प्रमुख वाद्ययंत्र एवं वादक - 200 MCQs (Static GK Practice Questions)

भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रमुख वाद्ययंत्रों (जैसे सितार, सरोद, सारंगी, संतूर, वीणा, बांसुरी, शहनाई, तबला, पखावज, मृदंगम, घटम आदि) एवं उनके सुप्रसिद्ध वादकों पर आधारित 200 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या सहित यहाँ दिए गए हैं। ये प्रश्न UPSC, SSC, रेलवे, राज्य PSC सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। प्रत्येक प्रश्न के नीचे 'SHOW ANSWER' बटन पर क्लिक करके सही उत्तर एवं व्याख्या देखें।

1निम्नलिखित में से किस भारतीय शास्त्रीय संगीतकार को 'सरोद सम्राट' के नाम से जाना जाता है और जिन्होंने सरोद में 'तार' और 'पर्दे' (frets) की जगह धातु की सपाट प्लेट (chrome-plated brass/steel fingerboard) का उपयोग करके इसके वादन को एक नई दिशा दी?
A.उस्ताद अमजद अली खान
B.उस्ताद अलाउद्दीन खान
C.उस्ताद अली अकबर खान
D.उस्ताद हाफिज अली खान

उत्तर (Ans): C. उस्ताद अली अकबर खान

व्याख्या (Explanation): उस्ताद अली अकबर खान (1922-2009) को भारतीय शास्त्रीय संगीत में 'सरोद सम्राट' कहा जाता है। उन्होंने सरोद वाद्ययंत्र की संरचना में सुधार किया और इसके फिंगरबोर्ड पर धातु की प्लेट का उपयोग लोकप्रिय बनाया, जिससे 'मींड' (स्लाइडिंग स्वर) बजाना अधिक सुगम हो गया। वे मैहर घराने के संस्थापक आचार्य बाबा अलाउद्दीन खान के पुत्र और शिष्य थे। उन्हें 1989 में पद्म विभूषण और अमेरिका का प्रतिष्ठित 'मैकआर्थर जीनियस ग्रांट' (यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय) मिला था।

2प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित पन्नालाल घोष, जिन्हें बांसुरी को लोक संगीत से शास्त्रीय संगीत के मंच पर लाने का श्रेय दिया जाता है, किस घराने के शिष्य थे और उनके बचपन का नाम क्या था?
A.मैहर घराना, अमल ज्योति घोष
B.बनारस घराना, हरिप्रसाद घोष
C.इटावा घराना, सुधीर घोष
D.किराना घराना, देवेन्द्र घोष

उत्तर (Ans): A. मैहर घराना, अमल ज्योति घोष

व्याख्या (Explanation): पंडित पन्नालाल घोष का जन्म वर्तमान बांग्लादेश के बारीसाल में हुआ था और उनके बचपन का नाम 'अमल ज्योति घोष' था। वे मैहर घराने के महान उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खान के शिष्य बने। उन्होंने ही पहली बार शास्त्रीय संगीत के मंद्र सप्तक (गहरे सुरों) को बजाने के लिए पारंपरिक छोटी बांसुरी की जगह 32 इंच लंबी बांसुरी का आविष्कार किया, जिसमें सातवां सुर छेद (7th hole) भी शामिल था ताकि तीव्र मध्यम और पंचम को आसानी से बजाया जा सके।

3'विलायतखानी बाज' या 'इमदादखानी घराना' मुख्य रूप से किस वाद्ययंत्र के वादन की विशिष्ट शैली के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें 'गायन अंग' (Vocal Style) की नकल करने की अद्भुत कला शामिल है?
A.सरोद
B.सितार
C.सारंगी
D.वीणा

उत्तर (Ans): B. सितार

व्याख्या (Explanation): इमदादखानी घराना (जिसे इटावा घराना भी कहा जाता है) सितार और सुरबहार वादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस घराने का नाम उस्ताद इमदाद खान के नाम पर पड़ा। इस घराने की सबसे बड़ी विशेषता 'गायन अंग' (Vocal style) शैली है, जिसे उस्ताद विलायत खान ने चरम पर पहुँचाया। उन्होंने सितार के तारों और उसकी बनावट में बदलाव किया ताकि सितार के माध्यम से मानव कंठ की बारीकियों (जैसे खटका, मुर्की, मींड) को पूरी तरह से हूबहू निकाला जा सके।

4तबले के किस घराने को 'पूरब बाज' (Eastern Style) के नाम से जाना जाता है, जिसमें खुले हाथों के बोल और पखावज के जोरदार थापों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है?
A.दिल्ली घराना
B.बनारस घराना
C.पंजाब घराना
D.लखनऊ घराना

उत्तर (Ans): D. लखनऊ घराना

व्याख्या (Explanation): तबला वादन में 'लखनऊ घराने' को 'पूरब बाज' का उद्गम माना जाता है। इस घराने की स्थापना उस्ताद मोदू खान और बख्शू खान ने की थी, जिन्होंने दिल्ली घराने के बंद बोलों की जगह लखनऊ के कथक नर्तकों के साथ संगत करते हुए खुले और जोरदार बोलों का विकास किया। इस घराने पर पखावज का बहुत गहरा प्रभाव है, क्योंकि अवध के नवाबों के दरबार में कथक और पखावज का बोलबाला था। बनारस और फर्रुखाबाद घराने भी इसी पूरब बाज के अंतर्गत आते हैं।

5कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के 'वायलिन त्रिमूर्ति' में से एक, लालगुडी जयरामन ने वायलिन वादन की जिस विशिष्ट शैली का विकास किया, उसे किस नाम से जाना जाता है?
A.लालगुडी बानी
B.तंजौर बानी
C.मैसूर बानी
D.मद्रास बानी

उत्तर (Ans): A. लालगुडी बानी

व्याख्या (Explanation): लालगुडी जयरामन (1930-2013) कर्नाटक संगीत के सबसे महान वायलिन वादकों और संगीतकारों में से एक थे। उन्होंने वायलिन बजाने की एक नई और अनूठी शैली विकसित की जिसे 'लालगुडी बानी' (Lalgudi Bani) कहा जाता है। इस शैली की विशेषता यह है कि वायलिन के सुर मानव कंठ के इतने करीब होते हैं कि सुनने वाले को ऐसा लगता है जैसे वाद्ययंत्र गा रहा हो। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

6'विचित्र वीणा' वाद्ययंत्र के उस महान प्रतिपादक का नाम बताइए जिन्होंने इस दुर्लभ वाद्य को शास्त्रीय मंच पर पुनर्जीवित किया और जो अपने ध्रुपद गायन के लिए भी जाने जाते थे?
A.उस्ताद असद अली खान
B.पंडित गोपाल कृष्ण शर्मा
C.उस्ताद बहाउद्दीन डागर
D.लालमणि मिश्र

उत्तर (Ans): B. पंडित गोपाल कृष्ण शर्मा

व्याख्या (Explanation): पंडित गोपाल कृष्ण शर्मा 'विचित्र वीणा' के सबसे महान वादकों में से एक थे। विचित्र वीणा एक बेहद प्राचीन और कठिन वाद्ययंत्र है जिसमें कोई पर्दा (fret) नहीं होता और इसे कांच की एक गोल गेंद (slide) को तारों पर खिसकाकर बजाया जाता है। उन्होंने इस वाद्य को शास्त्रीय मंचों पर एक नया जीवन दिया। उनके अलावा डॉ. लालमणि मिश्र ने भी विचित्र वीणा के पुनरुद्धार में ऐतिहासिक योगदान दिया था।

7भारत के एकमात्र प्रसिद्ध 'जलतरंग' वादकों में से एक, मिलिंद तुलनकर, किस वादन तकनीक का प्रयोग करते हैं जिसके द्वारा चीनी-मिट्टी के कटोरों में पानी भरकर मधुर तरंगें उत्पन्न की जाती हैं?
A.आघात तरंग तकनीक
B.कंपन गति तकनीक
C.जल आघात तरंग तकनीक
D.घर्षण तरंग तकनीक

उत्तर (Ans): A. आघात तरंग तकनीक

व्याख्या (Explanation): जलतरंग भारत का एक अत्यंत प्राचीन और दुर्लभ वाद्य यंत्र है। इसमें चीनी-मिट्टी (porcelain) के विभिन्न आकार के कटोरों में पानी की अलग-अलग मात्रा भरी जाती है, जिससे प्रत्येक कटोरे से एक विशिष्ट स्वर (Pitch) उत्पन्न होता है। कलाकार मिलिंद तुलनकर लकड़ी की दो पतली डंडियों (mallets) से इन कटोरों के किनारों पर कोमल आघात (striking) करके ध्वनि उत्पन्न करते हैं, जिसे 'आघात तरंग' या स्ट्राइकिंग तकनीक कहा जाता है। पानी की मात्रा जितनी अधिक होगी, स्वर उतना ही मंद्र (कम फ्रीक्वेंसी वाला) होगा।

8'सरोद' वाद्ययंत्र का उद्गम मूल रूप से किस देश के 'रबाब' नामक वाद्ययंत्र से माना जाता है, जिसे भारत लाकर शास्त्रीय रूप में ढाला गया?
A.ईरान
B.तुर्की
C.अफगानिस्तान
D.उज्बेकिस्तान

उत्तर (Ans): C. अफगानिस्तान

व्याख्या (Explanation): सरोद का विकास मूल रूप से अफ़ग़ानिस्तान के लोक वाद्य 'रबाब' (Rabab) से हुआ है। 18वीं-19वीं शताब्दी में भारत आए अफ़गान सैनिकों और संगीतकारों (विशेष रूप से उस्ताद अमजद अली खान के पूर्वजों, जैसे गुलाम बंदगी खान बंगश) ने रबाब में महत्वपूर्ण बदलाव किए। उन्होंने लकड़ी के फिंगरबोर्ड की जगह स्टील/क्रोम की प्लेट लगाई, तारों की संख्या बढ़ाई और इस तरह रबाब 'सरोद' के रूप में विकसित हुआ, जिसका अर्थ फारसी में 'मधुर संगीत' होता है।

9निम्नलिखित में से कौन सी महिला कलाकार 'रुद्र वीणा' वाद्ययंत्र बजाने वाली भारत की पहली और सबसे प्रसिद्ध महिला प्रतिपादक हैं, जो डागर घराने से ताल्लुक रखती हैं?
A.ज्योति हेगड़े
B.सुकन्या रामगोपाल
C.एन. राजम
D.शरण रानी

उत्तर (Ans): A. ज्योति हेगड़े

व्याख्या (Explanation): ज्योति हेगड़े 'रुद्र वीणा' वाद्ययंत्र बजाने वाली विश्व की पहली महिला कलाकार हैं। रुद्र वीणा को पारंपरिक रूप से केवल पुरुषों द्वारा बजाया जाता था और इसे सीखना अत्यंत कठिन माना जाता था। ज्योति हेगड़े ने प्रसिद्ध डागर घराने के उस्ताद बहाउद्दीन डागर और उस्ताद असद अली खान से दीक्षा ली और इस प्राचीन वाद्ययंत्र को बजाकर इतिहास रचा।

10तबले के 'दिल्ली घराने' के संस्थापक किसे माना जाता है और इस घराने की वादन शैली की सबसे मुख्य विशेषता क्या है?
A.उस्ताद सिद्धार खान ढाढ़ी, दो उंगलियों का काम
B.पंडित राम सहाय, खुले हाथ का थाप
C.उस्ताद हाजी विलायत अली खान, गूंजदार बोल
D.उस्ताद मसीत खान, चार उंगलियों का बाज

उत्तर (Ans): A. उस्ताद सिद्धार खान ढाढ़ी, दो उंगलियों का काम

व्याख्या (Explanation): तबले के सबसे प्राचीन घराने 'दिल्ली घराने' की स्थापना 18वीं शताब्दी की शुरुआत में 'उस्ताद सिद्धार खान ढाढ़ी' ने की थी। इस घराने की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल 'दो उंगलियों' (तर्जनी और मध्यमा) का मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है और बोलों को बहुत कोमल, स्पष्ट और बंद तरीके से बजाया जाता है। इसे 'किनार का बाज' भी कहा जाता है क्योंकि इसमें दाहिने तबले की 'चांटी' (किनारे) पर अधिक जोर दिया जाता है।

11विश्व प्रसिद्ध घटम वादक टी. एच. विनायकराम ('विकू') को किस वर्ष भारत सरकार द्वारा 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया था और वे किस अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन बैंड के सह-संस्थापक रहे हैं?
A.2012, 'शक्ति' (Shakti)
B.2014, 'प्लैनेट ड्रम' (Planet Drum)
C.2010, 'रिफ्लेक्शंस' (Reflections)
D.2016, 'ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट' (Global Drum Project)

उत्तर (Ans): A. 2012, 'शक्ति' (Shakti)

व्याख्या (Explanation): टी. एच. विनायकराम (विकू विनायकराम) को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2012 में 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया था (इससे पहले 2002 में पद्म श्री)। वे 1970 के दशक में ब्रिटिश गिटार वादक जॉन मैकलॉघलिन, प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन और एल. शंकर के साथ मिलकर बनाए गए प्रसिद्ध इंडो-जैज़ फ्यूजन बैंड 'शक्ति' (Shakti) के सह-संस्थापक सदस्य रहे हैं। उनके घटम वादन ने इस मिट्टी के घड़े को वैश्विक मंच पर अत्यंत लोकप्रिय बना दिया।

12'सारंगी' वाद्ययंत्र का नाम 'सौ-रंग' (सौ रंगों वाला) से प्रेरित माना जाता है। इस वाद्ययंत्र में मुख्य रूप से कितने मुख्य तार (gut strings) और कितने सहायक/तरब के तार (sympathetic strings) होते हैं?
A.3 मुख्य तार, 35 से 40 तरब के तार
B.4 मुख्य तार, 10 से 15 तरब के तार
C.2 मुख्य तार, 20 तरब के तार
D.5 मुख्य तार, 50 तरब के तार

उत्तर (Ans): A. 3 मुख्य तार, 35 से 40 तरब के तार

व्याख्या (Explanation): सारंगी शास्त्रीय संगीत का सबसे संवेदनशील और कठिन वाद्ययंत्र माना जाता है। इसमें मुख्य रूप से बकरे की आंत से बने 3 मुख्य तार (Gut strings) होते हैं, जिन पर धनुष (bow) चलाया जाता है। इसके नीचे लगभग 35 से 40 स्टील के पतले सहायक या 'तरब के तार' (sympathetic strings) होते हैं, जो मुख्य सुर के बजने पर खुद-ब-खुद गूंज उठते हैं और राग को एक अलौकिक गहराई प्रदान करते हैं। इसके वादन में तारों को उंगलियों के पोरों से नहीं बल्कि नाखूनों की जड़ से दबाया जाता है।

13गिटार को शास्त्रीय संगीत के अनुकूल बनाने के लिए उसमें अतिरिक्त तार जोड़कर 'मोहन वीणा' का आविष्कार करने वाले पंडित विश्व मोहन भट्ट किस घराने से संबंधित हैं?
A.सेनिया घराना
B.मैहर घराना
C.आगरा घराना
D.ग्वालियर घराना

उत्तर (Ans): B. मैहर घराना

व्याख्या (Explanation): पंडित विश्व मोहन भट्ट ने पश्चिमी हवाईयन गिटार में क्रांतिकारी बदलाव करके उसमें 14 अतिरिक्त तार (तरब और चिकारी के तार) जोड़े और उसे 'मोहन वीणा' नाम दिया। वे प्रसिद्ध 'मैहर घराने' से संबंध रखते हैं और उन्होंने सितार सम्राट पंडित रविशंकर से शिक्षा प्राप्त की थी। उन्हें वर्ष 1994 में उनके प्रसिद्ध एल्बम 'A Meeting by the River' (विली कोलमैन के साथ) के लिए विश्व का सबसे प्रतिष्ठित 'ग्रैमी पुरस्कार' (Grammy Award) मिला था।

14कर्नाटक संगीत में प्रयुक्त होने वाला 'मृदंगम' वाद्ययंत्र लकड़ी के किस खोखले तने से बनाया जाता है, जिसे इसकी विशिष्ट गूंज के लिए सर्वोत्तम माना जाता है?
A.कटहल की लकड़ी (Jackwood)
B.शीशम की लकड़ी (Rosewood)
C.सागौन की लकड़ी (Teakwood)
D.चंदन की लकड़ी (Sandalwood)

उत्तर (Ans): A. कटहल की लकड़ी (Jackwood)

व्याख्या (Explanation): कर्नाटक संगीत का मुख्य अवनद्ध वाद्य (percussion instrument) 'मृदंगम' मुख्य रूप से कटहल के पेड़ की लकड़ी (Jackwood) के एक ही खोखले टुकड़े से बनाया जाता है। कटहल की लकड़ी में नमी सोखने और ध्वनि को बहुत ही गहरी और मधुर गूंज (resonance) देने की विशेष क्षमता होती है। इसके दोनों मुख बकरे की खाल से मढ़े होते हैं और दाहिने मुख पर काले रंग का मसाला (श्याही या करणी) लगाया जाता है जो लोहे के बुरादे और पके चावल के लेप से बनता है।

15प्रसिद्ध 'पखावज' वादक पंडित कुदऊ सिंह महाराज किस राजा के दरबारी संगीतकार थे, जिन्होंने कुदऊ सिंह की कला से खुश होकर उन्हें 'मृदंगराज' की उपाधि दी थी?
A.जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह
B.नवाब वाजिद अली शाह (अवध)
C.ग्वालियर के महाराजा जीवाजीराव सिंधिया
D.जूनागढ़ के नवाब

उत्तर (Ans): B. नवाब वाजिद अली शाह (अवध)

व्याख्या (Explanation): पंडित कुदऊ सिंह (1815-1910) भारत के इतिहास में सबसे महान पखावज (मृदंग) वादक माने जाते हैं। वे अवध के आखिरी नवाब 'वाजिद अली शाह' के दरबार के मुख्य संगीतकार थे। नवाब उनकी अद्भुत थाप और लयकारी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कुदऊ सिंह को 'मृदंगराज' (मृदंग का राजा) की सर्वोच्च उपाधि से नवाजा था। उन्होंने पखावज वादन के क्षेत्र में 'कुदऊ सिंह घराने' की नींव रखी।

16पद्म विभूषण से सम्मानित उस्ताद शकूर खान और उस्ताद साबरी खान का संबंध मुख्य रूप से किस वाद्ययंत्र से है और वे किस प्रसिद्ध घराने से ताल्लुक रखते थे?
A.सारंगी, किराना घराना
B.वीणा, डागर घराना
C.शहनाई, बनारस घराना
D.सरोद, ग्वालियर घराना

उत्तर (Ans): A. सारंगी, किराना घराना

व्याख्या (Explanation): उस्ताद शकूर खान (1905-1975) और उनके शिष्य व भतीजे उस्ताद साबरी खान (1927-2015) भारत के महानतम 'सारंगी' वादकों में गिने जाते हैं। वे दोनों प्रसिद्ध 'किराना घराने' से संबंधित थे। उस्ताद शकूर खान सारंगी के पहले ऐसे वादक थे जिन्हें भारत सरकार द्वारा 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया था। किराना घराने की गायकी (जो तान और सुरों की शुद्धता के लिए जानी जाती है) को सारंगी पर उतारने में इन दोनों कलाकारों का योगदान अतुलनीय है।

17'संतूर' वाद्ययंत्र पर रागों को बजाते समय प्रयुक्त होने वाले दो छोटे लकड़ी के हथौड़ों जैसी डंडियों को क्या कहा जाता है?
A.मिजराब
B.मेजराब
C.कलम या कलामे
D.मिजराब या मेजराब दोनों नहीं, इसे 'कलम' (Mallets/Kalams) कहा जाता है

उत्तर (Ans): D. मिजराब या मेजराब दोनों नहीं, इसे 'कलम' (Mallets/Kalams) कहा जाता है

व्याख्या (Explanation): संतूर कश्मीर का एक पारंपरिक वाद्य यंत्र है, जिसे बजाने के लिए अखरोट या शीशम की लकड़ी से बनी दो विशेष घुमावदार डंडियों का प्रयोग किया जाता है। इन डंडियों को 'कलम' (Kalams) या 'मैलट्स' कहा जाता है। 'मिजराब' (Mizrab) का प्रयोग सितार बजाने के लिए उंगली में पहने जाने वाले तार के छल्ले के लिए होता है। संतूर पर कलम के कोमल प्रहार से ही बेहद जादुई और गूंजने वाली ध्वनि उत्पन्न होती है।

18पंडित किशन महाराज के गुरु का नाम क्या था, जिन्होंने उन्हें 'बनारस घराने' की कठिन तबला वादन विधा सिखाई थी?
A.पंडित बलदेव सहाय
B.पंडित कंठे महाराज
C.पंडित अनोखेलाल मिश्र
D.पंडित समता प्रसाद

उत्तर (Ans): B. पंडित कंठे महाराज

व्याख्या (Explanation): बनारस घराने के यशस्वी तबला वादक पंडित किशन महाराज (1923-2008) के गुरु उनके चाचा 'पंडित कंठे महाराज' थे, जो स्वयं अपने समय के दिग्गज तबला वादक थे। किशन महाराज को अपनी 'दाहिने हाथ की ताकत' और मुश्किल 'तिहाइयों' तथा 'परनों' के बेजोड़ वादन के लिए जाना जाता था। वे अक्सर कथक नर्तकों (जैसे पंडित बिरजू महाराज) के साथ अद्भुत जुगलबंदी करते थे। उन्हें 2002 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया था।

19निम्नलिखित में से कौन सा वाद्ययंत्र भगवान शिव के 'डमरू' का बड़ा रूप माना जाता है और यह दक्षिण भारत के मंदिरों में मुख्य रूप से धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान बजाया जाता है?
A.उडुकई (Udukkai)
B.चेंडा (Chenda)
C.इडक्का (Edakka)
D.थविल (Thavil)

उत्तर (Ans): C. इडक्का (Edakka)

व्याख्या (Explanation): 'इडक्का' (Edakka) केरल का एक अत्यंत पवित्र और पारंपरिक अवनद्ध वाद्य यंत्र है। यह दिखने में डमरू के आकार का होता है लेकिन आकार में बड़ा होता है। इसे भगवान शिव का वाद्य माना जाता है और केरल के सोपानम संगीत में मंदिरों के गर्भगृह के सामने इसका वादन अनिवार्य रूप से किया जाता है। इस वाद्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बजाने वाला इसके लटके हुए धागों को दबाकर या ढीला करके इसके स्वर की 'पिच' (Pitch) को लाइव बदल सकता है।

20उस्ताद अहमद जान थिरकवा, जिन्हें 20वीं सदी के सबसे महान तबला वादकों में से एक माना जाता है, किस विशिष्ट घराने के खलीफा (प्रमुख) थे?
A.फर्रुखाबाद घराना
B.दिल्ली घराना
C.लखनऊ घराना
D.ललियाना घराना

उत्तर (Ans): A. फर्रुखाबाद घराना

व्याख्या (Explanation): उस्ताद अहमद जान थिरकवा (1892-1976) तबले के 'फर्रुखाबाद घराने' के सबसे प्रसिद्ध कलाकार और खलीफा थे। उन्हें उनकी उंगलियों की अत्यधिक तेज गति और स्पष्टता के कारण 'थिरकवा' (थिरकने वाला) की उपाधि मिली थी। उन्होंने उस्ताद मुनीर खान से दीक्षा ली थी। उनका एकल (solo) वादन इतना प्रभावशाली होता था कि वे घंटों तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध रख सकते थे। उन्हें संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप से भी सम्मानित किया गया था।

21भारत की प्रसिद्ध महिला सरोद वादक 'शरण रानी' को किस उपनाम से जाना जाता था और वे किस घराने की शिष्या थीं?
A.सरोद रानी, मैहर घराना
B.सरोद कोकिला, बनारस घराना
C.सरोद पुत्री, रामपुर घराना
D.सरोद गरिमा, किराना घराना

उत्तर (Ans): A. सरोद रानी, मैहर घराना

व्याख्या (Explanation): शरण रानी (1929-2008) भारत की पहली महिला पेशेवर सरोद वादक थीं, जिन्हें पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 'सरोद रानी' (Sarod Queen of India) की उपाधि दी थी। उन्होंने मैहर घराने के महान उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खान और उस्ताद अली अकबर खान से सरोद की शिक्षा ली थी। उन्होंने न केवल सरोद बजाया बल्कि प्राचीन भारतीय वाद्ययंत्रों का एक विशाल संग्रह भी तैयार किया जो आज राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली में प्रदर्शित है। उन्हें 2000 में पद्म विभूषण मिला था।

22'सुरबहार' (Surbahar) वाद्ययंत्र, जिसे 'बास सितार' (Bass Sitar) भी कहा जाता है, का आविष्कार किसने किया था और यह सितार से किस प्रकार भिन्न है?
A.उस्ताद इमदाद खान, यह सितार से छोटा होता है
B.उस्ताद साहिबदाद खान, इसमें केवल 3 तार होते हैं
C.उस्ताद गुलाम मोहम्मद खान, यह आकार में सितार से बड़ा और गहरी गूंज वाला होता है
D.उस्ताद विलायत खान, इसमें कोई पर्दा नहीं होता

उत्तर (Ans): C. उस्ताद गुलाम मोहम्मद खान, यह आकार में सितार से बड़ा और गहरी गूंज वाला होता है

व्याख्या (Explanation): 'सुरबहार' वाद्ययंत्र का आविष्कार लगभग 1825 में उस्ताद गुलाम मोहम्मद खान (लखनऊ के प्रसिद्ध सितार वादक) द्वारा माना जाता है। यह मूल रूप से सितार का ही एक बहुत बड़ा रूप है जिसकी सूखी लौकी (pumpkin) और डांड आकार में बड़ी होती है। इसकी चौड़ी डांड के कारण इस पर बेहद गहरी और गंभीर गूंज उत्पन्न होती है, जिसका उपयोग विशेष रूप से ध्रुपद शैली के आलाप को बजाने के लिए किया जाता था। प्रसिद्ध अन्नपूर्णा देवी (अलाउद्दीन खान की पुत्री) सुरबहार की महानतम वादिका थीं।

23कर्नाटक संगीत का प्रसिद्ध लय वाद्ययंत्र 'मोर्सिंग' (Morsing) मूल रूप से किस श्रेणी के अंतर्गत आता है और इसे हवा के साथ कैसे बजाया जाता है?
A.सुषिर वाद्य (Wind Instrument)
B.अवनद्ध वाद्य (Percussion Instrument)
C.घन वाद्य (Plucked Idiophone)
D.तत वाद्य (String Instrument)

उत्तर (Ans): C. घन वाद्य (Plucked Idiophone)

व्याख्या (Explanation): 'मोर्सिंग' (Morsing) एक बहुत ही छोटा और अनोखा धातु का वाद्य यंत्र है जिसे अंग्रेजी में 'ज्यूज हार्प' (Jew's Harp) भी कहा जाता है। यह भारतीय संगीत वर्गीकरण के अनुसार 'घन वाद्य' (Idiophone) की श्रेणी में आता है। इसे वादक अपने दांतों के बीच दबाकर रखता है और मुंह की गुहा (mouth cavity) को एक गूंजने वाले बॉक्स (resonator) की तरह इस्तेमाल करते हुए लोहे की पतली जीभ (tongue) को उंगली से हिलाता है और सांस छोड़ते/खींचते हुए विभिन्न सुर पैदा करता है।

24उस्ताद असद अली खान, जो 'रुद्र वीणा' के अंतिम महान खलीफा माने जाते थे, इस प्राचीन वाद्य के किस घराने या शैली के रक्षक थे?
A.डागर घराना, खण्डारबानी शैली
B.जयपुर घराना, नोहारबानी शैली
C.ग्वालियर घराना, डागुरबानी शैली
D.आगरा घराना, गोबरहारबानी शैली

उत्तर (Ans): A. डागर घराना, खण्डारबानी शैली

व्याख्या (Explanation): उस्ताद असद अली खान (1937-2011) जयपुर के 'सेनिया घराने' और 'डागर घराने' दोनों के प्रभाव के तहत रुद्र वीणा वादन की अत्यंत प्राचीन और कठिन 'खण्डारबानी' (Khandarbani) शैली के अंतिम संरक्षक थे। रुद्र वीणा का प्रयोग ध्रुपद संगीत के आलापचारी में होता है। असद अली खान ने अपने पूर्वजों की इस परंपरा को जीवित रखने के लिए विवाह नहीं किया और पूरा जीवन इस वाद्य की साधना में समर्पित कर दिया। उन्हें 2008 में पद्म भूषण मिला था।

25प्रसिद्ध 'सारंगी' वादक उस्ताद सुल्तान खान, जिन्होंने हॉलीवुड फिल्म 'गांधी' के बैकग्राउंड स्कोर में सारंगी बजाई थी, किस घराने के कलाकार थे?
A.सीकर घराना
B.पटियाला घराना
C.दिल्ली घराना
D.किराना घराना

उत्तर (Ans): A. सीकर घराना

व्याख्या (Explanation): उस्ताद सुल्तान खान (1940-2011) राजस्थान के 'सीकर घराने' के एक असाधारण सारंगी वादक और पार्श्व गायक थे। उन्होंने रिचर्ड एटनबरो की कालजयी फिल्म 'गांधी' (1982) में सारंगी का मर्मस्पर्शी वादन किया था। शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ उन्होंने फ्यूजन संगीत (जैसे बीटल्स के जॉर्ज हैरिसन के साथ) और गजल/पॉप एलबमों (जैसे 'पिया बसंती') में भी सारंगी को युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया। उन्हें 2010 में पद्म भूषण मिला था।

26'शहनाई' वाद्ययंत्र के निर्माण में किस विशिष्ट पौधे की सरकंडों (reeds) का उपयोग किया जाता है, जिससे हवा गुजरने पर शहनाई की विशिष्ट तीखी और सुरीली आवाज निकलती है?
A.नरकट या नरसल (Narkat Reed)
B.बांस की कोपलें (Bamboo Shoot)
C.जूट के रेशे (Jute Fiber)
D.खस की घास (Vetiver Grass)

उत्तर (Ans): A. नरकट या नरसल (Narkat Reed)

व्याख्या (Explanation): शहनाई एक सुषिर (wind) वाद्य है। इसके ऊपरी हिस्से पर दोहरी पत्ती वाला सरकंडा लगा होता है, जिसे स्थानीय भाषा में 'नरकट' या 'नरसल' (Narkat Reed) नामक विशेष जलीय घास के तने से बनाया जाता है। यह घास मुख्य रूप से बिहार की नदियों (विशेषकर सोन नदी) के किनारे पाई जाती है। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान हमेशा इसी प्राकृतिक नरकट से बनी शहनाई का उपयोग करते थे क्योंकि इसके बिना शहनाई की असली शास्त्रीय गूंज पैदा होना असंभव है।

27कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में 'कंजिरा' (Kanjira) नामक छोटे डफली जैसे वाद्ययंत्र को एक मुख्य लय वाद्य के रूप में स्थापित करने का श्रेय किस महान कलाकार को दिया जाता है?
A.पुदुक्कोट्टई दक्षिणामूर्ति पिल्लई
B.हरिप्रसाद चौरसिया
C.पालघाट मणि अय्यर
D.जी. हरिशंकर

उत्तर (Ans): A. पुदुक्कोट्टई दक्षिणामूर्ति पिल्लई

व्याख्या (Explanation): 'कंजिरा' (Kanjira) कर्नाटक संगीत का एक छोटा फ्रेम ड्रम है जो डफली जैसा दिखता है। पारंपरिक रूप से इसे केवल सहायक वाद्य माना जाता था, लेकिन 'पुदुक्कोट्टई दक्षिणामूर्ति पिल्लई' (1875-1936) ने अपनी असाधारण लयकारी और कठिन गणितात्मक तालों को इस पर बजाकर इसे मुख्य मृदंगम के समकक्ष दर्जा दिलाया। कंजिरा का फ्रेम कटहल की लकड़ी का होता है और इस पर मॉनिटर छिपकली (Monitor Lizard) की त्वचा मढ़ी होती है।

28निम्नलिखित में से कौन सी प्रसिद्ध वायलिन वादिका संगीतज्ञ 'लालगुडी जयरामन' की बहन हैं और उन्होंने वायलिन जुगलबंदी के क्षेत्र में भाई के साथ लंबे समय तक प्रदर्शन किया?
A.लालगुडी श्रीमथी ब्रह्मानंदम
B.एन. राजम
C.एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी
D.कला रामनाथ

उत्तर (Ans): A. लालगुडी श्रीमथी ब्रह्मानंदम

व्याख्या (Explanation): लालगुडी श्रीमथी ब्रह्मानंदम कर्नाटक संगीत की एक अत्यंत सम्मानित वायलिन वादिका हैं। वे महान संगीतकार लालगुडी जयरामन की छोटी बहन और शिष्या हैं। इस भाई-बहन की जोड़ी ने कई दशकों तक भारत और विदेशों में वायलिन युगल (Violin Duet) की शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिसने कर्नाटक संगीत वायलिन वादन की 'लालगुडी बानी' को पूरी दुनिया में स्थापित किया।

29'पखावज' वाद्ययंत्र के 'नाना पानसे घराने' की स्थापना किसने की थी और यह घराना मुख्य रूप से भारत के किस क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय है?
A.नानासाहेब पानसे, महाराष्ट्र
B.पंडित भवानी शंकर, राजस्थान
C.बाबू जोधसिंह, उत्तर प्रदेश
D.पंडित रामचंद्र, मध्य प्रदेश

उत्तर (Ans): A. नानासाहेब पानसे, महाराष्ट्र

व्याख्या (Explanation): पखावज वादन की दो मुख्य शैलियां (घराने) हैं - कुदऊ सिंह घराना और नाना पानसे घराना। नाना पानसे घराने की स्थापना 19वीं सदी में 'नानासाहेब पानसे' ने की थी। यह शैली मुख्य रूप से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश (इंदौर/देवास) के क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय हुई। नानासाहेब पानसे इंदौर दरबार के महान संगीतकार थे और उनकी वादन शैली अपनी अत्यंत सूक्ष्म गणितीय लयकारी और कोमल निकास के लिए जानी जाती है।

30प्रसिद्ध सरोद वादक उस्ताद बुद्धदेव दासगुप्ता किस प्रसिद्ध घराने के सबसे प्रखर कलाकार माने जाते हैं, जिन्होंने सरोद वादन के साथ-साथ संगीत के वैज्ञानिक पहलुओं पर भी शोध किया?
A.शाहजहाँपुर घराना
B.मैहर घराना
C.लखनऊ घराना
D.ग्वालियर घराना

