INS मालवण 2026: माहे-श्रेणी का पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत नौसेना में शामिल
विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 17 जुलाई 2026
भारतीय नौसेना अपनी तटीय रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने जा रही है, क्योंकि 22 जुलाई 2026 को INS मालवण को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल (कमीशन) किया जाएगा। INS मालवण माहे-श्रेणी (Mahe-class) के पनडुब्बी-रोधी उथले जल पोत (ASW-SWC) का दूसरा जहाज है, जो विशेष रूप से भारतीय तट के निकट संचालन हेतु डिज़ाइन किया गया है। यह रक्षा क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण करेंट अफेयर्स विषय है, जो UPSC, RPSC, SSC, CDS, NDA एवं राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
INS मालवण को कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा डिज़ाइन एवं निर्मित किया गया है, जो भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के जहाज निर्माण यार्डों में से एक है। इसे 31 मार्च 2026 को नौसेना को सौंपा गया था। माहे-श्रेणी ASW-SWC श्रेणी में आती है, जिसे पनडुब्बी-रोधी युद्ध, माइन युद्ध एवं निम्न-तीव्रता समुद्री अभियानों (LIMO) के लिए बनाया गया है, विशेषकर उन उथले तटीय जलक्षेत्रों में जहाँ शत्रु पनडुब्बियों का पता लगाना कठिन होता है।
डिज़ाइन की दृष्टि से INS मालवण लगभग 80 मीटर लंबा है तथा इसका विस्थापन लगभग 1,100 टन है। इसकी एक विशेष इंजीनियरिंग विशेषता इसका वाटरजेट प्रणोदन (waterjet propulsion) तंत्र है, जो इसे उथले पानी में उत्कृष्ट गतिशीलता एवं युद्धाभ्यास क्षमता प्रदान करता है। यह पोत उन्नत सेंसर, टॉरपीडो एवं बहुउद्देशीय पनडुब्बी-रोधी रॉकेटों से सुसज्जित है, जो इसे तट के निकट पानी के भीतर मौजूद खतरों को ट्रैक करने एवं नष्ट करने में सक्षम बनाते हैं।
INS मालवण का सबसे उल्लेखनीय पहलू इसकी 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री है। यह पोत नौसैनिक जहाज निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत पहल का एक सशक्त उदाहरण है, जो युद्धपोतों के घरेलू डिज़ाइन एवं निर्माण को बढ़ावा देती है। इससे न केवल भारत की विदेशी रक्षा आयात पर निर्भरता कम होती है, बल्कि देश का स्वदेशी रक्षा विनिर्माण तंत्र मजबूत होता है एवं कुशल रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होते हैं।
बेड़े में INS मालवण को पुरानी हो चुकी अभय-श्रेणी (Abhay-class) की कॉर्वेट के स्थान पर लाने का उद्देश्य है, जो लंबे समय से भारत के तटीय एवं littoral जलक्षेत्रों में छोटे पनडुब्बी-रोधी प्लेटफॉर्म के रूप में सेवा दे रही हैं। आधुनिक माहे-श्रेणी के पोतों का समावेश यह सुनिश्चित करता है कि नौसेना उथले जल में पनडुब्बी-रोधी अभियानों में तकनीकी बढ़त बनाए रखे — यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसका सामरिक महत्व हिंद महासागर क्षेत्र में विदेशी पनडुब्बियों की बढ़ती उपस्थिति के कारण निरंतर बढ़ रहा है।
22 जुलाई 2026 को होने वाले कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह करेंगे, जबकि वाइस एडमिरल संजय वत्स्यायन भी उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन भारत की सशस्त्र सेनाओं के बीच बढ़ते अंतर-सेवा समन्वय को दर्शाता है तथा एक आत्मनिर्भर एवं तकनीकी रूप से उन्नत नौसेना की दिशा में देश की निरंतर प्रगति को रेखांकित करता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
- ◆INS मालवण भारतीय नौसेना का दूसरा माहे-श्रेणी ASW-SWC है।
- ◆निर्माता: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि; 31 मार्च 2026 को सौंपा गया।
- ◆लंबाई ~80 मीटर; विस्थापन ~1,100 टन; वाटरजेट प्रणोदन।
- ◆सेंसर, टॉरपीडो एवं बहुउद्देशीय पनडुब्बी-रोधी रॉकेट से सुसज्जित।
- ◆स्वदेशी सामग्री: 80% से अधिक — आत्मनिर्भर भारत से संबद्ध।
- ◆भूमिका: पनडुब्बी-रोधी युद्ध, माइन युद्ध एवं निम्न-तीव्रता समुद्री अभियान (LIMO)।
- ◆अभय-श्रेणी कॉर्वेट का स्थान लेगा; कमीशनिंग 22 जुलाई 2026।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
प्रश्न 1. INS मालवण किस श्रेणी के नौसैनिक पोत से संबंधित है?मध्यम स्तर
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उत्तर: B – माहे-श्रेणी
व्याख्या: INS मालवण भारतीय नौसेना की माहे-श्रेणी के ASW शैलो वाटर क्राफ्ट का हिस्सा है, जो तटीय पनडुब्बी-रोधी युद्ध के लिए बनाई गई है।
प्रश्न 2. INS मालवण को किस शिपयार्ड ने डिज़ाइन एवं निर्मित किया?मध्यम स्तर
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उत्तर: B – कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड
