मध्य प्रदेश ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी दी
विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 20 जुलाई 2026
19 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने भोपाल के निकट जगदीशपुर में एक विशेष बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी। यह विधेयक 20 जुलाई 2026 से शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान राज्य विधानसभा में पेश किया जाना है, जिससे मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद समान नागरिक संहिता अपनाने वाला चौथा भारतीय राज्य बनने जा रहा है।
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने एवं लिव-इन संबंधों को नियंत्रित करने वाला एकल, समान ढाँचा लागू करना है। इस विचार को संवैधानिक समर्थन अनुच्छेद 44 से मिलता है, जो राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत आता है।
मसौदे में कई ठोस प्रावधान हैं। यह सभी धर्मों में एकल विवाह अनिवार्य करता है और बहुविवाह, निकाह हलाला एवं तीन तलाक पर रोक लगाता है। विवाह की कानूनी आयु पुरुषों के लिए 21 और महिलाओं के लिए 18 वर्ष रखी गई है, जबकि विवाह पंजीकरण हर स्तर पर अनिवार्य किया गया है। महत्वपूर्ण रूप से, विधेयक बेटे और बेटियों को समान उत्तराधिकार एवं संपत्ति अधिकार की गारंटी देता है।
सामाजिक रूप से संवेदनशील लिव-इन संबंधों के प्रश्न पर, विधेयक एक माह के भीतर अनिवार्य पंजीकरण की माँग करता है और पहले से विवाहित व्यक्तियों के ऐसे संबंधों में प्रवेश करने पर पाँच वर्ष तक की सजा का प्रावधान करता है। भारत की विविधता का सम्मान करते हुए, मसौदा संरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों एवं विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) को छूट देता है।
यह प्रक्रिया असाधारण रूप से व्यापक जन-भागीदारी दर्शाती है: मसौदा 9.5 लाख से अधिक सुझावों के बाद अंतिम रूप दिया गया। कानूनी पाठ से परे, यह कदम सामरिक एवं सामाजिक महत्व रखता है — यह कानून के समक्ष समानता के संवैधानिक लक्ष्य को आगे बढ़ाता है, महिला अधिकारों को मजबूत करता है और एकरूपता एवं विविधता के संतुलन पर व्यापक राष्ट्रीय बहस को गति देता है।
साथ ही, राज्य-स्तरीय UCC संघवाद, अल्पसंख्यक अधिकारों एवं क्रियान्वयन-क्षमता के जटिल प्रश्न उठाता है। चूँकि व्यक्तिगत कानून समवर्ती सूची में आते हैं, राज्य इस पर कानून बना सकते हैं, पर ऐसे कानूनों को केंद्रीय अधिनियमों एवं संवैधानिक गारंटियों के साथ सामंजस्य में लाना सावधानीपूर्ण मसौदे की माँग करता है। अभ्यर्थियों के लिए यह विधेयक नीति निर्देशक तत्वों, मौलिक अधिकारों, लैंगिक न्याय एवं केंद्र-राज्य संबंधों को जोड़ने वाला एक समृद्ध अध्ययन है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
◆ संविधान का अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता को राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत रखता है।
◆ उत्तराखंड 2025 में UCC कानून बनाने वाला पहला भारतीय राज्य बना।
◆ मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात एवं असम के बाद चौथा UCC राज्य बनने जा रहा है।
◆ MP विधेयक एकल विवाह अनिवार्य करता है और बहुविवाह, निकाह हलाला एवं तीन तलाक पर रोक लगाता है।
◆ विवाह आयु 21 (पुरुष) एवं 18 (महिला) वर्ष रखी गई; विवाह पंजीकरण अनिवार्य।
◆ तीन तलाक को राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 से अपराध बनाया गया।
◆ मसौदा 9.5 लाख से अधिक जन-सुझावों के बाद तैयार; ST एवं PVTG को छूट।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
मध्यम स्तर प्रश्न 1. समान नागरिक संहिता का उल्लेख संविधान के किस अनुच्छेद में है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – अनुच्छेद 44
व्याख्या: अनुच्छेद 44 (एक नीति निर्देशक तत्व) राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
मध्यम स्तर प्रश्न 2. UCC कानून बनाने वाला पहला भारतीय राज्य कौन था?