उत्तर (Ans): A. शाहजहाँपुर घराना

व्याख्या (Explanation): उस्ताद बुद्धदेव दासगुप्ता (1933-2018) 'शाहजहाँपुर घराने' के सबसे दिग्गज सरोद वादकों में से एक थे। उन्होंने महान उस्ताद राधिका मोहन मैत्रा से दीक्षा ली थी। बुद्धदेव दासगुप्ता केवल एक महान संगीतकार ही नहीं थे, बल्कि वे पेशे से एक कुशल मैकेनिकल इंजीनियर भी थे। उन्होंने सरोद वादन की कला और इसके पीछे के ध्वनि विज्ञान (Acoustics) पर कई वैज्ञानिक शोध पत्र और पुस्तकें लिखीं। उन्हें वर्ष 2012 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

31सुरबहार वाद्ययंत्र की उस महान प्रतिपादक का नाम बताइए जो मैहर घराने के संस्थापक आचार्य बाबा अलाउद्दीन खान की पुत्री और शिष्या थीं, जिन्होंने पंडित रविशंकर से विवाह किया और जिन्होंने अपना अधिकांश जीवन एकांतवास में संगीत साधना करते हुए बिताया?
A.सुकन्या रामगोपाल
B.शरण रानी
C.ज्योति हेगड़े
D.अन्नपूर्णा देवी

उत्तर (Ans): D. अन्नपूर्णा देवी

व्याख्या (Explanation): अन्नपूर्णा देवी (1927-2018) सुरबहार (Bass Sitar) की सबसे महान प्रतिपादक थीं। वे बाबा अलाउद्दीन खान की बेटी और पंडित रविशंकर की पहली पत्नी थीं। उनका वास्तविक नाम 'रोशनआरा खान' था। उन्होंने सुरबहार वादन में इतनी महारत हासिल की थी कि उनके बारे में कहा जाता था कि उनका वादन रविशंकर से भी अधिक गहरा था। बाद में उन्होंने स्वयं को सार्वजनिक मंचों से पूरी तरह दूर कर लिया और एकांतवास में केवल चुनिंदा शिष्यों (जैसे पं. हरिप्रसाद चौरसिया, निखिल बनर्जी) को संगीत सिखाया। उन्हें पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप मिली थी।

32कर्नाटक संगीत में पहली महिला घटम (Ghatam) वादक के रूप में किसे जाना जाता है, जिन्होंने चीनी-मिट्टी के कई घटमों को अलग-अलग श्रुतियों (Shrutis) में ट्यून करके 'घट तरंग' (Ghata Tarang) नामक एक अनोखी मधुर अवधारणा की रचना की?
A.सुकन्या रामगोपाल
B.एन. राजम
C.कला रामनाथ
D.लालगुडी श्रीमथी

उत्तर (Ans): A. सुकन्या रामगोपाल

व्याख्या (Explanation): सुकन्या रामगोपाल कर्नाटक संगीत में पहली महिला घटम वादक हैं। उन्होंने प्रसिद्ध घटम वादक टी. एच. विनायकराम और उनके पिता टी. आर. हरिहर शर्मा से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 1992 में 'घट तरंग' (Ghata Tarang) नामक एक अनूठी अवधारणा विकसित की, जिसमें वे अलग-अलग पिच (श्रुतियों) के 6 से 7 घटमों का उपयोग करके एक मधुर धुन उत्पन्न करती हैं। वे पूरी तरह से महिलाओं के वाद्यवृंद 'स्त्री ताल तरंग' (Sthree Thaal Tarang) का भी नेतृत्व करती हैं। उन्हें 2014 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था।

33प्रसिद्ध सरोद वादक पंडित राजीव तारानाथ, जिनका जून 2024 में निधन हो गया, किस घराने के एक अत्यंत प्रतिष्ठित कलाकार थे और उन्होंने किस प्रसिद्ध सरोद उस्ताद से शिक्षा प्राप्त की थी?
A.सेनिया-मैहर घराना, उस्ताद अली अकबर खान
B.शाहजहाँपुर घराना, उस्ताद बुद्धदेव दासगुप्ता
C.ग्वालियर घराना, उस्ताद हाफिज अली खान
D.लखनऊ घराना, उस्ताद अमजद अली खान

उत्तर (Ans): A. सेनिया-मैहर घराना, उस्ताद अली अकबर खान

व्याख्या (Explanation): पंडित राजीव तारानाथ (1932 - 11 जून 2024) सेनिया-मैहर घराने के एक विश्व प्रसिद्ध सरोद वादक थे। वे सरोद सम्राट उस्ताद अली अकबर खान के सबसे प्रिय शिष्यों में से एक थे और उन्होंने पंडित रविशंकर तथा विदुषी अन्नपूर्णा देवी से भी मार्गदर्शन प्राप्त किया था। सरोद वादन में आने से पहले वे अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर थे। उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 में पद्म श्री और 1999-2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

34कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में पहली बार 'मेंडोलिन' (Mandolin) जैसे पश्चिमी वाद्ययंत्र को पेश करने और इसे एक मुख्य धारा का शास्त्रीय वाद्य बनाने का श्रेय किस बाल प्रतिभा (child prodigy) कलाकार को दिया जाता है?
A.यू. श्रीनिवास (Uppalapu Srinivas)
B.कुन्नाकुडी वैद्यनाथन
C.टी. एन. कृष्णन
D.कादरी गोपालनाथ

उत्तर (Ans): A. यू. श्रीनिवास (Uppalapu Srinivas)

व्याख्या (Explanation): उपलापु श्रीनिवास (जिन्हें यू. श्रीनिवास के नाम से जाना जाता है, 1969-2014) एक महान संगीतकार थे जिन्होंने मात्र 9 वर्ष की आयु में कर्नाटक संगीत के मंच पर पहली बार मेंडोलिन बजाया था। उनसे पहले इस पश्चिमी फ्लैट-बैक इंस्ट्रूमेंट को शास्त्रीय संगीत के अयोग्य माना जाता था। उन्होंने वाद्ययंत्र में संरचनात्मक बदलाव किए ताकि उसमें कर्नाटक संगीत की 'गमक' निकाली जा सके। उन्हें वर्ष 1998 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

35कर्नाटक संगीत में 'सैक्सोफोन' (Saxophone) वाद्ययंत्र के एकमात्र और महानतम प्रवर्तक कौन थे, जिन्होंने इस पश्चिमी ब्रास वाद्ययंत्र में कर्नाटक संगीत के जटिल गमक और रागों को बजाने की विशेष तकनीक खोजी?
A.कादरी गोपालनाथ
B.शेख चिन्ना मौलाना
C.पालघाट मणि अय्यर
D.जी. हरिशंकर

उत्तर (Ans): A. कादरी गोपालनाथ

व्याख्या (Explanation): कादरी गोपालनाथ (1949-2019) कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में सैक्सोफोन बजाने वाले भारत के अग्रणी कलाकार थे। उन्होंने इस पश्चिमी वाद्ययंत्र को कर्नाटक संगीत की गायकी बानी के अनुकूल बनाने के लिए लगभग 20 वर्षों तक कठिन अभ्यास किया और इसकी की-पैड सेटिंग में बदलाव किए। उन्हें 'सैक्सोफोन चक्रवर्ती' की उपाधि और वर्ष 2004 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

36विश्व प्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. एल. सुब्रमण्यम, जो अपनी वैश्विक जुगलबंदियों और 'फ्यूजन संगीत' (Global Fusion) के लिए जाने जाते हैं, किस संगीत शैली के महारथी हैं और उनका विवाह किस प्रसिद्ध भारतीय पार्श्व गायिका से हुआ है?
A.कर्नाटक शास्त्रीय संगीत, कविता कृष्णमूर्ति
B.हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, आशा भोंसले
C.कर्नाटक शास्त्रीय संगीत, के. एस. चित्रा
D.हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, साधना सरगम

उत्तर (Ans): A. कर्नाटक शास्त्रीय संगीत, कविता कृष्णमूर्ति

व्याख्या (Explanation): डॉ. एल. सुब्रमण्यम (लक्ष्मणनारायण सुब्रमण्यम) कर्नाटक संगीत पद्धति के एक महान वायलिन वादक, संगीतकार और कंडक्टर हैं। वे शास्त्रीय कर्नाटक संगीत के साथ-साथ पश्चिमी शास्त्रीय संगीत (आर्केस्ट्रा) और जैज के फ्यूजन के जनक माने जाते हैं। उन्होंने प्रसिद्ध पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति से विवाह किया है। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

37मैहर घराने के उस महान सितार वादक का नाम बताइए जो अपनी आध्यात्मिक और शुद्ध शास्त्रीय वादन शैली के लिए जाने जाते थे, जिन्होंने कभी भी व्यावसायिकता या गति के प्रदर्शन को अपने संगीत पर हावी नहीं होने दिया?
A.पंडित निखिल बनर्जी
B.पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी
C.उस्ताद विलायत खान
D.उस्ताद शाहिद परवेज

उत्तर (Ans): A. पंडित निखिल बनर्जी

व्याख्या (Explanation): पंडित निखिल बनर्जी (1931-1986) मैहर घराने के सबसे महान सितार वादकों में से एक थे। उन्होंने उस्ताद अलाउद्दीन खान और अली अकबर खान से सितार सीखा। निखिल बनर्जी का संगीत अपनी असाधारण गहराई, पवित्रता और आध्यात्मिक भाव के लिए जाना जाता था। वे अक्सर सितार पर 'ध्रुपद' और 'खयाल' अंग के गायन का अद्भुत सम्मिश्रण प्रस्तुत करते थे। उन्हें वर्ष 1986 में मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

38भारत के उस महान 'पखावाज' वादक का नाम बताइए जिन्हें "पखावाज का कथक सम्राट" भी कहा जाता था और जिन्होंने भारतीय सिनेमा में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आर. डी. बर्मन जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ बड़े पैमाने पर सहयोग किया?
A.पंडित भवानी शंकर
B.पंडित कुदऊ सिंह
C.नानासाहेब पानसे
D.पंडित रामचंद्र

उत्तर (Ans): A. पंडित भवानी शंकर

व्याख्या (Explanation): पंडित भवानी शंकर (1956-2023) भारत के सबसे प्रसिद्ध और आधुनिक पखावाज वादकों में से एक थे। वे कथक नृत्य के साथ संगत करने में इतने निपुण थे कि उन्हें कथक शैली का सबसे बड़ा पखावाज वादक माना जाता था। शास्त्रीय संगीत के अलावा, उन्होंने भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में सैकड़ों फिल्मों के गानों में पखावाज और ढोलक बजाया था।

39'संतूर' वाद्ययंत्र के उस महान प्रतिपादक का नाम बताइए जो कश्मीर के 'सूफियाना घराने' से संबंध रखते थे और जिन्होंने संतूर के प्रचार-प्रसार के लिए 'SaMaPa' (Sopori Academy of Music and Performing Arts) नामक संस्था की स्थापना की थी?
A.पंडित भजन सोपोरी
B.पंडित शिवकुमार शर्मा
C.अभय रुस्तम सोपोरी
D.उस्ताद शकूर खान

उत्तर (Ans): A. पंडित भजन सोपोरी

व्याख्या (Explanation): पंडित भजन सोपोरी (1948-2022) कश्मीर के एक महान संतूर वादक और संगीतकार थे। वे कश्मीर के प्राचीन सूफियाना संगीत घराने की ९वीं पीढ़ी के कलाकार थे। पंडित शिवकुमार शर्मा ने जहां संतूर को हिंदुस्तानी संगीत में स्थापित किया, वहीं भजन सोपोरी ने इसमें सूफियाना परंपरा के तत्वों को शामिल रखा और संतूर पर आलापचारी की नई तकनीकों का विकास किया। उन्हें वर्ष 2004 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

40इमदादखानी घराने के उस सुप्रसिद्ध सितार वादक का नाम बताइए जो अपनी अत्यंत तीव्र गति और मानव कंठ जैसी हूबहू 'गायन अंग' (Vocal style) शैली के वादन के लिए जाने जाते हैं, और जो उस्ताद अजीज खान के पुत्र हैं?
A.उस्ताद शाहिद परवेज खान
B.उस्ताद विलायत खान
C.पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी
D.उस्ताद इमरात खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद शाहिद परवेज खान

व्याख्या (Explanation): उस्ताद शाहिद परवेज खान इमदादखानी (इटावा) घराने के एक शीर्ष सितार वादक हैं। वे अपने घराने की सातवीं पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं। उनके सितार वादन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे सितार के माध्यम से बिना किसी रुकावट के मानव कंठ की बारीकियों (मुर्कियां, गमक और तान) को अद्भुत गति और शुद्धता के साथ प्रस्तुत करते हैं, जिसे सितार का 'गायन अंग' कहा जाता है। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और पद्म श्री से नवाजा जा चुका है।

41कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के उस मृदंगम महागुरु का नाम बताइए जिन्होंने संगीत वादन की वैज्ञानिक तकनीक विकसित की और जिन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण तीनों नागरिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है?
A.उमायलपुरम के. शिवरामन
B.पालघाट मणि अय्यर
C.तंजौर पिल्लई
D.पुदुक्कोट्टई दक्षिणामूर्ति

उत्तर (Ans): A. उमायलपुरम के. शिवरामन

व्याख्या (Explanation): उमायलपुरम काशीविश्वनाथ शिवरामन (जन्म 1935) कर्नाटक संगीत के सबसे सम्मानित मृदंगम वादकों में से एक हैं। उन्होंने मृदंगम की त्वचा की मोटाई, काले मसाले (श्याही) के घनत्व और ध्वनि के गूंजने की भौतिकी पर व्यापक वैज्ञानिक शोध किए हैं। वे विभिन्न घरानों की वादन शैलियों के मिश्रण के लिए जाने जाते हैं। उन्हें वर्ष 2010 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पदम विभूषण' से सम्मानित किया गया था।

42प्रसिद्ध वायलिन वादिका 'कला रामनाथ' किस घराने से संबंध रखती हैं और उन्होंने किस महान शास्त्रीय गायक के मार्गदर्शन में वायलिन पर "गाती हुई वायलिन" (Singing Violin) तकनीक का विकास किया?
A.मेवाती घराना, पंडित जसराज
B.किराना घराना, पंडित भीमसेन जोशी
C.आगरा घराना, उस्ताद फैयाज खान
D.बनारस घराना, पंडित राजन-साजन मिश्र

उत्तर (Ans): A. मेवाती घराना, पंडित जसराज

व्याख्या (Explanation): कला रामनाथ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक अत्यंत सम्मानित वायलिन वादिका हैं। वे मेवाती घराने के महान शास्त्रीय गायक पंडित जसराज की शिष्या रही हैं। पंडित जसराज के सानिध्य में उन्होंने वायलिन बजाने की एक अनोखी तकनीक विकसित की, जिसमें वायलिन की आवाज मेवाती घराने की गायकी की नकल करती है। इस तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'सिंगिंग वायलिन' (Singing Violin) के रूप में सराहा गया है।

43इमदादखानी घराने के उस महान सितार और सुरबहार वादक का नाम बताइए जिन्हें ब्रिटिश संसद के 'हाउस ऑफ कॉमन्स' (House of Commons) में प्रदर्शन करने वाले पहले भारतीय शास्त्रीय वादक होने का गौरव प्राप्त है?
A.पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी
B.पंडित निखिल बनर्जी
C.उस्ताद शाहिद परवेज
D.उस्ताद इमरात खान

उत्तर (Ans): A. पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी

व्याख्या (Explanation): पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी (जन्म 1955) इमदादखानी घराने के एक असाधारण सितार और सुरबहार वादक हैं। वे अपने बेजोड़ तान और द्रुत लयकारी के लिए प्रसिद्ध हैं। वर्ष 1990 में उन्हें लंदन के 'हाउस ऑफ कॉमन्स' में प्रदर्शन करने का दुर्लभ अवसर मिला, जहां वे प्रदर्शन करने वाले पहले भारतीय संगीतकार बने। उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

44'नादस्वरम' (Nadaswaram) वाद्ययंत्र, जिसे दक्षिण भारत का सबसे पवित्र और मांगलिक सुषिर वाद्य माना जाता है, के उस महान मुस्लिम प्रतिपादक का नाम बताइए जिन्होंने तंजौर शैली को अमर बनाया?
A.शेख चिन्ना मौलाना
B.उस्ताद बिस्मिल्लाह खान
C.कादरी गोपालनाथ
D.उस्ताद साबरी खान

उत्तर (Ans): A. शेख चिन्ना मौलाना

व्याख्या (Explanation): शेख चिन्ना मौलाना (1924-1999) कर्नाटक संगीत शैली के एक महान नादस्वरम वादक थे। नादस्वरम दक्षिण भारत के मंदिरों और विवाहों में बजाया जाने वाला एक विशाल और अत्यंत सुरीला सुषिर (wind) वाद्य है। मुस्लिम परिवार में जन्म लेने के बावजूद वे हिंदू संस्कृति और मंदिरों के प्रति समर्पित थे और उन्होंने श्रीरंगम मंदिर के मुख्य नादस्वरम वादक के रूप में सेवा की। उन्हें 1998 में संगीत कलानिधि और पद्म श्री पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

45तबले के 'लखनऊ घराने' के उस शीर्ष स्तंभ का नाम बताइए जो सैन फ्रांसिस्को के अली अकबर कॉलेज ऑफ म्यूजिक में दशकों से अध्यापन कर रहे हैं और जिन्हें अपनी कोमल निकास तकनीक के लिए जाना जाता है?
A.पंडित स्वपन चौधरी
B.उस्ताद अहमद जान थिरकवा
C.उस्ताद अल्ला रक्खा
D.पंडित कंठे महाराज

उत्तर (Ans): A. पंडित स्वपन चौधरी

व्याख्या (Explanation): पंडित स्वपन चौधरी (जन्म 1945) लखनऊ घराने के एक विश्व प्रसिद्ध तबला वादक हैं। उन्होंने पंडित संता प्रसाद के शिष्य के रूप में दीक्षा ली। वे अपनी बेहद स्पष्ट, कोमल और सुरीली ध्वनि निकास तकनीक के लिए जाने जाते हैं। वे अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित अली अकबर कॉलेज ऑफ म्यूजिक के तबला विभाग के निदेशक रहे हैं। उन्हें वर्ष 2019 में पद्म श्री और 1996 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था।

46कर्नाटक संगीत के इतिहास में 'कंजिरा' (Kanjira) वाद्ययंत्र के उस अद्वितीय जादूगर का नाम बताइए, जिनके बारे में कहा जाता था कि वे केवल 'एक हाथ' का उपयोग करके इतनी तेज गति से बजाते थे कि बड़े-बड़े मृदंगम वादक भी दंग रह जाते थे?
A.जी. हरिशंकर
B.पुदुक्कोट्टई दक्षिणामूर्ति
C.पालघाट मणि अय्यर
D.टी. एच. विनायकराम

उत्तर (Ans): A. जी. हरिशंकर

व्याख्या (Explanation): जी. हरिशंकर (1950-2002) को कंजिरा वाद्ययंत्र के इतिहास का सबसे महान कलाकार माना जाता है। कंजिरा केवल एक हाथ से बजाया जाता है (क्योंकि दूसरे हाथ से फ्रेम को पकड़ा जाता है)। हरिशंकर की उंगलियों की गति, सटीकता और गणितीय लयकारी इतनी असाधारण थी कि उन्हें लय की दुनिया का विस्मय माना जाता था। वे उस्ताद ज़ाकिर हुसैन और एल. सुब्रमण्यम के साथ कई ऐतिहासिक फ्यूजन शो का हिस्सा रहे।

47केरल के प्रसिद्ध पारंपरिक अवनद्ध वाद्य 'चेंडा' (Chenda) के उस महान उस्ताद का नाम बताइए जिन्हें "मेला प्रमणी" (Melapramani) कहा जाता है और जो त्रिशूर पूरम उत्सव के प्रसिद्ध 'इलांजिथारा मेलम' (Elanjithara Melam) के मुख्य संचालक रहे हैं?
A.पेरुवनम कुट्टन मारार
B.कलामंडलम कृष्णन नायर
C.कुमारन नायर
D.पल्लिपुरम करुणाकरन

उत्तर (Ans): A. पेरुवनम कुट्टन मारार

व्याख्या (Explanation): पेरुवनम कुट्टन मारार केरल के सबसे प्रसिद्ध 'चेंडा' (Chenda - एक ऊर्ध्वाधर ड्रम जिसे दो डंडियों से बजाया जाता है) वादक और कला गुरु हैं। वे केरल के प्रसिद्ध मंदिर उत्सव 'त्रिशूर पूरम' में होने वाले 'इलांजिथारा मेलम' (जिसमें 250 से अधिक वादक भाग लेते हैं) के 20 से अधिक वर्षों तक मुख्य संचालक (Melapramani) रहे हैं। कला क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2013 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

48इमदादखानी घराने के उस प्रसिद्ध सुरबहार वादक का नाम बताइए जो सितार सम्राट उस्ताद विलायत खान के छोटे भाई थे और जिन्होंने सुरबहार वादन को समर्पित अपना पूरा जीवन ब्रिटेन और यूरोप में इस वाद्य के प्रचार में बिताया?
A.उस्ताद इमरात खान
B.उस्ताद इनायत खान
C.उस्ताद साहिबदाद खान
D.उस्ताद मोदू खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद इमरात खान

व्याख्या (Explanation): उस्ताद इमरात खान (1935-2018) इमदादखानी घराने के एक अत्यंत प्रतिष्ठित सुरबहार और सितार वादक थे। वे उस्ताद विलायत खान के भाई थे। हालांकि उन्होंने दोनों वाद्य बजाए, लेकिन उनका झुकाव सुरबहार (Bass Sitar) की तरफ अधिक था, जिसे बजाना बहुत कठिन माना जाता है। उन्होंने यूरोप और अमेरिका में भारतीय संगीत की गरिमा को बढ़ाया और वर्ष 2017 में भारत सरकार द्वारा घोषित पद्म श्री पुरस्कार को यह कहकर ठुकरा दिया था कि उन्हें यह सम्मान उनके कनिष्ठों के बाद और बहुत देर से मिल रहा है।

49कर्नाटक संगीत के उस विलक्षण बाल कलाकार का नाम बताइए जिन्होंने 'चित्रवीणा' (Chitraveena) वाद्ययंत्र पर विश्व प्रसिद्धि पाई और संगीत में "मेलहार्मनी" (Melharmony) नामक एक नई वैश्विक संगीत अवधारणा का आविष्कार किया?
A.एन. रविकिरण (N. Ravikiran)
B.यू. श्रीनिवास
C.पालघाट रघु
D.सुकन्या रामगोपाल

उत्तर (Ans): A. एन. रविकिरण (N. Ravikiran)

व्याख्या (Explanation): एन. रविकिरण (जन्म 1967) कर्नाटक संगीत के एक महान चित्रवीणा (गोट्टूवाद्यम) वादक और संगीतकार हैं। वे मात्र दो वर्ष की आयु में संगीत के सैकड़ों रागों और तालों की पहचान करने के लिए जाने जाते थे, जिससे उन्हें 'बाल कौतुक' (Child Prodigy) कहा गया। उन्होंने पश्चिमी संगीत के सद्भाव (Harmony) और भारतीय संगीत की राग प्रणाली (Melody) को मिलाकर "मेलहार्मनी" (Melharmony) नामक एक क्रांतिकारी संगीत अवधारणा की रचना की।

50कर्नाटक शास्त्रीय वायलिन शैली के उस प्रसिद्ध वादक का नाम बताइए जो अपनी वादन ऊर्जा, माथे पर बहुत बड़े 'कुमकुम तिलक' और तमिल फिल्मों (जैसे 'करकट्टकरन') में दिए गए अपने ब्लॉकबस्टर संगीत के लिए जाने जाते थे?
A.कुन्नाकुडी वैद्यनाथन
B.लालगुडी जयरामन
C.एम. एस. गोपालकृष्णन
D.टी. एन. कृष्णन

उत्तर (Ans): A. कुन्नाकुडी वैद्यनाथन

व्याख्या (Explanation): कुन्नाकुडी वैद्यनाथन (1935-2008) कर्नाटक संगीत के सबसे लोकप्रिय और रंगीन वायलिन वादकों में से एक थे। वे अपनी अनूठी तेज वादन शैली के लिए जाने जाते थे जो आम जनता को भी संगीत से बांध देती थी। उनके माथे का विशाल सिंदूर/कुमकुम तिलक उनकी पहचान था। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए तमिल और कन्नड़ फिल्मों में कई मधुर संगीत दिए और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त किया।

51शांतिनिकेतन (विश्वभारती विश्वविद्यालय) के उस महान संगीतज्ञ का नाम बताइए जिन्होंने 'एशराज' (Esraj) वाद्ययंत्र को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और रवीन्द्र संगीत (Rabindra Sangeet) दोनों में एक विशिष्ट स्थान दिलाया?
A.पंडित रणधीर रॉय
B.पंडित रामनारायण
C.उस्ताद सुल्तान खान
D.डॉ. लालमणि मिश्र

उत्तर (Ans): A. पंडित रणधीर रॉय

व्याख्या (Explanation): पंडित रणधीर रॉय (1943-1988) भारत के सबसे महान 'एशराज' वादकों में से एक थे। एशराज एक दुर्लभ तत वाद्य (stringed bow instrument) है जो सारंगी और सितार का मिश्रण जैसा दिखता है। रणधीर रॉय ने विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन में एशराज विभाग की स्थापना की और इस वाद्य को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के गीतों (रवीन्द्र संगीत) के संगत से ऊपर उठाकर शास्त्रीय मंचों पर एकल वादन के रूप में स्थापित किया।

52प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार, जो बनारस घराने से संबंधित हैं, को बांसुरी की किस विशिष्ट बड़ी शैली के विकास के लिए जाना जाता है और उनके किस एल्बम को ग्रैमी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था?
A.शंख बांसुरी, 'ताराना' (Tarana)
B.शंख बांसुरी, 'तब्ला ज़ोन' (Tabla Zone)
C.शंख बांसुरी, 'मसाला' (Tabula Rasa)
D.शंख बांसुरी, 'क्रॉसविंड्स' (Tabula Rasa / Travelers) - 'तब्ला रस' (Tabula Rasa) के लिए

उत्तर (Ans): C. शंख बांसुरी, 'मसाला' (Tabula Rasa)

व्याख्या (Explanation): पंडित रोनू मजूमदार बनारस घराने के एक महान बांसुरी वादक हैं। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय बांसुरी में एक विशिष्ट प्रकार की बड़ी और गहरी बांसुरी का विकास किया जिसे 'शंख बांसुरी' कहा जाता है। उन्होंने वर्ष 1996 में प्रसिद्ध अमेरिकी गिटार वादक बेला फ्लेक के साथ 'तब्ला रस' (Tabula Rasa) एल्बम पर काम किया, जो ग्रैमी पुरस्कार (Grammy Award) के लिए नामांकित हुआ था।

53भारत की उस प्रसिद्ध महिला वीणा वादक का नाम बताइए जो मात्र 9 वर्ष की आयु में ऑल इंडिया रेडियो की 'ए' ग्रेड कलाकार बन गई थीं और जिन्हें बाद में तमिलनाडु संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति नियुक्त किया गया था?
A.ई. गायत्री (E. Gayathri)
B.सुकन्या रामगोपाल
C.ज्योति हेगड़े
D.एन. राजम

उत्तर (Ans): A. ई. गायत्री (E. Gayathri)

व्याख्या (Explanation): ई. गायत्री (मदुराई ई. गायत्री, जन्म 1959) कर्नाटक संगीत की एक अत्यंत प्रसिद्ध वीणा वादिका हैं। उन्हें वीणा बजाने में महारत हासिल है और वे बचपन से ही एक असाधारण कलाकार थीं। वे वर्ष 2013 में तमिलनाडु संगीत और ललित कला विश्वविद्यालय की पहली कुलपति (Vice-Chancellor) नियुक्त की गई थीं। उन्हें वर्ष 2002 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था।

54हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में 'हवाईयन गिटार' (Sliding Guitar) को शास्त्रीय रूप में बजाने वाली भारत की पहली महिला कलाकार कौन हैं, जिन्होंने अपने स्वयं के आविष्कृत वाद्ययंत्र 'शंकर गिटार' पर महारत हासिल की?
A.डॉ. कमला शंकर
B.सुकन्या रामगोपाल
C.शरण रानी
D.ज्योति हेगड़े

उत्तर (Ans): A. डॉ. कमला शंकर

व्याख्या (Explanation): डॉ. कमला शंकर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में स्लाइड गिटार बजाने वाली भारत की पहली महिला कलाकार हैं। उन्होंने गिटार की पारंपरिक बनावट में बदलाव करके 'शंकर गिटार' (Shankar Guitar) का आविष्कार किया, जिसमें कोई गूंजने वाला छेद नहीं होता और इसकी ध्वनि वीणा के बेहद करीब होती है। वे पंडित छन्नूलाल मिश्र के मार्गदर्शन में पली-बढ़ी हैं। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय 'कुमार गंधर्व सम्मान' से नवाजा गया है।

55बनारस घराने के उस प्रख्यात तबला वादक का नाम बताइए जो पंडित किशन महाराज के सबसे प्रिय शिष्या रहे हैं और जो अपनी असाधारण 'लयकारी' और पखावज के बोलों के तबले पर सटीक वादन के लिए प्रसिद्ध हैं?
A.पंडित कुमार बोस
B.पंडित अनोखेलाल मिश्र
C.पंडित समता प्रसाद
D.उस्ताद अहमद जान थिरकवा

उत्तर (Ans): A. पंडित कुमार बोस

व्याख्या (Explanation): पंडित कुमार बोस (जन्म 1953) बनारस घराने के एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रसिद्ध तबला वादक हैं। उन्होंने लगभग 30 वर्षों तक बनारस घराने के दिग्गज पंडित किशन महाराज से दीक्षा प्राप्त की। वे तबले पर पखावज के भारी बोलों (जैसे परन और तिहाई) को बजाने की अपनी अनूठी बनारस शैली के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। उन्हें वर्ष 2012 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था।

56सेनिया-मैहर घराने के उस शीर्ष सरोद वादक का नाम बताइए जो उस्ताद बहादुर खान के भतीजे और शिष्य हैं और जिन्हें आधुनिक दौर में सरोद वादन के सबसे सुरीले और तकनीकी रूप से सिद्ध कलाकारों में गिना जाता है?
A.उस्ताद तेजेंद्र नारायण मजूमदार
B.उस्ताद अमजद अली खान
C.पंडित बुद्धदेव दासगुप्ता
D.उस्ताद अली अकबर खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद तेजेंद्र नारायण मजूमदार

व्याख्या (Explanation): उस्ताद तेजेंद्र नारायण मजूमदार (जन्म 1956) वर्तमान समय के सबसे महान सरोद वादकों में से एक हैं। वे सेनिया-मैहर घराने से संबंध रखते हैं। उन्होंने उस्ताद बहादुर खान से सरोद सीखा और बाद में उस्ताद अली अकबर खान से भी मार्गदर्शन लिया। उनका वादन राग की शुद्धता और बेहद बारीक तान व लयकारी के लिए जाना जाता है। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

57'ध्रुपद' संगीत के प्रसिद्ध 'दरभंगा घराने' के उस महान पखावाज वादक का नाम बताइए जिन्होंने पखावाज वादन की प्राचीन शैलियों को पुनर्जीवित किया?
A.पंडित रामाशीष पाठक
B.पंडित कुदऊ सिंह
C.नानासाहेब पानसे
D.बाबू जोधसिंह

उत्तर (Ans): A. पंडित रामाशीष पाठक

व्याख्या (Explanation): पंडित रामाशीष पाठक (1914-1996) दरभंगा घराने (बिहार) के एक अत्यंत महान पखावाज वादक थे। ध्रुपद गायकी के साथ पखावाज की संगत में उनका कोई सानी नहीं था। उन्होंने पखावाज के कठिन और लुप्तप्राय 'तालो' (जैसे मत्त ताल, ब्रह्म ताल) के ऐतिहासिक रूपों को संरक्षित और रिकॉर्ड करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

58महाराष्ट्र के उस प्रसिद्ध 'हारमोनियम' वादक का नाम बताइए जो पंडित भीमसेन जोशी, पंडित जसराज और किशोरी अमोनकर जैसे महान हिंदुस्तानी गायकों के सबसे पसंदीदा संगतकार (Accompanist) रहे हैं?
A.पंडित अप्पा जलगांवकर
B.पंडित पुरुषोत्तम वालवलकर
C.पंडित तुलसीदास बोरकर
D.पंडित रामभाऊ विजापुरे

उत्तर (Ans): A. पंडित अप्पा जलगांवकर

व्याख्या (Explanation): पंडित अप्पा जलगांवकर (1922-2009) भारत के सबसे महान हारमोनियम वादकों और संगतकारों में से एक थे। यद्यपि वे अकेले (solo) भी बहुत सुंदर हारमोनियम बजाते थे, लेकिन हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायकी के साथ संगत करने में उनका कौशल अद्वितीय था। पंडित भीमसेन जोशी की सुप्रसिद्ध 'किराना गायकी' की तानों को हारमोनियम पर हूबहू उतारने में अप्पा जलगांवकर को महारत हासिल थी।

59तबले के 'फर्रुखाबाद घराने' के उस प्रसिद्ध प्रतिपादक का नाम बताइए जो महान संगीतकार पंडित ज्ञान प्रकाश घोष के शिष्य थे और जिन्हें अपनी उत्कृष्ट संगति और एकल वादन दोनों के लिए जाना जाता है?
A.पंडित अनिंदो चटर्जी
B.पंडित कुमार बोस
C.उस्ताद मुनीर खान
D.उस्ताद जाकिर हुसैन

उत्तर (Ans): A. पंडित अनिंदो चटर्जी

व्याख्या (Explanation): पंडित अनिंदो चटर्जी फर्रुखाबाद घराने के एक शीर्ष तबला वादक हैं। वे पंडित ज्ञान प्रकाश घोष के प्रमुख शिष्यों में से एक हैं। अनिंदो चटर्जी ने अपनी अनोखी स्पष्ट ध्वनि और अविश्वसनीय रूप से तेज और साफ 'धिन-धिन' निकालने की कला से दुनिया भर में ख्याति प्राप्त की है। वे राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शन करने वाले पहले भारतीय तबला वादक थे।

