TNSDA ने वेल्लालोर में 1,000 से अधिक पुरावशेष खोजे
विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 20 जुलाई 2026
तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) ने कोयंबटूर के वेल्लालोर में नोय्यल नदी तल से 1,000 से अधिक पुरावशेष खोजे हैं। ये खोजें आरंभिक ऐतिहासिक एवं ऐतिहासिक कालों तक फैली हैं, जिनमें कई वस्तुएँ ईसा पूर्व पहली शताब्दी से तीसरी शताब्दी ईस्वी के बीच की हैं — जिससे कुछ वस्तुएँ लगभग 2,100 वर्ष पुरानी हैं और प्राचीन तमिल समाज के भौतिक जीवन की दुर्लभ झलक देती हैं।
वेल्लालोर नोय्यल नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है, जो कावेरी बेसिन से संबद्ध एक सहायक नदी प्रणाली है। 1 अप्रैल 2026 को शुरू हुए उत्खनन के पहले सत्र में लगभग 100 एकड़ में फैली एक प्राचीन बस्ती के प्रमाण सामने आए हैं। थेनीश्वरर मंदिर के निकट तीन स्थलों पर चार स्थानों पर कार्य किया जा रहा है, जो एक सुव्यवस्थित बसावट का संकेत देता है।
प्राप्त सामग्री उल्लेखनीय रूप से विविध है। इसमें रोमन ताँबे के सिक्के, घरेलू वस्तुएँ, आभूषण, पत्थर की संरचनाएँ, जल नलिकाएँ, फर्श सामग्री एवं चूने के प्लास्टर वाला एक गोल गड्ढा शामिल है। तकनीकी एवं शिल्प दृष्टि से, स्थल पर मनका-निर्माण, लोहा एवं इस्पात निर्माण, बुनाई, शंख-आभूषण उत्पादन एवं मृद्भांड निर्माण के प्रमाण संरक्षित हैं।
कालक्रम बहुस्तरीय है, जिसमें 1, 5, 6, 8, 10 एवं 12वीं शताब्दियों तथा ब्रिटिश काल से जुड़ी वस्तुएँ हैं, जो दो सहस्राब्दियों तक निरंतर बसावट दर्शाती हैं। रोमन सिक्कों की उपस्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है: ऐसे सिक्के प्रायद्वीपीय भारत में दीर्घ-दूरी व्यापार के शास्त्रीय संकेतक हैं और वेल्लालोर को व्यापक इंडो-रोमन वाणिज्यिक जगत से जोड़ते हैं।
ये निष्कर्ष वेल्लालोर को प्रायद्वीप के पश्चिमी एवं पूर्वी तटों को जोड़ने वाले मार्गों से जुड़े एक प्राचीन व्यापार केंद्र के रूप में पहचानने के पक्ष को मजबूत करते हैं। यह भारत के आर्थिक इतिहास, लोहा-इस्पात प्रौद्योगिकी के प्रसार एवं पूर्व-आधुनिक शिल्प अर्थव्यवस्थाओं की जीवंतता को समझने के लिए व्यापक महत्व रखता है। इस पैमाने के उत्खनन धरोहर पर्यटन एवं स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा देते हैं।
उत्खनन अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा, जिसके बाद खोजों का दस्तावेजीकरण उत्खनन निदेशक के. सुरेश के नेतृत्व वाली टीम करेगी, जो राज्य भर के आठ स्थलों को कवर करने वाली बड़ी परियोजना का भाग है। अभ्यर्थियों के लिए वेल्लालोर प्राचीन भारतीय इतिहास, कला-संस्कृति एवं पुरातात्विक विधियों हेतु एक मूल्यवान करेंट-अफेयर्स आधार है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
◆ नोय्यल नदी तमिलनाडु में कावेरी बेसिन से संबद्ध एक सहायक नदी प्रणाली है।
◆ रोमन ताँबे के सिक्के प्रायद्वीपीय भारत में दीर्घ-दूरी व्यापार के शास्त्रीय संकेतक हैं।
◆ TNSDA तमिलनाडु में पुरातात्विक अनुसंधान एवं उत्खनन हेतु राज्य एजेंसी है।
◆ वेल्लालोर बस्ती लगभग 100 एकड़ में फैली है; उत्खनन 1 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ।
◆ कुछ पुरावशेष ईसा पूर्व पहली से तीसरी शताब्दी ईस्वी (लगभग 2,100 वर्ष पुराने) के हैं।
◆ स्थल पर मनका-निर्माण, लोहा-इस्पात, बुनाई, शंख-आभूषण एवं मृद्भांड के प्रमाण मिले हैं।
◆ उत्खनन अक्टूबर 2026 तक जारी, निदेशक के. सुरेश के नेतृत्व में।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
मध्यम स्तर प्रश्न 1. वेल्लालोर उत्खनन किस एजेंसी द्वारा किया गया?
