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NATO: स्थापना, सदस्य देश, अनुच्छेद 5 और मुख्यालय
UPSC Prelims एवं Mains | GS-II: अंतरराष्ट्रीय संबंध | तथ्य, अवधारणाएँ और आलोचनात्मक विश्लेषण
| पूरा नाम | North Atlantic Treaty Organization |
| स्थापना | 4 अप्रैल 1949 |
| संस्थापक संधि | उत्तर अटलांटिक संधि—वॉशिंगटन |
| राजनीतिक मुख्यालय | ब्रुसेल्स, बेल्जियम |
| सदस्य | 32 देश |
| भारत | सदस्य नहीं |
1. NATO क्या है?
NATO (North Atlantic Treaty Organization) यूरोप और उत्तरी अमेरिका के देशों का राजनीतिक तथा सैन्य गठबंधन है। इसका केंद्रीय आधार सदस्य देशों की सामूहिक रक्षा है।
1.1 प्रमुख विशेषताएँ
- राजनीतिक सहयोग: सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच संवाद और परामर्श।
- सैन्य सहयोग: रक्षा तैयारियों, संयुक्त अभ्यास और सामूहिक रक्षा में सहयोग।
- भौगोलिक आधार: यूरो-अटलांटिक क्षेत्र; अमेरिका और कनाडा इसके उत्तरी अमेरिकी सदस्य हैं।
1.2 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- इसकी स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, शीत युद्ध के शुरुआती दौर में हुई।
- यूरोप की सुरक्षा, सोवियत संघ के साथ तनाव तथा अमेरिका-कनाडा की भूमिका इसके ऐतिहासिक संदर्भ के प्रमुख पहलू हैं।
2. स्थापना और संस्थापक सदस्य
2.1 स्थापना से जुड़े मुख्य तथ्य
- स्थापना: 4 अप्रैल 1949।
- संधि: उत्तर अटलांटिक संधि, जिसे वॉशिंगटन संधि भी कहा जाता है।
- हस्ताक्षर का स्थान: वॉशिंगटन डी.सी., अमेरिका।
- राजनीतिक मुख्यालय: ब्रुसेल्स, बेल्जियम।
- फ्रेंच संक्षिप्त नाम: OTAN।
2.2 मूल 12 सदस्य
बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका।
परीक्षा में ध्यान दें: स्थापना संधि पर हस्ताक्षर वॉशिंगटन में हुए; वर्तमान राजनीतिक मुख्यालय ब्रुसेल्स में है।
3. सदस्यता और हाल का विस्तार
3.1 सदस्य संख्या और नवीनतम सदस्य
- कुल सदस्य: NATO की आधिकारिक सूची के अनुसार 32 देश।
- 31वाँ सदस्य: फिनलैंड — 4 अप्रैल 2023।
- 32वाँ सदस्य: स्वीडन — 7 मार्च 2024।
3.2 विस्तार की संक्षिप्त समयरेखा
- 1952: ग्रीस और तुर्किये; 1955: पश्चिम जर्मनी; 1982: स्पेन।
- 1999: चेकिया, हंगरी और पोलैंड।
- 2004: बुल्गारिया, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, रोमानिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया।
- 2009: अल्बानिया और क्रोएशिया; 2017: मोंटेनेग्रो; 2020: उत्तरी मैसेडोनिया।
- 2023–2024: क्रमशः फिनलैंड और स्वीडन।
3.3 सदस्यता के बारे में ज़रूरी बातें
- भारत NATO का सदस्य नहीं है।
- सभी यूरोपीय देश NATO के सदस्य नहीं हैं।
- NATO और यूरोपीय संघ की सदस्य सूचियाँ अलग हैं।
- अनुच्छेद 10 के अंतर्गत पात्र यूरोपीय देश को आमंत्रित करने के लिए सभी सदस्यों की सहमति आवश्यक है।
सदस्यता संदर्भ: NATO की आधिकारिक सदस्य सूची।
4. अनुच्छेद 5: सामूहिक रक्षा
4.1 सामूहिक रक्षा का अर्थ
- मुख्य सिद्धांत: संधि के दायरे में एक या अधिक सदस्यों पर सशस्त्र हमला सभी पर हमला माना जाता है।
- सहायता की प्रतिबद्धता: प्रत्येक सदस्य प्रभावित सहयोगी की सहायता के लिए वह कार्रवाई करता है जिसे वह आवश्यक समझता है।
- सैन्य बल: सहायता में सशस्त्र बल का प्रयोग शामिल हो सकता है।
4.2 क्या सभी देश अपने-आप युद्ध में उतरते हैं?