60कर्नाटक संगीत के इतिहास में 'क्लैरिनेट' (Clarinet) जैसे पश्चिमी विंड इंस्ट्रूमेंट को शास्त्रीय मंच पर मुख्य वाद्य के रूप में स्थापित करने के लिए किसे "क्लैरिनेट चक्रवर्ती" की उपाधि दी गई थी?
A.पंडित ए. के. सी. नटराजन (AKC Natarajan)
B.कादरी गोपालनाथ
C.शेख चिन्ना मौलाना
D.टी. एन. कृष्णन

उत्तर (Ans): A. पंडित ए. के. सी. नटराजन (AKC Natarajan)

व्याख्या (Explanation): पंडित ए. के. सी. नटराजन कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में क्लैरिनेट (Clarinet) वाद्य बजाने वाले सबसे महान कलाकार हैं। सैक्सोफोन के लिए जो स्थान कादरी गोपालनाथ का है, क्लैरिनेट के लिए वही स्थान नटराजन का है। उन्होंने क्लैरिनेट की तीखी और सपाट आवाज को दक्षिण भारतीय संगीत के गमक और आलाप के अनुकूल ढाला, जिसके कारण उन्हें 'क्लैरिनेट चक्रवर्ती' की उपाधि मिली थी।

61रुद्र वीणा के उस महान युवा प्रतिपादक का नाम बताइए जो प्रसिद्ध डागर घराने की २०वीं पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं और उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर के पुत्र और शिष्य हैं, जिन्होंने इस प्राचीन देव-वाद्य को वैश्विक मंचों पर एक नया जीवन दिया है?
A.उस्ताद असद अली खान
B.उस्ताद बहाउद्दीन डागर
C.ज्योति हेगड़े
D.उस्ताद शमशुद्दीन डागर

उत्तर (Ans): B. उस्ताद बहाउद्दीन डागर

व्याख्या (Explanation): उस्ताद बहाउद्दीन डागर (जन्म 1970) ध्रुपद संगीत और रुद्र वीणा के क्षेत्र में एक बेहद सम्मानित नाम हैं। वे प्रसिद्ध डागर घराने के महान उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर के पुत्र और शिष्य हैं। बहाउद्दीन ने मात्र 12 वर्ष की आयु से अपने पिता से रुद्र वीणा और ध्रुपद की दीक्षा लेनी शुरू की थी। उनके वादन में डागरबानी की शुद्धता, गहरा आलाप और गंभीर गूंज साफ दिखाई देती है। उन्होंने रुद्र वीणा वादन की प्राचीन तकनीकों को बनाए रखते हुए इसे आधुनिक पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्हें वर्ष 2012 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

62कर्नाटक संगीत के उस विलक्षण बांसुरी वादक (Child Prodigy) का नाम बताइए जिन्हें "मली" (Mali) के नाम से जाना जाता था, जिन्होंने कर्नाटक बांसुरी वादन में क्रांतिकारी फूंक और उंगलियों की तकनीक (Cross-fingering) पेश की और बांसुरी बजाने की शैली को हमेशा के लिए बदल दिया?
A.टी. आर. महालिंगम
B.एन. रमानी
C.शशांक सुब्रमण्यम
D.सिक्किल सिस्टर्स

उत्तर (Ans): A. टी. आर. महालिंगम

व्याख्या (Explanation): टी. आर. महालिंगम (1926-1986), जिन्हें संगीत की दुनिया में आदरपूर्वक "मली" (Flute Mali) कहा जाता था, कर्नाटक संगीत इतिहास के सबसे प्रतिभाशाली और अपरंपरागत बांसुरी वादकों में से थे। उन्होंने मात्र 7 वर्ष की आयु में अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन किया था। उनसे पहले कर्नाटक बांसुरी मुख्य रूप से हल्के सुरों तक सीमित थी, लेकिन महालिंगम ने 'ओपन-फिंगर' और विशेष 'क्रॉस-फिंगरिंग' तकनीकों का आविष्कार किया जिससे बांसुरी पर भी मानव कंठ की गमक और जटिल संगतियों को शुद्धता से बजाया जा सका। उनके शिष्यों में प्रसिद्ध बांसुरी वादक एन. रमानी भी शामिल थे।

63इमदादखानी घराने के उस प्रख्यात सितार वादक का नाम बताइए जो सितार सम्राट उस्ताद विलायत खान के पुत्र और शिष्य हैं, और जो अपने सूफियाना गायन तथा सितार वादन के अनूठे संगम के लिए दुनिया भर में विख्यात हैं?
A.उस्ताद सुजात खान
B.उस्ताद शाहिद परवेज
C.उस्ताद निशात खान
D.उस्ताद इरशाद खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद सुजात खान

व्याख्या (Explanation): उस्ताद सुजात खान (Shujaat Khan, जन्म 1960) इमदादखानी (इटावा) घराने के एक अत्यंत लोकप्रिय सितार वादक और गायक हैं। वे महान सितार वादक उस्ताद विलायत खान के पुत्र हैं। उनके वादन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे सितार बजाने के साथ-साथ अत्यंत सुरीले स्वर में लोक गीत और सूफियाना कलाम (जैसे अमीर खुसरो और कबीर के पद) गाते हैं, जो उनके संगीत को आम जनता के बेहद करीब ले जाता है। उनके एल्बम 'द रेन' (The Rain) को वर्ष 2004 में पारंपरिक विश्व संगीत श्रेणी में ग्रैमी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।

64हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में 'वायलिन' (Violin) को एक प्रतिष्ठित एकल वाद्य (Solo Instrument) के रूप में स्थापित करने वाले उस महान गुरु का नाम बताइए जिन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था और जो आकाशवाणी (AIR) के राष्ट्रीय संगठनकर्ता भी रहे थे?
A.पंडित वी. जी. जोग (Vishnu Govind Jog)
B.पंडित गजराज मिश्र
C.डॉ. एन. राजम
D.पंडित डी. के. दातार

उत्तर (Ans): A. पंडित वी. जी. जोग (Vishnu Govind Jog)

व्याख्या (Explanation): पंडित विष्णु गोविंद जोग (1922-2004), जिन्हें वी. जी. जोग के नाम से जाना जाता है, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में वायलिन वादन के पितामह माने जाते हैं। उन्होंने वायलिन को केवल फिल्मों या नाटकों के संगत वाद्य से ऊपर उठाकर शास्त्रीय मंचों पर एकल वादन के शिखर तक पहुँचाया। वे ग्वालियर, आगरा और बख्शू घरानों के संगीत से प्रभावित थे। उन्होंने पंडित रविशंकर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जैसे महान दिग्गजों के साथ कई ऐतिहासिक जुगलबंदियां प्रस्तुत कीं। उन्हें वर्ष 1983 में पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

65संगीत के उस महान गुरु, संगीतकार और बहुमुखी वादक का नाम बताइए जिन्हें तबले के 'फर्रुखाबाद घराने' का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है, जिन्होंने पंडित अनिंदो चटर्जी और पंडित करुणमयी सेन जैसे दर्जनों महान वादकों को तैयार किया?
A.पंडित ज्ञान प्रकाश घोष
B.उस्ताद मसीत खान
C.पंडित ज्ञानेंद्र प्रसाद गोस्वामी
D.उस्ताद करामतुल्ला खान

उत्तर (Ans): A. पंडित ज्ञान प्रकाश घोष

व्याख्या (Explanation): पंडित ज्ञान प्रकाश घोष (1909-1997) भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में एक असाधारण 'सव्यसाची' (बहुमुखी) व्यक्तित्व थे। वे एक महान तबला वादक, हारमोनियम वादक, संगीतकार और अद्वितीय गुरु थे। उन्होंने फर्रुखाबाद घराने के महान उस्ताद मसीत खान से दीक्षा ली थी। ज्ञान प्रकाश घोष ने कोलकाता को तबले और हिंदुस्तानी संगीत का एक प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके शिष्यों की सूची में पंडित अनिंदो चटर्जी, पंडित संजय मुखर्जी, और अजय चक्रवर्ती (गायन) जैसे दिग्गज कलाकार शामिल हैं। उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

66'सेनिया घराना' के उस महान सितार वादक का नाम बताइए जिन्होंने संगीत के क्षेत्र में राग 'बिहागड़ा' का विकास किया, जो सितार की संरचना में केवल १७ पर्दों (Frets) के उपयोग के पक्षधर थे और जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में संगीत संकाय के डीन के रूप में कार्य किया?
A.पंडित देबू चौधरी (Debu Chaudhuri)
B.पंडित प्रतीक चौधरी
C.उस्ताद हलीम जाफर खान
D.पंडित कार्तिक कुमार

उत्तर (Ans): A. पंडित देबू चौधरी (Debu Chaudhuri)

व्याख्या (Explanation): पंडित देवव्रत चौधरी (जिन्हें देबू चौधरी के नाम से जाना जाता है, 1935-2021) सेनिया जयपुर घराने के एक अत्यंत प्रतिष्ठित सितार वादक थे। वे उस्ताद मुश्ताक अली खान के शिष्य थे। देबू चौधरी पारंपरिक सितार वादन शैली के प्रबल समर्थक थे और उन्होंने सितार पर १७ पर्दों (Frets) की शुद्धता को बनाए रखा (जबकि अन्य वादक १९ या २० पर्दों का उपयोग करते हैं)। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में संगीत विभाग के अध्यक्ष और डीन के रूप में कई वर्षों तक अध्यापन किया। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 1992 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

67कर्नाटक संगीत के प्रसिद्ध कंजिरा वादक वी. सेल्वागणेश, जो विश्व प्रसिद्ध फ्यूजन बैंड 'रिमेम्बर शक्ति' (Remember Shakti) के सदस्य रहे हैं, किस महान घटम जादूगर के पुत्र हैं?
A.टी. एच. विनायकराम
B.उमायलपुरम के. शिवरामन
C.पालघाट रघु
D.जी. हरिशंकर

उत्तर (Ans): A. टी. एच. विनायकराम

व्याख्या (Explanation): वी. सेल्वागणेश (जन्म 1966) कर्नाटक संगीत के एक विश्व प्रसिद्ध कंजिरा और बहु-तालवादक (percussionist) हैं। वे महान घटम वादक टी. एच. विनायकराम (विकू) के पुत्र और प्रसिद्ध संगीत गुरु टी. आर. हरिहर शर्मा के पोते हैं। सेल्वागणेश ने महान तबला वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन, जॉन मैकलॉघलिन, और यू. श्रीनिवास के साथ मिलकर प्रसिद्ध वैश्विक इंडो-जैज फ्यूजन बैंड 'रिमेम्बर शक्ति' (Remember Shakti) में कंजिरा बजाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचाई।

68दक्षिण भारत के मंदिरों और उत्सवों में 'नादस्वरम' वाद्ययंत्र के साथ बजाए जाने वाले उस भारी-भरकम अवनद्ध वाद्य (Percussion Instrument) का नाम क्या है, जिसे बजाने के लिए एक हाथ में डंडे और दूसरे हाथ की उंगलियों पर धातु/प्लास्टर के छल्ले (caps) पहने जाते हैं?
A.थविल (Thavil)
B.चेंडा (Chenda)
C.मृदंगम
D.इडक्का

उत्तर (Ans): A. थविल (Thavil)

व्याख्या (Explanation): 'थविल' (Thavil) दक्षिण भारत का एक अत्यंत शक्तिशाली और ऊँची आवाज़ वाला अवनद्ध वाद्य यंत्र है। यह मुख्य रूप से मंदिरों के उत्सवों और विवाह समारोहों में 'नादस्वरम' (Nadaswaram) के साथ संगत के रूप में बजाया जाता है। थविल को बजाने की तकनीक अनोखी है; इसके दाहिने हिस्से को हाथ की उंगलियों से बजाया जाता है जिन पर मिट्टी, प्लास्टर या धातु की टोपी (caps/rings) चढ़ाई जाती है ताकि उंगलियों को चोट न लगे, और बाएं हिस्से पर लकड़ी के एक छोटे और सख्त डंडे से कोमल आघात किया जाता है। प्रसिद्ध थविल वादकों में वलयपट्टी ए. आर. सुब्रमण्यम का नाम शीर्ष पर है।

69शास्त्रीय संगीत की दुनिया के उस अनूठे और प्रतिभावान कलाकार का नाम बताइए जो हिंदुस्तानी और कर्नाटक दोनों शैलियों के वायलिन वादन में समान रूप से निपुण हैं, और जो प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अनुराधा श्रीराम के पति हैं?
A.श्रीराम परशुराम (Sriram Parasuram)
B.डॉ. एल. सुब्रमण्यम
C.लालगुडी कृष्णन
D.कुन्नाकुडी वैद्यनाथन

उत्तर (Ans): A. श्रीराम परशुराम (Sriram Parasuram)

व्याख्या (Explanation): श्रीराम परशुराम भारतीय संगीत जगत के एक दुर्लभ रत्न हैं जो उत्तर भारतीय (हिंदुस्तानी) और दक्षिण भारतीय (कर्नाटक) दोनों ही शास्त्रीय शैलियों के वायलिन वादन और गायन में असाधारण रूप से निपुण हैं। उन्होंने 4 वर्ष की आयु से वायलिन सीखना शुरू किया और कर्नाटक संगीत में संगीत कलानिधि टी. एन. कृष्णन से दीक्षा ली। उन्होंने पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का भी गहरा अध्ययन किया है। उनकी पत्नी प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अनुराधा श्रीराम हैं, जिनके साथ मिलकर उन्होंने कई फ्यूजन और शास्त्रीय कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं।

70कर्नाटक वायलिन वादन की उस विशिष्ट और क्रांतिकारी शैली का नाम क्या है जिसका विकास 'पद्म भूषण' एम. एस. गोपालकृष्णन के पिता ने किया था, जिसमें पश्चिमी संगीत की बॉइंग (Bowing) तकनीकों और हिंदुस्तानी तानों का अद्भुत मिश्रण है?
A.परूर शैली (Parur Style)
B.तंजौर शैली (Tanjore Style)
C.मैसूर शैली (Mysore Style)
D.लालगुडी शैली (Lalgudi Style)

उत्तर (Ans): A. परूर शैली (Parur Style)

व्याख्या (Explanation): 'परूर शैली' (Parur Style or Parur Bani) कर्नाटक और हिंदुस्तानी संगीत दोनों में वायलिन वादन की एक अत्यंत समृद्ध और कठिन शैली है। इसका आविष्कार महान वायलिन वादक परूर सुंदरम अय्यर (एम. एस. गोपालकृष्णन के पिता) ने किया था। इस शैली की विशेषता यह है कि इसमें वायलिन को पकड़ने की पश्चिमी शैली, बेहद तेज़ गति की उंगली संचालन (Fingering technique), और एक ही तार पर एक से अधिक सप्तक के सुरों को शुद्धता से बजाने की कला शामिल है। एम. एस. गोपालकृष्णन ने इस शैली को दुनिया भर में लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचाया।

71शहनाई वाद्ययंत्र के उस महान प्रतिपादक का नाम बताइए जिन्हें उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के बाद शहनाई का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ माना जाता था, जो बनारस घराने से संबंध रखते थे और जिनका वर्ष 2015 में निधन हो गया?
A.अली अहमद हुसैन खान
B.उस्ताद साबरी खान
C.पंडित अनन्त लाल
D.पंडित दया शंकर

उत्तर (Ans): A. अली अहमद हुसैन खान

व्याख्या (Explanation): उस्ताद अली अहमद हुसैन खान (1939 - 16 मार्च 2015) भारत के एक अत्यंत सम्मानित शहनाई वादक थे। बिस्मिल्लाह खान के बाद वे देश के दूसरे ऐसे शहनाई वादक थे जिन्होंने इस वाद्य को अंतरराष्ट्रीय शास्त्रीय मंचों पर एक स्वतंत्र सोलो इंस्ट्रूमेंट के रूप में स्थापित किया। वे बनारस घराने की गायकी शैली को शहनाई पर निकालने में बेजोड़ थे। उन्होंने वर्ष 1974 में दूरदर्शन के उद्घाटन और वर्ष 1982 के एशियाई खेलों के उद्घाटन समारोहों में अपनी शहनाई का जादू बिखेरा था।

72भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में पहली पेशेवर महिला 'सारंगी' वादिका होने का गौरव किसे प्राप्त है, जो महान सारंगी सम्राट पंडित राम नारायण की पुत्री और शिष्या हैं?
A.अरुणा नारायण (Aruna Narayan)
B.ज्योति हेगड़े
C.हर्षिता रामनाथ
D.सुकन्या रामगोपाल

उत्तर (Ans): A. अरुणा नारायण (Aruna Narayan)

व्याख्या (Explanation): अरुणा नारायण काले विश्व की पहली ऐसी महिला कलाकार हैं जिन्होंने पेशेवर स्तर पर 'सारंगी' वाद्ययंत्र को अपना मुख्य एकल वादन वाद्य बनाया। सारंगी को पारंपरिक रूप से बेहद कठिन और पुरुषों के वर्चस्व वाला वाद्य माना जाता था। अरुणा ने अपने पिता, विश्व प्रसिद्ध सारंगी वादक पंडित राम नारायण से संगीत की कठोर शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने भारतीय संगीत के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय ऑर्केस्ट्रा और फिल्मों (जैसे प्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्म 'लाइफ ऑफ पाई') के बैकग्राउंड स्कोर में सारंगी बजाई है।

73'संतूर' वाद्ययंत्र के उस प्रसिद्ध प्रतिपादक का नाम बताइए जिन्होंने संतूर में अतिरिक्त पुलों (bridges) और विशेष "संतूर रॉड्स" (Santoor Rods/Tuning levers) का आविष्कार किया जिससे रागों की ट्यूनिंग को लाइव प्रदर्शन के दौरान बहुत आसान बनाया जा सका?
A.पंडित तरुण भट्टाचार्य
B.पंडित शिवकुमार शर्मा
C.पंडित भजन सोपोरी
D.अभय रुस्तम सोपोरी

उत्तर (Ans): A. पंडित तरुण भट्टाचार्य

व्याख्या (Explanation): पंडित तरुण भट्टाचार्य (जन्म 1957) भारत के सबसे अभिनव और प्रसिद्ध संतूर वादकों में से एक हैं। वे महान सितार वादक पंडित रविशंकर के शिष्य रहे हैं। तरुण भट्टाचार्य ने संतूर वाद्ययंत्र में क्रांतिकारी तकनीकी बदलाव किए हैं। उन्होंने संतूर पर 'मींड' (स्लाइडिंग नोट्स) को अधिक स्पष्टता से बजाने के लिए इसकी बनावट में बदलाव किया और एक नई ट्यूनिंग रॉड विकसित की, जिससे प्रदर्शन के दौरान केवल एक सेकंड में सुर बदले जा सकते हैं। उनके प्रसिद्ध एल्बम 'किरवानी' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहा गया।

74कर्नाटक संगीत के उस प्रसिद्ध घटम वादक और संगीत गुरु का नाम बताइए जो "कोंनाकोल" (Konnakol - लयबद्ध बोलों को मुंह से बोलना) की कला में बेहद निपुण माने जाते हैं और जिन्होंने पश्चिमी देशों में दक्षिण भारतीय लयकारी के प्रचार के लिए काम किया?
A.टी. एच. सुबाश चंद्रन (T. H. Subash Chandran)
B.उमायलपुरम के. शिवरामन
C.पालघाट रघु
D.तंजौर उपेन्द्रन

उत्तर (Ans): A. टी. एच. सुबाश चंद्रन (T. H. Subash Chandran)

व्याख्या (Explanation): टी. एच. सुबाश चंद्रन कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के एक महान घटम वादक, मृदंगम वादक और कोंनाकोल (Konnakol) के उस्ताद हैं। कोंनाकोल कर्नाटक संगीत की वह प्राचीन कला है जिसमें मृदंगम और घटम के जटिल बोलों को केवल मुंह से आवाज़ निकालकर अत्यंत तीव्र गति से प्रस्तुत किया जाता है। सुबाश चंद्रन प्रसिद्ध घटम वादक टी. एच. विनायकराम के भाई हैं। उन्होंने पश्चिमी देशों के कई प्रसिद्ध जैज और फ्यूजन कलाकारों के साथ काम करके इस कला को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।

75पंडित शिवकुमार शर्मा के सबसे वरिष्ठ और प्रख्यात शिष्यों में से एक का नाम बताइए जो प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित सी. आर. व्यास के पुत्र हैं और जिन्हें 'तानसेन सम्मान' तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया चुका है?
A.पंडित सतीश व्यास (Satish Vyas)
B.पंडित भजन सोपोरी
C.राहुल शर्मा
D.अभय रुस्तम सोपोरी

उत्तर (Ans): A. पंडित सतीश व्यास (Satish Vyas)

व्याख्या (Explanation): पंडित सतीश व्यास भारत के एक वयोवृद्ध संतूर वादक हैं। वे महान हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित सी. आर. व्यास के पुत्र हैं। सतीश व्यास ने संतूर की शिक्षा संतूर के मसीहा पंडित शिवकुमार शर्मा से प्राप्त की। उनके वादन में गायकी अंग और संतूर की उत्कृष्ट वादन शैली का अद्भुत मिश्रण दिखाई देता है। उन्होंने पूरी दुनिया में भारतीय संगीत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 'तानसेन सम्मान' और वर्ष 2021 में देश के प्रतिष्ठित 'पद्म श्री' से भी सम्मानित किया गया था।

76कर्नाटक संगीत के उस महान और ऐतिहासिक वायलिन वादक का नाम बताइए जो बचपन में ही अपनी आँखों की रोशनी खो बैठे थे, लेकिन उन्होंने अपनी अलौकिक संगीत प्रतिभा से मैसूर और विजयनगरम के राजदरबारों को मंत्रमुग्ध कर दिया और वायलिन को दक्षिण भारत का मुख्य धारा का वाद्य बनाया?
A.द्वारम वेंकटस्वामी नायडू (Dwaram Venkataswamy Naidu)
B.कुन्नाकुडी वैद्यनाथन
C.टी. एन. कृष्णन
D.लालगुडी जयरामन

उत्तर (Ans): A. द्वारम वेंकटस्वामी नायडू (Dwaram Venkataswamy Naidu)

व्याख्या (Explanation): द्वारम वेंकटस्वामी नायडू (1893-1964) कर्नाटक संगीत के इतिहास में एक अत्यंत पूजनीय और महान वायलिन वादक थे। वे केवल छह वर्ष की आयु में आंशिक रूप से और बाद में पूरी तरह से दृष्टिहीन हो गए थे। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी कड़ी साधना से वायलिन वादन की एक ऐसी कोमल और मंत्रमुग्ध करने वाली शैली विकसित की जिसने दक्षिण भारत में वायलिन की प्रतिष्ठा को बदल दिया। वे विजयनगरम संगीत कॉलेज के प्रोफेसर और प्रिंसिपल रहे। उन्हें वर्ष 1957 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था, जो किसी भी दक्षिण भारतीय संगीतकार के लिए शुरुआती नागरिक सम्मानों में से एक था।

77घटम (Ghatam) वाद्ययंत्र के निर्माण के लिए तमिलनाडु का कौन सा छोटा कस्बा पूरे भारत में सबसे प्रसिद्ध है, जहाँ की विशेष लाल मिट्टी और लोहे के कणों (iron filings) से बने घटमों को सर्वश्रेष्ठ गूंज के लिए जाना जाता है?
A.मानामदुरै (Manamadurai)
B.तंजौर (Tanjore)
C.चिदंबरम (Chidambaram)
D.पुदुक्कोट्टई (Pudukkottai)

उत्तर (Ans): A. मानामदुरै (Manamadurai)

व्याख्या (Explanation): घटम एक मिट्टी का घड़ा होता है, लेकिन यह कोई साधारण घड़ा नहीं होता। तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में स्थित मानामदुरै (Manamadurai) कस्बा घटम निर्माण के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। यहाँ की मिट्टी में विशेष प्राकृतिक गुण होते हैं। घटम को बनाते समय मिट्टी में तांबे, चांदी और लोहे के महीन कण (iron filings) और विशेष रेत मिलाई जाती है। इसे बहुत ही सावधानी से पकाया जाता है जिससे घटम के टूटने का खतरा बहुत अधिक होता है, लेकिन जो घटम बच जाता है, उसकी खनक और गूंज धातु के बर्तनों जैसी तीखी और सुरीली होती है।

78भारत के उस महान संगीतकार का नाम बताइए जिन्हें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में पहली बार 'अकॉस्टिक स्पैनिश गिटार' (Acoustic Guitar) को शास्त्रीय वाद्य के रूप में बजाने का श्रेय दिया जाता है, जिन्होंने पंडित रविशंकर और उस्ताद अली अकबर खान से संगीत सीखा था?
A.पंडित बृज भूषण काबरा (Brij Bhushan Kabra)
B.पंडित विश्व मोहन भट्ट
C.डॉ. कमला शंकर
D.देबाशीष भट्टाचार्य

उत्तर (Ans): A. पंडित बृज भूषण काबरा (Brij Bhushan Kabra)

व्याख्या (Explanation): पंडित बृज भूषण काबरा (1937-2018) भारत के एक अत्यंत क्रांतिकारी संगीतकार थे। गिटार को शास्त्रीय संगीत में लाने का पहला वास्तविक श्रेय उन्हीं को जाता है। उन्होंने पारंपरिक पश्चिमी स्पैनिश अकॉस्टिक गिटार को बिना उसकी मूल बनावट बदले, उसे अपनी गोद में लिटाकर एक धातु की छड़ (slide) की मदद से भारतीय शास्त्रीय रागों के अनुकूल बजाने की तकनीक खोजी। वर्ष 1967 में पंडित हरिप्रसाद चौरसिया (बांसुरी) और पंडित शिवकुमार शर्मा (संतूर) के साथ आया उनका प्रसिद्ध एल्बम 'कॉल ऑफ द वैली' (Call of the Valley) भारतीय संगीत के इतिहास में सबसे अधिक बिकने वाले शास्त्रीय एल्बमों में से एक है।

79कर्नाटक संगीत के सबसे प्रसिद्ध 'वीणा' घरानों में से एक 'कराईकुडी घराने' (Karaikudi Gharana) के उन दो महान भाई-वादकों के नाम क्या हैं, जिन्होंने वीणा वादन की पारंपरिक 'कराईकुडी बानी' को अमर बना दिया?
A.सुब्बारामा अय्यर और साम्बसिव अय्यर
B.चिन्नास्वामी अय्यर और मुथुस्वामी अय्यर
C.शेषाचार्य और राघवाचार्य
D.रामानुज अय्यंगार और श्रीनिवास अय्यंगार

उत्तर (Ans): A. सुब्बारामा अय्यर और साम्बसिव अय्यर

व्याख्या (Explanation): कराईकुडी घराना कर्नाटक संगीत में 'वैणिक' (वीणा वादकों) की एक अत्यंत प्रतिष्ठित और शुद्ध परंपरा है। इस घराने के दो भाई - कराईकुडी सुब्बारामा अय्यर (1883-1936) और कराईकुडी साम्बसिव अय्यर (1888-1958) - इस परंपरा की सातवीं पीढ़ी के महान कलाकार थे। उन्हें "कराईकुडी ब्रदर्स" के नाम से जाना जाता था। उन्होंने वीणा को खड़े होकर बजाने की जगह बैठकर गोद में रखकर बजाने की कठोर शैली को लोकप्रिय बनाया, जिसमें बाएं हाथ की उंगलियों की शुद्ध गति और दाहिने हाथ के कोमल प्रहार पर अत्यधिक ध्यान दिया जाता है।

80तबले के 'बनारस घराने' के उस शीर्ष प्रतिपादक का नाम बताइए जिन्होंने अपने पिता पंडित शारदा सहाय की स्मृति में "पं. शारदा सहाय फाउंडेशन" की स्थापना की और जो वर्तमान में यू.के. (लंदन) को केंद्र बनाकर पूरी दुनिया में बनारस बाज का प्रचार कर रहे हैं?
A.पंडित संजू सहाय (Sanju Sahai)
B.पंडित कुमार बोस
C.पंडित सुखविंदर सिंह 'पिंकी'
D.पंडित अनोखेलाल मिश्र

उत्तर (Ans): A. पंडित संजू सहाय (Sanju Sahai)

व्याख्या (Explanation): पंडित संजू सहाय (जन्म 1970) बनारस घराने के वर्तमान समय के सबसे प्रखर और ऊर्जावान तबला वादकों में से एक हैं। वे बनारस घराने के संस्थापक पंडित राम सहाय के सीधे वंशज और महान तबला गुरु पंडित शारदा सहाय के पुत्र व शिष्य हैं। संजू सहाय अपनी बेजोड़ गति, स्पष्ट ध्वनि और बनारस घराने की कठिन परन व तिहाइयों को बजाने में माहिर हैं। वे वर्तमान में लंदन (U.K.) में रहते हैं और वहां रॉयल कॉलेज ऑफ म्यूजिक सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में तबला वादन और भारतीय लयकारी का अध्यापन कर रहे हैं।

81उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के उस प्रतिभावान छोटे भाई का नाम बताइए जो एक विश्व प्रसिद्ध 'पर्कशनिस्ट' (Percussionist) और संगीतकार हैं, जिन्होंने भारतीय संगीत में अफ्रीकी वाद्य 'डीजेंबे' (Djembe) और लैटिन वाद्ययंत्रों को मिलाकर एक नई फ्यूजन शैली का विकास किया?
A.तौफीक कुरैशी (Taufiq Qureshi)
B.फजल कुरैशी
C.शाकिर खान
D.साबरी खान

उत्तर (Ans): A. तौफीक कुरैशी (Taufiq Qureshi)

व्याख्या (Explanation): तौफीक कुरैशी (जन्म 1962) भारत के एक अत्यंत आधुनिक और प्रशंसित लयकार (percussionist) हैं। वे तबला सम्राट उस्ताद अल्ला रक्खा के सबसे छोटे पुत्र और उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के भाई हैं। हालांकि उन्होंने पारंपरिक तबले की भी शिक्षा ली, लेकिन उन्होंने अपनी एक अलग राह चुनी। उन्होंने अफ्रीकी ढोल 'डीजेंबे' (Djembe) पर तबले के बोलों को बजाने की एक नई अनूठी तकनीक विकसित की। वे भारतीय सिनेमा में बैकग्राउंड स्कोर और फ्यूजन बैंड 'सूर्या' के माध्यम से संगीत की दुनिया में एक बड़ा नाम हैं।

82कर्नाटक संगीत के उस महान 'मृदंगम' वादक का नाम बताइए जिन्हें "मृदंगम का भीष्म पितामह" भी कहा जाता था, जिन्होंने पालघाट मणि अय्यर के साथ एक ही दौर में मंच साझा किया और जो अपनी अत्यंत सूक्ष्म गणितीय लयकारी के लिए प्रसिद्ध थे?
A.पालघाट रघु (Palghat Raghu)
B.तंजौर उपेन्द्रन
C.उमायलपुरम के. शिवरामन
D.मदुरै टी. श्रीनिवासन

उत्तर (Ans): A. पालघाट रघु (Palghat Raghu)

व्याख्या (Explanation): पालघाट रघु (1928-2009) कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में मृदंगम के सबसे जादुई और सम्मानित गुरुओं में से एक थे। उन्होंने पालघाट सुब्बू अय्यर से मृदंगम सीखा। पालघाट रघु का वादन अपनी जटिल गणितीय गणनाओं, तीव्र गति और गायक के भावों के साथ बिल्कुल सटीक संगति के लिए जाना जाता था। उन्होंने उस्ताद ज़ाकिर हुसैन, पंडित रविशंकर और विदुषी एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी जैसे संगीत के दिग्गजों के साथ अनगिनत ऐतिहासिक प्रस्तुतियां दीं। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

83पश्चिम बंगाल के 'विष्णुपुर घराने' (Bishnupur Gharana) से संबंध रखने वाले उस महान सितार वादक का नाम बताइए जो अपनी गंभीर आलापचारी और द्रुत झाला वादन के लिए प्रसिद्ध हैं, और जिन्हें वर्ष 2011 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था?
A.पंडित मणिलाल नाग (Manilal Nag)
B.पंडित कार्तिक कुमार
C.पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी
D.पंडित देबू चौधरी

उत्तर (Ans): A. पंडित मणिलाल नाग (Manilal Nag)

व्याख्या (Explanation): पंडित मणिलाल नाग (जन्म 1939) विष्णुपुर घराने के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और वरिष्ठ सितार वादक हैं। विष्णुपुर घराना बंगाल का एकमात्र घराना है जो ध्रुपद शैली के गायन और वादन के लिए प्रसिद्ध है। मणिलाल नाग ने अपने पिता पंडित गोकुल चंद्र नाग से सितार सीखा। उनके वादन में ध्रुपद अंग का आलाप और सितार की जटिल गत-तोड़े की कला साफ दिखाई देती है। उन्हें संगीत के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए वर्ष 2020 में भारत सरकार द्वारा 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया था।

84मैसूर पैलेस के दरबारी संगीतकार रहे उस प्रसिद्ध 'वैणिक' (Veena player) का नाम बताइए जिन्होंने मैसूर वीणा वादन शैली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया और जिन्होंने अपनी वीणा पर बिना मिजराब के कोमल उंगलियों से बजाने की अनोखी तकनीक विकसित की?
A.मैसूर वी. दोरईस्वामी अय्यंगार (V. Doreswamy Iyengar)
B.कराईकुडी साम्बसिव अय्यर
C.चिता बाबू
D.एस. बालचंदर

उत्तर (Ans): A. मैसूर वी. दोरईस्वामी अय्यंगार (V. Doreswamy Iyengar)

व्याख्या (Explanation): मैसूर वी. दोरईस्वामी अय्यंगार (1920-1997) कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के सबसे प्रख्यात वीणा वादकों में से एक थे। वे मैसूर के महाराजा कृष्णराज वोडेयार चतुर्थ के दरबार के मुख्य संगीतकार थे। उनकी वीणा वादन शैली (मैसूर बानी) की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे वीणा पर तारों को बजाने के लिए किसी कृत्रिम तार की अंगूठी (मिजराब) का प्रयोग करने की जगह सीधे उंगलियों के पोरों से बजाते थे, जिससे वीणा की आवाज बेहद कोमल, मधुर और गहरी गूंज वाली उत्पन्न होती थी। उन्हें पद्म भूषण और संगीत कलानिधि पुरस्कारों से नवाजा गया था।

