शब्दलोक: कोलकाता में खुला भारत का पहला इमर्सिव भाषा संग्रहालय
विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 21 जुलाई 2026
भारत ने अपनी विशाल भाषाई विरासत को संजोने और उत्सव के रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। शब्दलोक, जिसे Museum of Word भी कहा जाता है, का उद्घाटन 19 जुलाई 2026 को कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर स्थित एतिहासिक बेल्वेडियर हाउस में हुआ। यह भारत का पहला इमर्सिव भाषा संग्रहालय है और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होता है।
यह संग्रहालय भारत की असाधारण भाषाई विविधता पर केंद्रित है। यह प्रदर्शनी, कलाकृतियों और तकनीक-आधारित प्रदर्शों के माध्यम से लगभग 380 भाषाओं को प्रस्तुत करता है, और विशेष रूप से 2011 की जनगणना में दर्ज 121 भाषाओं को उजागर करता है। यह दिखाता है कि भाषा ने हजारों वर्षों में भारतीय पहचान, साहित्य और समाज को कैसे आकार दिया है।
डिज़ाइन की दृष्टि से इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी नौ गैलरियाँ हैं, जो भाषा के इतिहास और भारतीय सभ्यता में उसकी भूमिका के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं। स्थिर कांच के बक्सों के बजाय, गैलरियाँ इंटरैक्टिव टचस्क्रीन, जेस्चर सेंसर, ऑडियो-विज़ुअल इंस्टॉलेशन, होलोग्राम और इमर्सिव डिस्प्ले प्रणालियों का उपयोग करती हैं।
एक विशिष्ट विशेषता अत्याधुनिक तकनीक का एकीकरण है। शब्दलोक अपने अनुभव को समृद्ध बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ओगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) का उपयोग करता है। यह मॉडल भारत के सांस्कृतिक विरासत के डिजिटल संरक्षण और शिक्षा में नई तकनीकों के व्यापक प्रयास को दर्शाता है।
इस परियोजना का नीतिगत और रणनीतिक महत्व भी है। भाषा संग्रहालय लुप्तप्राय और अल्पसंख्यक भाषाओं की रक्षा करते हैं, भाषाविज्ञान में शोध को बढ़ावा देते हैं और सांस्कृतिक पर्यटन को मज़बूत करते हैं — जिससे कोलकाता और पश्चिम बंगाल को आर्थिक और रोज़गार संबंधी लाभ भी मिलते हैं।
आगंतुकों के लिए यह संग्रहालय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है, सोमवार को बंद रहता है, और 15 अगस्त 2026 तक प्रवेश निःशुल्क है। शब्दलोक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस विचार को संस्थागत रूप देता है कि भाषा स्वयं एक विरासत है जिसे संजोना चाहिए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
◆ शब्दलोक (Museum of Word) भारत का पहला इमर्सिव भाषा संग्रहालय है।
◆ इसका उद्घाटन 19 जुलाई 2026 को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत हुआ।
◆ स्थान: बेल्वेडियर हाउस, राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर, कोलकाता।
◆ यह लगभग 380 भाषाओं को दर्शाता है, जिसमें 2011 की जनगणना की 121 भाषाएँ शामिल हैं।
◆ संग्रहालय में नौ गैलरियाँ हैं, जिनमें होलोग्राम और जेस्चर सेंसर हैं।
◆ यह AI, AR और VR का उपयोग करता है।
◆ समय: सुबह 10 – शाम 6, सोमवार बंद; 15 अगस्त 2026 तक प्रवेश निःशुल्क।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
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उत्तर: B – शब्दलोक
व्याख्या: शब्दलोक (Museum of Word) भारत का पहला इमर्सिव भाषा संग्रहालय है।
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उत्तर: C – कोलकाता
व्याख्या: इसका उद्घाटन कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में हुआ।
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उत्तर: B – संस्कृति मंत्रालय
व्याख्या: यह केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होता है।
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उत्तर: B – 121
व्याख्या: 2011 की जनगणना में 121 भाषाएँ दर्ज थीं, जिन्हें संग्रहालय विशेष रूप से दर्शाता है।
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उत्तर: C – नौ
व्याख्या: संग्रहालय में नौ गैलरियाँ हैं जो भाषा इतिहास के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं।
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उत्तर: B – बेल्वेडियर हाउस
व्याख्या: यह राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर के बेल्वेडियर हाउस में स्थित है।
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उत्तर: A – 15 अगस्त 2026
व्याख्या: 15 अगस्त 2026 तक प्रवेश निःशुल्क है और सोमवार को बंद रहता है।
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उत्तर: B – सांस्कृतिक विरासत का डिजिटल संरक्षण
व्याख्या: भाषाओं के डिजिटल प्रलेखन हेतु AI/AR/VR का उपयोग सांस्कृतिक विरासत के डिजिटल संरक्षण को दर्शाता है।
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उत्तर: A – लुप्तप्राय एवं अल्पसंख्यक भाषाओं की रक्षा
व्याख्या: भाषा संग्रहालय लुप्तप्राय/अल्पसंख्यक भाषाओं का प्रलेखन एवं पुनरुद्धार करता है।
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उत्तर: B – भारत का सबसे बड़ा पुस्तकालय
व्याख्या: कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय भारत का सबसे बड़ा पुस्तकालय है।
UPSC / RPSC प्रासंगिकता
- ➜ प्रारंभिक (Prelims): शब्दलोक, बेल्वेडियर हाउस, राष्ट्रीय पुस्तकालय, 2011 जनगणना (121 भाषाएँ) से संबंधित तथ्य।
- ➜ मुख्य GS-I / GS-II: भारतीय कला एवं संस्कृति, भाषाओं का संरक्षण, संस्कृति मंत्रालय की भूमिका।
- ➜ संस्कृति एवं समाज: भाषाई विविधता, लुप्तप्राय भाषाओं का संरक्षण, सांस्कृतिक पर्यटन।
- ➜ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: विरासत और शिक्षा में AI, AR और VR का उपयोग।
UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
“भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि किसी सभ्यता की स्मृति का भंडार है।” भारत के पहले इमर्सिव भाषा संग्रहालय की स्थापना के आलोक में, भाषाई विविधता के प्रलेखन एवं संरक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए और इस प्रयास में प्रौद्योगिकी की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
(250 शब्द, 15 अंक)
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