ASHVINI ₹28,000 करोड़ का माही बांसवाड़ा परमाणु EPC टेंडर जारी करेगी (2026)
विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 15 जुलाई 2026
अनुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड (ASHVINI) माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए लगभग ₹28,000 करोड़ का इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन (EPC) टेंडर जारी करने जा रही है। इस बड़े पैकेज को "न्यूक्लियर आइलैंड मेगा EPC पैकेज" (NIMEP) नाम दिया गया है, जिसमें चार 700 MWe क्षमता वाली दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) इकाइयाँ शामिल हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 2,800 MWe होगी।
यह परियोजना भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार और स्वच्छ-ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थापित होने वाली यह परियोजना क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करेगी और देश के कार्बन-उत्सर्जन घटाने के प्रयासों में योगदान देगी। परमाणु ऊर्जा को आधार-भार (base load) बिजली का एक विश्वसनीय, कम-कार्बन स्रोत माना जाता है।
संरचना की दृष्टि से ASHVINI, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और NTPC लिमिटेड के बीच एक संयुक्त उद्यम है। इस साझेदारी के माध्यम से देश की अग्रणी परमाणु और तापीय-ऊर्जा कंपनियों की विशेषज्ञता एक साथ आती है। यह परियोजना माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP) के नाम से भी जानी जाती है।
तकनीकी रूप से यह परियोजना भारत के स्वदेशी 700 MW दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) कार्यक्रम से संबंधित है। PHWR भारी जल (heavy water) का उपयोग मॉडरेटर और शीतलक दोनों रूपों में करता है और यह भारत के घरेलू परमाणु बेड़े की रीढ़ है। इस स्वदेशी तकनीक पर निर्भरता आत्मनिर्भर भारत और परमाणु क्षेत्र में तकनीकी संप्रभुता को दर्शाती है।
आर्थिक और रोजगार की दृष्टि से ₹28,000 करोड़ का यह निवेश निर्माण चरण के दौरान बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगा और घरेलू विनिर्माण एवं आपूर्ति-श्रृंखला (supply chain) को बढ़ावा देगा। स्थानीय अवसंरचना विकास और कौशल-निर्माण भी इसके व्यापक लाभों में शामिल हैं, जो क्षेत्रीय विकास को गति देंगे।
समग्र रूप से यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल विकास और स्वदेशी तकनीकी क्षमता का संगम है। भारत के परमाणु ऊर्जा लक्ष्य, PHWR कार्यक्रम और सार्वजनिक क्षेत्र की साझेदारी के दृष्टिकोण से यह प्रतियोगी परीक्षाओं (विज्ञान-प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण) के लिए एक महत्वपूर्ण करेंट अफेयर है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
- ◆ ASHVINI ~₹28,000 करोड़ का EPC टेंडर (NIMEP) जारी करेगी।
- ◆ परियोजना: माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP), राजस्थान।
- ◆ इसमें चार 700 MWe PHWR इकाइयाँ; कुल क्षमता 2,800 MWe।
- ◆ ASHVINI = NPCIL और NTPC लिमिटेड का संयुक्त उद्यम।
- ◆ यह भारत के स्वदेशी 700 MW PHWR कार्यक्रम से संबंधित है।
- ◆ PHWR भारी जल का उपयोग मॉडरेटर एवं शीतलक दोनों रूप में करता है।
- ◆ पैकेज का नाम: न्यूक्लियर आइलैंड मेगा EPC पैकेज (NIMEP)।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
ASHVINI किस परियोजना हेतु ₹28,000 करोड़ का EPC टेंडर जारी करेगी?
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व्याख्या: यह टेंडर माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP) के लिए है।
ASHVINI किन दो कंपनियों के बीच संयुक्त उद्यम है?
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व्याख्या: ASHVINI, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और NTPC लिमिटेड के बीच संयुक्त उद्यम है।
परियोजना में कितनी रिएक्टर इकाइयाँ शामिल हैं?
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व्याख्या: परियोजना में चार 700 MWe PHWR इकाइयाँ शामिल हैं।
प्रत्येक रिएक्टर इकाई की क्षमता कितनी है?
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व्याख्या: प्रत्येक इकाई 700 MWe की है, चार इकाइयों की संयुक्त क्षमता 2,800 MWe है।
परियोजना किस प्रकार के रिएक्टर पर आधारित है?
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व्याख्या: यह भारत के स्वदेशी 700 MW PHWR कार्यक्रम पर आधारित है।
EPC पैकेज को क्या नाम दिया गया है?
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व्याख्या: पैकेज का नाम न्यूक्लियर आइलैंड मेगा EPC पैकेज (NIMEP) है।
यह परियोजना किस राज्य में स्थित है?
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व्याख्या: यह परियोजना राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित है।
दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) के संदर्भ में विचार करें: (1) यह भारी जल का उपयोग मॉडरेटर एवं शीतलक दोनों के रूप में करता है। (2) यह प्राकृतिक यूरेनियम का ईंधन के रूप में उपयोग कर सकता है। सही कथन:
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व्याख्या: PHWR भारी जल को मॉडरेटर व शीतलक दोनों रूप में उपयोग करता है और प्राकृतिक यूरेनियम ईंधन का उपयोग कर सकता है; अतः दोनों कथन सही हैं।
भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम में PHWR की मुख्य भूमिका क्या है?
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व्याख्या: PHWR भारत के तीन-चरणीय कार्यक्रम के प्रथम चरण की रीढ़ हैं और अगले चरणों हेतु प्लूटोनियम भी उत्पन्न करते हैं।
परमाणु ऊर्जा को स्वच्छ-ऊर्जा संक्रमण में महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
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व्याख्या: परमाणु ऊर्जा निम्न-कार्बन उत्सर्जन के साथ निरंतर व विश्वसनीय आधार-भार बिजली प्रदान करती है, जो जलवायु लक्ष्यों में सहायक है।
UPSC / RPSC प्रासंगिकता
- ➜ प्रीलिम्स: ASHVINI, NPCIL, NTPC, PHWR एवं परियोजना क्षमता संबंधी तथ्य।
- ➜ मेन्स GS-III: ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा एवं अवसंरचना विकास।
- ➜ अर्थव्यवस्था/सुरक्षा: निवेश, रोजगार एवं ऊर्जा आत्मनिर्भरता।
- ➜ विज्ञान-प्रौद्योगिकी: स्वदेशी 700 MW PHWR कार्यक्रम एवं परमाणु तकनीक।
UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
परमाणु ऊर्जा भारत की स्वच्छ-ऊर्जा संक्रमण एवं ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ है। माही बांसवाड़ा परियोजना एवं स्वदेशी 700 MW PHWR कार्यक्रम के संदर्भ में भारत की परमाणु ऊर्जा नीति की संभावनाओं एवं चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(250 शब्द, 15 अंक)
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