85भारत के उस महान 'पखावाज' गुरु का नाम बताइए जो पंडित कुदऊ सिंह घराने के सबसे प्रखर जीवित स्तंभ माने जाते हैं, जिन्होंने कथक नर्तकों के साथ संगत की प्राचीन परंपरा को जीवित रखा है और जिन्हें वर्ष 2012 में पद्म श्री मिला?
A.पंडित तोताराम शर्मा (Totaram Sharma)
B.पंडित भवानी शंकर
C.पंडित रामाशीष पाठक
D.नानासाहेब पानसे

उत्तर (Ans): A. पंडित तोताराम शर्मा (Totaram Sharma)

व्याख्या (Explanation): पंडित तोताराम शर्मा भारत के सबसे प्रतिष्ठित और वरिष्ठ पखावाज वादकों व गुरुओं में से एक हैं। वे पखावाज के प्रसिद्ध 'कुदऊ सिंह घराने' से संबंध रखते हैं और उन्होंने पंडित बाबूलाल शर्मा से दीक्षा ली। तोताराम शर्मा कथक नृत्य के साथ पखावाज की संगत करने की प्राचीन शास्त्रीय कला के सबसे बड़े विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने कला के प्रचार-प्रसार के लिए सैकड़ों शिष्यों को तैयार किया है। उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2012 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

86दिल्ली घराने के उस ऐतिहासिक 'सारंगी' वादक का नाम बताइए जो सारंगी वादन के इतने महान गुरु थे कि उनके बारे में कहा जाता था कि वे अपनी सारंगी को एक ही सुर में बांधकर सैकड़ों रागों के स्वरों को केवल अपनी अंगुलियों के जादुई स्पर्श से निकाल देते थे?
A.उस्ताद बुंदू खान (Bundu Khan)
B.उस्ताद शकूर खान
C.उस्ताद साबरी खान
D.पंडित राम नारायण

उत्तर (Ans): A. उस्ताद बुंदू खान (Bundu Khan)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद बुंदू खान (1880-1955) भारतीय संगीत के इतिहास के सबसे महान सारंगी वादकों में से एक थे। वे तबले और सारंगी के प्रसिद्ध दिल्ली घराने से संबंध रखते थे। बुंदू खान ने सारंगी वादन में कई अभूतपूर्व प्रयोग किए। उनकी उंगलियों की गति और सुरों पर नियंत्रण इतना सटीक था कि वे सारंगी पर कठिन से कठिन तान और मुर्कियां बेहद आसानी से निकाल लेते थे। उन्होंने सारंगी वादन पर एक प्रसिद्ध पुस्तक 'संगीत विवेक दर्पण' भी लिखी थी। देश के विभाजन के बाद वे पाकिस्तान चले गए थे।

87हिंदुस्तानी वायलिन वादन में 'राग वर्गीकरण' और 'संगीत अध्यापन' के लिए जाने जाने वाले किस महान वादक ने प्रसिद्ध राग 'जोगिया' और 'जोग' के मिश्रण से एक नए राग का विकास किया था?
A.पंडित वी. जी. जोग
B.डॉ. एन. राजम
C.पंडित डी. के. दातार
D.लालगुडी जयरामन

उत्तर (Ans): A. पंडित वी. जी. जोग

व्याख्या (Explanation): पंडित वी. जी. जोग (विष्णु गोविंद जोग) ने अपनी वायलिन साधना के दौरान हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में कई महत्वपूर्ण रागों का सृजन और प्रचार किया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में अपने अभिनव प्रयोगों के लिए कई प्रसिद्ध रागों की संगति तैयार की। वायलिन को भारत के घर-घर में लोकप्रिय बनाने और आकाशवाणी के माध्यम से शास्त्रीय धुनों को आम जनता तक पहुँचाने में उनका योगदान अतुलनीय है।

88कर्नाटक संगीत के इतिहास में 'मृदंगम' वादन के उस महान भीष्म पितामह का नाम बताइए जिन्होंने लगातार ७ दशकों से अधिक समय तक मृदंगम बजाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया, और जिन्हें पद्म श्री व संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला है?
A.डॉक्टर टी. के. मूर्ति (T. K. Murthy)
B.उमायलपुरम के. शिवरामन
C.पालघाट मणि अय्यर
D.तंजौर उपेन्द्रन

उत्तर (Ans): A. डॉक्टर टी. के. मूर्ति (T. K. Murthy)

व्याख्या (Explanation): डॉक्टर टी. के. मूर्ति (जन्म 1924) कर्नाटक संगीत के इतिहास के सबसे वरिष्ठ और महानतम मृदंगम वादकों में से एक हैं। उन्होंने मात्र 9 वर्ष की आयु से मृदंगम बजाना शुरू किया और वे महान संगीतज्ञ तंजौर वैद्यनाथ अय्यर के प्रिय शिष्य थे। उन्होंने एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी, जी. एन. बालासुब्रमण्यम और मदुरै मणि अय्यर जैसे संगीत के इतिहास के स्वर्ण युग के लगभग सभी दिग्गजों के साथ संगत की। उनके नाम सबसे लंबे समय तक सक्रिय मृदंगम वादन का रिकॉर्ड है।

89कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में इलेक्ट्रिक गिटार (Electric Guitar) जैसे पूर्णतः आधुनिक पश्चिमी वाद्ययंत्र को मुख्यधारा के राग वादन में ढालने वाले और "गिटार प्रसन्ना" के नाम से प्रसिद्ध वैश्विक वादक कौन हैं?
A.आर. प्रसन्ना (R. Prasanna)
B.यू. श्रीनिवास
C.कादरी गोपालनाथ
D.आर. के. सूर्य नारायण

उत्तर (Ans): A. आर. प्रसन्ना (R. Prasanna)

व्याख्या (Explanation): आर. प्रसन्ना (जिन्हें गिटार प्रसन्ना के नाम से जाना जाता है) दुनिया के पहले ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने पूरी तरह से पश्चिमी और आधुनिक वाद्ययंत्र 'इलेक्ट्रिक गिटार' पर कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के गमक, आलाप और जटिल रागों को शुद्धता के साथ बजाने की तकनीक खोज ली थी। वे प्रसिद्ध गिटार वादक और संगीतकार हैं जिन्होंने भारतीय संगीत को रॉक, जैज और मेटल के साथ मिलाकर एक नया आयाम दिया। वे बर्कली कॉलेज ऑफ म्यूजिक, बोस्टन से स्नातक हैं और संगीत की दुनिया में एक बड़ा नाम हैं।

90भारतीय शास्त्रीय संगीत के उस अनूठे और विलक्षण 'सव्यसाची' (द्वि-मुखी) कलाकार का नाम बताइए जो तबले के 'फर्रुखाबाद घराने' के एक शीर्ष तबला वादक होने के साथ-साथ 'मैहर घराने' के एक अत्यंत सुरीले सितार वादक भी हैं?
A.पंडित नयन घोष (Nayan Ghosh)
B.पंडित कुमार बोस
C.पंडित अनिंदो चटर्जी
D.पंडित स्वप्न चौधरी

उत्तर (Ans): A. पंडित नयन घोष (Nayan Ghosh)

व्याख्या (Explanation): पंडित नयन घोष (जन्म 1956) भारतीय संगीत जगत के एक अत्यंत विस्मयकारी और अनूठे कलाकार हैं। वे एक ही समय में दो अलग-अलग वाद्ययंत्रों - तबला और सितार - पर पूर्ण महारत रखने वाले देश के एकमात्र कलाकार हैं। उन्होंने तबले की शिक्षा अपने पिता, महान तबला गुरु पंडित ज्ञान प्रकाश घोष से फर्रुखाबाद घराने की शुद्ध शैली में ली, और सितार की शिक्षा मैहर घराने के उस्ताद अली अकबर खान और पंडित रविशंकर की परंपरा में प्राप्त की। वे दोनों वाद्यों के स्वतंत्र एकल (solo) वादन के लिए जाने जाते हैं।

91प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के उस प्रख्यात भतीजे और शिष्य का नाम बताइए जिन्होंने फरवरी 2024 में आयोजित 66वें ग्रैमी अवार्ड्स में अपने एल्बम 'As We Speak' और गीत 'Pashto' के लिए दो प्रतिष्ठित ग्रैमी पुरस्कार जीतकर भारत का मान वैश्विक स्तर पर बढ़ाया है?
A.पंडित तरुण भट्टाचार्य
B.राकेश चौरसिया (Rakesh Chaurasia)
C.रोनू मजूमदार
D.शशांक सुब्रमण्यम

उत्तर (Ans): B. राकेश चौरसिया (Rakesh Chaurasia)

व्याख्या (Explanation): राकेश चौरसिया (जन्म 13 जनवरी 1971) भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक अत्यंत प्रतिष्ठित बांसुरी वादक हैं। वे महान बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के भतीजे और शिष्य हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में महान अमेरिकी गिटार वादक बेला फ्लेक, डबल बास वादक एडगर मेयर और तबला सम्राट उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के साथ मिलकर बनाए गए एल्बम 'As We Speak' के लिए दो ग्रैमी पुरस्कार जीते हैं—पहला 'बेस्ट कंटेंपरेरी इंस्ट्रूमेंटल एल्बम' श्रेणी में और दूसरा गीत 'Pashto' के लिए 'बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक परफॉर्मेंस' श्रेणी में। उन्हें वर्ष 2017 में 'इंडियन ऑफ द ईयर' पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

92भारतीय संगीत जगत में नव-फ्यूजन (Neo-Fusion) के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले उस प्रख्यात तबला वादक और संगीतकार का नाम बताइए जिन्होंने प्रसिद्ध 'रिदमस्केप' (Rhythmscape) बैंड की स्थापना की और जिन्होंने पंडित रविशंकर के साथ कई ऐतिहासिक मंचों पर संगत की थी?
A.पंडित बिक्रम घोष (Bickram Ghosh)
B.पंडित तौफीक कुरैशी
C.पंडित कुमार बोस
D.पंडित स्वप्न चौधरी

उत्तर (Ans): A. पंडित बिक्रम घोष (Bickram Ghosh)

व्याख्या (Explanation): पंडित बिक्रम घोष (जन्म 1966) भारत के सबसे अभिनव और प्रसिद्ध तबला वादकों व संगीत निर्देशकों में से हैं। वे महान तबला वादक पंडित शंकर घोष के पुत्र और शिष्य हैं। उन्होंने लगभग एक दशक तक सितार सम्राट पंडित रविशंकर के साथ दुनिया भर में संगत की थी। बिक्रम घोष ने वर्ष 2001 में प्रसिद्ध इंडो-फ्यूजन बैंड 'रिदमस्केप' (Rhythmscape) की स्थापना की, जो शास्त्रीय संगीत, रॉक और न्यू-एज संगीत के अनूठे संगम के लिए जाना जाता है। उन्होंने जॉर्ज हैरिसन के प्रसिद्ध एल्बम 'Brainwashed' और पंडित रविशंकर के 'Full Circle' (जो ग्रैमी विजेता एल्बम था) सहित कई वैश्विक परियोजनाओं में अपना योगदान दिया है।

93'मोहन वीणा' के आविष्कारक और ग्रैमी पुरस्कार विजेता पंडित विश्व मोहन भट्ट के उस प्रतिभावान पुत्र का नाम बताइए जिन्होंने गिटार की बनावट में अभिनव परिवर्तन करके 'सात्विक वीणा' (Satvik Veena) नामक एक नए शास्त्रीय वाद्ययंत्र का विकास किया है?
A.सलिल भट्ट (Salil Bhatt)
B.सौरभ भट्ट
C.सागर भट्ट
D.देबाशीष भट्टाचार्य

उत्तर (Ans): A. सलिल भट्ट (Salil Bhatt)

व्याख्या (Explanation): सलिल भट्ट अपने पिता पंडित विश्व मोहन भट्ट की विरासत को आगे बढ़ाने वाले एक अत्यंत प्रखर और अभिनव शास्त्रीय वादक हैं। उन्होंने गिटार और वीणा के तत्वों को मिलाकर एक नए वाद्ययंत्र 'सात्विक वीणा' (Satvik Veena) का आविष्कार किया है। सात्विक वीणा अपनी गहरी गूंज, तीखे आलाप और लंबे समय तक बने रहने वाले सुर (sustain) के लिए विख्यात है। सलिल भट्ट कनाडा के प्रतिष्ठित 'जुनो अवार्ड' (Juno Award) के लिए नामांकित होने वाले पहले भारतीय वादक हैं और वे दुनिया भर में 'सात्विक वीणा' के एकल वादन के माध्यम से भारतीय संगीत का प्रचार कर रहे हैं।

94भारत के उस महान और ऐतिहासिक सारंगी वादक का नाम बताइए जो 'किराना घराने' के एक अत्यंत प्रतिष्ठित स्तंभ थे, जिन्होंने संगीत की जटिलताओं को सुलझाकर सारंगी वादन की एक अनूठी शैली विकसित की और जिनके पुत्र कमाल साबरी भी एक प्रसिद्ध सारंगी वादक हैं?
A.उस्ताद साबरी खान (Sabri Khan)
B.उस्ताद शकूर खान
C.उस्ताद सुल्तान खान
D.उस्ताद बुंदू खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद साबरी खान (Sabri Khan)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद साबरी खान (1927-2015) किराना घराने के एक अत्यंत पूजनीय सारंगी वादक थे। वे उस्ताद मसीत खान और उस्ताद हाजी विलायत अली खान के वंशज थे। साबरी खान ने सारंगी पर शास्त्रीय संगीत के 'गायन अंग' को अद्भुत कोमलता और शुद्धता के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत और विदेशों (जैसे अमेरिका, यूरोप) में सारंगी के प्रचार के लिए कई कार्यशालाएं आयोजित कीं। उनके संगीत के योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण (2006) और पद्म श्री (1992) से सम्मानित किया गया था। उनके पुत्र कमाल साबरी उनकी इस सातवीं पीढ़ी की परंपरा को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं।

95भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में 'सरोद' वाद्ययंत्र पर पूर्ण व्यावसायिक महारत हासिल करने वाली और भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर (विशेषकर आर. डी. बर्मन और नौशाद जैसे दिग्गजों के साथ) में बड़े पैमाने पर सरोद वादन करने वाली देश की पहली प्रसिद्ध पारसी महिला सरोद वादिका कौन थीं?
A.जरीन दारूवाला शर्मा (Zarin Daruwala Sharma)
B.शरण रानी
C.अरुणा नारायण
D.सुकन्या रामगोपाल

उत्तर (Ans): A. जरीन दारूवाला शर्मा (Zarin Daruwala Sharma)

व्याख्या (Explanation): जरीन दारूवाला शर्मा (1946-2014) भारत की एक महान और ऐतिहासिक सरोद वादिका थीं। वे देश की पहली पारसी महिला थीं जिन्होंने सरोद जैसे कठिन और पुरुष-प्रधान वाद्ययंत्र पर पूर्ण महारत हासिल की। उन्होंने पंडित हरिप्रसाद चौरसिया और पंडित वी. जी. जोग जैसे दिग्गजों के साथ जुगलबंदियां प्रस्तुत कीं। शास्त्रीय मंचों के अलावा, जरीन ने बॉलीवुड के सुनहरे दौर की सैकड़ों फिल्मों के बैकग्राउंड स्कोर और गीतों में सरोद बजाया। वे संगीतकार आर. डी. बर्मन, नौशाद और मदन मोहन की पसंदीदा सरोद वादिका थीं।

96कर्नाटक संगीत के इतिहास में 'मृदंगम' वादन के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए वर्ष 1966 में मद्रास संगीत अकादमी का सर्वोच्च सम्मान "संगीत कलानिधि" (Sangeet Kalanidhi) प्राप्त करने वाले इतिहास के पहले मृदंगम वादक कौन थे?
A.पालघाट मणि अय्यर (Palghat Mani Iyer)
B.उमायलपुरम के. शिवरामन
C.पालघाट रघु
D.डॉक्टर टी. के. मूर्ति

उत्तर (Ans): A. पालघाट मणि अय्यर (Palghat Mani Iyer)

व्याख्या (Explanation): पालघाट टी. एस. मणि अय्यर (1912-1981) कर्नाटक संगीत इतिहास के सबसे महान और प्रभावशाली मृदंगम वादकों में से एक थे। वे पहले ऐसे मृदंगम वादक थे जिन्हें मद्रास संगीत अकादमी द्वारा प्रतिष्ठित 'संगीत कलानिधि' पुरस्कार (1966) प्रदान किया गया था। उनसे पहले यह सम्मान मुख्य रूप से केवल गायकों या वीणा वादकों को ही मिलता था। मणि अय्यर ने मृदंगम बजाने की कला में कई क्रांतिकारी सुधार किए, जैसे कि गायक के सुर के साथ सटीक संवाद स्थापित करना और जटिल गणितीय तालों को कोमलता से प्रस्तुत करना। उन्हें पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

97भारतीय स्लाइड गिटार (Indian Slide Guitar) के क्षेत्र में उस वैश्विक अग्रणी कलाकार का नाम बताइए जिन्होंने 'चतुरंगुई' (Chaturangui), 'गांधर्वी' (Gandharvi) और 'आनंदी' (Anandi) नामक तीन क्रांतिकारी और अनूठे स्लाइड गिटार यंत्रों का आविष्कार किया है?
A.देबाशीष भट्टाचार्य (Debashish Bhattacharya)
B.पंडित विश्व मोहन भट्ट
C.सलिल भट्ट
D.पंडित बृज भूषण काबरा

उत्तर (Ans): A. देबाशीष भट्टाचार्य (Debashish Bhattacharya)

व्याख्या (Explanation): पंडित देबाशीष भट्टाचार्य (जन्म 1963) भारत के एक अत्यंत क्रांतिकारी स्लाइड गिटार वादक, संगीतकार और इनोवेटर हैं। उन्होंने हवाईयन स्पैनिश गिटार को भारतीय शास्त्रीय रागों के पूर्णतः अनुकूल बनाने के लिए तीन विशेष गिटारों का आविष्कार किया: 1) चतुरंगुई (24 तारों वाला छह-तरब गिटार), 2) गांधर्वी (14 तारों वाला गिटार), और 3) आनंदी (एक छोटा 4-तारों वाला स्लाइड गिटार)। वे उस्ताद अली अकबर खान के शिष्य रहे हैं। उनके एल्बम 'कलकत्ता क्रॉनिकल' को वर्ष 2009 में ग्रैमी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।

98कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में "वायलिन जोड़ी" (Violin Duo) के रूप में विख्यात उन दो सगे भाइयों के नाम क्या हैं, जिन्होंने अपनी अनूठी जुगलबंदी से पूरी दुनिया में सनसनी फैलाई और जिन्हें वायलिन वादन की एक अत्यंत गतिशील शैली विकसित करने का श्रेय दिया जाता है?
A.गणेश और कुमारेसन (Ganesh & Kumaresh)
B.लालगुडी कृष्णन और लालगुडी विजयलक्ष्मी
C.कुन्नाकुडी वैद्यनाथन और एम. एस. गोपालकृष्णन
D.टी. एन. कृष्णन और श्रीराम परशुराम

उत्तर (Ans): A. गणेश और कुमारेसन (Ganesh & Kumaresh)

व्याख्या (Explanation): गणेश और कुमारेसन (Ganesh and Kumaresh) कर्नाटक संगीत जगत की सबसे प्रसिद्ध समकालीन वायलिन जोड़ी हैं। इन दोनों भाइयों ने बचपन से ही (बाल कौतुक के रूप में) अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। वे अपने वायलिन वादन में शास्त्रीय शुद्धता को बनाए रखते हुए पश्चिमी संगीत, जैज और फ्यूजन के तत्वों को बहुत ही खूबसूरती से जोड़ते हैं। उन्होंने संगीत की दुनिया में "प्रणव" नामक एक नई वायलिन शैली का विकास किया है। उन्हें भारत और विदेशों के कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

99कश्मीर के प्रसिद्ध सूफियाना घराने से संबंध रखने वाले उस युवा संतूर वादक का नाम बताइए जो दिवंगत संतूर उस्ताद पंडित भजन सोपोरी के पुत्र हैं, जिन्होंने बहुत कम उम्र में 'SaMaPa' संगीत अकादमी की बागडोर संभाली और संतूर पर सूफियाना और हिंदुस्तानी शैली का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रहे हैं?
A.अभय रुस्तम सोपोरी (Abhay Rustum Sopori)
B.राहुल शर्मा
C.सतीश व्यास
D.तरुण भट्टाचार्य

उत्तर (Ans): A. अभय रुस्तम सोपोरी (Abhay Rustum Sopori)

व्याख्या (Explanation): अभय रुस्तम सोपोरी (जन्म 1979) कश्मीर के प्राचीन सोपोरी सूफियाना घराने की 10वीं पीढ़ी के प्रखर संतूर वादक और संगीतकार हैं। वे महान संतूर वादक पंडित भजन सोपोरी के पुत्र और शिष्य हैं। उन्होंने अपने पिता की संगीत अकादमी 'SaMaPa' (Sopori Academy of Music and Performing Arts) के माध्यम से देश भर में शास्त्रीय और लोक संगीत के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अभय सोपोरी को प्रतिष्ठित 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार' और कई अन्य राज्य व राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

100प्रसिद्ध अमेरिकी रॉक बैंड 'द ग्रेटफुल डेड' (The Grateful Dead) के ड्रमर मिकी हार्ट (Mickey Hart) द्वारा वर्ष 1991 में तैयार किए गए ऐतिहासिक एल्बम "प्लैनेट ड्रम" (Planet Drum) के लिए ग्रैमी पुरस्कार जीतने वाले प्रसिद्ध घटम वादक कौन थे, जिन्होंने उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के साथ इस विश्व प्रसिद्ध ताल-परियोजना में भाग लिया था?
A.टी. एच. विनायकराम (Vikku Vinayakram)
B.वी. सेल्वागणेश
C.उमायलपुरम के. शिवरामन
D.जी. हरिशंकर

उत्तर (Ans): A. टी. एच. विनायकराम (Vikku Vinayakram)

व्याख्या (Explanation): टी. एच. विनायकराम (जिन्हें आदरपूर्वक 'विकू' कहा जाता है) भारत के एक महान घटम वादक हैं। वर्ष 1991 में मिकी हार्ट (Mickey Hart) के नेतृत्व में बने वैश्विक ताल-वाद्य एल्बम 'प्लैनेट ड्रम' (Planet Drum) में उन्होंने और उस्ताद ज़ाकिर हुसैन ने भारतीय तालवादकों का प्रतिनिधित्व किया था। इस एल्बम को वर्ष 1991 में 'सर्वश्रेष्ठ विश्व संगीत एल्बम' (Best World Music Album) की श्रेणी में पहला ग्रैमी पुरस्कार मिला था। इसके साथ ही विकू विनायकराम घटम जैसे मिट्टी के घड़े को बजाकर ग्रैमी पुरस्कार जीतने वाले पहले दक्षिण भारतीय संगीतकार बने थे।

101हिंदुस्तानी वायलिन वादन की महान स्तंभ पद्म भूषण डॉ. एन. राजम (N. Rajam) की उन दो पोतियों (Granddaughters) के नाम क्या हैं, जो अपनी मां संगीता शंकर की देखरेख में वायलिन वादन की 'तीन पीढ़ियों' की समृद्ध 'परंपरा' को पूरी दुनिया के शास्त्रीय मंचों पर प्रस्तुत कर रही हैं?
A.रागिनी शंकर और नंदिनी शंकर (Ragini & Nandini Shankar)
B.कला रामनाथ और अरुणा नारायण
C.हर्षिता रामनाथ और सुकन्या रामगोपाल
D.अनुराधा श्रीराम और लालगुडी विजयलक्ष्मी

उत्तर (Ans): A. रागिनी शंकर और नंदिनी शंकर (Ragini & Nandini Shankar)

व्याख्या (Explanation): रागिनी शंकर और नंदिनी शंकर भारतीय शास्त्रीय संगीत (वायलिन वादन) की नई पीढ़ी की दो अत्यंत प्रतिभाशाली बहनें हैं। वे वायलिन की विश्व प्रसिद्ध विदुषी डॉ. एन. राजम की पोतियां और प्रसिद्ध वायलिन वादिका संगीता शंकर की पुत्रियां हैं। ये दोनों बहनें अपनी नानी और मां के साथ मिलकर 'थ्री जनरेशन्स ऑफ वायलिन' (Three Generations of Violin) के अंतर्गत मंच साझा करती हैं। उनके वादन में बनारस घराने की शुद्ध गायकी शैली (Gayaki Ang) की गहरी छाप दिखाई देती है, जो वायलिन को इंसानी कंठ की तरह मधुर बनाती है।

102तबले के प्रसिद्ध 'पंजाब घराने' के उस शीर्ष और ऊर्जावान तबला वादक का नाम बताइए जो बनारस घराने के महान उस्ताद पंडित किशन महाराज के शिष्य बने और जो अपनी प्रचंड गति, कठिन तिहाइयों और बेजोड़ संगति के कारण संगीत जगत में 'पिंकी' (Pinky) उपनाम से विख्यात हैं?
A.पंडित सुखविंदर सिंह 'पिंकी' (Sukhvinder Singh Pinky)
B.पंडित संजू सहाय
C.पंडित कुमार बोस
D.पंडित नयन घोष

उत्तर (Ans): A. पंडित सुखविंदर सिंह 'पिंकी' (Sukhvinder Singh Pinky)

व्याख्या (Explanation): पंडित सुखविंदर सिंह 'पिंकी' (जन्म 1965) भारत के सबसे गतिशील और ऊर्जावान तबला वादकों में से एक हैं। यद्यपि वे जन्म से पंजाब घराने की परंपराओं से जुड़े थे, लेकिन उन्होंने बनारस घराने के कालजयी तबला सम्राट पंडित किशन महाराज से संगीत की गहन दीक्षा प्राप्त की। उनके वादन में पंजाब घराने के खुले बोल और बनारस घराने की भारी परनों व तिहाइयों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। उन्होंने पंडित रविशंकर, उस्ताद विलायत खान और पंडित जसराज जैसे महान दिग्गजों के साथ अनगिनत ऐतिहासिक प्रस्तुतियां दी हैं।

103प्रसिद्ध सितार वादक उस्ताद विलायत खान के उस दादा का नाम क्या था, जिन्हें 'इमदादखानी घराने' (इटावा घराना) का मुख्य स्तंभ और सितार पर 'सुरबहार' वादन को नए आयाम देने के लिए इतिहास में एक महान संगीत ऋषि माना जाता है?
A.उस्ताद इमदाद खान (Imdad Khan)
B.उस्ताद इनायत खान
C.उस्ताद साहिबदाद खान
D.उस्ताद सुजात खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद इमदाद खान (Imdad Khan)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद इमदाद खान (1848-1920) भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में सितार और सुरबहार के सबसे प्रभावशाली वादकों में से एक थे। वे इटावा (इमदादखानी) घराने के संस्थापक खलीफा थे और उस्ताद इनायत खान के पिता व उस्ताद विलायत खान के दादा थे। उन्होंने सितार वादन में 'गायकी अंग' (Vocal style) के प्रारंभिक तत्वों को शामिल किया। उस्ताद इमदाद खान मैसूर, इंदौर और हैदराबाद के राजदरबारों के मुख्य संगीतकार रहे थे। उनके नाम पर ही इस इटावा घराने को 'इमदादखानी घराना' भी कहा जाता है।

104शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के उस प्रिय शिष्य और दत्तक पुत्री (Adopted Daughter) का नाम बताइए, जिन्हें बिस्मिल्लाह खान के साथ संसद भवन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष (Central Hall) में शहनाई वादन करने वाली देश की पहली महिला शास्त्रीय गायिका होने का गौरव प्राप्त है?
A.डॉ. सोमा घोष (Dr. Soma Ghosh)
B.अरुणा नारायण
C.ज्योति हेगड़े
D.सुकन्या रामगोपाल

उत्तर (Ans): A. डॉ. सोमा घोष (Dr. Soma Ghosh)

व्याख्या (Explanation): डॉ. सोमा घोष बनारस घराने की एक अत्यंत सम्मानित शास्त्रीय गायिका हैं। वे भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की मानस पुत्री और शिष्या थीं। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के जीवन के अंतिम वर्षों में सोमा घोष ने उनके साथ जुगलबंदी के रूप में कई ऐतिहासिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वे पहली ऐसी महिला कलाकार हैं जिन्होंने उस्ताद के साथ भारतीय संसद के ऐतिहासिक 'सेंट्रल हॉल' में शहनाई और गायन की जुगलबंदी पेश की थी। उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2016 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

105कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के उस असाधारण और जादुई वायलिन वादक का नाम बताइए जो जॉन मैकलॉघलिन के साथ मिलकर बनाए गए प्रसिद्ध फ्यूजन बैंड 'शक्ति' (Shakti) के सह-संस्थापक थे, और जिन्होंने केवल 'दस तारों वाले डबल-नेक वायलिन' (10-stringed Double-neck Violin) का आविष्कार किया?
A.एल. शंकर (L. Shankar)
B.डॉ. एल. सुब्रमण्यम
C.लालगुडी जयरामन
D.कुन्नाकुडी वैद्यनाथन

उत्तर (Ans): A. एल. शंकर (L. Shankar)

व्याख्या (Explanation): लक्ष्मणनारायण शंकर (जिन्हें एल. शंकर के नाम से जाना जाता है, जन्म 1950) एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय वायलिन वादक और संगीतकार हैं। वे डॉ. एल. सुब्रमण्यम के भाई हैं। एल. शंकर ने वर्ष 1970 के दशक में उस्ताद ज़ाकिर हुसैन और जॉन मैकलॉघलिन के साथ मिलकर 'शक्ति' (Shakti) बैंड की स्थापना की थी। उन्होंने वर्ष 1980 में एक अनोखे 'डबल-नेक वायलिन' (Double-neck Violin) का डिजाइन तैयार किया जिसमें 10 तार होते हैं और यह वायलिन एक साथ बेस (Bass), वायोला (Viola) और सामान्य वायलिन तीनों की ध्वनियों को एक साथ निकालने में सक्षम है।

106मैहर घराने (Maihar Gharana) के उस वयोवृद्ध और आदरणीय सितार वादक का नाम बताइए जो सितार के मसीहा पंडित रविशंकर के सबसे शुरुआती और वरिष्ठतम शिष्यों में से एक रहे हैं, और जिन्हें वर्ष 2016 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 'तानसेन सम्मान' से नवाजा गया था?
A.पंडित कार्तिक कुमार (Kartick Kumar)
B.पंडित प्रतीक चौधरी
C.पंडित मणिलाल नाग
D.पंडित देवव्रत चौधरी

उत्तर (Ans): A. पंडित कार्तिक कुमार (Kartick Kumar)

व्याख्या (Explanation): पंडित कार्तिक कुमार (जन्म 1936) मैहर घराने के एक अत्यंत वरिष्ठ और प्रतिष्ठित सितार वादक हैं। उन्होंने वर्ष 1950 के दशक से ही पंडित रविशंकर से सितार की कठोर दीक्षा लेनी शुरू की थी। उनके वादन में राग की शुद्धता, आलाप की कोमलता और मैहर घराने की पारंपरिक गत-तोड़े की शैली का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। वे मुंबई को केंद्र बनाकर पिछले छह दशकों से सैकड़ों शिष्यों को सितार सिखा रहे हैं। उन्हें वर्ष 2016 में प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय तानसेन सम्मान' से सम्मानित किया गया था।

107संतूर के मसीहा पंडित शिवकुमार शर्मा के उस प्रतिभावान पुत्र का नाम बताइए जो वर्तमान में संतूर वादन की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, और जिन्होंने प्रसिद्ध फ्रांसीसी पियानो वादक रिचर्ड क्लेडरमैन (Richard Clayderman) के साथ मिलकर 'द कौतुक' (The Confluence) जैसे सुपरहिट फ्यूजन एल्बम का निर्माण किया?
A.राहुल शर्मा (Rahul Sharma)
B.अभय सोपोरी
C.सतीश व्यास
D.तरुण भट्टाचार्य

उत्तर (Ans): A. राहुल शर्मा (Rahul Sharma)

व्याख्या (Explanation): राहुल शर्मा (जन्म 1972) भारत के एक अत्यंत आधुनिक और प्रसिद्ध संतूर वादक व फ्यूजन संगीतकार हैं। वे महान संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा के पुत्र और शिष्य हैं। राहुल शर्मा ने संतूर को वैश्विक रॉक, पॉप और जैज संगीत के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने वर्ष 2002 में विश्व प्रसिद्ध फ्रांसीसी पियानो वादक रिचर्ड क्लेडरमैन के साथ मिलकर 'द कॉन्फ्लुएंस' (The Confluence) नामक एल्बम बनाया जो भारत में सबसे अधिक बिकने वाले इंस्ट्रूमेंटल एल्बमों में से एक बन गया।

108इमदादखानी (इटावा) घराने के उस विख्यात सितार और सुरबहार वादक का नाम बताइए जो उस्ताद इमरात खान के पुत्र और उस्ताद सुजात खान के छोटे भाई हैं, और जो वर्तमान में उत्तरी अमेरिका को केंद्र बनाकर सुरबहार वादन की प्राचीन परंपराओं का संरक्षण कर रहे हैं?
A.उस्ताद इरशाद खान (Irshad Khan)
B.उस्ताद शाहिद परवेज
C.उस्ताद निशात खान
D.उस्ताद बहाउद्दीन डागर

उत्तर (Ans): A. उस्ताद इरशाद खान (Irshad Khan)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद इरशाद खान (जन्म 1964) इमदादखानी (इटावा) घराने के एक शीर्ष और विश्व प्रसिद्ध सितार व सुरबहार वादक हैं। वे महान सुरबहार वादक उस्ताद इमरात खान के दूसरे पुत्र हैं। इरशाद खान को बहुत कम उम्र में ही सुरबहार (Bass Sitar) बजाने में महारत हासिल हो गई थी, जिसे संगीत की दुनिया में सबसे कठिन वाद्यों में गिना जाता है। वे वर्तमान में टोरंटो (कनाडा) और न्यूयॉर्क (अमेरिका) में रहकर पश्चिमी देशों के संगीतकारों के साथ कोलाब्रेशन कर रहे हैं और इमदादखानी बाज का प्रचार कर रहे हैं।