व्याख्या: इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि ने किया है, जो भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की जहाज-निर्माण कंपनी है।
प्रश्न 3. ASW-SWC का पूर्ण रूप क्या है?मध्यम स्तर
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उत्तर: B – एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट
व्याख्या: ASW-SWC का पूर्ण रूप है Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft, जो उथले पानी में पनडुब्बियों का पता लगाने व नष्ट करने हेतु है।
प्रश्न 4. INS मालवण किस प्रकार के प्रणोदन तंत्र का उपयोग करता है?मध्यम स्तर
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उत्तर: C – वाटरजेट प्रणोदन
व्याख्या: माहे-श्रेणी क्राफ्ट वाटरजेट प्रणोदन का उपयोग करते हैं, जिससे उथले जल में उच्च गति व बेहतर युद्धाभ्यास संभव होता है।
प्रश्न 5. INS मालवण किस श्रेणी के पोतों का स्थान लेने हेतु है?मध्यम स्तर
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उत्तर: A – अभय-श्रेणी कॉर्वेट
व्याख्या: माहे-श्रेणी, पुरानी अभय-श्रेणी कॉर्वेट का स्थान ले रही है, जिससे नौसेना की तटीय ASW क्षमता आधुनिक होगी।
प्रश्न 6. INS मालवण की स्वदेशी सामग्री लगभग कितनी है?मध्यम स्तर
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उत्तर: B – 80% से अधिक
व्याख्या: इस क्राफ्ट में स्वदेशी सामग्री 80% से अधिक है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' और स्वदेशी रक्षा निर्माण को दर्शाता है।
प्रश्न 7. INS मालवण को किस तिथि को कमीशन किया जाना है?मध्यम स्तर
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उत्तर: B – 22 जुलाई 2026
व्याख्या: INS मालवण को 22 जुलाई 2026 को नौसेना में शामिल (कमीशन) किया गया।
प्रश्न 8. पनडुब्बी-रोधी उथले जल पोत (ASW-SWC) के संदर्भ में विचार कीजिए: (1) ये मुख्यतः गहरे महासागरीय blue-water अभियानों के लिए हैं। (2) ये littoral एवं तटीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं। सही कथन चुनिए।UPSC/RPSC स्तर
उत्तर देखें
उत्तर: B – केवल 2
ASW-SWC उथले तटीय/littoral जल के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं, गहरे blue-water अभियानों के लिए नहीं।
व्याख्या: पनडुब्बी-रोधी उथले जल पोत (ASW-SWC) विशेष रूप से littoral एवं तटीय क्षेत्रों में संचालन हेतु डिज़ाइन किए जाते हैं, न कि गहरे blue-water अभियानों के लिए; अतः केवल कथन 2 सही है।
प्रश्न 9. INS मालवण की उच्च स्वदेशी सामग्री सर्वाधिक प्रत्यक्ष रूप से किस नीति ढांचे से संबंधित है?UPSC/RPSC स्तर
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उत्तर: B – आत्मनिर्भर भारत
स्वदेशी युद्धपोत निर्माण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत पहल से जुड़ा है।
व्याख्या: स्वदेशी सामग्री की उच्च मात्रा वाले युद्धपोतों का निर्माण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत पहल को दर्शाता है, जो घरेलू उत्पादन एवं आयात पर निर्भरता कम करने पर बल देती है।
प्रश्न 10. तटीय जल में संचालित होने वाले INS मालवण जैसे पोतों के लिए वाटरजेट प्रणोदन विशेष रूप से उपयुक्त क्यों है?UPSC/RPSC स्तर
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उत्तर: B – यह उथले जल में बेहतर युद्धाभ्यास क्षमता देता है
वाटरजेट उथले जल में गतिशीलता बढ़ाते हैं एवं draught संबंधी जोखिम कम करते हैं।
व्याख्या: वाटरजेट प्रणोदन उथले जल में पोत की गतिशीलता एवं युद्धाभ्यास क्षमता बढ़ाता है तथा draught संबंधी जोखिम कम करता है, जिससे ये तटीय अभियानों के लिए उपयुक्त बनते हैं।
UPSC / RPSC प्रासंगिकता
- ➜प्रारंभिक परीक्षा: माहे-श्रेणी, ASW-SWC, कोचीन शिपयार्ड, अभय-श्रेणी, वाटरजेट प्रणोदन।
- ➜मुख्य परीक्षा (GS-III): स्वदेशी रक्षा विनिर्माण एवं जहाज निर्माण में आत्मनिर्भर भारत।
- ➜सुरक्षा: पनडुब्बी-रोधी युद्ध एवं हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा।
- ➜विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: नौसैनिक प्रणोदन तंत्र, सेंसर एवं तटीय रक्षा तकनीक।
UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
"INS मालवण जैसे पोतों द्वारा प्रदर्शित स्वदेशी युद्धपोत निर्माण, भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की खोज का केंद्र है।" आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत स्वदेशी नौसैनिक जहाज निर्माण के सामरिक एवं आर्थिक महत्व की चर्चा कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
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