आईएनएस महेंद्रगिरि कमीशनिंग 2026: प्रोजेक्ट 17ए स्टेल्थ फ्रिगेट, विशेषताएँ व रणनीतिक महत्व
विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 2026
प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठा स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरि 11 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। इस युद्धपोत का पेनेंट नंबर F38 है और इसे 30 अप्रैल 2026 को औपचारिक रूप से नौसेना को सौंपा गया था। इसे पूर्वी नौसेना कमान के अधीन पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) में तैनात किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट 17ए श्रृंखला का छठा एवं अंतिम फ्रिगेट है।
आईएनएस महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट 17ए का हिस्सा है, जिसे नीलगिरि-श्रेणी (Nilgiri-class) कार्यक्रम भी कहा जाता है। यह कार्यक्रम पहले के प्रोजेक्ट 17 शिवालिक-श्रेणी का उत्तराधिकारी है। इसमें बेहतर स्टेल्थ क्षमता, अधिक स्वचालन तथा एकीकृत युद्ध प्रणालियाँ शामिल हैं, जिससे ये जहाज रडार पर कम पकड़ में आते हैं और बहु-भूमिका अभियानों में अधिक सक्षम होते हैं।
इस फ्रिगेट को भारतीय नौसेना के वारशिप डिज़ाइन ब्यूरो ने स्वयं डिज़ाइन किया है और इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है, जो भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की जहाज निर्माण कंपनियों में से एक है। इस पोत की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि इसमें 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है, जिसमें इसकी प्रमुख हथियार प्रणालियाँ, उपकरण और प्लेटफॉर्म एकीकरण शामिल हैं।
आईएनएस महेंद्रगिरि में सतह-से-सतह तथा सतह-से-हवा मिसाइल प्रणालियाँ, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) क्षमता तथा पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW) क्षमताएँ मौजूद हैं, जिससे यह एक साथ कई मोर्चों पर खतरों का सामना कर सकता है। प्रणोदन के लिए इसमें CODOG (Combined Diesel or Gas) प्रणाली का उपयोग होता है, जो डीज़ल इंजन और गैस टर्बाइन को जोड़कर किफायती परिभ्रमण तथा उच्च गति दोनों प्रदान करती है।
इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है और यह इस नाम को धारण करने वाला पहला भारतीय नौसैनिक पोत है। नामकरण की यह परंपरा भारत की भौगोलिक विरासत और नौसैनिक गौरव को जोड़ती है।
इस पोत की कमीशनिंग ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अनुरूप है। समग्र रूप से प्रोजेक्ट 17ए ने घरेलू जहाज-निर्माण उद्योग, सहायक विनिर्माण क्षेत्र तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया है, और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की नौसैनिक शक्ति एवं सामरिक उपस्थिति को सुदृढ़ किया है।
📌 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
- ◆पोत: आईएनएस महेंद्रगिरि (पेनेंट नंबर F38), प्रोजेक्ट 17ए का छठा एवं अंतिम स्टेल्थ फ्रिगेट।
- ◆कमीशनिंग: 11 जुलाई 2026, विशाखापत्तनम; तैनाती — पूर्वी बेड़ा (पूर्वी नौसेना कमान)।
- ◆नौसेना को सौंपा गया: 30 अप्रैल 2026।
- ◆श्रेणी: नीलगिरि-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए), शिवालिक-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17) का उत्तराधिकारी।
- ◆डिज़ाइन: नौसेना का वारशिप डिज़ाइन ब्यूरो; निर्माण — मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई।
- ◆स्वदेशी सामग्री: 75% से अधिक; प्रणोदन — CODOG प्रणाली।
- ◆नामकरण: पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला पर आधारित; इस नाम का पहला नौसैनिक पोत।
📝 अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
प्रश्न 1. आईएनएस महेंद्रगिरि किस प्रोजेक्ट के तहत बना स्टेल्थ फ्रिगेट है?
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उत्तर: (ब) प्रोजेक्ट 17ए
व्याख्या: यह प्रोजेक्ट 17ए (नीलगिरि-श्रेणी) का छठा एवं अंतिम फ्रिगेट है।
प्रश्न 2. आईएनएस महेंद्रगिरि की कमीशनिंग कहाँ हुई/होगी?
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उत्तर: (ब) विशाखापत्तनम
व्याख्या: 11 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में इसकी कमीशनिंग निर्धारित है।
प्रश्न 3. इस पोत का निर्माण किस शिपयार्ड ने किया?
उत्तर देखें
उत्तर: (स) मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL)
व्याख्या: मुंबई स्थित MDL ने इसका निर्माण किया।
प्रश्न 4. आईएनएस महेंद्रगिरि का पेनेंट नंबर क्या है?
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उत्तर: (ब) F38
व्याख्या: इसका पेनेंट नंबर F38 है।
प्रश्न 5. इस पोत में लगभग कितनी स्वदेशी सामग्री है?
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उत्तर: (स) 75% से अधिक
व्याख्या: इसमें 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है।
प्रश्न 6. पोत का नाम किस भौगोलिक विशेषता पर आधारित है?
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उत्तर: (ब) महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला
व्याख्या: यह पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला पर आधारित है।
प्रश्न 7. आईएनएस महेंद्रगिरि किस बेड़े में तैनात होगा?
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उत्तर: (ब) पूर्वी बेड़ा
व्याख्या: इसे पूर्वी नौसेना कमान के अधीन पूर्वी बेड़े में तैनात किया जाएगा।
प्रश्न 8. प्रोजेक्ट 17ए किस पूर्ववर्ती श्रेणी का उत्तराधिकारी है?
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उत्तर: (ब) शिवालिक-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17)
व्याख्या: प्रोजेक्ट 17ए, प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक-श्रेणी) का उन्नत उत्तराधिकारी है।
प्रश्न 9. CODOG प्रणोदन प्रणाली किन दो घटकों का संयोजन है?
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उत्तर: (ब) डीज़ल इंजन व गैस टर्बाइन
व्याख्या: CODOG में किफायती परिभ्रमण हेतु डीज़ल तथा उच्च गति हेतु गैस टर्बाइन का उपयोग होता है।
प्रश्न 10. इस पोत की कमीशनिंग मुख्यतः किस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ी है?
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उत्तर: (ब) आत्मनिर्भर भारत
व्याख्या: 75%+ स्वदेशी सामग्री के साथ यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है।
🎯 UPSC / RPSC प्रासंगिकता
- ➜रक्षा (GS-III): स्वदेशी युद्धपोत निर्माण, आत्मनिर्भरता एवं नौसैनिक आधुनिकीकरण।
- ➜भूगोल: पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला एवं नामकरण परंपरा।
- ➜अर्थव्यवस्था: रक्षा विनिर्माण से रोजगार सृजन एवं सहायक उद्योगों का विकास।
- ➜रणनीति: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की नौसैनिक उपस्थिति एवं सुरक्षा।
✍️ UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
भारत के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम (जैसे प्रोजेक्ट 17ए) आत्मनिर्भरता एवं समुद्री सुरक्षा को किस प्रकार सुदृढ़ करते हैं? आईएनएस महेंद्रगिरि के उदाहरण सहित विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)