109तबले के सबसे प्रसिद्ध घरानों में से एक 'फर्रुखाबाद घराने' की स्थापना का श्रेय किसे दिया जाता है, जो लखनऊ घराने के खलीफा उस्ताद बख्शू खान के दामाद थे और जिन्होंने इस नए बाज का विकास किया?
A.उस्ताद हाजी विलायत अली खान (Haji Vilayat Ali Khan)
B.उस्ताद मसीत खान
C.उस्ताद सिद्धार खान ढाढ़ी
D.उस्ताद मोदू खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद हाजी विलायत अली खान (Haji Vilayat Ali Khan)

व्याख्या (Explanation): तबले के 'फर्रुखाबाद घराने' की स्थापना 19वीं शताब्दी की शुरुआत में 'उस्ताद हाजी विलायत अली खान' ने की थी। वे लखनऊ घराने के महान उस्ताद बख्शू खान के शिष्य और दामाद थे। बख्शू खान ने अपनी पुत्री के विवाह के दहेज के रूप में विलायत अली खान को तबले की कई अत्यंत दुर्लभ और गुप्त बंदिशें (गतें) उपहार में दी थीं। हाजी विलायत अली खान ने इन बंदिशों को मिलाकर फर्रुखाबाद में एक स्वतंत्र घराने की नींव रखी, जो अपनी उत्कृष्ट गत और पेशकार वादन शैली के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है।

110कर्नाटक वायलिन वादन की अमर परंपरा 'लालगुडी बानी' को आगे बढ़ाने वाले उन भाई-बहन के नाम क्या हैं, जो महान संगीतकार लालगुडी जयरामन के पुत्र और पुत्री हैं और वर्तमान में विश्व स्तर पर वायलिन युगल प्रस्तुत करते हैं?
A.लालगुडी जी. जे. आर. कृष्णन और लालगुडी विजयलक्ष्मी
B.श्रीराम परशुराम और अनुराधा श्रीराम
C.लालगुडी कृष्णन और लालगुडी श्रीमथी
D.गणेश और कुमारेसन

उत्तर (Ans): A. लालगुडी जी. जे. आर. कृष्णन और लालगुडी विजयलक्ष्मी

व्याख्या (Explanation): लालगुडी जी. जे. आर. कृष्णन और उनकी बहन लालगुडी विजयलक्ष्मी कर्नाटक संगीत के अत्यंत प्रतिष्ठित वायलिन वादक हैं। वे महान संगीत कलानिधि लालगुडी जयरामन के पुत्र और पुत्री हैं। ये दोनों भाई-बहन अपने पिता द्वारा विकसित की गई 'लालगुडी बानी' (Lalgudi Bani) के सबसे प्रखर जीवित प्रतिनिधि हैं। इस शैली की विशेषता वायलिन पर गायन अंग की कोमलता और राग के भावों की शुद्ध प्रस्तुति है। उन्हें भारत सरकार और विभिन्न संगीत अकादमियों द्वारा कई शीर्ष नागरिक व शास्त्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

111कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में 'मृदंगम' वादन के उस महान दिग्गज का नाम बताइए जिन्होंने शास्त्रीय मृदंगम वादन के साथ-साथ प्रसिद्ध 'श्रुति लय' (Sruthi Laya) नामक ताल-वादक समूह की स्थापना की थी और जिन्होंने पश्चिमी ताल-वादकों के साथ फ्यूजन प्रस्तुत किया?
A.कराईकुडी आर. मणि (Karaikudi R. Mani)
B.पालघाट रघु
C.तंजौर उपेन्द्रन
D.उमायलपुरम के. शिवरामन

उत्तर (Ans): A. कराईकुडी आर. मणि (Karaikudi R. Mani)

व्याख्या (Explanation): कराईकुडी आर. मणि (1945-2023) कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में मृदंगम के सबसे जादुई और सम्मानित उस्तादों में से एक थे। उन्होंने कराईकुडी घराने की पारंपरिक शैली को नया रूप दिया। आर. मणि ने वर्ष 1980 के दशक में 'श्रुति लय' (Sruthi Laya) नामक एक अत्यंत अभिनव ताल-वाद्य समूह (percussion ensemble) की स्थापना की, जिसने पूरी दुनिया में दक्षिण भारतीय ताल पद्धति (तनी आवरणम) को लोकप्रिय बनाया। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई जैज संगीतकारों के साथ ऐतिहासिक फ्यूजन परियोजनाएं भी की थीं।

112कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में केवल ११ वर्ष की आयु में मुख्य बांसुरी वादक के रूप में प्रदर्शन करने वाले उस अद्भुत बाल कौतुक (Child Prodigy) का नाम बताइए जिन्होंने मेवाती घराने के पंडित जसराज से भी संगीत की बारीकियाँ सीखी थीं?
A.शशांक सुब्रमण्यम (Shashank Subramanyam)
B.टी. आर. महालिंगम
C.एन. रमानी
D.सिक्किल सिस्टर्स

उत्तर (Ans): A. शशांक सुब्रमण्यम (Shashank Subramanyam)

व्याख्या (Explanation): शशांक सुब्रमण्यम (जन्म 1978) कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के एक अत्यंत असाधारण बांसुरी वादक हैं। उन्होंने मात्र 11 वर्ष की आयु में वर्ष 1990 में मद्रास संगीत अकादमी में मुख्य कलाकार के रूप में प्रदर्शन करके इतिहास रच दिया था। शशांक ने कर्नाटक संगीत के साथ-साथ हिंदुस्तानी संगीत की बारीकियों को सीखने के लिए मेवाती घराने के महान गायक पंडित जसराज से भी शिक्षा प्राप्त की। उनके वादन में दोनों पद्धतियों का एक अत्यंत सुरीला और गंभीर संगम दिखाई देता है। उन्हें वर्ष 2013 में फ्रांसीसी सरकार द्वारा 'चेवेलियर' (Chevalier) की उपाधि दी गई थी।

113इमदादखानी (इटावा) घराने के वर्तमान समय के सबसे दिग्गज सितार वादक उस्ताद शाहिद परवेज खान के पिता और गुरु कौन थे, जो स्वयं सुरबहार और सितार के एक महान गुरु थे?
A.उस्ताद अजीज खान (Ustad Aziz Khan)
B.उस्ताद विलायत खान
C.उस्ताद इमरात खान
D.उस्ताद वाहिद खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद अजीज खान (Ustad Aziz Khan)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद शाहिद परवेज खान इमदादखानी घराने के एक अत्यंत प्रतिष्ठित सितार वादक हैं। उनके पिता और मुख्य गुरु 'उस्ताद अजीज खान' थे, जो इटावा घराने के महान उस्ताद वाहिद खान के पुत्र थे। अजीज खान ने अपने पुत्र शाहिद परवेज को मात्र 3 वर्ष की आयु से संगीत की बेहद कठोर और वैज्ञानिक दीक्षा देनी शुरू की थी। उनके सिखाने के कठिन तरीकों के कारण ही शाहिद परवेज आज सितार पर बिना किसी प्रयास के मानव कंठ की गमक, मुर्की और द्रुत तानों को शुद्धता से बजाने में सक्षम हैं।

114सरोद सम्राट उस्ताद अमजद अली खान के पिता और गुरु का नाम क्या था, जो ग्वालियर और सेनिया-बंगश घराने के एक अत्यंत पूजनीय सरोद वादक थे और जिन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर को भी प्रभावित किया था?
A.उस्ताद हाफिज अली खान (Hafiz Ali Khan)
B.उस्ताद अलाउद्दीन खान
C.उस्ताद अली अकबर खान
D.उस्ताद सादिक अली खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद हाफिज अली खान (Hafiz Ali Khan)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद हाफिज अली खान (1888-1972) भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास के सबसे महान सरोद वादकों में से एक थे। वे उस्ताद अमजद अली खान के पिता और गुरु थे। हाफिज अली खान ने ग्वालियर दरबार के मुख्य संगीतकार के रूप में कार्य किया। वे सेनिया घराने के अंतिम खलीफा उस्ताद वजीर खान के शिष्य थे। उनके वादन की शुद्धता और गंभीरता इतनी बेजोड़ थी कि वे जिस भी राग को छूते थे, उसमें एक अलौकिक गहराई उत्पन्न हो जाती थी। उन्हें वर्ष 1960 में देश का प्रतिष्ठित 'पद्म भूषण' सम्मान मिला था।

115भारतीय शास्त्रीय संगीत में 'पखावाज' (Pakhawaj) वादन के क्षेत्र में वर्तमान समय के उस प्रख्यात कलाकार का नाम बताइए जो श्रीनाथद्वारा (नाथद्वारा) मंदिर शैली के पखावाज वादन के शीर्ष गुरु माने जाते हैं, जिन्होंने कथक नर्तकों और ध्रुपद गायकों के साथ दशकों तक ऐतिहासिक संगत की है?
A.पंडित मोहन श्याम शर्मा (Mohan Shyam Sharma)
B.पंडित तोताराम शर्मा
C.पंडित भवानी शंकर
D.पंडित रामाशीष पाठक

उत्तर (Ans): A. पंडित मोहन श्याम शर्मा (Mohan Shyam Sharma)

व्याख्या (Explanation): पंडित मोहन श्याम शर्मा (जन्म 1965) भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सक्रिय पखावाज वादकों में से एक हैं। वे उत्तर प्रदेश के मथुरा से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने पखावाज की दीक्षा प्रसिद्ध गुरु बाबा गोपाल दास जी महाराज और पंडित तोताराम शर्मा से प्राप्त की। मोहन श्याम शर्मा अपनी बारीक लयकारी, स्पष्ट निकास और ध्रुपद गायकों (विशेषकर डागर बंधुओं) के साथ सटीक संगत के लिए पूरी दुनिया में विख्यात हैं। उन्होंने देश-विदेश के कई बड़े मंचों पर पखावाज का स्वतंत्र सोलो वादन प्रस्तुत किया है।

116हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में 'वायलिन' (Violin) वादन की 'गायकी अंग' (Vocal style) शैली को लोकप्रिय बनाने वाले उस महान प्रतिपादक का नाम बताइए जो ग्वालियर घराने के महान संगीत मनीषी पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर के भानजे और शिष्य थे?
A.पंडित डी. के. दातार (D. K. Datar)
B.पंडित वी. जी. जोग
C.डॉ. एन. राजम
D.लालगुडी कृष्णन

उत्तर (Ans): A. पंडित डी. के. दातार (D. K. Datar)

व्याख्या (Explanation): पंडित दत्तात्रेय केशव दातार (डी. के. दातार, 1932-2018) हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक अत्यंत महान वायलिन वादक थे। वे प्रसिद्ध ग्वालियर घराने के संस्थापक विष्णु दिगंबर पलुस्कर के भानजे थे और उन्होंने पंडित विनायकराव पटवर्धन से दीक्षा ली थी। डी. के. दातार ने वायलिन पर ख्याल गायकी के रागों, तानों और आलाप को बिल्कुल मानव कंठ की तरह बजाने की एक अत्यंत कोमल और भावपूर्ण शैली विकसित की, जिसे वायलिन का 'गायकी अंग' कहा जाता है। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

117भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के उस अत्यंत होनहार युवा तबला वादक का नाम बताइए जो सितार और तबले के सव्यसाची कलाकार पंडित नयन घोष के पुत्र और शिष्य हैं, जिन्होंने बहुत कम उम्र में अपनी अद्भुत लयकारी से देश-विदेश के मंचों पर सनसनी फैलाई है?
A.ईशान घोष (Ishaan Ghosh)
B.शाकिर खान
C.अयान अली
D.संजू सहाय

उत्तर (Ans): A. ईशान घोष (Ishaan Ghosh)

व्याख्या (Explanation): ईशान घोष (जन्म 2000) भारत के सबसे प्रतिभावान और प्रखर युवा तबला वादकों में से एक हैं। वे अपने पिता, महान तबला व सितार गुरु पंडित नयन घोष के पुत्र और शिष्य हैं। ईशान ने बहुत कम उम्र में ही तबले के फर्रुखाबाद घराने के कठिन बोलों, कायदों और रेला वादन पर अद्भुत नियंत्रण हासिल कर लिया है। वे वर्तमान में भारत के सभी बड़े शास्त्रीय संगीत समारोहों (जैसे सवाई गंधर्व महोत्सव) में सोलो और संगत दोनों रूपों में अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं।

118एक पारंपरिक और मानक 'सितार' (Sitar) वाद्ययंत्र में मुख्य रूप से कितने खेलने वाले तार (Main Playing Strings) और कितने सहायक/गूंजने वाले तार (Sympathetic or Tarab Strings) होते हैं, जो राग की गूंज को अत्यधिक गहरा बनाते हैं?
A.7 मुख्य खेलने वाले तार, 11 से 13 तरब के तार
B.3 मुख्य तार, 20 तरब के तार
C.5 मुख्य तार, 30 तरब के तार
D.9 मुख्य तार, 5 तरब के तार

उत्तर (Ans): A. 7 मुख्य खेलने वाले तार, 11 से 13 तरब के तार

व्याख्या (Explanation): पारंपरिक और मानक सितार की बनावट अत्यंत वैज्ञानिक होती है। इसमें मुख्य रूप से ऊपरी हिस्से पर 7 खेलने वाले तार (Main strings) होते हैं। इनमें से पहले तार पर मुख्य गत बजाई जाती है, जबकि अंतिम के कुछ तारों को 'चिकारी' (Chikari) कहा जाता है जो लय और झाला बजाने के लिए उपयोग होते हैं। इन मुख्य तारों के ठीक नीचे, सितार के खोखले डांड के भीतर लगभग 11 से 13 पतले तार बिछे होते हैं जिन्हें 'तरब के तार' (Tarab Strings) कहा जाता है। ये तरब के तार राग के मुख्य सुरों के कंपन के साथ खुद-ब-खुद गूंज उठते हैं जिससे सितार को उसकी जादुई और गूंजती हुई आवाज मिलती है।

119'रुद्र वीणा' वाद्ययंत्र के इतिहास के उस महानतम उस्ताद का नाम बताइए जिन्होंने वर्ष 1959-1960 में इस लुप्तप्राय वाद्ययंत्र की बनावट में क्रांतिकारी सुधार किए—जैसे कि सूखी लौकी (Tumbas) का आकार बड़ा करना और बांस की जगह सागौन की डांड लगाना—जिससे इस वाद्य को आधुनिक कॉन्सर्ट हॉल के अनुकूल गहरी आवाज मिली?
A.उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर (Zia Mohiuddin Dagar)
B.उस्ताद असद अली खान
C.उस्ताद बहाउद्दीन डागर
D.पंडित गोपाल कृष्ण शर्मा

उत्तर (Ans): A. उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर (Zia Mohiuddin Dagar)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद जिया मोहिउद्दीन डागर (1929-1990), जिन्हें संगीत की दुनिया में "बड़े उस्ताद" के नाम से जाना जाता है, डागर घराने के 19वीं पीढ़ी के प्रतिनिधि और रुद्र वीणा के सबसे महान पुनरुद्धारक थे। 20वीं शताब्दी के मध्य में रुद्र वीणा अपनी धीमी आवाज़ और कम सस्टेन (सुर की लंबाई) के कारण लगभग विलुप्त हो रही थी। उस्ताद जिया मोहिउद्दीन ने इसके कद्दू (gourds) का आकार काफी बड़ा कर दिया, बांस के फिंगरबोर्ड की जगह मजबूत सागौन (teakwood) की लकड़ी लगाई और मोटे तारों का उपयोग किया। इस बदली हुई 'डागर वीणा' ने रुद्र वीणा को कॉन्सर्ट मंचों पर एकल वाद्य के रूप में एक नया और यशस्वी जीवन दिया।

120प्रसिद्ध 'मनामदुरै घटम' (Manamadurai Ghatam) के निर्माण के दौरान वहाँ की विशेष लाल मिट्टी में धातु जैसी तीखी खनक और बेजोड़ गूंज उत्पन्न करने के लिए मुख्य रूप से किस तत्व को अत्यधिक बारीक पीसकर मिलाया जाता है?
A.लोहे के महीन कण (Iron filings) और तांबे का बुरादा
B.कोयले की राख और चूना पत्थर
C.एल्युमिनियम ऑक्साइड और जिप्सम
D.केवल बारीक छनी हुई नदी की रेत

उत्तर (Ans): A. लोहे के महीन कण (Iron filings) और तांबे का बुरादा

व्याख्या (Explanation): घटम निर्माण के लिए तमिलनाडु का मानामदुरै कस्बा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहाँ के घटम साधारण मिट्टी के घड़े नहीं होते। इसके निर्माण के दौरान वहाँ की लाल मिट्टी में तांबे, चांदी और मुख्य रूप से लोहे के महीन कण (Iron filings/dust) मिलाए जाते हैं। मिट्टी को गूंथते समय इस धातु के मिश्रण के कारण ही जब घटम को पकाया जाता है, तो इसकी त्वचा अत्यंत कठोर हो जाती है। इसे उंगलियों से बजाने पर निकलने वाली ध्वनि किसी धातु के बर्तन जैसी तीखी, गूंजदार और मधुर खनक वाली होती है।

121बनारस घराने के उस महान तबला वादक का नाम बताइए, जिन्हें 'गुदई महाराज' (Gudai Maharaj) के उपनाम से जाना जाता था और जिन्होंने अपनी अद्भुत लयकारी से फिल्मों (जैसे 'शोले' और 'झनक झनक पायल बाजे') में भी अपनी तबला संगति से अमिट छाप छोड़ी थी?
A.पंडित अनोखेलाल मिश्र
B.पंडित कंठे महाराज
C.पंडित सामता प्रसाद (Samta Prasad)
D.पंडित किशन महाराज

उत्तर (Ans): C. पंडित सामता प्रसाद (Samta Prasad)

व्याख्या (Explanation): पंडित सामता प्रसाद (1921-1994) बनारस घराने के एक अत्यंत विख्यात तबला वादक थे, जिन्हें संगीत जगत में 'गुदई महाराज' के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने पंडित विक्रम सिंह और अपने पूर्वजों से तबले की दीक्षा ली। गुदई महाराज अपनी अद्वितीय लयकारी, स्पष्ट ध्वनि निकास और अविश्वसनीय गति के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने कई प्रसिद्ध हिंदी फिल्मों जैसे 'शोले' (पृष्ठभूमि संगीत में प्रसिद्ध डाकुओं के भागने का तबला संगीत), 'झनक झनक पायल बाजे' और 'बसंत बहार' में अपनी तबला संगति से जादू बिखेरा था। उन्हें वर्ष 1991 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

122तबले के 'बनारस घराने' के उस महान प्रतिपादक का नाम बताइए जिन्हें "न धिन धिन ना" (Na Dhin Dhin Na) की प्रसिद्ध लयकारी और अति तीव्र गति से बजाए जाने वाले 'रेला' (Rela) का सर्वकालिक सम्राट माना जाता था?
A.पंडित अनोखेलाल मिश्र (Anokhelal Mishra)
B.पंडित किशन महाराज
C.पंडित सामता प्रसाद
D.पंडित कंठे महाराज

उत्तर (Ans): A. पंडित अनोखेलाल मिश्र (Anokhelal Mishra)

व्याख्या (Explanation): पंडित अनोखेलाल मिश्र (1914-1958) बनारस घराने के इतिहास के सबसे जादुई तबला वादकों में से एक थे। उन्हें संगीत की दुनिया में 'रेला का जादूगर' या 'न धिन धिन ना का सम्राट' कहा जाता था। उनके द्वारा तीन ताल में 'न धिन धिन ना' के बोलों को इतनी तीव्र गति और स्पष्टता से बजाया जाता था कि बड़े-बड़े संगीतज्ञ आश्चर्यचकित रह जाते थे। उन्होंने पंडित भैरव प्रसाद जी से तबले की दीक्षा प्राप्त की थी। बहुत कम उम्र में (मात्र 44 वर्ष) कैंसर के कारण उनका निधन हो गया, लेकिन आज भी वे तबला वादकों के लिए एक आदर्श और पूजनीय स्तंभ हैं।

123वर्ष 1968 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री प्राप्त करने वाली देश की पहली महिला पेशेवर 'सरोद' वादक कौन थीं, जिन्होंने न केवल विश्व स्तर पर सरोद का परचम लहराया बल्कि प्राचीन भारतीय वाद्ययंत्रों का एक अमूल्य संग्रह भी तैयार किया?
A.शरण रानी (Sharan Rani)
B.जरीन दारूवाला शर्मा
C.अन्नपूर्णा देवी
D.ज्योति हेगड़े

उत्तर (Ans): A. शरण रानी (Sharan Rani)

व्याख्या (Explanation): शरण रानी बैकलीवाल (1929-2008) भारत की पहली महिला पेशेवर सरोद वादिका थीं। उन्हें प्रेमपूर्वक 'सरोद रानी' (Sarod Queen of India) कहा जाता था। उन्होंने मैहर घराने के महान उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खान और उस्ताद अली अकबर खान से सरोद की शिक्षा ली थी। शरण रानी पहली ऐसी महिला कलाकार थीं जिन्होंने विदेशों में जाकर सरोद का प्रदर्शन किया। उन्होंने कई दशकों तक भारत के दुर्लभ और प्राचीन वाद्ययंत्रों का संग्रह किया, जिसे उन्होंने बाद में राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum, नई दिल्ली) को दान कर दिया, जहां आज 'शरण रानी बैकलीवाल गैलरी ऑफ म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स' स्थित है। उन्हें वर्ष 2000 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

124'विचित्र वीणा' (Vichitra Veena) के उस महान विद्वान और संगीत मनीषी का नाम बताइए जिन्होंने न केवल इस प्राचीन वाद्य को पुनर्जीवित किया, बल्कि 'श्रुति वीणा' नामक एक नए शोध वाद्य का निर्माण किया और ऐतिहासिक पुस्तक "भारतीय संगीत वाद्य" लिखी?
A.डॉ. लालमणि मिश्र (Dr. Lalmani Misra)
B.पंडित गोपाल कृष्ण शर्मा
C.उस्ताद असद अली खान
D.पंडित शिवकुमार शर्मा

उत्तर (Ans): A. डॉ. लालमणि मिश्र (Dr. Lalmani Misra)

व्याख्या (Explanation): डॉ. लालमणि मिश्र (1924-1979) भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक महानतम संगीतशास्त्री, बहुमुखी वादक और शोधकर्ता थे। वे विचित्र वीणा वादन के अद्वितीय उस्ताद थे। उन्होंने विचित्र वीणा पर रागों को प्रस्तुत करने की प्राचीन तकनीक को पुनर्जीवित किया। उन्होंने 22 श्रुतियों को सटीक रूप से मापने के लिए एक विशेष 'श्रुति वीणा' (Shruti Veena) का आविष्कार किया। उनकी कालजयी पुस्तक "भारतीय संगीत वाद्य" आज भी भारतीय वाद्यों के इतिहास और बनावट पर सबसे प्रामाणिक ग्रंथ मानी जाती है। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के संगीत संकाय के डीन के रूप में भी कार्य किया था।

125कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के उस क्रांतिकारी 'सैक्सोफोन' (Saxophone) वादक का नाम बताइए जिन्हें संगीत जगत में "सैक्सोफोन चक्रवर्ती" कहा जाता था और जिन्होंने पश्चिमी पीतल सुषिर वाद्य को दक्षिण भारतीय संगीत के गमक के अनुकूल ढाला?
A.कादरी गोपालनाथ (Kadri Gopalnath)
B.शेख चिन्ना मौलाना
C.कराईकुडी आर. मणि
D.ए. के. सी. नटराजन

उत्तर (Ans): A. कादरी गोपालनाथ (Kadri Gopalnath)

व्याख्या (Explanation): कादरी गोपालनाथ (1949-2019) कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में सैक्सोफोन के एकमात्र और युगप्रवर्तक प्रतिपादक थे। सैक्सोफोन एक पश्चिमी वाद्ययंत्र है, जिसमें भारतीय रागों के 'गमक' (स्लाइडिंग स्वर और कंपन) निकालना बेहद कठिन माना जाता था। कादरी गोपालनाथ ने लगभग 20 वर्षों के कड़े अभ्यास के बाद इस वाद्ययंत्र के की-पैड्स और अपनी फूंक की तकनीक में क्रांतिकारी बदलाव किए। वे लंदन के प्रतिष्ठित 'रॉयल अल्बर्ट हॉल' में प्रदर्शन करने वाले पहले दक्षिण भारतीय वाद्य वादक थे। उन्हें वर्ष 2004 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

126कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के 'वायलिन' वादन के उस महान दिग्गज का नाम बताइए जो हिंदुस्तानी और कर्नाटक दोनों शैलियों के वादन में समान रूप से सिद्धहस्त थे और जिन्होंने 'परूर शैली' को वैश्विक स्तर पर एक नई ऊंचाई प्रदान की?
A.एम. एस. गोपालकृष्णन (M. S. Gopalakrishnan)
B.टी. एन. कृष्णन
C.लालगुडी जयरामन
D.कुन्नाकुडी वैद्यनाथन

उत्तर (Ans): A. एम. एस. गोपालकृष्णन (M. S. Gopalakrishnan)

व्याख्या (Explanation): एम. एस. गोपालकृष्णन (1933-2012), जिन्हें आदरपूर्वक 'एम.एस.जी.' कहा जाता था, कर्नाटक संगीत जगत के वायलिन त्रिमूर्ति में से एक थे। वे अपने पिता परूर सुंदरम अय्यर के शिष्य थे। एम.एस.जी. की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे दक्षिण भारतीय कर्नाटक संगीत और उत्तर भारतीय हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत दोनों पद्धतियों में वायलिन बजाने वाले अद्वितीय कलाकार थे। उनके वादन में पश्चिमी वायलिन की जटिल बोइंग (Bowing) तकनीकों और भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुरीले राग भावों का बेजोड़ संगम दिखाई देता था। उन्हें पद्म भूषण और संगीत कलानिधि पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

127इमदादखानी घराने के उस महान सितार और सुरबहार वादक का नाम बताइए जिन्होंने वर्ष 2017 में भारत सरकार द्वारा घोषित 'पद्म श्री' पुरस्कार को यह कहकर विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया था कि उन्हें यह सम्मान उनके शिष्यों और कनिष्ठों के बाद बहुत विलंब से दिया जा रहा है?
A.उस्ताद इमरात खान (Ustad Imrat Khan)
B.उस्ताद शाहिद परवेज
C.उस्ताद सुजात खान
D.उस्ताद इरशाद खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद इमरात खान (Ustad Imrat Khan)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद इमरात खान (1935-2018) इटावा (इमदादखानी) घराने के एक शीर्ष सितार और सुरबहार वादक थे। वे महान सितार सम्राट उस्ताद विलायत खान के छोटे भाई थे। उन्होंने अपने जीवन के कई दशक विदेशों (विशेष रूप से ब्रिटेन और अमेरिका) में भारतीय संगीत और विशेष रूप से सुरबहार (Bass Sitar) के प्रचार में बिताए। वर्ष 2017 में जब भारत सरकार ने उन्हें 'पद्म श्री' देने की घोषणा की, तो उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। उनका मानना था कि उनके योगदान और संगीत के वरिष्ठता क्रम के अनुसार उन्हें यह सम्मान बहुत पहले या उच्च स्तर (जैसे पद्म भूषण या पद्म विभूषण) पर मिलना चाहिए था।

128कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में "सिक्किल सिस्टर्स" (Sikkil Sisters) के नाम से विख्यात दो बहनें मुख्य रूप से किस वाद्ययंत्र के वादन के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती थीं?
A.बांसुरी (Flute)
B.वायलिन
C.वीणा
D.घटम

उत्तर (Ans): A. बांसुरी (Flute)

व्याख्या (Explanation): सिक्किल सिस्टर्स—कुंजुमणि (1927-2010) और नीला (जन्म 1937)—कर्नाटक संगीत के इतिहास की सबसे प्रसिद्ध महिला बांसुरी वादक बहनें थीं। उन्होंने कर्नाटक संगीत के पुरुष-प्रधान बांसुरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी का मार्ग प्रशस्त किया। सिक्किल बहनों ने अपनी अद्भुत और सुरीली जुगलबंदियों से दक्षिण भारतीय बांसुरी वादन को एक अत्यंत सुगम और मधुर रूप प्रदान किया। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और मद्रास संगीत अकादमी के प्रतिष्ठित "संगीत कलानिधि" पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

129भारतीय शास्त्रीय संगीत में 'संतूर' वाद्ययंत्र को स्थापित करने वाले पंडित शिवकुमार शर्मा ने प्रसिद्ध बाँसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के साथ मिलकर 'शिव-हरी' (Shiv-Hari) के नाम से किस पहली ब्लॉकबस्टर हिंदी फ़िल्म में संगीत निर्देशक के रूप में कार्य किया था?
A.सिलसिला (Silsila)
B.चांदनी
C.डर
D.लम्हे

उत्तर (Ans): A. सिलसिला (Silsila)

व्याख्या (Explanation): पंडित शिवकुमार शर्मा और पंडित हरिप्रसाद चौरसिया की प्रसिद्ध जोड़ी ने शास्त्रीय संगीत के अलावा भारतीय सिनेमा में भी 'शिव-हरी' के नाम से संगीत निर्देशन किया। इस जोड़ी ने सबसे पहले वर्ष 1981 में यश चोपड़ा की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'सिलसिला' (Silsila) में अपना मधुर और कालजयी संगीत दिया था। इस फिल्म के सभी गीत (जैसे "देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए" और "रंग बरसे भीगे चुनरवाली") आज भी बेहद लोकप्रिय हैं। इसके बाद उन्होंने 'चांदनी', 'लम्हे' और 'डर' जैसी कई अन्य बड़ी फिल्मों में भी सफल संगीत दिया था।

130कर्नाटक संगीत के इतिहास में 'चित्रा वीणा' (Chitraveena) या 'गोट्टूवाद्यम' (Gottuvadhyam) के उस महान विद्वान और बाल कौतुक का नाम बताइए जो मात्र दो वर्ष की आयु में ७० से अधिक रागों की पहचान करने के लिए विख्यात थे?
A.एन. रविकिरण (N. Ravikiran)
B.यू. श्रीनिवास
C.एल. सुब्रमण्यम
D.जी. हरिशंकर

उत्तर (Ans): A. एन. रविकिरण (N. Ravikiran)

व्याख्या (Explanation): एन. रविकिरण (नारासिम्हन रविकिरण, जन्म 1967) कर्नाटक संगीत के एक अत्यंत असाधारण 'चित्रवीणा' (जिसे गोट्टूवाद्यम भी कहा जाता है) वादक हैं। वे बचपन में एक विस्मयकारी बाल कौतुक (Child Prodigy) थे, जिन्होंने मात्र दो वर्ष की आयु में संगीत के अत्यंत जटिल रागों और तालों की सटीक पहचान करके बड़े-बड़े विद्वानों को चकित कर दिया था। उन्होंने बाद में चित्रवीणा पर रागों की प्रस्तुति की एक नई और गतिशील तकनीक विकसित की। रविकिरण ने पश्चिमी और भारतीय संगीत के संगम से "मेलहार्मनी" (Melharmony) नामक एक वैश्विक संगीत अवधारणा की रचना भी की है।

131प्रसिद्ध 'नादस्वरम' (Nadaswaram) वादक राजारत्नम पिल्लई, जिन्होंने दक्षिण भारत के मंदिरों और शाही दरबारों में नादस्वरम वादन को एक स्वतंत्र शास्त्रीय मंच प्रदान किया, किस शैली के महान प्रवर्तक माने जाते हैं?
A.तंजौर शैली (Tanjore Style)
B.मैसूर शैली
C.तिरुवनंतपुरम शैली
D.मदुरै शैली

उत्तर (Ans): A. तंजौर शैली (Tanjore Style)

व्याख्या (Explanation): टी. एन. राजारत्नम पिल्लई (1898-1956) कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में नादस्वरम के सबसे महान और क्रांतिकारी वादक माने जाते हैं। नादस्वरम दक्षिण भारत का एक विशाल और ऊँची ध्वनि वाला सुषिर वाद्य है। राजारत्नम पिल्लई ने तंजौर की पारंपरिक नादस्वरम वादन शैली को अत्यधिक गंभीर, व्यापक और सुरीला बनाया। उन्होंने रागों की विस्तृत आलापचारी (Todi राग के आलाप के लिए वे विशेष रूप से विख्यात थे) के माध्यम से नादस्वरम को मंदिरों की रस्मों से ऊपर उठाकर मुख्य शास्त्रीय कॉन्सर्ट मंचों पर स्थापित किया था।

132'पखावाज' (Pakhawaj) वाद्ययंत्र के उस महान प्रतिपादक का नाम बताइए जो पखावाज वादन के कुदऊ सिंह घराने के शीर्ष गुरु हैं और जिन्होंने वर्तमान युग में ध्रुपद गायन और पखावाज वादन की प्राचीन परंपराओं को अक्षुण्ण रखा है?
A.पंडित भवानी शंकर (Bhavani Shankar)
B.पंडित तोताराम शर्मा
C.पंडित रामाशीष पाठक
D.पंडित मोहन श्याम शर्मा

उत्तर (Ans): B. पंडित तोताराम शर्मा

व्याख्या (Explanation): पंडित तोताराम शर्मा पखावाज वादन के क्षेत्र में वर्तमान युग के सबसे वरिष्ठ और आदरणीय गुरुओं में से एक हैं। वे पखावाज के प्रसिद्ध 'कुदऊ सिंह घराने' की शुद्ध परंपरा के सबसे प्रमुख संवाहक हैं। उन्होंने अपने पिता और अन्य दिग्गज पखावाज वादकों से अत्यंत कठोर शास्त्रीय दीक्षा ली थी। वे विशेष रूप से कथक नृत्य की जटिल बंदिशों और ध्रुपद गायन के साथ पखावाज की संगत करने की प्राचीन शास्त्रीय तकनीकों के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञ माने जाते हैं। कला के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2012 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

133'जलतरंग' (Jaltarang) वाद्ययंत्र पर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के रागों को शुद्धता के साथ प्रस्तुत करने वाली वर्तमान समय की उस विख्यात महिला कलाकार का नाम बताइए जिन्होंने 'जलतरंग' पर शोध किया है और इस वाद्ययंत्र पर रागों के आलाप की बारीकियों को सहजता से बजाती हैं?
A.डॉ. रागिनी त्रिवेदी (Dr. Ragini Trivedi)
B.सुकन्या रामगोपाल
C.अरुणा नारायण
D.जरीन दारूवाला शर्मा

उत्तर (Ans): A. डॉ. रागिनी त्रिवेदी (Dr. Ragini Trivedi)

