केंद्रीय कैबिनेट ने मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) 2026 को मंजूरी दी
विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 18 जुलाई 2026
भारत ने अपने इलेक्ट्रॉनिक्स तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम तब उठाया जब 15 जुलाई 2026 को केंद्रीय कैबिनेट ने मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (Mobile Phone Manufacturing Scheme – MPMS) को ₹62,500 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ मंजूरी दे दी। यह नई योजना पाँच वित्तीय वर्षों तक, अर्थात् वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी और यह बड़े पैमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हेतु पूर्ववर्ती उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का स्थान लेगी, जो 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी। यह कदम नीतिगत निरंतरता दर्शाता है, साथ ही ध्यान अब गहरे मूल्यवर्धन (value addition) और स्वदेशी नवाचार की ओर अधिक केंद्रित करता है।
इस योजना के मूल में भारत में वास्तव में निर्मित मोबाइल फोनों की पात्र बिक्री पर प्रोत्साहन सहायता है। आधार प्रोत्साहन दर 2.25% से 5% के बीच स्तरित है, और घरेलू स्तर पर प्रमुख कलपुर्जों एवं उप-असेंबलियों की सोर्सिंग पर निर्माताओं को 1.5% तक का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। इसके अतिरिक्त उत्पाद डिज़ाइन एवं अनुसंधान-विकास (R&D) से जुड़ी पात्र बिक्री पर 3% अतिरिक्त प्रोत्साहन उपलब्ध है — यह प्रावधान जानबूझकर भारतीय ब्रांडों तथा स्वदेशी नवाचार से जोड़ा गया है, ताकि देश केवल असेंबली से आगे बढ़कर मूल्य शृंखला की डिज़ाइन परत पर स्वामित्व की ओर बढ़े।
योजना के उद्देश्य व्यापक पर स्पष्ट हैं: मोबाइल फोन उत्पादन बढ़ाना, घरेलू मूल्यवर्धन गहरा करना, बाहरी झटकों के विरुद्ध आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता बनाना, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता तेज़ करना। संख्यात्मक रूप में सरकार को अपेक्षा है कि MPMS अपनी अवधि में लगभग ₹39 लाख करोड़ का संचयी मोबाइल फोन उत्पादन, लगभग ₹15 लाख करोड़ के निर्यात तथा करीब 60,000 प्रत्यक्ष रोज़गार उत्पन्न करेगी।
मोबाइल फोन व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा हैं, जिसमें उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार उपकरण भी शामिल हैं। हाल के वर्षों में भारत ने इस क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण बढ़ाने और आयात-निर्भरता घटाने हेतु बार-बार PLI-शैली के ढाँचों का प्रयोग किया है। यहाँ "घरेलू मूल्यवर्धन" (भारत के भीतर जोड़े गए कलपुर्जों, असेंबली, डिज़ाइन एवं सेवाओं का अंश) तथा "आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ता" (व्यवधानों के बावजूद उत्पादन बनाए रखने की क्षमता) की अवधारणाएँ केंद्रीय हैं।
प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए MPMS अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं तथा विज्ञान-प्रौद्योगिकी से जुड़ी समृद्ध परीक्षा सामग्री है और UPSC, RPSC, SSC एवं बैंकिंग परीक्षाओं के प्रीलिम्स तथा मेन्स दोनों में आने की प्रबल संभावना रखती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
- ◆ केंद्रीय कैबिनेट ने 15 जुलाई 2026 को मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) को मंजूरी दी।
- ◆ कुल परिव्यय: ₹62,500 करोड़; अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 (पाँच वर्ष)।
- ◆ यह बड़े पैमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स हेतु PLI योजना का स्थान लेती है, जो 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई।
- ◆ आधार प्रोत्साहन: 2.25%–5%; घरेलू सोर्सिंग पर 1.5% तक अतिरिक्त; डिज़ाइन एवं R&D पर 3% अतिरिक्त।
- ◆ अपेक्षित संचयी उत्पादन ~₹39 लाख करोड़; अनुमानित निर्यात ~₹15 लाख करोड़।
- ◆ अनुमानित प्रत्यक्ष रोज़गार ~60,000।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
प्रश्न 1. केंद्रीय कैबिनेट ने मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) को कब मंजूरी दी?
उत्तर देखें
उत्तर: (B) 15 जुलाई 2026
व्याख्या: केंद्रीय कैबिनेट ने 15 जुलाई 2026 को MPMS को मंजूरी दी।
प्रश्न 2. MPMS का कुल बजटीय परिव्यय कितना है?
