और युद्ध में भूख को हथियार बनाने के विरुद्ध इसके योगदान को मान्यता दी।
- स्थापना वर्ष 1961 और पुरस्कार वर्ष 2020 परीक्षा के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।
3. खाद्य सहायता कैसे दी जाती है
सहायता भोजन के प्रत्यक्ष वितरण, नकद या वाउचर जैसे रूपों में दी जा सकती है। सही तरीका स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। यदि बाजार में भोजन मौजूद है लेकिन लोगों के पास खरीदने की क्षमता नहीं है, तो नकद सहायता उपयोगी हो सकती है। यदि आपूर्ति ही बाधित है, तो प्रत्यक्ष खाद्य आपूर्ति जरूरी हो सकती है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- यह चुनाव कीमतों, सुरक्षा, परिवहन, लाभार्थियों की जरूरत और बाजार की स्थिति देखकर करना पड़ता है।
- सभी आपदाओं में एक ही प्रकार की सहायता प्रभावी नहीं होगी।
- सहायता का लक्ष्य लोगों तक पर्याप्त और उपयुक्त भोजन समय पर पहुँचाना है।
4. लॉजिस्टिक्स और आपदा प्रतिक्रिया
भोजन उपलब्ध होने के बाद भी अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना कठिन हो सकता है। क्षतिग्रस्त सड़कें, बंद बंदरगाह, असुरक्षित रास्ते और भंडारण की कमी राहत को रोक सकते हैं। WFP की आपूर्ति श्रृंखला और मानवीय लॉजिस्टिक्स में भूमिका इसी कारण महत्वपूर्ण है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- मान लें किसी बाढ़ प्रभावित गाँव में परिवार अलग-थलग पड़ गए हैं।
- केवल अनाज खरीदना पर्याप्त नहीं होगा; सुरक्षित परिवहन, वितरण स्थल, साफ पानी और पकाने की सुविधा भी देखनी होगी।
- राहत के मूल्यांकन में भेजे गए सामान तथा वास्तव में मिली सहायता में अंतर करना चाहिए।
5. पोषण, स्कूल भोजन और आजीविका
भूख और कुपोषण जुड़े हुए हैं, लेकिन समान नहीं। पर्याप्त कैलोरी के बावजूद जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य कमजोर समूहों की जरूरतें अलग हो सकती हैं। पोषण संबंधी सहायता को स्थानीय भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना उपयोगी है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- स्कूल भोजन बच्चों की नियमित उपस्थिति और सीखने की परिस्थितियों को बेहतर बनाने में योगदान कर सकता है।
- स्थानीय खरीद किसानों के लिए बाजार का अवसर दे सकती है।
- कार्यक्रम की सफलता भोजन की गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति और वास्तविक पहुँच से तय होती है।
6. भारत में सहयोग
WFP भारत में 1963 से कार्य कर रहा है। भारत के अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के बाद इसकी भूमिका प्रत्यक्ष वितरण से अधिक तकनीकी सहायता की ओर बदली। राष्ट्रीय और राज्य स्तर की खाद्य सुरक्षा तथा पोषण व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने में सहयोग इसका महत्वपूर्ण पक्ष है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- भारत जैसे बड़े देश में सरकारी योजनाओं का विस्तार बहुत बड़ा है।
- तकनीकी सहयोग का उद्देश्य उन व्यवस्थाओं में सुधार करना है जिनसे लोग भोजन प्राप्त करते हैं।
- इससे WFP और भारतीय सरकारी कार्यक्रमों की भूमिकाओं को अलग पहचानना आसान होता है।
7. चुनौतियाँ और पुनरावृत्ति
लंबे संघर्ष, जलवायु घटनाएँ, महँगाई और वित्त की कमी खाद्य सहायता को कठिन बनाते हैं। तत्काल राहत के साथ भविष्य की आय और उत्पादन क्षमता मजबूत करना जरूरी है। समुदाय बार-बार सहायता पर निर्भर न रहे, इसके लिए स्थानीय संस्थाओं और आजीविका पर भी काम करना पड़ता है।
व्याख्या एवं परीक्षा उपयोग
- परीक्षा सूत्र: WFP—1961—रोम—2020 नोबेल शांति पुरस्कार।
- भारत में कार्य 1963 से।
- FAO, WFP और IFAD तीन अलग रोम स्थित संस्थाएँ हैं।
- नकद सहायता और खाद्य वितरण में चुनाव का आधार स्थानीय जरूरत तथा बाजार की वास्तविक स्थिति है।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ें
8. UPSC अवधारणाएँ और विश्लेषण
पाठ्यक्रम: GS-II: भूख, मानवीय सहायता एवं सामाजिक क्षेत्र; GS-III: खाद्य वितरण और आपदा प्रबंधन।
संकट में खाद्य सहायता कैसे चुनें?