व्याख्या (Explanation): डॉ. रागिनी त्रिवेदी भारत की एक अत्यंत प्रतिष्ठित जलतरंग वादिका और संगीतशास्त्री हैं। वे महान विचित्र वीणा वादक डॉ. लालमणि मिश्र की पुत्री हैं। उन्होंने जलतरंग की प्राचीन वादन शैली का गहरा अध्ययन किया है और कटोरों में पानी की मात्रा तथा प्रहार की तकनीक में कई वैज्ञानिक प्रयोग किए हैं। रागिनी त्रिवेदी जलतरंग के साथ-साथ सितार और विचित्र वीणा वादन में भी निपुण हैं। वे भारत और विदेशों के प्रमुख संगीत समारोहों में जलतरंग का स्वतंत्र एकल वादन प्रस्तुत करती हैं।

134कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में 'मृदंगम' वादन के क्षेत्र में 'पालघाट रघु' (Palghat Raghu) ने जिस विशिष्ट और गणितीय सटीकता वाली शैली का प्रचार किया, वे मुख्य रूप से किस महान गुरु के शिष्य थे?
A.पालघाट मणि अय्यर (Palghat Mani Iyer)
B.तंजौर वैद्यनाथ अय्यर
C.पालघाट सुब्बू अय्यर
D.उमायलपुरम के. शिवरामन

उत्तर (Ans): C. पालघाट सुब्बू अय्यर

व्याख्या (Explanation): पालघाट रघु (1928-2009) कर्नाटक संगीत के इतिहास के सबसे प्रसिद्ध और प्रतिभाशाली मृदंगम वादकों में से एक थे। उन्होंने मृदंगम की दीक्षा मुख्य रूप से 'पालघाट सुब्बू अय्यर' से प्राप्त की थी और बाद में महान तंजौर वैद्यनाथ अय्यर की शैली से भी प्रभावित हुए। पालघाट रघु का वादन अपनी जटिल गणितीय ताल संरचनाओं (Calculative patterns), अत्यंत तीव्र गति और गायक के सुरों के साथ सटीक संवाद के लिए जाना जाता था। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

135प्रसिद्ध 'एशराज' (Esraj) वाद्ययंत्र, जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन और रवीन्द्र संगीत (Rabindra Sangeet) में बजाया जाता है, शास्त्रीय संगीत वर्गीकरण के अनुसार किस श्रेणी के अंतर्गत आता है?
A.तत वाद्य (Stringed Bow Instrument)
B.सुषिर वाद्य (Wind Instrument)
C.अवनद्ध वाद्य (Percussion Instrument)
D.घन वाद्य (Idiophone)

उत्तर (Ans): A. तत वाद्य (Stringed Bow Instrument)

व्याख्या (Explanation): 'एशराज' (Esraj) एक अत्यंत मधुर और दुर्लभ भारतीय वाद्य यंत्र है जो मुख्य रूप से 'तत वाद्य' (Stringed Bow Instrument) की श्रेणी में आता है। यह वाद्य सारंगी और सितार की बनावट का एक अनूठा संगम है। इसमें सितार की तरह लोहे के पर्दे (frets) और डांड होती है, लेकिन इसे सारंगी की तरह एक गज (bow) की मदद से घर्षण द्वारा बजाया जाता है। शांतिनिकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय के कारण यह वाद्य रवीन्द्र संगीत की संगत के रूप में बहुत प्रसिद्ध हुआ। पंडित रणधीर रॉय ने इसे एकल शास्त्रीय वाद्य के रूप में प्रतिष्ठित किया था।

136भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में 'शहनाई' वाद्ययंत्र को फिल्मों में एक विशिष्ट पहचान दिलाने वाले उस प्रख्यात शहनाई वादक का नाम बताइए जो बनारस घराने से थे और जिन्होंने प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के साथ भी कई जुगलबंदियां की थीं?
A.पंडित अनन्त लाल (Pt. Anant Lal)
B.अली अहमद हुसैन खान
C.दया शंकर
D.कमाल साबरी

उत्तर (Ans): A. पंडित अनन्त लाल (Pt. Anant Lal)

व्याख्या (Explanation): पंडित अनन्त लाल (1927-2011) बनारस घराने के एक अत्यंत प्रतिष्ठित शहनाई वादक थे। वे उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के बाद देश के सबसे प्रसिद्ध शहनाई वादकों में गिने जाते थे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत के मंचों के अलावा भारतीय फिल्मों (जैसे राज कपूर की फिल्मों और प्रसिद्ध गीतों) के बैकग्राउंड स्कोर में अपनी शहनाई का जादू बिखेरा था। उनके पुत्र दया शंकर भी एक विख्यात शहनाई वादक हैं, और इस पिता-पुत्र की जोड़ी ने लंबे समय तक दूरदर्शन और राष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दी थीं।

137प्रसिद्ध 'मोरचंग' या 'मोर्सिंग' (Morsing) वाद्ययंत्र को बजाते समय वादक के शरीर का कौन सा अंग एक मुख्य 'गूंज बक्से' (Resonator Box) की तरह कार्य करता है, जिससे ध्वनि की गहराई को लाइव बदला जाता है?
A.मुख गुहा (Mouth Cavity / Buccal Cavity)
B.फेफड़े (Lungs)
C.कान (Ears)
D.पेट (Stomach)

उत्तर (Ans): A. मुख गुहा (Mouth Cavity / Buccal Cavity)

व्याख्या (Explanation): मोर्सिंग (Morsing) एक बहुत ही छोटा और अनोखा धातु का वाद्य यंत्र है जिसे भारतीय संगीत में 'घन वाद्य' (Idiophone) और अंग्रेजी में 'ज्यूज हार्प' (Jew's Harp) कहा जाता है। इसे बजाते समय वादक इसके फ्रेम को अपने दांतों के बीच कसकर दबाकर रखता है और इसकी लोहे की पतली जीभ (tongue) को उंगलियों से झंकृत करता है। इस दौरान निकलने वाले सुरों की गूंज और गहराई को नियंत्रित करने के लिए वादक की 'मुख गुहा' (Mouth Cavity) एक गूंजने वाले बॉक्स (Resonator) की तरह काम करती है। वादक अपने मुंह के अंदर के आकार को बदलकर और सांस छोड़ते/खींचते हुए इसके सुर की पिच और टोन को लाइव बदलता है।

138बनारस घराने के उस विख्यात तबला वादक का नाम बताइए, जिन्हें तबला वादन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला, और जो बनारस घराने की विशालकाय परनों और कठिन तिहाइयों को तबले पर बजाने के लिए संगीत जगत में 'कुमार' (Kumar) उपनाम से विख्यात हैं?
A.पंडित कुमार बोस (Pt. Kumar Bose)
B.पंडित संजू सहाय
C.पंडित सुखविंदर सिंह 'पिंकी'
D.पंडित नयन घोष

उत्तर (Ans): A. पंडित कुमार बोस (Pt. Kumar Bose)

व्याख्या (Explanation): पंडित कुमार बोस (जन्म 1953) बनारस घराने के वर्तमान समय के सबसे शक्तिशाली और विश्व प्रसिद्ध तबला वादकों में से एक हैं। उन्होंने बनारस घराने के कालजयी तबला सम्राट पंडित किशन महाराज से संगीत की गहन दीक्षा प्राप्त की थी। कुमार बोस अपने दाहिने हाथ की प्रचंड ताकत, बेहद स्पष्ट बोलों के निकास और पखावाज के भारी बोलों (परनों व तिहाइयों) को तबले पर अद्भुत कोमलता व शुद्धता से बजाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पंडित रविशंकर और उस्ताद अमजद अली खान जैसे महान दिग्गजों के साथ दशकों तक ऐतिहासिक प्रस्तुतियां दी हैं। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

139प्रसिद्ध महिला वायलिन वादिका 'रागिनी शंकर' और 'नंदिनी शंकर' किस प्रसिद्ध वायलिन घराने से संबंध रखती हैं, जिसकी स्थापना उनकी नानी डॉ. एन. राजम (N. Rajam) ने की थी?
A.बनारस घराना (गायकी अंग)
B.परूर घराना
C.मैसूर घराना
D.ग्वालियर घराना

उत्तर (Ans): A. बनारस घराना (गायकी अंग)

व्याख्या (Explanation): रागिनी शंकर और नंदिनी शंकर भारतीय शास्त्रीय संगीत (वायलिन वादन) की प्रसिद्ध बहनें हैं, जो बनारस घराने की 'गायकी अंग' (Vocal style) शैली की प्रखर प्रतिनिधि हैं। इस वायलिन शैली का विकास उनकी नानी, पद्म भूषण डॉ. एन. राजम ने किया था। इस शैली की विशेषता यह है कि इसमें वायलिन को इस प्रकार बजाया जाता है जिससे उसकी ध्वनि बिल्कुल बनारस घराने की ख्याल और ठुमरी गायकी के मानव कंठ की हूबहू नकल करती है। ये दोनों बहनें अपनी मां संगीता शंकर और नानी डॉ. एन. राजम के साथ "थ्री जनरेशन्स ऑफ वायलिन" के रूप में वैश्विक मंचों पर प्रदर्शन करती हैं।

140'चित्रवीणा' (Chitraveena) वाद्ययंत्र को बजाते समय तारों पर रगड़ने के लिए किस विशेष सामग्री से बनी हुई गोल स्लाइड (cylinder/slide) का उपयोग मुख्य रूप से किया जाता है?
A.आबनूस की लकड़ी (Ebony wood) या कांच की ठोस छड़
B.धातु की भारी छड़
C.प्लास्टिक की छड़
D.हाथीदांत की पट्टी

उत्तर (Ans): A. आबनूस की लकड़ी (Ebony wood) या कांच की ठोस छड़

व्याख्या (Explanation): चित्रवीणा (गोट्टूवाद्यम) कर्नाटक संगीत का एक प्राचीन और अत्यंत सुरीला तत वाद्य यंत्र है जिसमें कोई पर्दा (fret) नहीं होता। इस पर सुर निकालने के लिए बाएं हाथ में आबनूस की लकड़ी (Ebony wood), ठोस कांच (Teflon/Glass block) या विशेष रूप से तैयार की गई एक गोल चिकनी स्लाइड (cylinder) को तारों पर आगे-पीछे खिसकाया जाता है, जबकि दाहिने हाथ की उंगलियों से तारों को झंकृत किया जाता है। आबनूस की लकड़ी या कांच के इस घर्षण के कारण ही चित्रवीणा से अत्यंत कोमल, निरंतर और गहरी गूंज वाली ध्वनि निकलती है जो मानव आवाज के बेहद करीब होती है।

141कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में 'कंजिरा' (Kanjira) वाद्ययंत्र के उस अप्रतिम जादूगर का नाम बताइए, जिनके बारे में कहा जाता था कि वे केवल एक हाथ की उंगलियों की अविश्वसनीय गति से इतनी जटिल लय प्रस्तुत करते थे कि सुनने वाले दंग रह जाते थे?
A.जी. हरिशंकर (G. Harishankar)
B.पुदुक्कोट्टई दक्षिणामूर्ति पिल्लई
C.वी. सेल्वागणेश
D.टी. एच. विनायकराम

उत्तर (Ans): A. जी. हरिशंकर (G. Harishankar)

व्याख्या (Explanation): जी. हरिशंकर (1950-2002) को कंजिरा वाद्ययंत्र के इतिहास का सबसे जादुई और महानतम कलाकार माना जाता है। कंजिरा दक्षिण भारत का एक छोटा डफली जैसा फ्रेम ड्रम होता है जिसे केवल एक हाथ से बजाया जाता है (क्योंकि दूसरे हाथ से इसके फ्रेम को पकड़ा जाता है)। हरिशंकर की उंगलियों की गति, गणितीय लयकारी की सूक्ष्मता और मृदंगम वादकों के साथ संगत करने की उनकी क्षमता इतनी विस्मयकारी थी कि उन्हें लय की दुनिया का अजूबा माना जाता था। वे उस्ताद ज़ाकिर हुसैन और डॉ. एल. सुब्रमण्यम के साथ कई ऐतिहासिक फ्यूजन शो का हिस्सा रहे थे।

142तबले के सबसे प्रसिद्ध और अभिनव घरानों में से एक 'फर्रुखाबाद घराने' के उस महान प्रतिपादक का नाम बताइए जिन्होंने राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शन करने वाले पहले भारतीय तबला वादक होने का गौरव प्राप्त किया था?
A.पंडित अनिंदो चटर्जी (Anindo Chatterjee)
B.पंडित ज्ञान प्रकाश घोष
C.उस्ताद अहमद जान थिरकवा
D.पंडित स्वप्न चौधरी

उत्तर (Ans): A. पंडित अनिंदो चटर्जी (Anindo Chatterjee)

व्याख्या (Explanation): पंडित अनिंदो चटर्जी फर्रुखाबाद घराने के वर्तमान समय के सबसे प्रख्यात और सम्मानित तबला वादकों में से एक हैं। वे महान तबला गुरु पंडित ज्ञान प्रकाश घोष के शिष्य हैं। अनिंदो चटर्जी अपनी बेहद स्पष्ट ध्वनि, बिजली जैसी तीव्र गति और फर्रुखाबाद बाज के कठिन कायदों पर अद्भुत नियंत्रण के लिए विख्यात हैं। वे भारत के पहले ऐसे तबला वादक हैं जिन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति भवन में एकल प्रदर्शन करने का गौरव प्राप्त हुआ था। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

143कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के 'वायलिन त्रिमूर्ति' (Violin Trinity) में विख्यात 'लालगुडी जयरामन' ने वायलिन वादन की तकनीक में सुधार करने के साथ-साथ कर्नाटक संगीत में किस विशेष संगीतमय रचना (Composition) के लिए दर्जनों सुपरहिट "थिलाना" (Thillanas) की रचना की थी?
A.थिलाना (Thillanas)
B.कृति (Kritis)
C.वर्णम (Varnams)
D.उपर्युक्त सभी

उत्तर (Ans): D. उपर्युक्त सभी

व्याख्या (Explanation): लालगुडी जी. जयरामन (1930-2013) कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के सबसे महान वायलिन वादकों, संगीतकारों और वाग्गेयकारों (Composers) में से एक थे। उन्होंने न केवल वायलिन बजाने की 'लालगुडी बानी' विकसित की, बल्कि उन्होंने कर्नाटक संगीत को कई अत्यंत सुरीली और अमर रचनाएं दीं। उनके द्वारा रचित थिलाना (Thillanas - एक प्रकार की तीव्र लयबद्ध कर्नाटक शास्त्रीय रचना) आज भी दुनिया भर के भरतनाट्यम नर्तकों और कर्नाटक संगीतकारों के बीच शीर्ष पसंद हैं। उन्होंने कई वर्णम और कृतियों की भी रचना की थी, जिन्हें रागों की शुद्धता का आदर्श पैमाना माना जाता है।

144'शहनाई' वाद्ययंत्र के इतिहास में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के बाद शहनाई को वैश्विक शास्त्रीय मंचों पर स्थापित करने वाले उस्ताद अली अहमद हुसैन खान का संबंध मुख्य रूप से किस प्रतिष्ठित घराने से था?
A.बनारस घराना (Banaras Gharana)
B.लखनऊ घराना
C.दिल्ली घराना
D.इटावा घराना

उत्तर (Ans): A. बनारस घराना (Banaras Gharana)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद अली अहमद हुसैन खान (1939-2015) भारत के एक अत्यंत सम्मानित और ऐतिहासिक शहनाई वादक थे। बिस्मिल्लाह खान के बाद वे देश के दूसरे ऐसे शहनाई वादक थे जिन्होंने इस वाद्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र सोलो इंस्ट्रूमेंट के रूप में स्थापित किया। वे बनारस घराने की मधुर गायकी शैली को शहनाई पर निकालने में बेजोड़ थे। उन्होंने वर्ष 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों के उद्घाटन समारोह में अपनी शहनाई का वादन प्रस्तुत किया था।

145'बांसुरी' को केवल लोक संगीत के दायरे से बाहर निकालकर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के कॉन्सर्ट मंचों पर स्थापित करने वाले पंडित पन्नालाल घोष ने बांसुरी में कौन सा सातवां छेद (7th Hole) जोड़ा था, ताकि कौन से दो विशिष्ट स्वरों को आसानी से बजाया जा सके?
A.तीव्र मध्यम (Teevra Madhyam) और पंचम (Pancham)
B.कोमल ऋषभ और शुद्ध गंधार
C.कोमल धैवत और शुद्ध निषाद
D.केवल तार सप्तक के स्वर

उत्तर (Ans): A. तीव्र मध्यम (Teevra Madhyam) और पंचम (Pancham)

व्याख्या (Explanation): पंडित पन्नालाल घोष (1911-1960), जिन्हें बांसुरी का मसीहा कहा जाता है, ने बांसुरी की बनावट में क्रांतिकारी सुधार किए। उन्होंने सबसे पहले 32 इंच लंबी बांसुरी का निर्माण किया ताकि रागों के निचले स्वरों (मंद्र सप्तक) को बजाया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने बांसुरी के निचले हिस्से पर एक अतिरिक्त 'सातवां छेद' (7th hole) जोड़ा। इस सातवें छेद की मदद से बांसुरी वादक तीव्र मध्यम (Teevra Madhyam) और पंचम (Pancham) जैसे स्वरों को बिना किसी रुकावट के अत्यधिक शुद्धता और कोमलता के साथ बजाने में सक्षम हुए।

146दिल्ली घराने के उस ऐतिहासिक 'सारंगी' वादक का नाम बताइए जो सारंगी वादन के इतने महान उस्ताद और लेखक थे कि उन्होंने इस वाद्य की तकनीकों पर ऐतिहासिक पुस्तक "संगीत विवेक दर्पण" लिखी थी?
A.उस्ताद बुंदू खान (Bundu Khan)
B.उस्ताद शकूर खान
C.उस्ताद साबरी खान
D.पंडित राम नारायण

उत्तर (Ans): A. उस्ताद बुंदू खान (Bundu Khan)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद बुंदू खान (1880-1955) भारतीय संगीत के इतिहास के सबसे महान और प्रभावशाली सारंगी वादकों में से एक थे। वे दिल्ली घराने के एक शीर्ष स्तंभ थे। बुंदू खान की सारंगी पर पकड़ इतनी चमत्कारी थी कि वे अत्यंत कठिन रागों और मुर्कियों को बेहद कोमलता से प्रस्तुत करते थे। संगीत के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि उन्होंने सारंगी वादन की बारीकियों, रागों के वर्गीकरण और जटिलताओं को सुलझाते हुए "संगीत विवेक दर्पण" नामक एक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की थी, जिसे आज भी सारंगी वादन का एक मुख्य प्रामाणिक दस्तावेज माना जाता है।

147प्रसिद्ध 'मनामदुरै घटम' (Manamadurai Ghatam) के निर्माण के दौरान, मिट्टी के घड़े को पकाने के बाद उसकी खनक को धातु जैसी तीखी बनाने के लिए, मिट्टी को गूंथने की प्रक्रिया में तांबे के बुरादे के साथ मुख्य रूप से किस धातु के महीन कणों को मिलाया जाता है?
A.लोहे के कण (Iron filings)
B.एल्युमिनियम का बुरादा
C.जिप्सम और चूना
D.चांदी का बुरादा

उत्तर (Ans): A. लोहे के कण (Iron filings)

व्याख्या (Explanation): घटम निर्माण के लिए तमिलनाडु का मानामदुरै कस्बा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहाँ के घटम साधारण मिट्टी के घड़े नहीं होते। इसके निर्माण के दौरान वहाँ की लाल मिट्टी में तांबे, चांदी और मुख्य रूप से लोहे के महीन कण (Iron filings/dust) मिलाए जाते हैं। मिट्टी को गूंथते समय इस धातु के मिश्रण के कारण ही जब घटम को पकाया जाता है, तो इसकी त्वचा अत्यंत कठोर हो जाती है। इसे उंगलियों से बजाने पर निकलने वाली ध्वनि किसी धातु के बर्तन जैसी तीखी, गूंजदार और मधुर खनक वाली होती है।

148इमदादखानी (इटावा) घराने के वर्तमान समय के सबसे दिग्गज सितार वादक उस्ताद शाहिद परवेज खान के दादा का नाम क्या था, जो स्वयं सुरबहार और सितार के एक महान गुरु थे?
A.उस्ताद वाहिद खान (Ustad Wahid Khan)
B.उस्ताद अजीज खान
C.उस्ताद इमरात खान
D.उस्ताद विलायत खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद वाहिद खान (Ustad Wahid Khan)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद शाहिद परवेज खान इमदादखानी घराने के एक अत्यंत प्रतिष्ठित सितार वादक हैं। उनके दादा 'उस्ताद वाहिद खान' थे, जो इटावा घराने के महान उस्ताद इमदाद खान के पुत्र थे। वाहिद खान अपने समय के सबसे श्रेष्ठ सुरबहार (Bass Sitar) और सितार वादक थे, जिन्होंने मैसूर दरबार के मुख्य दरबारी संगीतकार के रूप में कार्य किया था। उन्होंने ही अपने पुत्र अजीज खान और पोते शाहिद परवेज को सितार पर 'गायकी अंग' की कोमलता और 'तंत्रकारी' के कठिन संतुलन को साधने की अनूठी तकनीक सिखाई थी।

149कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में 'मृदंगम' वादन के उस महान दिग्गज का नाम बताइए जिन्होंने शास्त्रीय मृदंगम वादन के वैज्ञानिक ध्वनि विज्ञान (Acoustics) पर व्यापक शोध पत्र लिखे और जिन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया?
A.उमायलपुरम के. शिवरामन (Umayalpuram K. Sivaraman)
B.पालघाट रघु
C.कराईकुडी आर. मणि
D.डॉक्टर टी. के. मूर्ति

उत्तर (Ans): A. उमायलपुरम के. शिवरामन (Umayalpuram K. Sivaraman)

व्याख्या (Explanation): उमायलपुरम काशीविश्वनाथ शिवरामन (जन्म 1935) कर्नाटक संगीत के सबसे सम्मानित मृदंगम वादकों में से एक हैं। उन्होंने मृदंगम की त्वचा की मोटाई, काले मसाले (श्याही) के घनत्व और ध्वनि के गूंजने की भौतिकी (Acoustical Physics of Mridangam) पर व्यापक वैज्ञानिक शोध किए हैं। वे विभिन्न घरानों की वादन शैलियों के वैज्ञानिक मिश्रण के लिए जाने जाते हैं। कला के क्षेत्र में उनके असाधारण और युगप्रवर्तक योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2010 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया था।

150कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के सबसे प्रसिद्ध 'वीणा' घरानों में से एक 'कराईकुडी घराने' (Karaikudi Gharana) के कराईकुडी साम्बसिव अय्यर अपनी वीणा बजाने के लिए किसी कृत्रिम तार की अंगूठी (मिजराब) का प्रयोग करने की जगह सीधे उंगलियों के पोरों से बजाते थे, इस विशिष्ट शैली को किस नाम से जाना जाता है?
A.कराईकुडी बानी (Karaikudi Bani)
B.तंजौर बानी
C.मैसूर बानी
D.लालगुडी बानी

उत्तर (Ans): A. कराईकुडी बानी (Karaikudi Bani)

व्याख्या (Explanation): कराईकुडी घराना कर्नाटक संगीत में 'वैणिक' (वीणा वादकों) की एक अत्यंत प्रतिष्ठित और शुद्ध परंपरा है। कराईकुडी साम्बसिव अय्यर (1888-1958) इस परंपरा के सातवीं पीढ़ी के महान कलाकार थे। वे वीणा को खड़े होकर बजाने की जगह बैठकर गोद में रखकर बजाने की कठोर शैली को लोकप्रिय बनाने के लिए जाने जाते थे, जिसे 'कराईकुडी बानी' (Karaikudi Bani) कहा जाता है। इस शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे वीणा पर तारों को बजाने के लिए किसी कृत्रिम तार की अंगूठी (मिजराब) का प्रयोग करने की जगह सीधे उंगलियों के पोरों से बजाते थे, जिससे वीणा की आवाज बेहद कोमल, मधुर और गहरी गूंज वाली उत्पन्न होती थी।

151सारंगी वाद्ययंत्र को बजाने की तकनीक अन्य सभी तत वाद्यों (String Instruments) से पूर्णतः भिन्न है। सारंगी बजाते समय वादक तारों को दबाने के लिए उंगलियों के पोरों (fingertips) की जगह हाथ के किस हिस्से का प्रयोग करता है, जो इसे सबसे कठिन वाद्यों में से एक बनाता है?
A.नाखूनों के ठीक ऊपर की त्वचा (Cuticles / skin above the nails)
B.हथेली का निचला हिस्सा (Base of the palm)
C.केवल अँगूठे का अंदरूनी हिस्सा
D.उंगलियों के बीच का जोड़ (Knuckles)

उत्तर (Ans): A. नाखूनों के ठीक ऊपर की त्वचा (Cuticles / skin above the nails)

व्याख्या (Explanation): सारंगी शास्त्रीय संगीत का सबसे संवेदनशील और कठिन वाद्ययंत्र माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वादन विशेषता यह है कि इसमें सुर निकालने के लिए तारों को अन्य वाद्यों (जैसे सितार या गिटार) की तरह उंगलियों के पोरों से नहीं दबाया जाता। इसके विपरीत, वादक अपने बाएं हाथ की उंगलियों के नाखूनों के ठीक ऊपर की कोमल त्वचा (Cuticles) या नाखूनों की जड़ को तारों के पार्श्व (side) पर रगड़ता या खिसकाता है। इस घर्षण तकनीक के कारण वादक की उंगलियों में गहरे घाव या निशान बन जाते हैं, और अत्यधिक दर्द के बावजूद इस कला को साधना पड़ता है। इसी तकनीक के कारण सारंगी से निकलने वाली आवाज इंसानी कंठ के रोने, गाने या हंसने की आवाजों के सबसे करीब महसूस होती है।

152मैहर घराने (Maihar Gharana) के संस्थापक आचार्य बाबा अलाउद्दीन खान ने वर्ष 1918 में मध्य प्रदेश के मैहर राज्य में अनाथ बच्चों को संगीत के माध्यम से पुनर्वासित करने के लिए किस ऐतिहासिक बैंड/ऑर्केस्ट्रा का गठन किया था, जो आज भी अपनी शास्त्रीय प्रस्तुतियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है?
A.मैहर बैंड (Maihar Band / Maihar Orchestral Group)
B.अलाउद्दीन खान राष्ट्रीय वाद्यवृंद
C.शारदा संगीत वाद्यवृंद
D.सेनिया-मैहर सिंफनी

उत्तर (Ans): A. मैहर बैंड (Maihar Band / Maihar Orchestral Group)

व्याख्या (Explanation): बाबा अलाउद्दीन खान ने वर्ष 1918 में तत्कालीन मैहर रियासत के महाराजा ब्रजनाथ सिंह के संरक्षण में 'मैहर बैंड' (Maihar Band) की स्थापना की थी। इस बैंड की स्थापना के पीछे एक अत्यंत मानवीय कहानी है; उस समय फैले भीषण इन्फ्लूएंजा (महामारी) और अकाल के कारण सैकड़ों बच्चे अनाथ हो गए थे। बाबा अलाउद्दीन खान ने इन अनाथ और बेसहारा बच्चों को गोद लिया और उन्हें विभिन्न भारतीय व पश्चिमी वाद्ययंत्र (जैसे वायलिन, सैक्सोफोन, क्लैरिनेट, सितार और सरोद) बजाना सिखाया। उन्होंने पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा की तर्ज पर भारतीय शास्त्रीय रागों को बजाने का एक अनूठा समन्वय स्थापित किया। मैहर बैंड आज भी शास्त्रीय संगीत की एक अमूल्य और जीवित ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका संचालन वर्तमान में मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा किया जाता है।

153सुरबहार (Surbahar) वाद्ययंत्र के प्रसिद्ध आविष्कारक 'उस्ताद गुलाम मोहम्मद खान' मुख्य रूप से अवध के किस नवाब के शाही दरबार के सबसे सम्मानित सितार और सुरबहार वादक थे?
A.नवाब वाजिद अली शाह (Nawab Wajid Ali Shah)
B.नवाब आसफ-उद-दौला
C.नवाब शुजाउद्दौला
D.नवाब गाजीउद्दीन हैदर

उत्तर (Ans): A. नवाब वाजिद अली शाह (Nawab Wajid Ali Shah)

व्याख्या (Explanation): सुरबहार (Bass Sitar) के आविष्कार और विकास का श्रेय 19वीं शताब्दी के महान संगीतज्ञ उस्ताद गुलाम मोहम्मद खान को दिया जाता है। वे अवध के अंतिम नवाब और संगीत व कला के महान संरक्षक 'नवाब वाजिद अली शाह' के दरबार के मुख्य दरबारी संगीतकार थे। गुलाम मोहम्मद खान ने सितार के आकार को बहुत बड़ा करके, उसके कद्दू (tumba) को विशाल रूप दिया और उसमें मोटे पीतल व लोहे के तारों का उपयोग किया ताकि ध्रुपद शैली की आलापचारी की गंभीर और गहरी गूंज पैदा की जा सके। नवाब वाजिद अली शाह स्वयं उनके वादन के बहुत बड़े प्रशंसक थे और जब नवाब को अंग्रेजों द्वारा कोलकाता के मटियाबुर्ज में निर्वासित किया गया, तब भी उस्ताद गुलाम मोहम्मद उनके साथ वहाँ गए थे।

154हिंदुस्तानी सितार वादन के इतिहास में उस महान सम्राट का नाम बताइए जिन्होंने संगीत की सर्वोच्च गरिमा का हवाला देते हुए वर्ष 1964 में 'पद्म श्री', 1968 में 'पद्म भूषण' और वर्ष 2000 में 'पद्म विभूषण' पुरस्कारों को यह कहकर ठुकरा दिया था कि "पुरस्कार देने वाली समिति मेरे संगीत का मूल्यांकन करने की योग्यता नहीं रखती"?
A.उस्ताद विलायत खान (Ustad Vilayat Khan)
B.उस्ताद अल्लाउद्दीन खान
C.उस्ताद अली अकबर खान
D.पंडित रविशंकर

उत्तर (Ans): A. उस्ताद विलायत खान (Ustad Vilayat Khan)

व्याख्या (Explanation): इटावा (इमदादखानी) घराने के सितार सम्राट उस्ताद विलायत खान (1928-2004) भारतीय संगीत जगत के सबसे स्वाभिमानी कलाकारों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में भारत सरकार द्वारा घोषित तीन बड़े नागरिक सम्मानों—पद्म श्री (1964), पद्म भूषण (1968) और पद्म विभूषण (2000)—को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था। उनका दृढ़ विश्वास था कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के मूल्यांकन के लिए सरकारी नौकरशाहों या राजनेताओं की बनाई गई समितियां अयोग्य हैं। उनका यह भी मानना था कि उनसे कनिष्ठ (junior) कलाकारों को उनसे पहले बड़े सम्मान दे दिए गए, जो कला के वरिष्ठता क्रम का अपमान था। वे मानते थे कि केवल उनके श्रोता और उनका संगीत ही उनका असली सम्मान है।

155कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में 'वायलिन' (Violin) वाद्ययंत्र को मुख्यधारा की शास्त्रीय संगीत पद्धतियों में शामिल करने और इसे गायकी की संगत का मुख्य आधार बनाने का ऐतिहासिक श्रेय 18वीं शताब्दी के किस महान संगीतज्ञ को दिया जाता है?
A.बालुस्वामी दीक्षितर (Baluswami Dikshitar)
B.मुथुस्वामी दीक्षितर
C.त्यागराज
D.श्यामा शास्त्री

उत्तर (Ans): A. बालुस्वामी दीक्षितर (Baluswami Dikshitar)

व्याख्या (Explanation): यद्यपि वायलिन एक मूलतः पश्चिमी वाद्ययंत्र है, लेकिन कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में इसे अपनाने और प्रतिष्ठित करने का श्रेय 'बालुस्वामी दीक्षितर' (1786-1858) को जाता है। वे कर्नाटक संगीत के त्रिमूर्ति में से एक 'मुथुस्वामी दीक्षितर' के छोटे भाई थे। बालुस्वामी ने मनाली (चेन्नई के पास) के तत्कालीन जमींदार के दरबार में एक ब्रिटिश बैंड मास्टर से पश्चिमी वायलिन बजाना सीखा था। उन्होंने तुरंत भांप लिया कि वायलिन की निरंतर गूंजने वाली और कोमल ध्वनि कर्नाटक संगीत के सूक्ष्म गमक (Gamaka) निकालने के लिए सबसे उपयुक्त है। उन्होंने वायलिन को ट्यून करने की भारतीय पद्धति (सा-पा-सा-पा) विकसित की और बैठने की मुद्रा में इसे बजाना शुरू किया, जिससे यह दक्षिण भारतीय संगीत का अभिन्न हिस्सा बन गया।

156घटम (Ghatam), जो कि मिट्टी का एक घड़ा होता है, को बजाते समय वादक अपनी उंगलियों और हथेलियों के अलावा अपने शरीर के किस विशिष्ट अंग का उपयोग करके घड़े के मुंह से निकलने वाली हवा के दबाव को नियंत्रित करता है और लाइव पिच (Pitch) बदलता है?
A.पेट (Stomach / Belly)
B.छाती (Chest)
C.जांघ (Thigh)
D.कंधा (Shoulder)

उत्तर (Ans): A. पेट (Stomach / Belly)

व्याख्या (Explanation): घटम एक बहुत ही अनूठा अवनद्ध वाद्य यंत्र है जो पूरी तरह से पकी हुई मिट्टी से बनता है। इसे बजाते समय घटम का जो संकरा खुला मुंह (neck) होता है, उसे वादक अपने नग्न पेट (Stomach) की तरफ सटाकर रखता है। जब वादक अपनी उंगलियों और हथेलियों से घटम की दीवारों पर तीव्र आघात करता है, तो घड़े के अंदर की हवा कंपित होती है। इस दौरान घड़े के मुंह से निकलने वाली हवा के दबाव को वादक अपने पेट को आगे-पीछे करके या मुंह को दबाकर-खोलकर नियंत्रित करता है। पेट के इस जादुई स्पर्श और हवा के दबाव के लाइव नियंत्रण के कारण ही घटम से गहरे बेस (bass) और गूंजने वाले सुर उत्पन्न होते हैं।