उत्तर देखें
उत्तर: B – TNSDA
व्याख्या: तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) ने उत्खनन किया।
मध्यम स्तर प्रश्न 2. वेल्लालोर तमिलनाडु के किस जिले में स्थित है?
उत्तर देखें
उत्तर: C – कोयंबटूर
व्याख्या: वेल्लालोर कोयंबटूर जिले में नोय्यल नदी के दक्षिणी तट पर है।
मध्यम स्तर प्रश्न 3. नोय्यल नदी किस नदी बेसिन से संबद्ध है?
उत्तर देखें
उत्तर: C – कावेरी
व्याख्या: नोय्यल कावेरी बेसिन से संबद्ध एक सहायक नदी प्रणाली है।
मध्यम स्तर प्रश्न 4. किसी स्थल पर रोमन सिक्कों की उपस्थिति सामान्यतः किसका संकेत देती है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – दीर्घ-दूरी व्यापार
व्याख्या: रोमन सिक्के प्रायद्वीपीय भारत में दीर्घ-दूरी व्यापार के शास्त्रीय संकेतक हैं।
मध्यम स्तर प्रश्न 5. वेल्लालोर की प्राचीन बस्ती लगभग कितनी बड़ी है?
उत्तर देखें
उत्तर: C – 100 एकड़
व्याख्या: बस्ती लगभग 100 एकड़ में फैली है।
मध्यम स्तर प्रश्न 6. वेल्लालोर में कितने पुरावशेष खोजे गए?
उत्तर देखें
उत्तर: C – 1,000 से अधिक
व्याख्या: TNSDA ने स्थल पर 1,000 से अधिक पुरावशेष खोजे।
मध्यम स्तर प्रश्न 7. वेल्लालोर के सबसे पुराने पुरावशेष लगभग कितने पुराने हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: C – 2,100 वर्ष
व्याख्या: कुछ वस्तुएँ ईसा पूर्व पहली से तीसरी शताब्दी ईस्वी की हैं, लगभग 2,100 वर्ष पुरानी।
UPSC/RPSC प्रश्न 8. वेल्लालोर की खोजों के बारे में विचार कीजिए: 1. इनमें लोहा एवं इस्पात निर्माण के प्रमाण हैं। 2. ये ब्रिटिश काल तक कई शताब्दियों तक फैली हैं। 3. ये सुझाती हैं कि वेल्लालोर एक प्राचीन व्यापार केंद्र था। कौन-से सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: D – 1, 2 और 3
व्याख्या: तीनों समर्थित हैं — शिल्प प्रमाण, बहु-शताब्दी कालक्रम एवं व्यापार-केंद्र पहचान।
UPSC/RPSC प्रश्न 9. तमिलनाडु में रोमन सिक्कों की खोज ऐतिहासिक रूप से किस साहित्य/काल से सर्वाधिक जुड़ी है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – संगम-कालीन साहित्य
व्याख्या: तमिल क्षेत्र में इंडो-रोमन व्यापार संगम-कालीन साहित्य एवं तटीय पुरातत्व में अच्छी तरह प्रलेखित है।
UPSC/RPSC प्रश्न 10. 100 एकड़ में मनका-निर्माण, बुनाई एवं मृद्भांड दर्शाने वाली बस्ती सबसे प्रबल रूप से किसका संकेत देती है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – एक विशिष्ट, सुव्यवस्थित शिल्प-व-व्यापार अर्थव्यवस्था
व्याख्या: बड़े क्षेत्र में विविध शिल्प गतिविधि एक विशिष्ट, सुव्यवस्थित शिल्प-व-व्यापार अर्थव्यवस्था का संकेत देती है।
UPSC / RPSC प्रासंगिकता
➜ प्रारंभिक परीक्षा: नोय्यल नदी, कावेरी बेसिन, रोमन सिक्के, TNSDA, वेल्लालोर।
➜ मुख्य परीक्षा GS-I: प्राचीन भारतीय इतिहास, कला-संस्कृति, इंडो-रोमन व्यापार।
➜ पुरातत्व: उत्खनन विधियाँ, बसावट स्तर एवं भौतिक संस्कृति।
➜ अर्थव्यवस्था एवं धरोहर: प्राचीन शिल्प अर्थव्यवस्थाएँ एवं धरोहर पर्यटन।
UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
वेल्लालोर जैसे तमिलनाडु में हालिया पुरातात्विक उत्खनन प्राचीन दक्षिण भारतीय व्यापार एवं शिल्प अर्थव्यवस्थाओं की हमारी समझ को नया रूप दे रहे हैं। भारत के आरंभिक ऐतिहासिक अतीत के पुनर्निर्माण हेतु ऐसी खोजों के महत्व की चर्चा कीजिए एवं पुरातात्विक धरोहर के संरक्षण व दस्तावेजीकरण की चुनौतियों को रेखांकित कीजिए।
(250 शब्द, 15 अंक)
📚 Cosmo Classes की अन्य महत्वपूर्ण कैटेगरी
और अधिक अध्ययन सामग्री एवं करेंट अफेयर्स श्रेणियाँ देखें: