RBI ने बैंकों के लिए SNFA ढाँचा पेश किया (2026)

विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 18 जुलाई 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने दबावग्रस्त परिसंपत्ति समाधान निर्देश, 2025 (Resolution of Stressed Assets Directions, 2025) में संशोधन के माध्यम से निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों (Specified Non-Financial Assets – SNFAs) हेतु एक नया विवेकपूर्ण (prudential) ढाँचा पेश किया है। यह ढाँचा व्यापक रूप से लागू होता है — क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान, वाणिज्यिक बैंक, लघु वित्त बैंक एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पर — और यह 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।

तो SNFA वास्तव में क्या है? ये अचल परिसंपत्तियाँ हैं, जिनमें गैर-बैंकिंग परिसंपत्तियाँ भी शामिल हैं, जिन्हें बैंक किसी ऐसे उधारकर्ता पर अपने दावों की पूर्ण या आंशिक संतुष्टि में अर्जित करता है जिसका ऋण पहले ही गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के रूप में वर्गीकृत किया जा चुका है। सामान्य वित्तीय दावों के विपरीत ये भौतिक संपत्तियाँ या अन्य अचल होल्डिंग्स होती हैं जिन्हें बैंक चूक के बाद अपने अधिकार में लेता है।

ढाँचा बैंकों से SNFAs के अधिग्रहण, सीमाओं, पात्रता, वसूली प्रयासों एवं निपटान को कवर करने वाली आंतरिक नीतियाँ बनाने की अपेक्षा करता है। यह अधिकतम सात वर्ष की निपटान अवधि निर्धारित करता है, और महत्वपूर्ण रूप से किसी SNFA को मूल उधारकर्ता या संबंधित पक्षों को पुनः बेचने पर रोक लगाता है — जिससे वह खामी बंद होती है जिसके तहत चूककर्ता सस्ते में परिसंपत्तियाँ पुनः प्राप्त कर सकते थे।

मूल्यांकन पर, अर्जित SNFA का मूल्यांकन समाप्त ऋण के शुद्ध बही मूल्य (net book value) या संकटकालीन बिक्री मूल्य में से जो कम हो, उस पर करना होगा, और संकटकालीन बिक्री मूल्य कम-से-कम दो स्वतंत्र बाह्य मूल्यांककों द्वारा निर्धारित होगा। महत्वपूर्ण रूप से SNFAs को सकल NPA, शुद्ध NPA या दबावग्रस्त परिसंपत्ति के रूप में नहीं गिना जाएगा और इन्हें विशिष्ट लेखा शीर्षों के तहत अलग से प्रकट किया जाएगा। 30 सितंबर 2026 तक बैंक की बही में मौजूद पुरानी (legacy) SNFAs को नए निर्देशों का अनुपालन 30 सितंबर 2027 तक करना होगा।

परीक्षार्थियों के लिए यह बैंकिंग-एवं-वित्त का एक मुख्य विषय है जो NPAs, विवेकपूर्ण विनियमन एवं RBI की पर्यवेक्षी भूमिका को छूता है — बैंकिंग, UPSC, RPSC एवं SSC परीक्षाओं के लिए अत्यधिक प्रासंगिक।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)

  • RBI ने दबावग्रस्त परिसंपत्ति समाधान निर्देश, 2025 में संशोधन से SNFA ढाँचा पेश किया।
  • यह 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी; RRBs, AIFIs, वाणिज्यिक बैंक, SFBs एवं NBFCs पर लागू।
  • SNFAs हेतु अधिकतम निपटान अवधि: सात वर्ष।
  • SNFAs को मूल उधारकर्ता या संबंधित पक्षों को पुनः नहीं बेचा जा सकता।
  • मूल्यांकन: शुद्ध बही मूल्य या संकटकालीन बिक्री मूल्य में से जो कम हो (कम-से-कम दो स्वतंत्र मूल्यांकक)।
  • SNFAs सकल/शुद्ध NPA नहीं; पुरानी SNFAs (30 सित. 2026 तक) को 30 सित. 2027 तक अनुपालन करना होगा।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।

मध्यम स्तर

प्रश्न 1. SNFA ढाँचा किस संस्थान ने पेश किया?

(A) SEBI
(B) RBI
(C) IRDAI
(D) NABARD
उत्तर देखें
उत्तर: (B) RBI
व्याख्या: यह नया विवेकपूर्ण ढाँचा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने दबावग्रस्त परिसंपत्ति समाधान निर्देशों में संशोधन के माध्यम से पेश किया।
मध्यम स्तर

प्रश्न 2. SNFA का पूर्ण रूप है:

(A) Specified Non-Financial Assets
(B) Secured Net Financial Assets
(C) Standard Non-Fund Assets
(D) Special Note Finance Accounts
उत्तर देखें
उत्तर: (A) Specified Non-Financial Assets
व्याख्या: SNFA का पूर्ण रूप Specified Non-Financial Assets (निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियाँ) है।
मध्यम स्तर

प्रश्न 3. SNFA ढाँचा कब से प्रभावी होता है?

(A) 1 अप्रैल 2026
(B) 1 अक्टूबर 2026
(C) 30 सितंबर 2026
(D) 1 जनवरी 2027
उत्तर देखें
उत्तर: (B) 1 अक्टूबर 2026
व्याख्या: यह ढाँचा 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा, जिसके बाद संबंधित संस्थानों को इसका अनुपालन करना होगा।
मध्यम स्तर

प्रश्न 4. SNFAs हेतु निर्धारित अधिकतम निपटान अवधि कितनी है?

(A) तीन वर्ष
(B) पाँच वर्ष
(C) सात वर्ष
(D) दस वर्ष
उत्तर देखें
उत्तर: (C) सात वर्ष
व्याख्या: SNFAs के लिए निर्धारित अधिकतम निपटान (disposal) अवधि सात वर्ष रखी गई है, ताकि परिसंपत्तियाँ अनिश्चितकाल तक न रखी जाएँ।
मध्यम स्तर

प्रश्न 5. संकटकालीन बिक्री मूल्य कम-से-कम कितने स्वतंत्र बाह्य मूल्यांककों द्वारा निर्धारित होगा?

(A) एक
(B) दो
(C) तीन
(D) चार
उत्तर देखें
उत्तर: (B) दो
व्याख्या: संकटकालीन बिक्री मूल्य कम-से-कम दो स्वतंत्र बाह्य मूल्यांककों द्वारा निर्धारित होगा, जिससे मूल्यांकन में पारदर्शिता बनी रहे।
मध्यम स्तर

प्रश्न 6. SNFA का मूल्यांकन किस पर करना होगा?

(A) शुद्ध बही मूल्य या संकट बिक्री मूल्य में जो अधिक हो
(B) शुद्ध बही मूल्य या संकट बिक्री मूल्य में जो कम हो
(C) केवल बाज़ार मूल्य
(D) मूल ऋण राशि
उत्तर देखें
उत्तर: (B) शुद्ध बही मूल्य या संकट बिक्री मूल्य में जो कम हो
व्याख्या: SNFA का मूल्यांकन शुद्ध बही मूल्य अथवा संकट बिक्री मूल्य — इनमें से जो कम हो, उस पर करना होगा, जो विवेकपूर्ण लेखांकन सिद्धांत के अनुरूप है।
मध्यम स्तर

प्रश्न 7. RBI की स्थापना किस वर्ष हुई?

(A) 1934
(B) 1935
(C) 1949
(D) 1955
उत्तर देखें
उत्तर: (B) 1935
व्याख्या: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्थापना 1935 में हुई थी और यह देश का केंद्रीय बैंक है।
UPSC/RPSC स्तर

प्रश्न 8. SNFAs के विषय में विचार करें: 1) इन्हें मूल उधारकर्ता को पुनः बेचा जा सकता है। 2) इन्हें सकल NPA माना जाता है। 3) इन्हें विशिष्ट लेखा शीर्षों के तहत अलग से प्रकट किया जाता है। कौन-सा/से सही है/हैं?

(A) केवल 3
(B) केवल 1 और 2
(C) केवल 2 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (A) केवल 3
व्याख्या: केवल कथन 3 सही है — SNFAs को विशिष्ट लेखा शीर्षों के तहत अलग से प्रकट किया जाता है; इन्हें मूल उधारकर्ता को पुनः नहीं बेचा जा सकता और न ही ये सकल NPA के रूप में गिनी जाती हैं।
UPSC/RPSC स्तर

प्रश्न 9. विचार करें: 1) ढाँचा NBFCs पर लागू होता है। 2) 30 सित. 2026 तक की पुरानी SNFAs को 30 सित. 2027 तक अनुपालन करना होगा। 3) SNFAs दबावग्रस्त परिसंपत्ति के रूप में गिनी जाती हैं। कौन-से सही हैं?

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (A) केवल 1 और 2
व्याख्या: कथन 1 व 2 सही हैं — ढाँचा NBFCs सहित विभिन्न संस्थानों पर लागू होता है तथा 30 सितंबर 2026 तक की पुरानी SNFAs को 30 सितंबर 2027 तक अनुपालन करना होगा; कथन 3 गलत है।
UPSC/RPSC स्तर

प्रश्न 10. SNFAs बैंकों द्वारा उस उधारकर्ता पर दावों की संतुष्टि में अर्जित होती हैं जिसका ऋण वर्गीकृत होता है:

(A) मानक परिसंपत्ति
(B) गैर-निष्पादित परिसंपत्ति
(C) प्राथमिकता-क्षेत्र ऋण
(D) पुनर्गठित मानक परिसंपत्ति
उत्तर देखें
उत्तर: (B) गैर-निष्पादित परिसंपत्ति
व्याख्या: SNFAs बैंकों द्वारा तब अर्जित होती हैं जब वे ऐसे उधारकर्ता पर दावों की संतुष्टि में परिसंपत्ति लेते हैं जिसका ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के रूप में वर्गीकृत होता है।

UPSC / RPSC प्रासंगिकता

  • प्रीलिम्स: इस विषय के प्रमुख तथ्य, आँकड़े, तिथियाँ एवं शब्दावली।
  • मुख्य परीक्षा GS-II/III: नीति, शासन, अर्थव्यवस्था एवं व्यापक प्रभाव।
  • अर्थव्यवस्था एवं शासन: भारत के लिए संस्थागत संदर्भ एवं महत्व।
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UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न

"चूक पर अर्जित गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों हेतु पृथक विवेकपूर्ण व्यवहार बैंक बैलेंस शीट में पारदर्शिता बढ़ाता है।" RBI के SNFA ढाँचे के संदर्भ में विवेचना कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

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