157महान बाँसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने अपने प्रारंभिक जीवन में अपने पिता (जो उन्हें एक पहलवान बनाना चाहते थे) से छिपकर संगीत सीखना शुरू किया था। बाँसुरी को अपनाने से पहले उन्होंने किस शास्त्रीय कला विधा में शुरुआती औपचारिक प्रशिक्षण लिया था?
A.शास्त्रीय गायन (Classical Vocal)
B.तबला वादन
C.कुश्ती और जिमनास्टिक
D.सितार वादन

उत्तर (Ans): A. शास्त्रीय गायन (Classical Vocal)

व्याख्या (Explanation): पंडित हरिप्रसाद चौरसिया (जन्म 1938) के पिता प्रयागराज (इलाहाबाद) में एक पेशेवर पहलवान थे और वे चाहते थे कि उनका बेटा भी कुश्ती के अखाड़े में उतरे। संगीत के प्रति बेहद झुकाव होने के कारण, चौरसिया जी ने अपने पिता से छिपकर मात्र 15 वर्ष की आयु में अपने पड़ोसी पंडित राजाराम से शास्त्रीय गायन (Classical Vocal Singing) सीखना शुरू कर दिया था। इसके कुछ समय बाद, जब उन्होंने महान बाँसुरी वादक पंडित भोलानाथ प्रसन्ना को सुना, तो वे बाँसुरी की तरफ आकर्षित हुए और बाँसुरी वादन सीखना शुरू किया। गायन के इस शुरुआती कड़े अभ्यास के कारण ही बाद में उनकी बाँसुरी शैली में 'गायन अंग' (Vocal technique) की अनूठी मिठास और सांसों पर अद्भुत नियंत्रण विकसित हुआ।

158'मृदंगम' (Mridangam) वाद्ययंत्र के बाएं मुख (जिसे 'थोप्पी' या Thoppi कहा जाता है) पर वादन शुरू करने से ठीक पहले किस सामग्री का एक गीला लेप अस्थाई रूप से लगाया जाता है, जिसे प्रदर्शन के तुरंत बाद हटा दिया जाता है?
A.सूजी/रवा और पानी का लेप (Semolina and water paste)
B.गीली लाल मिट्टी
C.चावल का मांड और चारकोल
D.चंदन का लेप

उत्तर (Ans): A. सूजी/रवा और पानी का लेप (Semolina and water paste)

व्याख्या (Explanation): मृदंगम के दो मुख होते हैं। दाहिने मुख पर स्थाई रूप से काले रंग का मसाला (श्याही या करणी) लगा होता है, जिससे तीखे सुर निकलते हैं। इसके विपरीत, बाएं मुख (थोप्पी) को गहरा बेस (bass) और मंद्र स्वर प्रदान करने के लिए उस पर वादन शुरू करने से ठीक 5-10 मिनट पहले 'सूजी (रवा) या गूंथे हुए गीले आटे' और पानी का एक कच्चा लेप लगाया जाता है। यह गीला लेप बाएं मुख की त्वचा के कंपन को धीमा कर देता है, जिससे अत्यधिक गहरी और गूंजने वाली मधुर बेस ध्वनि उत्पन्न होती है। प्रदर्शन समाप्त होने के तुरंत बाद इस लेप को खुरचकर हटा दिया जाता है ताकि चमड़े को सड़ने या खराब होने से बचाया जा सके।

159विस्मयकारी बाल प्रतिभा (Child Prodigy) 'यू. श्रीनिवास' (U. Srinivas) ने इलेक्ट्रिक मेंडोलिन पर कर्नाटक शास्त्रीय संगीत बजाकर पूरी दुनिया को चकित कर दिया था। उन्होंने वर्ष 1995 में प्रसिद्ध कनाडाई गिटार वादक 'माइकल ब्रुक' (Michael Brook) के साथ मिलकर किस ऐतिहासिक जुगलबंदी एल्बम का निर्माण किया था, जो वैश्विक फ्यूजन संगीत का मील का पत्थर माना जाता है?
A.ड्रीम (Dream)
B.द रेन (The Rain)
C.रिफ्लेक्शंस (Reflections)
D.शक्ति रीविजिटेड

उत्तर (Ans): A. ड्रीम (Dream)

व्याख्या (Explanation): उपलापु श्रीनिवास (यू. श्रीनिवास, 1969-2014) ने मात्र 9 वर्ष की आयु से मेंडोलिन बजाकर शास्त्रीय जगत में तहलका मचाया था। उन्होंने वर्ष 1995 में प्रसिद्ध कनाडाई गिटार वादक और निर्माता माइकल ब्रुक के साथ मिलकर 'ड्रीम' (Dream) नामक एक अत्यंत क्रांतिकारी वैश्विक फ्यूजन एल्बम रिकॉर्ड किया था। इस एल्बम में भारतीय रागों की गमक और पश्चिमी एम्बिएंट गिटार का जो अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया गया था, उसने विश्व संगीत (World Music) को एक नया आयाम दिया। इस एल्बम की वैश्विक सफलता के बाद उन्हें दुनिया भर के बड़े जैज और रॉक समारोहों में प्रदर्शन करने के निमंत्रण मिले थे।

160प्रसिद्ध 'कंजिरा' (Kanjira) वाद्ययंत्र के निर्माण में पारंपरिक रूप से किस संकटग्रस्त जीव की त्वचा का उपयोग इसके फ्रेम पर मढ़ने के लिए किया जाता रहा है, जिसके कारण वर्तमान में इसके व्यावसायिक निर्माण पर कड़े प्रतिबंध हैं और अब कृत्रिम फाइबर का प्रयोग किया जाता है?
A.मॉनिटर छिपकली (Monitor Lizard / गोह)
B.अजगर (Python)
C.मगरमच्छ की पीठ की खाल
D.कस्तूरी हिरण की नाभि का चमड़ा

उत्तर (Ans): A. मॉनिटर छिपकली (Monitor Lizard / गोह)

व्याख्या (Explanation): कंजिरा दक्षिण भारत का एक छोटा फ्रेम ड्रम है जो दिखने में डफली जैसा होता है। पारंपरिक रूप से इसकी बेजोड़ खनक और टोनल क्वालिटी के लिए इसके फ्रेम पर 'मॉनिटर छिपकली' (Monitor Lizard या भारतीय गोह, वैज्ञानिक नाम: Varanus bengalensis) की त्वचा मढ़ी जाती थी। चूंकि मॉनिटर छिपकली भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत एक संरक्षित और लुप्तप्राय प्रजाति है, इसलिए इसकी त्वचा का शिकार और व्यापार पूरी तरह से प्रतिबंधित और दंडनीय है। इस प्रतिबंध के कारण अब आधुनिक कंजिरा वादक और निर्माता सिंथेटिक सामग्री (जैसे Remo का Fiberskyn) या बकरे की त्वचा का उपयोग करते हैं, जो पर्यावरण और वन्यजीवों के अनुकूल है।

161'सरोद' वाद्ययंत्र के इतिहास के सबसे प्रसिद्ध स्तंभ उस्ताद अमजद अली खान के ग्वालियर स्थित पैतृक घर को, जहाँ उनकी सात पीढ़ियों ने सरोद साधना की थी, वर्तमान में किस सुविख्यात संगीत संग्रहालय और अनुसंधान केंद्र में परिवर्तित कर दिया गया है?
A.सरोद घर (Sarod Ghar)
B.सेनिया बंगश संग्रहालय
C.अलाउद्दीन खान संगीत दीर्घा
D.तानसेन संगीत साधना केंद्र

उत्तर (Ans): A. सरोद घर (Sarod Ghar)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद अमजद अली खान के ग्वालियर (मध्य प्रदेश) स्थित पूर्वजों के ऐतिहासिक घर को "सरोद घर" (Sarod Ghar - Museum of Music) के नाम से एक राष्ट्रीय संगीत संग्रहालय में बदल दिया गया है। यह संस्थान उस्ताद हाफिज अली खान मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। इस संग्रहालय में भारत के महानतम संगीतकारों के प्राचीन और दुर्लभ वाद्ययंत्र (जैसे उस्ताद हाफिज अली खान का सरोद, बाबा अलाउद्दीन खान की विचित्र वीणा और अन्य ऐतिहासिक वाद्य) संरक्षित हैं। यह स्थान ग्वालियर की समृद्ध सेनिया-बंगश संगीत परंपरा का एक जीवंत प्रतीक है और संगीत प्रेमियों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल की तरह है।

162कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के कॉन्सर्ट (Concert) के दौरान, जब मुख्य गायक या वादक अपनी प्रस्तुति पूरी कर लेता है, तो अंत में सभी ताल-वादक (जैसे मृदंगम, घटम, कंजिरा और मोर्सिंग के कलाकार) मिलकर एक अत्यंत जटिल और भव्य एकल एकल लयबद्ध जुगलबंदी प्रस्तुत करते हैं। इस विशिष्ट लयबद्ध सत्र को क्या कहा जाता है?
A.तनी आवर्तनम (Tani Avartanam)
B.राग अल्पम (Raga Alapana)
C.कल्पम स्वरम
D.थिलाना (Thillana)

उत्तर (Ans): A. तनी आवर्तनम (Tani Avartanam)

व्याख्या (Explanation): कर्नाटक संगीत की मुख्य कॉन्सर्ट पद्धति में 'तनी आवर्तनम' (Tani Avartanam) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रोमांचक हिस्सा होता है। मुख्य गीत (कृति) के समाप्त होने के ठीक बाद, मुख्य राग और ताल के अंतर्गत मुख्य मृदंगम वादक अपने साथी ताल-वादकों (जैसे घटम, कंजिरा, मोर्सिंग) के साथ मिलकर एक अत्यंत गणितीय और तीव्र गति की सोलो लयबद्ध श्रृंखला प्रस्तुत करते हैं। इसमें प्रत्येक वादक अपनी उंगलियों की गति और प्रतिभा का प्रदर्शन करता है और अंत में सभी वादक एक अत्यंत कठिन 'कोरवई' (लयबद्ध पैटर्न) पर आकर एक साथ मुख्य सम (Sam) पर मिलते हैं। यह सत्र कर्नाटक संगीत के गणितीय सौंदर्य को दर्शाता है।

163महान सारंगी सम्राट पंडित राम नारायण को सारंगी को विश्व स्तर पर एकल वाद्य के रूप में स्थापित करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में किस प्रसिद्ध पश्चिमी वाद्ययंत्र के 'बो' (Bow / गज) की बनावट से प्रभावित होकर सारंगी के 'गज' में क्रांतिकारी सुधार किए थे?
A.वायलिन का गज (Violin Bow)
B.सेलो का गज (Cello Bow)
C.डबल बास का गज
D.उपर्युक्त में से कोई नहीं, उन्होंने पारंपरिक गज को ही बनाए रखा

उत्तर (Ans): A. वायलिन का गज (Violin Bow)

व्याख्या (Explanation): पंडित राम नारायण (1927-2024) ने जब सारंगी को एक स्वतंत्र सोलो वाद्य के रूप में बजाना शुरू किया, तो उन्हें महसूस हुआ कि पारंपरिक भारतीय भारी और गोल सारंगी का गज (bow) तीव्र गतियों और सूक्ष्म आलाप की निरंतरता के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं था। उन्होंने पश्चिमी वायलिन के गज (Violin Bow) का गहराई से अध्ययन किया और इसकी हल्की, लचीली और सीधे बालों के खिंचाव की तकनीक को सारंगी के भारी गज में अपनाया। उन्होंने गज की लंबाई बढ़ाई और उस पर घोड़ों के बालों की ट्यूनिंग को अधिक सटीक बनाया। इस सुधार के कारण वे सारंगी पर बिना किसी रुकावट के लगातार लंबी मींड और द्रुत तानें बजाने में सक्षम हुए।

164पंडित शिवकुमार शर्मा ने कश्मीर के लोक वाद्य 'संतूर' को शास्त्रीय मंच के अनुकूल बनाने के लिए इसके तारों की संख्या में भारी कमी की थी। पारंपरिक कश्मीरी संतूर में जहाँ १०० तार (शत-तंत्री) होते थे, वहीं पंडित शिवकुमार शर्मा द्वारा संशोधित आधुनिक शास्त्रीय संतूर में कुल कितने तार होते हैं?
A.87 से 91 तार
B.50 तार
C.120 तार
D.72 तार

उत्तर (Ans): A. 87 से 91 तार

व्याख्या (Explanation): मूल कश्मीरी संतूर जिसे सूफियाना मौसीकी में बजाया जाता था, उसमें 100 तार होते थे जिन्हें धातु की चाबियों से ट्यून किया जाता था। पंडित शिवकुमार शर्मा ने जब इसे शास्त्रीय रागों के अनुकूल ढाला, तो उन्होंने पाया कि इतने अधिक तारों के कारण रागों की शुद्धता बनाए रखना और लाइव ट्यूनिंग करना लगभग असंभव था। उन्होंने संतूर की बनावट को अधिक वैज्ञानिक बनाया और इसके तारों की संख्या को घटाकर लगभग 87 से 91 तारों के बीच सीमित कर दिया। इसके अलावा उन्होंने पीतल और स्टील के तारों की मोटाई में बदलाव किया और संतूर के पुलों (bridges) की संख्या और उनकी स्थिति को भी बदला ताकि रागों के गमक और मींड को आंशिक रूप से लकड़ी की कलम (mallets) के कोमल घर्षण से निकाला जा सके।

165सुरबहार (Surbahar) और सितार के इतिहास में प्रसिद्ध 'इमदादखानी घराना' (इटावा घराना) का नाम मुख्य रूप से किस महान संगीत ऋषि के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने सितार वादन में 'गायकी अंग' की नींव रखी थी?
A.उस्ताद इमदाद खान (Ustad Imdad Khan)
B.उस्ताद इनायत खान
C.उस्ताद विलायत खान
D.उस्ताद साहिबदाद खान

उत्तर (Ans): A. उस्ताद इमदाद खान (Ustad Imdad Khan)

व्याख्या (Explanation): इमदादखानी घराने का नामकरण उस्ताद इमदाद खान (1848-1920) के नाम पर हुआ है, जो अपने समय के सबसे महान सितार और सुरबहार वादक थे। वे इटावा के पास पैदा हुए थे, इसलिए इस घराने को 'इटावा घराना' भी कहा जाता है। इमदाद खान भारत के पहले ऐसे सितार वादक थे जिनकी प्रस्तुतियों को रिकॉर्ड किया गया था (वर्ष 1904 में ग्रामोफोन कंपनी द्वारा)। उन्होंने सितार वादन में गायन शैली (Vocal style) को शामिल किया और अपने बेटों—उस्ताद इनायत खान और उस्ताद वाहिद खान—को इसकी कठोर शिक्षा दी, जिन्होंने बाद में इस परंपरा को चरम पर पहुँचाया।

166कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में 'वीणा' (Veena) वाद्ययंत्र के किस विशिष्ट भाग के सिरे पर 'याली' (Yali - एक हिंदू पौराणिक मिश्रित जीव, जो शेर और हाथी का संगम है) का अत्यंत कलात्मक और नक्काशीदार चेहरा बना होता है, जो इस देव-वाद्य की पहचान है?
A.पेग बॉक्स / डांड का सिरा (Neck / Pegbox end)
B.तुंबा (Resonator / कद्दू)
C.ब्रिज (पुल)
D.फ्रेटबोर्ड का मध्य भाग

उत्तर (Ans): A. पेग बॉक्स / डांड का सिरा (Neck / Pegbox end)

व्याख्या (Explanation): सरस्वती वीणा (Saraswati Veena) की बनावट भारतीय कला और शिल्प कौशल का बेजोड़ नमूना है। इसके संकरे डांड (neck) के ठीक अंत में, जहाँ ट्यूनिंग खूँटियाँ (pegs) लगी होती हैं, लकड़ी को तराशकर एक विशेष पौराणिक जीव 'याली' (Yali) का मुख बनाया जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में याली को अत्यंत शक्तिशाली रक्षक जीव माना गया है। यह नक्काशी न केवल वीणा को एक अलौकिक और राजसी रूप प्रदान करती है, बल्कि यह वीणा के वजन को संतुलित करने और उसके कंपन को लकड़ी के माध्यम से गूंजने में भी मदद करती है।

167तबला वादन के इतिहास में 'पंजाब घराने' के महान खलीफा उस्ताद अल्ला रक्खा के मुख्य गुरु कौन थे, जिन्होंने उन्हें पंजाब बाज के अत्यंत कठिन और खुले बोलों (पखावाज शैली) की जादुई दीक्षा दी थी?
A.उस्ताद कादिर बख्श (Ustad Kadir Baksh)
B.उस्ताद लाल मोहम्मद खान
C.उस्ताद मुनीर खान
D.उस्ताद अहमद जान थिरकवा

उत्तर (Ans): A. उस्ताद कादिर बख्श (Ustad Kadir Baksh)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद अल्ला रक्खा (1919-2000) ने तबले की प्रारंभिक दीक्षा उस्ताद लाल मोहम्मद से ली थी, लेकिन उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण गुरु 'उस्ताद कादिर बख्श' थे। उस्ताद कादिर बख्श पंजाब घराने के सबसे प्रख्यात खलीफा थे और वे अपनी बिजली जैसी उंगलियों की गति और पखावाज के कठिन बोलों को तबले पर निकालने की कला के लिए विख्यात थे। कादिर बख्श ने अल्ला रक्खा को अपने बेटे की तरह पाला और उन्हें पंजाब घराने के सैकड़ों साल पुराने गुप्त कायदे, पेशकार और गतें सिखाईं, जिसे अल्ला रक्खा ने बाद में पूरी दुनिया में फैलाया।

168प्रसिद्ध जलतरंग (Jaltarang) वाद्ययंत्र में पानी के स्तर और कटोरों के आकार का ध्वनि के वैज्ञानिक ध्वनि विज्ञान (Acoustics) पर क्या प्रभाव पड़ता है, जिससे सुरों की पिच (Pitch) नियंत्रित होती है?
A.कटोरे में पानी का स्तर जितना अधिक होगा, उत्पन्न होने वाले सुर की पिच उतनी ही नीची (Lower pitch / bass) होगी
B.कटोरे में पानी का स्तर जितना अधिक होगा, सुर की पिच उतनी ही ऊँची (Higher pitch / treble) होगी
C.पानी के स्तर का पिच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, यह केवल कटोरे के आकार पर निर्भर करता है
D.पानी केवल कटोरे को टूटने से बचाने के लिए भरा जाता है

उत्तर (Ans): A. कटोरे में पानी का स्तर जितना अधिक होगा, उत्पन्न होने वाले सुर की पिच उतनी ही नीची (Lower pitch / bass) होगी

व्याख्या (Explanation): जलतरंग का वादन भौतिकी के तरंग सिद्धांतों (Wave acoustics) पर आधारित है। जब चीनी-मिट्टी के कटोरे पर लकड़ी की डंडी से प्रहार किया जाता है, तो कटोरे की दीवारें और उसके अंदर की हवा कंपित होती है। कटोरे में 'पानी का स्तर जितना अधिक' होता है, वह कटोरे के कंपन की गति (frequency) को उतना ही धीमा कर देता है। धीमी आवृत्ति (Lower frequency) के कारण निकलने वाला स्वर नीचा यानी मंद्र (Lower pitch / Bass) होता है। इसके विपरीत, पानी कम होने पर कंपन की गति तेज होती है और स्वर ऊँचा व तीखा (Higher pitch) निकलता है। इसलिए वादक कटोरों में पानी की बूंद-बूंद मात्रा को सावधानीपूर्वक ट्यून करता है।

169उस्ताद विलायत खान के छोटे भाई उस्ताद इमरात खान सुरबहार वादन के अद्वितीय जादूगर थे। वे सुरबहार वाद्य को और अधिक गहरा सुर देने के लिए किस विशेष प्रकार के तारों का उपयोग करते थे, जो आम तौर पर सितार में प्रयुक्त नहीं होते?
A.पीतल और कांसे के बहुत मोटे तार (Thick brass & bronze strings)
B.चांदी के महीन तार
C.घोड़े के बाल से बने तार
D.बकरे की आंत से बने गुट तार (Gut strings)

उत्तर (Ans): A. पीतल और कांसे के बहुत मोटे तार (Thick brass & bronze strings)

व्याख्या (Explanation): सुरबहार (Bass Sitar) की पहचान इसकी अत्यधिक गंभीर, गूंजने वाली और भारी ध्वनि है जो ध्रुपद गायकी के मंद्र सप्तक को छूती है। इस गहरी गूंज को उत्पन्न करने के लिए उस्ताद इमरात खान सुरबहार पर सितार के सामान्य स्टील के पतले तारों की जगह 'पीतल (brass) और कांसे (bronze) के विशेष रूप से तैयार किए गए बहुत मोटे तारों' का उपयोग करते थे। इन भारी तारों को खींचने और उन पर कंपन पैदा करने के लिए बाएं हाथ की उंगलियों में प्रचंड ताकत और कड़े अभ्यास की आवश्यकता होती थी। यही कारण है कि सुरबहार वादन को दुनिया के सबसे कठिन शारीरिक श्रम वाले वाद्यों में गिना जाता है।

170प्रसिद्ध शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्लाह खान अपने प्रारंभिक जीवन में वाराणसी (बनारस) के किस गंगा घाट पर स्थित ऐतिहासिक मंदिर में बैठकर लगातार घंटों तक शहनाई का रियाज करते थे, जहां से उनकी गंगा-जमुनी तहजीब की संगीत शैली विकसित हुई थी?
A.पंचगंगा घाट पर स्थित बालाजी मंदिर (Balaji Temple at Panchganga Ghat)
B.दशाश्वमेध घाट पर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर
C.अस्सी घाट पर स्थित जगन्नाथ मंदिर
D.मणिकर्णिका घाट पर स्थित शिव मंदिर

उत्तर (Ans): A. पंचगंगा घाट पर स्थित बालाजी मंदिर (Balaji Temple at Panchganga Ghat)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद बिस्मिल्लाह खान (1916-2006) का शुरुआती जीवन बनारस की तंग गलियों और गंगा के घाटों पर बीता। उनके मामा अली बख्श 'विलायती' वाराणसी के प्रसिद्ध 'पंचगंगा घाट' पर स्थित 'मंगला गौरी और बालाजी मंदिर' के मुख्य शहनाई वादक थे। बिस्मिल्लाह खान अपने मामा के साथ रोज भोर में 3 बजे इस मंदिर के कमरों में बैठ जाते थे और गंगा जी की शीतल बयार के बीच घंटों शहनाई का कठिन रियाज करते थे। मंदिर के शांत वातावरण और गंगा मैया की लहरों की आवाज ने उनके शहनाई वादन में एक अलौकिक आध्यात्मिक गहराई भर दी थी, जिसे वे जीवन भर याद करते थे।

171प्रसिद्ध 'वायलिन' वादिका डॉ. एन. राजम (N. Rajam) ने वायलिन पर बनारस घराने की शुद्ध गायकी अंग (Vocal Style) शैली का अभूतपूर्व विकास किया। वे मुख्य रूप से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के किस महान और ऐतिहासिक ख्याल गायक की सबसे प्रखर शिष्या रही हैं?
A.पंडित ओंकारनाथ ठाकुर (Pt. Omkarnath Thakur)
B.उस्ताद फैयाज खान
C.पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर
D.पंडित भीमसेन जोशी

उत्तर (Ans): A. पंडित ओंकारनाथ ठाकुर (Pt. Omkarnath Thakur)

व्याख्या (Explanation): डॉ. एन. राजम ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति और ग्वालियर घराने के महानतम गायक 'पंडित ओंकारनाथ ठाकुर' (जो पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर के शिष्य थे) से संगीत की गहन शिक्षा प्राप्त की थी। ओंकारनाथ ठाकुर की गायकी अपनी अत्यधिक भावुकता, तीव्र गमक और विस्तृत आलाप के लिए प्रसिद्ध थी। डॉ. राजम ने उनके गाए हुए भजनों, ख्यालों और ठुमरियों की बारीक से बारीक तानों को वायलिन के तारों पर हूबहू उतारने का कठिन अभ्यास किया। उनके इस प्रयास से वायलिन पर "गाती हुई वायलिन" (Singing Violin) तकनीक का जन्म हुआ, जो आज बनारस वायलिन घराने की पहचान है।

172तबला वादन में दाहिने तबले (चांटी) के बिल्कुल केंद्र में जो गोल काले रंग का मसाला लगा होता है जिसे 'श्याही' (Syahi) कहा जाता है, उसके निर्माण में मुख्य रूप से किन तीन सामग्रियों के लेप का वैज्ञानिक मिश्रण प्रयुक्त होता है?
A.लोहे का बुरादा, कोयले की राख/कालिख और पके हुए चावल का मांड
B.काली मिट्टी, सरेस और तांबे का बुरादा
C.जिप्सम, लाख और पानी का घोल
D.गोंद, शीशम की लकड़ी का बुरादा और चारकोल पाउडर

उत्तर (Ans): A. लोहे का बुरादा, कोयले की राख/कालिख और पके हुए चावल का मांड

व्याख्या (Explanation): तबले की श्याही (काले मसाले का पैच) का निर्माण अत्यंत वैज्ञानिक पद्धति से किया जाता है। इसका मुख्य कार्य तबले की ऊपरी चमड़े की परत (pudi) को भारी बनाना है ताकि उस पर चोट करने पर विशिष्ट मधुर और गूंजने वाले सुर (overtones) उत्पन्न हों। इस श्याही को बनाने के लिए बारीक पिसे हुए 'लोहे के बुरादे (iron filings)', 'कोयले की राख या काजल (carbon soot)' और 'पके हुए चावल के मांड (boiled starch paste)' को मिलाकर एक घना लेप तैयार किया जाता है। इस लेप को चमड़े पर अत्यंत महीन परतों के रूप में एक-एक करके लगाया जाता है और प्रत्येक परत के सूखने पर उसे पत्थर से घिसा जाता है। इसी श्याही के कारण तबले से बिल्कुल सटीक सुर निकलता है।

173कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के इतिहास में 'वीणा' वादन के उस महान बाल कौतुक और विद्वान का नाम बताइए, जिन्होंने वीणा को केवल उंगलियों के पोरों से बजाने की 'कराईकुडी बानी' को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया और जिन्हें वर्ष 1982 में मद्रास संगीत अकादमी का "संगीत कलानिधि" पुरस्कार मिला था?
A.कराईकुडी साम्बसिव अय्यर (Karaikudi Sambasiva Iyer)
B.चिता बाबू
C.एस. बालचंदर
D.मैसूर वी. दोरईस्वामी अय्यंगार

उत्तर (Ans): A. कराईकुडी साम्बसिव अय्यर (Karaikudi Sambasiva Iyer)

व्याख्या (Explanation): कराईकुडी साम्बसिव अय्यर (1888-1958) कराईकुडी वीणा घराने के सातवीं पीढ़ी के सबसे यशस्वी स्तंभ थे। वे वीणा वादन की अत्यंत शुद्ध और प्राचीन 'कराईकुडी बानी' के प्रवर्तक थे। उनकी वादन शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे वीणा पर तारों को बजाने के लिए किसी कृत्रिम तार की अंगूठी (मिजराब) का प्रयोग करने की जगह सीधे उंगलियों के पोरों से बजाते थे, जिससे वीणा की आवाज बेहद कोमल, मधुर और गहरी गूंज वाली उत्पन्न होती थी। उन्हें कला के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए मद्रास संगीत अकादमी द्वारा वर्ष 1952 में प्रतिष्ठित 'संगीत कलानिधि' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

174तबले के 'बनारस घराने' के संस्थापक पंडित राम सहाय ने अपने जीवनकाल में बनारस बाज की नींव रखने से पहले दिल्ली घराने के किस महान उस्ताद से लखनऊ दरबार में कई वर्षों तक तबले की शिक्षा प्राप्त की थी?
A.उस्ताद मोदू खान (Ustad Modu Khan)
B.उस्ताद सिद्धार खान ढाढ़ी
C.उस्ताद बख्शू खान
D.उस्ताद अहमद जान थिरकवा

उत्तर (Ans): A. उस्ताद मोदू खान (Ustad Modu Khan)

व्याख्या (Explanation): पंडित राम सहाय (1780-1826) बनारस घराने के संस्थापक खलीफा थे। वे बचपन से ही विस्मयकारी प्रतिभा के धनी थे। वे लखनऊ गए और वहां के नवाब के दरबारी संगीतकार और तबले के पूरब बाज के महान उस्ताद 'मोदू खान' के शिष्य बन गए। मोदू खान लखनऊ घराने के खलीफा थे। राम सहाय ने उनसे 12 वर्षों तक तबले की अत्यंत कठिन शिक्षा ली। बाद में वे वापस वाराणसी (बनारस) लौटे और उन्होंने बनारस की आध्यात्मिक परंपराओं, कथक नृत्य और मंदिरों की शहनाई संगति के अनुकूल तबले का एक नया और स्वतंत्र बाज विकसित किया, जिसे 'बनारस घराना' कहा जाता है।

175प्रसिद्ध सारंगी वादक उस्ताद सुल्तान खान, जो अपने सूफियाना गायन और सारंगी वादन के लिए विख्यात थे, वर्ष 2000 के दशक में किस प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक और फ्यूजन समूह (Fusion Band) के संस्थापक सदस्य थे, जिसमें उस्ताद ज़ाकिर हुसैन और बिल लासवेल (Bill Laswell) भी शामिल थे?
A.तबला बीट साइंस (Tabla Beat Science)
B.शक्ति रीविजिटेड
C.प्लैनेट ड्रम प्रोजेक्ट
D.ग्लोबल रिदम्स

उत्तर (Ans): A. तबला बीट साइंस (Tabla Beat Science)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद सुल्तान खान (1940-2011) केवल पारंपरिक शास्त्रीय सारंगी वादक ही नहीं थे, बल्कि वे नए संगीत प्रयोगों के भी प्रबल समर्थक थे। उन्होंने वर्ष 1999 में महान तबला वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन, प्रसिद्ध अमेरिकी बास गिटार वादक बिल लासवेल और तालवादक त्रिलोक गुर्टू के साथ मिलकर 'तबला बीट साइंस' (Tabla Beat Science) नामक एक अत्यंत क्रांतिकारी अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक-फ्यूजन बैंड की स्थापना की थी। इस बैंड ने भारतीय शास्त्रीय संगीत, डब, ड्रम एंड बेस और जैज का एक बेजोड़ मिश्रण तैयार किया, जिसने पश्चिमी देशों के युवाओं के बीच सारंगी और तबले की गूंज को एक नए रॉक अवतार में लोकप्रिय बनाया था।

176'पखावाज' (Pakhawaj) वाद्ययंत्र के बाएं मुख पर लगने वाले आटे के लेप के विपरीत, इसके दाहिने मुख पर स्थाई रूप से काले रंग का मसाला लगा होता है। इस काले मसाले (श्याही) को पखावाज की स्थानीय तकनीकी भाषा में क्या कहा जाता है?
A.स्याही या करणी (Karanai / Syahi)
B.थोप्पी
C.गजरा
D.चांटी

उत्तर (Ans): A. स्याही या करणी (Karanai / Syahi)

व्याख्या (Explanation): पखावाज (मृदंग) के दाहिने मुख पर स्थाई रूप से लगे काले मसाले के गोल चकत्ते को 'श्याही' या 'करणी' (Karanai) कहा जाता है। यह बिल्कुल तबले की श्याही की तरह ही लोहे के महीन बुरादे, चावल के पके मांड और चारकोल से मिलकर बनता है। इस श्याही के कारण ही पखावाज की ध्वनि को उसकी विशिष्ट गंभीर, तीव्र और तीखी गूंज मिलती है जो ध्रुपद गायन के सुरों के साथ सटीक संवाद स्थापित करने के लिए आवश्यक होती है।

177पंडित कंठे महाराज तबला वादन के इतिहास के सबसे प्रसिद्ध और पूजनीय गुरुओं में से एक थे। बनारस घराने के उस महान तबला सम्राट का नाम बताइए जो कंठे महाराज के सगे भतीजे (Nephew) और शिष्य थे, जिन्होंने बाद में पूरी दुनिया में बनारस बाज का परचम लहराया?
A.पंडित किशन महाराज (Pt. Kishan Maharaj)
B.पंडित समता प्रसाद
C.पंडित अनोखेलाल मिश्र
D.पंडित कुमार बोस

उत्तर (Ans): A. पंडित किशन महाराज (Pt. Kishan Maharaj)

व्याख्या (Explanation): पंडित कंठे महाराज (1880-1969) बनारस घराने के एक अत्यंत शीर्ष तबला वादक थे। उनके भाई के असमय निधन के बाद, उन्होंने अपने भतीजे 'किशन महाराज' (1923-2008) को गोद लिया और उन्हें मात्र 5 वर्ष की आयु से तबले की दीक्षा देनी शुरू की। कंठे महाराज ने किशन महाराज को बनारस घराने की कठिन परनें, गतें और तिहाइयाँ बजाने की गुप्त तकनीकें सिखाईं। किशन महाराज ने बाद में अपनी प्रचंड दाहिने हाथ की ताकत और राजसी शैली से विश्व स्तर पर सोलो तबला वादन को एक नए मुकाम पर पहुँचाया और उन्हें वर्ष 2002 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया था।

178कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के "वायलिन त्रिमूर्ति" (Violin Trinity) के रूप में विख्यात 'टी. एन. कृष्णन' (T. N. Krishnan) मुख्य रूप से किस महान कर्नाटक गायक के दरबार के मुख्य वायलिन संगतकार रहे थे, जिन्होंने उनके वादन की शुद्धता को प्रभावित किया था?
A.अरियाकुडी रामानुज अय्यंगार (Ariyakudi Ramanuja Iyengar)
B.सेम्मनगुडी श्रीनिवास अय्यर
C.जी. एन. बालासुब्रमण्यम
D.एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी

उत्तर (Ans): A. अरियाकुडी रामानुज अय्यंगार (Ariyakudi Ramanuja Iyengar)

व्याख्या (Explanation): प्रोफेसर टी. एन. कृष्णन (1928-2020) कर्नाटक संगीत जगत के सबसे आदरणीय वायलिन वादकों में से एक थे। वे बचपन में ही एक बाल कौतुक के रूप में उभरे और उन्होंने कर्नाटक संगीत के आधुनिक कॉन्सर्ट प्रारूप के जनक 'अरियाकुडी रामानुज अय्यंगार' के साथ लंबे समय तक संगत की थी। अरियाकुडी की संगति के कारण ही कृष्णन जी के वादन में अत्यंत संयमित, शुद्ध और राग की शास्त्रीय मर्यादा को बनाए रखने की एक अद्भुत शैली विकसित हुई, जिसे संगीत जगत में लालित्य और शुद्धता का आदर्श पैमाना माना जाता है।