उत्तर देखें
उत्तर: C – उत्तराखंड
व्याख्या: उत्तराखंड 2025 में UCC कानून बनाने वाला पहला राज्य बना।
मध्यम स्तर प्रश्न 3. मध्य प्रदेश भारत का कौन सा UCC राज्य बनने जा रहा है?
उत्तर देखें
उत्तर: C – चौथा
व्याख्या: MP उत्तराखंड, गुजरात एवं असम के बाद चौथा राज्य होगा।
मध्यम स्तर प्रश्न 4. व्यक्तिगत कानून किस सूची के अंतर्गत आते हैं, जिससे राज्य UCC बना सकते हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: C – समवर्ती सूची
व्याख्या: व्यक्तिगत कानून समवर्ती सूची में आते हैं, इसलिए संसद एवं राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
मध्यम स्तर प्रश्न 5. MP विधेयक महिलाओं के लिए विवाह की कानूनी आयु कितनी रखता है?
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उत्तर: B – 18 वर्ष
व्याख्या: विधेयक पुरुषों के लिए 21 एवं महिलाओं के लिए 18 वर्ष आयु रखता है।
मध्यम स्तर प्रश्न 6. तीन तलाक को राष्ट्रीय स्तर पर किस अधिनियम से अपराध बनाया गया?
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उत्तर: B – मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019
व्याख्या: 2019 अधिनियम ने तत्काल तीन तलाक को आपराधिक अपराध बनाया।
मध्यम स्तर प्रश्न 7. MP मसौदे के लिए लगभग कितने जन-सुझाव प्राप्त हुए?
उत्तर देखें
उत्तर: C – 9.5 लाख
व्याख्या: मसौदा 9.5 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त करने वाली परामर्श प्रक्रिया के बाद तैयार हुआ।
UPSC/RPSC प्रश्न 8. MP UCC विधेयक के बारे में विचार कीजिए: 1. यह सभी धर्मों में बहुविवाह पर रोक लगाता है। 2. यह संरक्षित क्षेत्रों में ST एवं PVTG को छूट देता है। 3. यह लिव-इन संबंधों के पंजीकरण की माँग करता है। कौन-से सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: D – 1, 2 और 3
व्याख्या: तीनों विधेयक के प्रावधान हैं — एकल विवाह, जनजातीय छूट एवं अनिवार्य लिव-इन पंजीकरण।
UPSC/RPSC प्रश्न 9. अनुच्छेद 44 सहित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों का सर्वोत्तम वर्णन है:
उत्तर देखें
उत्तर: B – गैर-वादयोग्य पर शासन में मौलिक
व्याख्या: DPSP न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं पर देश के शासन में मौलिक हैं (अनुच्छेद 37)।
UPSC/RPSC प्रश्न 10. राज्य-स्तरीय UCC मुख्यतः किसके संतुलन पर संवैधानिक बहस उठाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – कानून की एकरूपता एवं सांस्कृतिक विविधता की रक्षा
व्याख्या: मूल तनाव समान नागरिक संहिता एवं विविध व्यक्तिगत कानूनों/सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के बीच है।
UPSC / RPSC प्रासंगिकता
➜ प्रारंभिक परीक्षा: अनुच्छेद 44, नीति निर्देशक तत्व, UCC वाले राज्य, मुस्लिम महिला अधिनियम 2019।
➜ मुख्य परीक्षा GS-II: समान नागरिक संहिता, व्यक्तिगत कानून, धर्मनिरपेक्षता एवं लैंगिक न्याय।
➜ समाज एवं अधिकार: एकरूपता एवं अल्पसंख्यक/जनजातीय अधिकारों में संतुलन।
➜ संघवाद: समवर्ती सूची के विषयों पर राज्य विधान एवं केंद्र-राज्य संबंध।
UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
समान नागरिक संहिता पर बहस समानता के संवैधानिक लक्ष्य एवं भारत की धार्मिक व सांस्कृतिक विविधता की रक्षा के बीच तनाव को दर्शाती है। मध्य प्रदेश विधेयक जैसी हालिया राज्य-स्तरीय पहलों के आलोक में समान नागरिक संहिता के पक्ष एवं विपक्ष के तर्कों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
(250 शब्द, 15 अंक)
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