- वस्तु सहायता: बाजार में भोजन उपलब्ध न हो या आपूर्ति टूट गई हो तो खाद्य वस्तुओं का वितरण आवश्यक हो सकता है।
- नकद अथवा वाउचर: बाजार कार्य कर रहा हो तो लोगों को विकल्प और स्थानीय अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल सकता है; कीमतों तथा पहुँच की निगरानी जरूरी है।
- पोषण संवेदनशील सहायता: केवल कैलोरी नहीं; आयु, गर्भावस्था और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जरूरतें अलग होती हैं।
- FAO से अंतर: FAO कृषि और खाद्य प्रणालियों के ज्ञान तथा तकनीकी सहयोग पर बल देता है; WFP मानवीय खाद्य सहायता और परिचालन क्षमता में प्रमुख भूमिका निभाता है।
9. भारत के हित, चुनौतियाँ और आगे की राह
नीचे दिए गए मूल्यांकन-बिंदु Mains के लिए विश्लेषण हैं; आधिकारिक तथ्य जहाँ आवश्यक हैं, स्रोत के साथ दिए गए हैं।
आपात राहत और दीर्घकालीन क्षमता
- संघर्ष और भूख: हिंसा उत्पादन, बाजार, परिवहन और आय को एक साथ प्रभावित कर सकती है; राहत पहुँच के लिए मानवीय सुरक्षा आवश्यक है।
- भारत में भूमिका: WFP का कार्य अब प्रमुखतः राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्रणालियों में तकनीकी सहयोग एवं क्षमता सुधार से जुड़ा है; इसे देशव्यापी प्रत्यक्ष राशन वितरण का संचालक न लिखें।
- वितरण गुणवत्ता: लाभार्थी पहचान, अंतिम छोर तक पहुँच, पोषण गुणवत्ता और शिकायत निवारण को साथ मापें।
- चुनौतियाँ: अस्थिर वित्त, मानवीय पहुँच में बाधा, परिवहन लागत और लंबे संकटों में निर्भरता का जोखिम।
- आगे की राह: स्थानीय खरीद जहाँ उपयुक्त हो, पहले से तैयारी, पोषण केंद्रित सहायता और राष्ट्रीय संस्थाओं की क्षमता।
स्रोत: WFP India।
10. Prelims अभ्यास: 5 कथन आधारित प्रश्न
ये मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं; UPSC के वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं हैं।
प्रश्न 1
- WFP का मुख्यालय रोम में है।
- WFP को 2020 का Nobel Peace Prize मिला।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: C। दोनों तथ्य सही हैं।
प्रश्न 2
- बाजार ठप होने पर नकद सहायता हमेशा पर्याप्त है।
- सहायता का प्रकार स्थानीय बाजार स्थिति पर निर्भर होना चाहिए।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: B। भोजन उपलब्ध न होने पर वस्तु सहायता आवश्यक हो सकती है।
प्रश्न 3
- WFP और FAO समान संस्था हैं।
- WFP मानवीय खाद्य सहायता में भूमिका निभाता है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: B। दोनों अलग लेकिन सहयोगी संस्थाएँ हैं।
प्रश्न 4
- भारत में WFP का कार्य तकनीकी सहयोग से भी जुड़ा है।
- पोषण परिणाम केवल वितरित अनाज के वजन से पूरी तरह मापे जा सकते हैं।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। आहार की गुणवत्ता, उपयोग और पहुँच भी जरूरी हैं।
प्रश्न 5
- संघर्ष खाद्य आपूर्ति और आय दोनों प्रभावित कर सकता है।
- मानवीय सहायता में सुरक्षित पहुँच का कोई महत्त्व नहीं है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। सुरक्षित पहुँच प्रभावी राहत की शर्त है।
11. Mains अभ्यास और मॉडल उत्तर
उत्तर-लेखन अभ्यास
- 150 शब्द: नकद और वस्तु आधारित खाद्य सहायता के चयन के आधार बताइए।
- 250 शब्द: आपात खाद्य राहत को दीर्घकालीन पोषण सुरक्षा से कैसे जोड़ा जा सकता है?
- 250 शब्द: WFP की मानवीय भूमिका और परिचालन चुनौतियों का मूल्यांकन कीजिए।
मॉडल उत्तर: आपात खाद्य राहत को दीर्घकालीन पोषण सुरक्षा से कैसे जोड़ा जा सकता है?
आपात खाद्य राहत जीवन बचाती है, लेकिन लंबे समय की पोषण सुरक्षा के लिए घरेलू खाद्य प्रणालियों को मजबूत करना आवश्यक है।
सहायता का प्रकार बाजार की स्थिति, भोजन की उपलब्धता और लोगों की जरूरतों के अनुसार चुना जाना चाहिए।
कार्यशील बाजारों में नकद या वाउचर उपयोगी हो सकते हैं, जबकि आपूर्ति टूटने पर वस्तु सहायता जरूरी हो सकती है।
बच्चों और अन्य कमजोर समूहों के लिए पोषण गुणवत्ता विशेष महत्त्व रखती है।
स्थानीय क्षमता, भंडारण, पूर्व चेतावनी और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करके संकट के प्रभाव घटाए जा सकते हैं।
WFP की परिचालन विशेषज्ञता राष्ट्रीय संस्थाओं का सहयोग कर सकती है।
पारदर्शी वितरण और शिकायत निवारण से भरोसा बढ़ता है।
राहत को आजीविका, स्वास्थ्य और टिकाऊ खाद्य पहुँच से जोड़ना सहायता पर लंबे समय की निर्भरता घटाने का मार्ग है।
उत्तर सुधारने की जाँच-सूची
- भूमिका में प्रश्न की केंद्रीय अवधारणा स्पष्ट करें।
- तथ्य और अपना विश्लेषण अलग रखें; जहाँ लागू हो, उदाहरण दें।
- लाभ, सीमाएँ और भारत के हितों को संतुलित ढंग से जोड़ें।
- निष्कर्ष में व्यावहारिक सुधार तथा कार्यान्वयन की शर्तें बताएँ।
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