179'रुद्र वीणा' (Rudra Veena) वाद्ययंत्र को बजाते समय वादक की उंगलियों में किस धातु से बने हुए त्रिकोणीय मिजराब (Plectrums / wire rings) पहने जाते हैं ताकि तारों पर तीव्र प्रहार किया जा सके?
A.तांबे या लोहे के पतले तार के मिजराब (Wire Mizrabs)
B.प्लास्टिक की छड़ें
C.हाथीदांत के छल्ले
D.कछुए की पीठ की खाल के टुकड़े

उत्तर (Ans): A. तांबे या लोहे के पतले तार के मिजराब (Wire Mizrabs)

व्याख्या (Explanation): रुद्र वीणा एक अत्यंत विशाल और भारी तत वाद्य यंत्र है जिसके तार बहुत मोटे और सख्त होते हैं। इन मोटे तारों पर प्रहार करके राग 'ध्रुपद' के गंभीर आलाप और गमक को निकालने के लिए वादक अपने दाहिने हाथ की तर्जनी (index) और मध्यमा (middle) उंगलियों में विशेष रूप से तैयार किए गए तांबे या लोहे के पतले तारों से बने त्रिकोणीय छल्ले पहनता है जिन्हें 'मिजराब' (Mizrab) कहा जाता है। इन मिजराबों की मदद से जब तारों पर प्रहार किया जाता है, तो वीणा के दोनों विशाल कद्दू (Tumbas) कंपित हो उठते हैं और एक अलौकिक आध्यात्मिक ध्वनि उत्पन्न होती है।

180भारत के प्रख्यात 'सरोद' वादक उस्ताद बुद्धदेव दासगुप्ता, जो शाहजहाँपुर घराने के शीर्ष गुरु थे, सरोद वादन की कला के अलावा मूल रूप से किस प्रतिष्ठित क्षेत्र के एक अत्यंत कुशल इंजीनियर और विभागाध्यक्ष (Head of Department) भी थे?
A.मैकेनिकल इंजीनियरिंग (Mechanical Engineering)
B.सिविल इंजीनियरिंग
C.कंप्यूटर साइंस
D.केमिकल इंजीनियरिंग

उत्तर (Ans): A. मैकेनिकल इंजीनियरिंग (Mechanical Engineering)

व्याख्या (Explanation): उस्ताद बुद्धदेव दासगुप्ता (1933-2018) भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास के सबसे अनोखे बहुमुखी व्यक्तित्वों में से एक थे। वे सरोद के महान उस्ताद होने के साथ-साथ एक अत्यंत मेधावी मैकेनिकल इंजीनियर भी थे। उन्होंने प्रतिष्ठित 'शिवपुर इंजीनियरिंग कॉलेज' (वर्तमान IIEST, पश्चिम बंगाल) से प्रथम श्रेणी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की थी। वे कई वर्षों तक कोलकाता के एक तकनीकी संस्थान में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख (HOD) रहे। उनके इस वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण ही सरोद की बनावट, उसके तारों के कंपन के भौतिक विज्ञान (Acoustics) और रागों के ट्यूनिंग पैटर्न पर उनका वैज्ञानिक नियंत्रण अद्भुत माना जाता था। उन्हें वर्ष 2012 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

181तानपुरा (Tanpura) वाद्ययंत्र में विशिष्ट 'जवारी' (Javari - गूंजने वाली समृद्ध और भनभनाहट युक्त ध्वनि) उत्पन्न करने के लिए इसके पुल (Bridge / घोड़ी) और तारों के बीच किस सूक्ष्म सामग्री का उपयोग किया जाता है, जो इसकी ट्यूनिंग की आत्मा मानी जाती है?
A.सूती या रेशमी धागा (Cotton / Silk thread)
B.लोहे की बारीक सुइयाँ
C.केवल पीतल के स्क्रू
D.बांस की पतली छड़ें

उत्तर (Ans): A. सूती या रेशमी धागा (Cotton / Silk thread)

व्याख्या (Explanation): तानपुरा (Tanpura) में 'जवारी' (Javari) या 'स्वयंभू स्वर' (overtones) उत्पन्न करने की तकनीक संगीत का एक बड़ा चमत्कार है। पुल (घोड़ी) जो कि हिरण के सींग, हाथी दांत या ऊंट की हड्डी से बना होता है, के ठीक ऊपर तारों के नीचे सूती या रेशमी धागा (जिसे 'सूत' या thread कहा जाता है) फंसाया जाता है। इस धागे को बहुत सूक्ष्मता से आगे-पीछे खिसकाकर तार और पुल के बीच का संपर्क बिंदु बदला जाता है। जब तार कंपन करता है, तो वह पुल की सपाट सतह पर धीरे से रगड़ खाता है, जिससे केवल एक सुर के बजाय उसके सहायक सुर (Harmonics) गूंज उठते हैं और एक अत्यंत समृद्ध 'भनभनाहट' (buzzing sound) पैदा होती है।

182हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के इतिहास में सितार सम्राट पंडित रविशंकर ने वर्ष 1948 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आकस्मिक निधन पर उनकी स्मृति में किस एक अत्यंत मधुर और नए राग का सृजन किया था?
A.राग बिलासखानी तोडी
B.राग मोहन कौंस (Raga Mohan Kauns)
C.राग मारू बिहाग
D.राग दरबारी कानडा

उत्तर (Ans): B. राग मोहन कौंस (Raga Mohan Kauns)

व्याख्या (Explanation): सितार सम्राट पंडित रविशंकर ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निधन (1948) पर उनकी स्मृति में एक नए राग का सृजन किया था, जिसे उन्होंने 'राग मोहन कौंस' (Mohan Kauns) नाम दिया था। यह राग 'मोहन' (महात्मा गांधी का मूल नाम मोहनदास) और 'राग मालकौंस' के तत्वों का एक सुरीला संगम है। इसके अलावा पंडित रविशंकर ने 'परमेश्वरी', 'कामेश्वरी', 'गंगेश्वरी' और 'जोगेश्वरी' जैसे कई अन्य अत्यंत लोकप्रिय और नए रागों की भी रचना की थी, जिन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को समृद्ध बनाया।

183मृदंगम, तबला या पखावाज के ऊपरी चमड़े की पुड़ी (drumhead) के बाहरी किनारे पर जो चमड़े की सुंदर गूंथी हुई एक गोल पट्टी या बॉर्डर बनी होती है, उसे तकनीकी रूप से क्या कहा जाता है?
A.श्याही (Syahi)
B.गजरा (Gajra / पगड़ी)
C.चांटी
D.बद्दी (Baddi)

उत्तर (Ans): B. गजरा (Gajra / पगड़ी)

व्याख्या (Explanation): तबला, मृदंगम और पखावाज जैसे ताल वाद्यों के निर्माण में 'गजरा' (Gajra) या पगड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह ऊपरी चमड़े की परत (पुड़ी) के बिल्कुल किनारे पर चारों तरफ गूंथी गई चमड़े की एक मोटी, गोलाकार रस्सी जैसी पट्टी होती है। इसी गजरे के भीतर १६ छेद (घर) बनाए जाते हैं, जिनमें से चमड़े की बद्दी (strap) को पिरोकर नीचे की तरफ खींचा जाता है। गजरे की मजबूती पर ही तबले की ट्यूनिंग और उसकी टोनल क्वालिटी टिकी होती है, क्योंकि इसी हिस्से पर चोट करके और गीटियों को खिसकाकर सुर को ऊपर या नीचे किया जाता है।

184वर्ष 1967 में कैलिफोर्निया में आयोजित ऐतिहासिक 'मोंटेरे पॉप फेस्टिवल' (Monterey Pop Festival) में जब पंडित रविशंकर (सितार) और उस्ताद अली अकबर खान (सरोद) की ऐतिहासिक जुगलबंदी हुई, तब मंच पर तबले पर उनका साथ देने वाले पंजाब घराने के महान खलीफा कौन थे?
A.पंडित अनोखेलाल मिश्र
B.उस्ताद अल्ला रक्खा (Ustad Alla Rakha)
C.पंडित सामता प्रसाद
D.उस्ताद जाकिर हुसैन

उत्तर (Ans): B. उस्ताद अल्ला रक्खा (Ustad Alla Rakha)

व्याख्या (Explanation): वर्ष 1967 में आयोजित ऐतिहासिक 'मोंटेरे पॉप फेस्टिवल' (Monterey Pop Festival, कैलिफोर्निया) में पंडित रविशंकर (सितार) और उस्ताद अली अकबर खान (सरोद) की जुगलबंदी ने पश्चिमी दुनिया के युवाओं और रॉक संगीतकारों (जैसे बीटल्स, जिमी हेंड्रिक्स) को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया था। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के दौरान मंच पर तबले पर उनका साथ पंजाब घराने के महान खलीफा 'उस्ताद अल्ला रक्खा' ने दिया था। इस कॉन्सर्ट के लाइव रिकॉर्डिंग एल्बम को पूरी दुनिया में सराहा गया और इसने पश्चिम में भारतीय शास्त्रीय संगीत की लोकप्रियता की मजबूत नींव रखी थी।

185महान बाँसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने बाँसुरी वादन में रागों की शुद्धता और ध्रुपद शैली की गंभीर 'आलापचारी' की दीक्षा लेने के लिए मैहर घराने की किस परम विदुषी को अपना गुरु बनाया था?
A.विदुषी शरण रानी
B.विदुषी अन्नपूर्णा देवी (Vidushi Annapurna Devi)
C.विदुषी सुकन्या रामगोपाल
D.विदुषी एन. राजम

उत्तर (Ans): B. विदुषी अन्नपूर्णा देवी (Vidushi Annapurna Devi)

व्याख्या (Explanation): पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने बाँसुरी वादन की अपनी अनूठी 'गायन अंग' शैली और सांसों पर नियंत्रण विकसित करने के लिए मैहर घराने की महान सुरबहार वादिका और बाबा अलाउद्दीन खान की पुत्री 'विदुषी अन्नपूर्णा देवी' से दीक्षा ली थी। चौरसिया जी पहले से ही एक स्थापित बाँसुरी वादक थे, लेकिन जब वे अन्नपूर्णा देवी के पास गए, तो उन्होंने शर्त रखी कि उन्हें अपने वादन का पुराना तरीका बदलना होगा और बेहद धीमी तथा गंभीर ध्रुपद शैली की आलापचारी सीखनी होगी। अन्नपूर्णा देवी के इस मार्गदर्शन ने उनकी बाँसुरी में राग की शुद्धता और अलौकिक आध्यात्मिक गहराई भर दी।

186कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के विश्व प्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. एन. सुब्रमण्यम (L. Subramaniam) ने संगीत की दुनिया में पूर्णकालिक रूप से आने से पहले किस प्रतिष्ठित क्षेत्र में अपनी उच्च व्यावहारिक डिग्री पूरी की थी?
A.मैकेनिकल इंजीनियरिंग (Mechanical Engineering)
B.एमबीबीएस / मेडिकल डॉक्टर की डिग्री (MBBS / Medical Doctor)
C.भौतिकी में पी.एच.डी. (Ph.D. in Physics)
D.वकालत / कानून की डिग्री (LLB)

उत्तर (Ans): B. एमबीबीएस / मेडिकल डॉक्टर की डिग्री (MBBS / Medical Doctor)

व्याख्या (Explanation): विश्व प्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. एल. सुब्रमण्यम (लक्ष्मणनारायण सुब्रमण्यम) केवल संगीत के ही विद्वान नहीं हैं, बल्कि वे एक योग्य 'मेडिकल डॉक्टर' (MBBS) भी हैं। उन्होंने मद्रास मेडिकल कॉलेज से अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की थी। हालांकि, संगीत के प्रति उनके गहरे समर्पण और पारिवारिक विरासत के कारण उन्होंने चिकित्सा के पेशे को छोड़कर अपना पूरा जीवन वायलिन वादन, फ्यूजन संगीत और शास्त्रीय संगीत के संरक्षण में समर्पित कर दिया। उनके इसी शैक्षणिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण उनके संगीत में अत्यधिक सटीकता और जटिल पश्चिमी आर्केस्ट्रा संचालन की बेजोड़ क्षमता दिखाई देती है।

187तबला वादन के इतिहास में किस घराने को उसकी ऊर्जावान, खुली और पखावाज शैली की भारी थापों के तीव्र बोलों के वादन के लिए जाना जाता है, जिसके विकास में वहां के विशाल भौगोलिक परिवेश का बड़ा प्रभाव था?
A.दिल्ली घराना
B.पंजाब घराना (Punjab Gharana)
C.बनारस घराना
D.अजराड़ा घराना

उत्तर (Ans): B. पंजाब घराना (Punjab Gharana)

व्याख्या (Explanation): तबले का 'पंजाब घराने' (Punjab Gharana) अपनी अत्यंत शक्तिशाली, खुली और पखावाज की भारी शैली (भारी थाप) के प्रभाव के लिए जाना जाता है। इस घराने का विकास पंजाब के खुले और विस्तृत वातावरण में हुआ, जहाँ तबले पर 'चमड़े के खुले बोल' और पखावाज की जोरदार परनें बजाई जाती थीं। पंजाब घराने के बोलों में बिजली जैसी गति और जटिल गणितीय ताल चक्रों का उपयोग होता है, जिसे उस्ताद अल्ला रक्खा और उस्ताद ज़ाकिर हुसैन ने दुनिया भर में लोकप्रिय बनाया।

188सितार सम्राट उस्ताद विलायत खान ने सितार वादन में 'गायकी अंग' (Vocal style) को पूर्णता देने के लिए पारंपरिक ७ तारों वाले सितार में से सबसे भारी 'खरज' का तार हटाकर किस ६ तारों वाले विशिष्ट सितार को विकसित किया था?
A.गंधार-पंचम सितार (Gandhar-Pancham Sitar)
B.खरज-पंचम सितार
C.सरस्वती सितार
D.गायत्री सितार

उत्तर (Ans): A. गंधार-पंचम सितार (Gandhar-Pancham Sitar)

व्याख्या (Explanation): सितार सम्राट उस्ताद विलायत खान ने सितार वादन में 'गायकी अंग' (Vocal style) को पूर्णता देने के लिए सितार की बनावट में क्रांतिकारी सुधार किए थे। उन्होंने पारंपरिक ७ तारों वाले सितार में से सबसे भारी और गंभीर 'खरज' (bass) का तार हटा दिया और उसे ६ तारों के ढांचे में बदल दिया, जिसे 'गंधार-पंचम सितार' (Gandhar-Pancham Sitar) या 'विलायतखानी सितार' कहा जाता है। उन्होंने सितार की ट्यूनिंग को 'सा-पा-सा-पा' की जगह 'सा-म-सा-प-ग' के रूप में संशोधित किया। इस सुधार के कारण सितार पर मानव कंठ की गमक, मींड और मुर्कियां अत्यधिक तीव्र गति और मधुरता से बजने लगीं।

189कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के ताल वादन में प्रयुक्त होने वाले दो सबसे लोकप्रिय घटमों—'मानामदुरै घटम' और 'बैंगलोर घटम'—के बीच बनावट और ध्वनि विज्ञान (Acoustics) का मुख्य अंतर क्या होता है?
A.मानामदुरै घटम अधिक भारी, मोटा होता है और उसमें लोहे व तांबे का बुरादा मिलाया जाता है, जबकि बैंगलोर घटम हल्का और पतली दीवारों वाला होता है
B.बैंगलोर घटम पीतल का बना होता है
C.मानामदुरै घटम को पकाया नहीं जाता
D.दोनों में कोई अंतर नहीं है

उत्तर (Ans): A. मानामदुरै घटम अधिक भारी, मोटा होता है और उसमें लोहे व तांबे का बुरादा मिलाया जाता है, जबकि बैंगलोर घटम हल्का और पतली दीवारों वाला होता है

व्याख्या (Explanation): घटम के वादन में दो मुख्य प्रकार के घटम बहुत प्रसिद्ध हैं: मानामदुरै घटम और बैंगलोर घटम। तमिलनाडु के मानामदुरै में बनने वाला घटम विशेष लाल मिट्टी में लोहे और तांबे के महीन बुरादे को मिलाकर बनाया जाता है। इसकी दीवारें बहुत मोटी और भारी होती हैं, जिसके कारण इसे बजाने के लिए अत्यधिक शारीरिक शक्ति की आवश्यकता होती है और इससे धातु जैसी अत्यंत तीखी व गूंजदार ध्वनि निकलती है। इसके विपरीत, बैंगलोर में बनने वाला घटम बहुत हल्का, पतला और मिट्टी की सामान्य परतों वाला होता है, जिससे कोमल और मंद सुर आसानी से निकलते हैं।

190कर्नाटक संगीत के सर्वप्रमुख देव-वाद्य 'सरस्वती वीणा' (Saraswati Veena) के डांड (Neck) के ऊपर इसके २४ पीतल के पर्दों (Frets) को स्थापित करने के लिए किस विशिष्ट सामग्री के अर्ध-ठोस लेप का उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता है?
A.मधुमक्खी के मोम और कोयले की राख के गाढ़े लेप से (Beeswax and charcoal powder paste)
B.लोहे के पेंचों की मदद से स्थायी रूप से ठोककर
C.सितार की तरह सूती धागों से बांधकर
D.आधुनिक सिंथेटिक एडहेसिव से चिपकाकर

उत्तर (Ans): A. मधुमक्खी के मोम और कोयले की राख के गाढ़े लेप से (Beeswax and charcoal powder paste)

व्याख्या (Explanation): सरस्वती वीणा (Saraswati Veena) की सबसे बड़ी संरचनात्मक विशेषता इसके २४ पीतल के पर्दे (frets) हैं। इन पर्दों को डांड (neck) के ऊपर स्थायी रूप से लगाने के लिए किसी धातु के पेंच या धागे का उपयोग नहीं किया जाता। इसके विपरीत, 'शुद्ध मधुमक्खी के मोम (beeswax)' और 'कोयले के बारीक पाउडर' को मिलाकर एक अर्ध-ठोस काला लेप तैयार किया जाता है। इस मोम के गाढ़े लेप की दो पट्टियाँ डांड पर बिछाई जाती हैं और गर्म पर्दों को बहुत ही सूक्ष्मता से शुद्ध श्रुतियों (Pitches) के अनुसार मोम के ऊपर दबाकर बैठाया जाता है। ठंडा होने पर यह लेप अत्यधिक कठोर हो जाता है, जो पर्दों को मजबूती से थामे रखता है।

191प्रसिद्ध सुषिर वाद्ययंत्र 'शहनाई' (Shehnai) के मुख्य खोखले लकड़ी के ढांचे में संगीत के सुरों की पिच और गूँज को उंगलियों से नियंत्रित करने के लिए कुल कितने खेलने वाले छेद (Sur Holes) बने होते हैं?
A.7 से 9 छेद (7 to 9 holes)
B.केवल 2 छेद
C.15 छेद
D.कोई छेद नहीं होता

उत्तर (Ans): A. 7 से 9 छेद (7 to 9 holes)

व्याख्या (Explanation): एक मानक शास्त्रीय 'शहनाई' वाद्ययंत्र में मुख्य रूप से ७ से ९ सुर छेद (playing holes) होते हैं। शहनाई बजाते समय वादक अपनी उंगलियों के कोमल स्पर्श से इन छेदों को आंशिक या पूर्ण रूप से दबाकर और खोलकर सुरों की पिच (frequency) को नियंत्रित करता है। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जैसे महान वादक शहनाई की फूंक की हवा के दबाव और अपनी उंगलियों की अत्यधिक सूक्ष्म कंपन गति से इन ७-९ छेदों के माध्यम से ही राग के गमक, मींड और अर्ध-सुर (श्रुतियों) को अत्यंत शुद्धता के साथ प्रस्तुत करते थे।

192'सरोद' (Sarod) वाद्ययंत्र का डांड (Fingerboard) बिल्कुल सपाट और चिकना होता है। इस पर बिना किसी पर्दे (fret) के उंगलियों के नाखूनों को रगड़कर मींड निकालने के लिए इसे किस विशिष्ट सामग्री से मढ़ा जाता है?
A.अत्यधिक पॉलिश की हुई स्टील या क्रोम-प्लेटेड ब्रास की सपाट प्लेट से (Highly polished chrome-plated brass/steel fingerboard)
B.शीशम की बिना पॉलिश की हुई खुरदरी लकड़ी से
C.पतली बकरे की चमड़ी की महीन परत से
D.हाथीदांत की चौड़ी और सपाट पट्टियों से

उत्तर (Ans): A. अत्यधिक पॉलिश की हुई स्टील या क्रोम-प्लेटेड ब्रास की सपाट प्लेट से (Highly polished chrome-plated brass/steel fingerboard)

व्याख्या (Explanation): सरोद (Sarod) वाद्ययंत्र की सबसे बड़ी पहचान इसका बिल्कुल चिकना और चमकीला फिंगरबोर्ड है, जिस पर कोई पर्दा (fret) नहीं होता। यह फिंगरबोर्ड 'अत्यधिक पॉलिश की हुई क्रोम-प्लेटेड स्टील या पीतल की प्लेट' से बना होता है। सरोद वादक सुर निकालने के लिए तारों को अपनी उंगलियों के पोरों से नहीं दबाता, बल्कि अपने बाएं हाथ की उंगलियों के नाखूनों के पिछले हिस्से या नाखूनों के पार्श्व (side) को इस धातु की प्लेट पर तेजी से रगड़ता या खिसकाता है। धातु की यह सपाट प्लेट बिना किसी घर्षण के बेहद सुगम मींड (sliding notes) और द्रुत गतियों को निकालने में मदद करती है, जो सरोद की गूंजती हुई गंभीर आवाज का मुख्य रहस्य है।

193कर्नाटक संगीत में वायलिन बजाने की अत्यंत प्रसिद्ध और कठिन 'परूर शैली' (Parur Bani), जिसमें पश्चिमी बोइंग (Bowing) और हिंदुस्तानी तानों का अद्भुत समन्वय है, का ऐतिहासिक जनक किसे माना जाता है?
A.परूर सुंदरम अय्यर (Parur Sundaram Iyer)
B.लालगुडी जयरामन
C.द्वारम वेंकटस्वामी नायडू
D.एम. एस. गोपालकृष्णन

उत्तर (Ans): A. परूर सुंदरम अय्यर (Parur Sundaram Iyer)

व्याख्या (Explanation): कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में वायलिन वादन की प्रसिद्ध 'परूर शैली' (Parur Bani) का जनक 'परूर सुंदरम अय्यर' (1888-1955) को माना जाता है। उन्होंने हिंदुस्तानी और कर्नाटक दोनों पद्धतियों का गहन अध्ययन किया था। उन्होंने वायलिन की ऐसी अनूठी तकनीक विकसित की जिसमें पश्चिमी वायलिन की जटिल बोइंग (Bowing) तकनीकों, तीव्र उंगली संचालन और हिंदुस्तानी तानों का अद्भुत समन्वय था। उनके पुत्र एम. एस. गोपालकृष्णन (एम.एस.जी.) ने इस परूर शैली को वैश्विक मंचों पर सर्वोच्च प्रतिष्ठा दिलाई।

194देखने में बिल्कुल एक जैसे महसूस होने वाले दो अत्यंत मधुर सुषिर और गज से बजाए जाने वाले भारतीय तत वाद्यों—'एशराज' (Esraj) और 'दिलरुबा' (Dilruba)—के बीच मुख्य संरचनात्मक और क्षेत्रीय अंतर क्या होता है?
A.एशराज मुख्य रूप से बंगाल (शांतिनिकेतन) में लोकप्रिय है और इसका मुख्य कद्दू गोल होता है, जबकि दिलरुबा पंजाब व उत्तर भारत में लोकप्रिय है जिसका बक्सा चौकोर होता है
B.एशराज एक सुषिर वाद्य है जबकि दिलरुबा तत वाद्य है
C.दिलरुबा में कोई पर्दा नहीं होता
D.दोनों एक ही वाद्ययंत्र के दो अलग-अलग नाम हैं, कोई अंतर नहीं है

उत्तर (Ans): A. एशराज मुख्य रूप से बंगाल (शांतिनिकेतन) में लोकप्रिय है और इसका मुख्य कद्दू गोल होता है, जबकि दिलरुबा पंजाब व उत्तर भारत में लोकप्रिय है जिसका बक्सा चौकोर होता है

व्याख्या (Explanation): एशराज (Esraj) और दिलरुबा (Dilruba) दोनों ही बहुत प्यारे और लगभग समान दिखने वाले तत वाद्य (stringed bow instruments) हैं, लेकिन इनमें कुछ बारीक अंतर हैं। एशराज मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, रवीन्द्र संगीत और शांतिनिकेतन की परंपरा से जुड़ा है, और इसका नीचे का मुख्य गूंजने वाला बक्सा (soundbox) गोल और छोटा होता है। इसके विपरीत, दिलरुबा का विकास गुरु गोबिंद सिंह जी के समय पंजाब में हुआ था; इसका निचला बक्सा सारंगी की तरह चौकोर, चौड़ा और भारी होता है ताकि सिख शबद कीर्तन की गंभीर गायकी को गहरा बेस प्रदान किया जा सके।

195दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन और विशाल सुषिर वाद्ययंत्रों में से एक 'नादस्वरम' (Nadaswaram), जिसे मंदिरों और राजदरबारों में अनिवार्य मांगलिक वाद्य माना जाता है, किस संगीत श्रेणी के अंतर्गत आता है?
A.सुषिर वाद्य (Sushir Vadya - Wind Instrument)
B.तत वाद्य (String Instrument)
C.अवनद्ध वाद्य (Percussion Instrument)
D.घन वाद्य (Solid/Idiophone)

उत्तर (Ans): A. सुषिर वाद्य (Sushir Vadya - Wind Instrument)

व्याख्या (Explanation): 'नादस्वरम' (Nadaswaram) दक्षिण भारत का एक अत्यंत विशाल और मांगलिक वाद्य यंत्र है जो पूरी तरह से 'सुषिर वाद्य' (Wind Instrument) की श्रेणी में आता है। यह दिखने में उत्तर भारत की शहनाई की तरह ही होता है लेकिन आकार में उससे बहुत बड़ा और भारी होता है (लगभग २ से २.५ फीट लंबा)। इसे विशेष काली लकड़ी (आबनूस) से बनाया जाता है। नादस्वरम की ध्वनि अत्यंत तीव्र और तीखी होती है, जिसके कारण इसे मुख्य रूप से खुले आकाश के नीचे, मंदिरों के प्रांगणों और बड़े धार्मिक उत्सवों में अनिवार्य रूप से बजाया जाता है।

196तबले के 'बनारस घराने' के उस कालजयी तबला सम्राट का नाम बताइए जिन्हें कथक नर्तकों के साथ उनकी तीव्र पदचापों पर अत्यंत कठिन चक्रदार तिहाइयों और परनों की जादुई जुगलबंदी करने के लिए "लय का बादशाह" माना जाता था?
A.पंडित किशन महाराज (Pt. Kishan Maharaj)
B.पंडित सामता प्रसाद
C.पंडित अनोखेलाल मिश्र
D.पंडित कुमार बोस

उत्तर (Ans): A. पंडित किशन महाराज (Pt. Kishan Maharaj)

व्याख्या (Explanation): बनारस घराने के यशस्वी तबला सम्राट पंडित किशन महाराज (1923-2008) को कथक नृत्य की संगत करने और अत्यंत जटिल 'चक्रदार तिहाइयों' व 'परनों' को बजाने में महारत हासिल थी। कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज के साथ उनकी जुगलबंदियां ऐतिहासिक मानी जाती थीं। किशन महाराज जब मंच पर तबला बजाते थे, तो उनका राजसी व्यक्तित्व, माथे पर लाल तिलक और उनके बाएं हाथ की प्रचंड थाप कथक की जटिल पदचाप (footwork) के साथ बिल्कुल सटीक संवाद स्थापित करती थी, जिससे लाइव कॉन्सर्ट का रोमांच चरम पर पहुँच जाता था।

197शत-तंत्री वीणा यानी 'संतूर' (Santoor) वाद्ययंत्र पर प्रहार करके मींड और आलाप निकालने के लिए प्रयुक्त होने वाले दो अत्यंत हल्के लकड़ी के हथौड़ों (Mallets / Kalams) की पारंपरिक बनावट कैसी होती है?
A.अखरोट या शीशम की लकड़ी से बनी, अर्धचंद्र या कौवे की चोंच के आकार की घुमावदार हल्की डंडियाँ
B.सीधे लोहे के पतले सरकंडे
C.प्लास्टिक के भारी हथौड़े
D.बकरे की आंत से बने कोमल छल्ले

उत्तर (Ans): A. अखरोट या शीशम की लकड़ी से बनी, अर्धचंद्र या कौवे की चोंच के आकार की घुमावदार हल्की डंडियाँ

व्याख्या (Explanation): संतूर (Santoor) पर प्रहार करने के लिए जिन दो विशेष लकड़ी की डंडियों का उपयोग किया जाता है, उन्हें स्थानीय भाषा में 'कलम' (Kalams या Mallets) कहा जाता है। ये कलमें अत्यंत हल्की होती हैं और मुख्य रूप से 'अखरोट (walnut)' या 'शीशम (rosewood)' की लकड़ी को तराशकर बनाई जाती हैं। इनकी बनावट आगे से एक घुमावदार अर्धचंद्र या 'कौवे की चोंच' जैसी होती है। वादक इन कलमों को अपनी उंगलियों के बीच बहुत ही लचीले ढंग से पकड़ता है और तारों पर अत्यंत तीव्र व कोमल आघात करता है, जिससे संतूर की जादुई और झंकृत करने वाली गूंज उत्पन्न होती है।

198हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में तानपुरा ट्यून करते समय, यदि किसी विशिष्ट राग में 'पंचम' (Pa) स्वर पूरी तरह वर्जित हो (जैसे राग मालकौंस या राग चंद्रकौंस) लेकिन 'मध्यम' (Ma) स्वर मुख्य हो, तो तानपुरे के पहले तार को किस सुर पर ट्यून किया जाता है?
A.म - सा - सा - सा (Ma - Sa - Sa - Sa)
B.प - सा - सा - सा
C.नि - सा - सा - सा
D.ध - सा - सा - सा

उत्तर (Ans): A. म - सा - सा - सा (Ma - Sa - Sa - Sa)

व्याख्या (Explanation): तानपुरा (Tanpura) की ट्यूनिंग राग के सुरों के अनुसार की जाती है। यदि किसी राग में 'पंचम' (Pa) स्वर पूरी तरह वर्जित होता है (जैसे राग मालकौंस, राग चंद्रकौंस), तो तानपुरे के पहले तार को पंचम पर ट्यून करना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में, शास्त्रीय नियम के अनुसार तानपुरे के पहले तार को मध्यम यानी 'म' (Ma) स्वर पर ट्यून किया जाता है। इसके बाद के दो बीच के तारों को षडज यानी 'सा' (Sa - तार सप्तक) पर और अंतिम चौथे मोटे तार को मंद्र 'सा' (Sa) पर ट्यून किया जाता है। इस प्रकार इसकी ट्यूनिंग 'म-सा-सा-सा' के रूप में होती है।

199पंडित पन्नालाल घोष द्वारा शास्त्रीय संगीत के मंच पर पहली बार प्रस्तुत की गई 'मंद्र' (Bass) सुरों की ३२ इंच लंबी विशाल बांसुरी की सबसे बड़ी वादन विशेषता क्या होती है?
A.लगभग 32 इंच लंबी, जो सुरों की पिच को मंद्र सप्तक (Mandra Saptak / Bass) तक नीची कर देती है
B.केवल 10 इंच छोटी, जो सुरों को बहुत तीखा (High Treble) बनाती है
C.50 इंच लंबी, जिसे सीधे खड़े होकर बजाया जाता है
D.लोहे की बनी 20 इंच की बांसुरी

उत्तर (Ans): A. लगभग 32 इंच लंबी, जो सुरों की पिच को मंद्र सप्तक (Mandra Saptak / Bass) तक नीची कर देती है

व्याख्या (Explanation): पंडित पन्नालाल घोष (1911-1960) ने बाँसुरी को लोक संगीत से निकालकर शास्त्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने के लिए इसकी बनावट में भारी संशोधन किए। उन्होंने पाया कि पारंपरिक बांसुरी बहुत छोटी और तीखी होती है, जिस पर शास्त्रीय संगीत के मंद्र सप्तक (गहरे बेस स्वर) नहीं बजाए जा सकते। इसके लिए उन्होंने 'लगभग ३२ इंच लंबी और चौड़ी बांसुरी' (Bass Flute) का निर्माण किया। इस बड़ी बांसुरी की गूंजती हुई हवा के कारण सुरों की पिच बहुत नीची (Lower Pitch / Bass) हो गई, जिससे शास्त्रीय रागों की गंभीर आलापचारी और गमक को बाँसुरी के सुरों पर उतारना संभव हुआ।

200'पखावाज' (Pakhawaj) वाद्ययंत्र हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की किस अत्यंत प्राचीन, राजसी और गंभीर गायन विधा के लिए मुख्य रूप से बजने वाला केंद्रीय लयबद्ध संगतकार वाद्ययंत्र माना जाता है?
A.ध्रुपद (Dhrupad)
B.ख्याल (Khayal)
C.ठुमरी (Thumri)
D.टप्पा (Tappa)

उत्तर (Ans): A. ध्रुपद (Dhrupad)

व्याख्या (Explanation): पखावाज (Pakhawaj या मृदंग) भारतीय शास्त्रीय संगीत का सबसे प्राचीन और गंभीर अवनद्ध वाद्य यंत्र है। यह मुख्य रूप से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की सबसे प्राचीन, राजसी और गंभीर गायन विधा 'ध्रुपद' (Dhrupad) के साथ मुख्य संगतकार वाद्य के रूप में बजाया जाता है। ध्रुपद गायन में चौताल, धमार, सूलताल और तीव्र ताल जैसी बेहद गंभीर और कठिन तालों का उपयोग होता है, जिनकी जोरदार और गूंजती हुई गतों को केवल पखावज की गंभीर थाप से ही सहारा दिया जा सकता है। ख्याल या ठुमरी जैसी सुगम शैलियों में तबले का उपयोग किया जाता है।

इस टॉपिक की विस्तृत थ्योरी (Theory) पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें 👇

प्रमुख वाद्ययंत्र एवं वादक (Famous Musical Instruments & Instrumentalists) - Theory