नहीं। अनुच्छेद 5 हर सदस्य की एक जैसी सैन्य कार्रवाई स्वतः अनिवार्य नहीं करता। सहायता का स्वरूप संबंधित सदस्य के निर्णय और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।
4.3 पहली बार कब लागू हुआ?
- 2001 में अमेरिका पर 11 सितंबर के आतंकवादी हमलों के बाद।
- परीक्षा के लिए संबंध याद रखें: अनुच्छेद 5 = सामूहिक रक्षा।
5. अनुच्छेद 4 और निर्णय प्रक्रिया
5.1 अनुच्छेद 4: सुरक्षा पर परामर्श
- जब किसी सदस्य को अपनी क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता या सुरक्षा पर खतरा महसूस हो, तो सदस्यों के बीच परामर्श का प्रावधान है।
- अनुच्छेद 4 के तहत परामर्श शुरू होने का अर्थ अनुच्छेद 5 लागू होना नहीं है।
5.2 निर्णय कौन लेता है?
- North Atlantic Council (NAC): NATO का प्रमुख राजनीतिक निर्णय निकाय।
- निर्णय का आधार: सदस्य देशों की सहमति (Consensus)।
- सदस्यों की स्थिति: देश संप्रभु बने रहते हैं और अपनी घरेलू संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
याद रखने का सूत्र: अनुच्छेद 4 → परामर्श; अनुच्छेद 5 → सामूहिक रक्षा; अनुच्छेद 10 → नए सदस्यों का प्रवेश।
6. NATO, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ
6.1 तीनों संगठनों के उद्देश्य
- NATO: संधि आधारित राजनीतिक-सैन्य गठबंधन; सदस्य देशों की सामूहिक रक्षा पर केंद्रित।
- संयुक्त राष्ट्र (UN): वैश्विक संगठन; शांति, सुरक्षा, विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का व्यापक कार्यक्षेत्र।
- यूरोपीय संघ (EU): यूरोपीय देशों के आर्थिक और राजनीतिक एकीकरण की संस्था।
6.2 सामान्य गलतफहमियाँ
- NATO संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसी नहीं है।
- NATO और EU अलग संगठन हैं; उनकी संधियाँ, संस्थाएँ और दायित्व भी अलग हैं।
- किसी देश की एक संगठन में सदस्यता का अर्थ दूसरे में स्वतः सदस्यता नहीं है।
7. भारत और परीक्षा की दृष्टि
7.1 NATO के संदर्भ में भारत की स्थिति
- भारत NATO का सदस्य नहीं है।
- अमेरिका, फ्रांस या अन्य NATO सदस्य के साथ भारत का रक्षा या तकनीकी सहयोग द्विपक्षीय संबंध है।
- ऐसे संबंधों से भारत को NATO की सदस्यता या अनुच्छेद 5 की सुरक्षा स्वतः नहीं मिलती।
7.2 उत्तर लिखते समय किन विषयों को जोड़ें?
