भारत ने अपनी पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाई
विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 18 जुलाई 2026
भारत ने हरित परिवहन (Green Mobility) की दिशा में एक बड़ा कदम तब उठाया जब 17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन को हरियाणा के जींद से हरी झंडी दिखाई। यह स्वदेशी ट्रेन 89 किलोमीटर लंबे जींद–सोनीपत मार्ग पर 12 मध्यवर्ती स्टॉप के साथ चलती है, और इसका एकमात्र उत्सर्जन हानिरहित जलवाष्प (water vapour) है। इसके साथ ही भारतीय रेलवे शून्य-उत्सर्जन रेल परिवहन चलाने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।
इस ट्रेन के केंद्र में हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की इलेक्ट्रोकेमिकल अभिक्रिया से बिजली बनती है — किसी भी प्रकार का दहन (combustion) नहीं होता। चूँकि इस प्रक्रिया में उपयोग-स्थल पर कोई कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन नहीं होता, यह डीज़ल का एक सचमुच स्वच्छ विकल्प है। शुरू की गई ट्रेन में 10 कोच हैं, यात्री क्षमता लगभग 2,600 है, अधिकतम स्वीकृत गति 75 किमी/घंटा तथा डिज़ाइन गति 110 किमी/घंटा है।
यह ट्रेन स्वदेशी इंजीनियरिंग का गौरव है, जिसे इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई ने मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत डिज़ाइन एवं निर्मित किया है। प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार में 1,200 किलोवाट का हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणोदन तंत्र लगा है, जिससे संयुक्त शक्ति 2,400 किलोवाट हो जाती है। दैनिक संचालन के लिए भारतीय रेलवे ने जींद में एक समर्पित हाइड्रोजन भंडारण एवं ईंधन-भराई सुविधा स्थापित की है, जो इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा है।
यह कार्यक्रम "हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज" पहल पर आधारित है, जिसे 2023 में चुनिंदा विरासत एवं पहाड़ी मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने के लिए शुरू किया गया था। पर्यावरणीय लाभ के अलावा इसका मजबूत रणनीतिक एवं आर्थिक महत्व है: यह भारत की आयातित डीज़ल पर निर्भरता घटाता है, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करता है, और देश को अगली पीढ़ी के रोलिंग स्टॉक के निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करता है। इससे फ्यूल-सेल निर्माण, हाइड्रोजन उत्पादन और विशेष रखरखाव में कुशल रोज़गार भी पैदा होगा।
वैश्विक स्तर पर हाइड्रोजन ट्रेनें अभी भी एक उभरती तकनीक हैं। जर्मनी, जापान, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश पहले से ही हाइड्रोजन-चालित सेवाएँ चला रहे हैं, और भारत की यह सफल शुरुआत उसे इन अग्रणी देशों की पंक्ति में ला खड़ा करती है। जैसे-जैसे नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य के अनुरूप डीज़ल को चरणबद्ध रूप से हटाया जाएगा, हाइड्रोजन और विद्युत कर्षण मिलकर भारतीय रेलवे के भविष्य को परिभाषित करेंगे।
प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए यह घटनाक्रम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सरकारी योजनाओं से जुड़ी परीक्षा सामग्री का समृद्ध स्रोत है और UPSC, RPSC, SSC एवं रेलवे परीक्षाओं के प्रीलिम्स तथा मेन्स दोनों में आने की प्रबल संभावना रखता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
- ◆ भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन को 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद से पीएम नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाई।
- ◆ यह 89 किमी जींद–सोनीपत मार्ग पर 12 मध्यवर्ती स्टॉप के साथ चलती है।
- ◆ हाइड्रोजन फ्यूल सेल का उपयोग-स्थल पर एकमात्र उपोत्पाद जलवाष्प है।
- ◆ संरचना: 10 कोच, क्षमता ~2,600; अधिकतम स्वीकृत गति 75 किमी/घंटा, डिज़ाइन गति 110 किमी/घंटा।
- ◆ निर्माता: इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई — मेक इन इंडिया / आत्मनिर्भर भारत के तहत।
- ◆ प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार में 1,200 किलोवाट फ्यूल सेल; संयुक्त शक्ति 2,400 किलोवाट।
- ◆ "हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज" पहल (2023) से जुड़ी; जींद में ईंधन-भराई सुविधा स्थापित।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
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UPSC / RPSC प्रासंगिकता
- ➜ प्रीलिम्स: हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक, जींद–सोनीपत मार्ग, "हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज" पहल, ICF चेन्नई।
- ➜ मेन्स GS-III: स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा, रेलवे क्षेत्र में स्वदेशीकरण एवं मेक इन इंडिया।
- ➜ अर्थव्यवस्था एवं सुरक्षा: घटता डीज़ल आयात, ऊर्जा सुरक्षा, ग्रीन-हाइड्रोजन मूल्य शृंखला में रोज़गार।
- ➜ भूगोल एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी: हरित परिवहन, नेट ज़ीरो 2070, जर्मनी/जापान/चीन/अमेरिका से तुलना।
UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
"भारत द्वारा अपनी पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन का संचालन जितना पर्यावरणीय कदम है, उतना ही एक रणनीतिक एवं आर्थिक वक्तव्य भी है।" इस कथन के आलोक में भारतीय रेलवे के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक के महत्व और इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की चुनौतियों की विवेचना कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
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