NMCG का लघु नदी पुनर्जीवन (SRR) ढाँचा 2026
विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 18 जुलाई 2026
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने भारत की छोटी नदियों के पुनरुद्धार हेतु एक मसौदा लघु नदी पुनर्जीवन ढाँचा (Small River Rejuvenation – SRR Framework) जारी किया है। उल्लेखनीय है कि यह ढाँचा जानबूझकर छोटी नदियों के संरक्षण को गंगा बेसिन में प्रयुक्त बड़ी-नदी मॉडल से अलग करता है, और इसके बजाय स्थानीय, प्रकृति-आधारित उपायों, वैज्ञानिक आकलन एवं सामुदायिक भागीदारी पर बल देता है।
मूल रूप से SRR ढाँचा छोटी नदी प्रणालियों के लिए तैयार एक नीति मसौदा है। यह बड़े इंजीनियरिंग हस्तक्षेपों से हटकर जल-विज्ञान (hydrology), पारिस्थितिकी, भू-उपयोग एवं स्थानीय जल उपलब्धता पर आधारित नदी-विशिष्ट योजना की ओर बढ़ने का प्रस्ताव रखता है। यहाँ "पुनर्जीवन" का अर्थ इन छोटी जलधाराओं में प्रवाह, जल गुणवत्ता एवं पारिस्थितिक कार्यों को बहाल करना है, न कि केवल उनके चारों ओर संरचनाएँ बनाना।
योजना उपकरण विस्तृत हैं: जल-विज्ञान एवं जल-भूविज्ञान (hydrogeology) अध्ययन, पारिस्थितिक आकलन, जल-गुणवत्ता विश्लेषण एवं GIS मानचित्रण, तत्पश्चात विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की तैयारी। संचालनात्मक गतिविधियों में स्रोत संरक्षण, तरल एवं ठोस प्रदूषण नियंत्रण, पारिस्थितिक बहाली, चैनल सुधार तथा जन-नदी संपर्क प्रयास शामिल हैं। ग्रामीण छोटी नदियों हेतु प्राथमिकता प्राकृतिक संपर्क एवं स्थानीय जल भंडारण है; शहरी छोटी नदियों हेतु ध्यान निरंतर प्रवाह एवं शहरी अपवाह के प्रबंधन पर केंद्रित होता है।
NMCG ने इस ढाँचे को निर्मल गंगा (स्वच्छता) एवं अविरल गंगा (अबाधित प्रवाह) के दो सिद्धांतों से जोड़ा है, साथ ही यह रेखांकित किया है कि छोटी नदियों को भिन्न विधियों की आवश्यकता है क्योंकि उनके जलग्रहण, प्रवाह प्रतिरूप एवं प्रदूषण स्रोत बड़ी प्रणालियों से भिन्न होते हैं। महत्वपूर्ण रूप से यह रखरखाव एवं संरक्षण का दायित्व नदी-किनारे रहने वाले समुदायों को सौंपता है — अर्थात केवल जागरूकता अभियानों के बजाय स्थानीय भागीदारी में नदी की देखरेख को स्थापित करता है। वित्तपोषण पर ढाँचा महँगी स्वतंत्र अवसंरचना से बचते हुए मौजूदा केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं के अभिसरण (convergence) का प्रस्ताव देता है।
परीक्षार्थियों के लिए यह पर्यावरण, शासन एवं नदी-प्रबंधन विषयों को जोड़ता है और UPSC, RPSC, SSC एवं राज्य परीक्षाओं के लिए सीधे प्रासंगिक है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
- ◆ NMCG ने भारत की छोटी नदियों हेतु लघु नदी पुनर्जीवन (SRR) ढाँचा तैयार किया है।
- ◆ यह छोटी-नदी संरक्षण को बड़ी-नदी (गंगा) मॉडल से अलग करता है।
- ◆ NMCG जल शक्ति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- ◆ यह निर्मल गंगा (स्वच्छता) एवं अविरल गंगा (अबाधित प्रवाह) सिद्धांतों से जुड़ा है।
- ◆ वित्तपोषण मौजूदा केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं के अभिसरण पर आधारित है, नई महँगी अवसंरचना पर नहीं।
- ◆ उपकरण: जल-विज्ञान, जल-भूविज्ञान, पारिस्थितिक आकलन, जल-गुणवत्ता विश्लेषण, GIS मानचित्रण एवं DPR।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
प्रश्न 1. लघु नदी पुनर्जीवन (SRR) ढाँचा किसने तैयार किया?
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प्रश्न 2. SRR ढाँचा किसके लिए है?
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प्रश्न 3. NMCG किस मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
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प्रश्न 4. "अविरल गंगा" किस विचार को दर्शाता है?
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प्रश्न 5. GIS का पूर्ण रूप क्या है?
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प्रश्न 6. शहरी छोटी नदियों हेतु ढाँचा मुख्यतः किस पर केंद्रित है?
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प्रश्न 7. जल-भूविज्ञान (Hydrogeology) किसका अध्ययन है?
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प्रश्न 8. SRR ढाँचे के विषय में विचार करें: 1) यह मौजूदा योजना निधियों के अभिसरण पर निर्भर है। 2) यह रखरखाव का दायित्व नदी-किनारे के समुदायों को सौंपता है। 3) यह बड़ी नदियों वाला ही मॉडल प्रयोग करता है। कौन-से सही हैं?
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प्रश्न 9. ढाँचे के योजना उपकरणों के संदर्भ में विचार करें: 1) यह GIS मानचित्रण का उपयोग करता है। 2) इसमें DPR आवश्यक है। 3) यह पारिस्थितिक आकलन को बाहर रखता है। कौन-से सही हैं?
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प्रश्न 10. ढाँचा छोटी-नदी पुनर्जीवन को किन दो सिद्धांतों से जोड़ता है?
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UPSC / RPSC प्रासंगिकता
- ➜ प्रीलिम्स: NMCG का मूल मंत्रालय, निर्मल/अविरल गंगा, GIS, DPR, जल-भूविज्ञान।
- ➜ मेन्स GS-III: नदी बहाली, जल संसाधन, प्रकृति-आधारित समाधान, प्रदूषण नियंत्रण।
- ➜ मेन्स GS-II: सामुदायिक भागीदारी एवं विकेंद्रीकृत पर्यावरणीय शासन।
UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
"छोटी नदियाँ बड़ी नदी बेसिनों की तुलना में भिन्न पुनर्जीवन व्याकरण की माँग करती हैं।" NMCG के लघु नदी पुनर्जीवन ढाँचे तथा सामुदायिक देखरेख की भूमिका के संदर्भ में विवेचना कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
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