उत्तर देखें
उत्तर: (C) ₹62,500 करोड़
व्याख्या: योजना का कुल परिव्यय ₹62,500 करोड़ रखा गया है।
प्रश्न 3. MPMS किस पूर्ववर्ती योजना का स्थान लेती है?
उत्तर देखें
उत्तर: (B) उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना
व्याख्या: MPMS, 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का स्थान लेती है।
प्रश्न 4. MPMS कितने वित्तीय वर्षों तक चलेगी?
उत्तर देखें
उत्तर: (C) पाँच
व्याख्या: यह योजना पाँच वित्तीय वर्षों तक (वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक) चलेगी।
प्रश्न 5. उत्पाद डिज़ाइन एवं R&D के लिए योजना कितना अतिरिक्त प्रोत्साहन देती है?
उत्तर देखें
उत्तर: (C) 3%
व्याख्या: उत्पाद डिज़ाइन एवं अनुसंधान-विकास से जुड़ी पात्र बिक्री पर 3% अतिरिक्त प्रोत्साहन उपलब्ध है।
प्रश्न 6. योजना के तहत अनुमानित मोबाइल फोन निर्यात लगभग कितना है?
उत्तर देखें
उत्तर: (C) ₹15 लाख करोड़
व्याख्या: सरकार को योजना अवधि में लगभग ₹15 लाख करोड़ के मोबाइल फोन निर्यात की अपेक्षा है।
प्रश्न 7. MPMS के तहत अनुमानित प्रत्यक्ष रोज़गार सृजन लगभग कितना है?
उत्तर देखें
उत्तर: (C) 60,000
व्याख्या: योजना से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की अपेक्षा है।
प्रश्न 8. MPMS के विषय में विचार करें: 1) यह पात्र बिक्री पर 2.25% से 5% आधार प्रोत्साहन देती है। 2) घरेलू सोर्सिंग पर 1.5% तक अतिरिक्त देती है। 3) योजना का उत्पाद डिज़ाइन से कोई संबंध नहीं है। कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: (A) केवल 1 और 2
व्याख्या: कथन 1 व 2 सही हैं — आधार प्रोत्साहन 2.25% से 5% है और घरेलू सोर्सिंग पर 1.5% तक अतिरिक्त मिलता है; योजना उत्पाद डिज़ाइन व R&D को 3% प्रोत्साहन से जोड़ती है, अतः कथन 3 गलत है।
प्रश्न 9. भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स नीति के संदर्भ में विचार करें: 1) घरेलू मूल्यवर्धन का अर्थ भारत के भीतर जोड़े गए कलपुर्जे, असेंबली एवं डिज़ाइन का अंश है। 2) MPMS आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ता सुधारना चाहती है। 3) जिस PLI योजना का यह स्थान लेती है वह 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई। कौन-से सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: (D) 1, 2 और 3
व्याख्या: तीनों कथन सही हैं — घरेलू मूल्यवर्धन में भारत के भीतर जोड़े गए कलपुर्जे व डिज़ाइन शामिल हैं, MPMS आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ता बढ़ाना चाहती है, तथा पूर्ववर्ती PLI योजना 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई।
प्रश्न 10. MPMS के तहत अपनी अवधि में अपेक्षित संचयी मोबाइल फोन उत्पादन लगभग कितना है?
उत्तर देखें
उत्तर: (C) ₹39 लाख करोड़
व्याख्या: सरकार को योजना अवधि में लगभग ₹39 लाख करोड़ का संचयी मोबाइल फोन उत्पादन अपेक्षित है।
UPSC / RPSC प्रासंगिकता
- ➜ प्रीलिम्स: इस विषय के प्रमुख तथ्य, आँकड़े, तिथियाँ एवं शब्दावली।
- ➜ मुख्य परीक्षा GS-II/III: नीति, शासन, अर्थव्यवस्था एवं व्यापक प्रभाव।
- ➜ अर्थव्यवस्था एवं शासन: भारत के लिए संस्थागत संदर्भ एवं महत्व।
UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
"मोबाइल फोन विनिर्माण योजना असेंबली से अधिक भारत के भीतर डिज़ाइन एवं कलपुर्जा तंत्र को स्थापित करने के बारे में है।" इस कथन के आलोक में विवेचना कीजिए कि MPMS घरेलू मूल्यवर्धन को गहरा करने का प्रयास कैसे करती है तथा इसमें क्या चुनौतियाँ हैं। (250 शब्द, 15 अंक)
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