- ऐतिहासिक संदर्भ: शीत युद्ध और यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था।
- मुख्य अवधारणा: सामूहिक रक्षा तथा सुरक्षा पर परामर्श।
- विश्लेषण: संगठन के घोषित उद्देश्यों और उसके अभियानों पर होने वाली राजनीतिक बहसों को अलग-अलग समझें।
8. त्वरित पुनरावृत्ति
8.1 एक नज़र में याद करें
- स्थापना: 4 अप्रैल 1949 | मूल सदस्य: 12।
- मुख्यालय: ब्रुसेल्स, बेल्जियम | सदस्य: 32।
- फिनलैंड: 31वाँ सदस्य, 2023 | स्वीडन: 32वाँ सदस्य, 2024।
- अनुच्छेद 4: परामर्श | अनुच्छेद 5: सामूहिक रक्षा।
- प्रमुख राजनीतिक निकाय: NAC | निर्णय: सहमति से।
- भारत: सदस्य नहीं।
8.2 स्वयं जाँचें
- संधि पर हस्ताक्षर कहाँ हुए? — वॉशिंगटन डी.सी.।
- अनुच्छेद 5 का पहला प्रयोग किस घटना के बाद हुआ? — 2001 के 11 सितंबर हमलों के बाद।
- क्या NATO और EU एक ही संगठन हैं? — नहीं।
- क्या अनुच्छेद 4 लागू होने पर युद्ध अनिवार्य है? — नहीं; यह परामर्श का प्रावधान है।
9. UPSC के लिए अवधारणात्मक आधार
पाठ्यक्रम से संबंध: GS-II में अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, क्षेत्रीय समूह और भारत के हित; GS-III में साइबर सुरक्षा तथा सुरक्षा चुनौतियाँ; Prelims में संधियाँ, सदस्यता और मानचित्र।
9.1 सामूहिक रक्षा बनाम सामूहिक सुरक्षा
- सामूहिक रक्षा (Collective Defence): निर्धारित सहयोगियों की पारस्परिक रक्षा की व्यवस्था। NATO का अनुच्छेद 5 इसका उदाहरण है।
- सामूहिक सुरक्षा (Collective Security): अंतरराष्ट्रीय शांति को खतरे के विरुद्ध व्यापक व्यवस्था; संयुक्त राष्ट्र प्रणाली इसका प्रमुख उदाहरण है।
- मुख्य अंतर: पहली व्यवस्था का केंद्र गठबंधन के सदस्य हैं; दूसरी का उद्देश्य व्यापक अंतरराष्ट्रीय शांति है। दोनों शब्दों को समानार्थी न लिखें।
9.2 प्रतिरोध और सुरक्षा-दुविधा
- प्रतिरोध (Deterrence): संभावित हमलावर को यह विश्वास दिलाना कि आक्रमण की लागत उसके लाभ से अधिक होगी। इसकी विश्वसनीयता क्षमता और राजनीतिक संकल्प, दोनों पर निर्भर करती है।
- सुरक्षा-दुविधा (Security Dilemma): एक पक्ष का रक्षात्मक कदम दूसरे को खतरा लग सकता है; जवाबी सैन्य तैयारी से दोनों की असुरक्षा बढ़ सकती है।
- विश्लेषण की सीमा: यह अवधारणा तनाव समझाने का उपकरण है; इससे किसी आक्रमण का औचित्य सिद्ध नहीं होता और छोटे देशों की स्वतंत्र पसंद का महत्त्व समाप्त नहीं होता।
10. शीत युद्ध से वर्तमान भूमिका तक
10.1 परिवर्तन के प्रमुख चरण
- शीत युद्ध: सोवियत शक्ति के संदर्भ में पश्चिमी सहयोगियों की सामूहिक रक्षा और अटलांटिक पार सुरक्षा संबंध संगठन के केंद्र में रहे।
- 1991 के बाद: सोवियत संघ के विघटन के बावजूद NATO समाप्त नहीं हुआ; विस्तार, साझेदारी और संकट-प्रबंधन की भूमिका बढ़ी।
- बाल्कन: बोस्निया और कोसोवो ने यूरोपीय संकटों में सैन्य भूमिका, नागरिक संरक्षण और राजनीतिक समाधान के संबंध पर प्रश्न उठाए।
- अफगानिस्तान: आतंकवाद और दूरस्थ अभियानों ने सैन्य उपलब्धि तथा स्थायी राजनीतिक स्थिरता के बीच अंतर दिखाया।
- 2014 और 2022 के बाद: क्रीमिया और यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में यूरोपीय क्षेत्रीय रक्षा फिर प्राथमिकता बनी।
Mains निष्कर्ष: NATO की निरंतरता केवल पुराने विरोधी से नहीं, बल्कि संस्थागत अनुकूलन, साझा सैन्य क्षमताओं और बदलती खतरे की धारणा से भी समझी जा सकती है।
ऐतिहासिक संदर्भ: NATO का संक्षिप्त इतिहास।
10.2 सैन्य अभियानों से सीख
- सैन्य सफलता ≠ स्थायी शांति: स्थानीय वैधता, प्रशासन और समावेशी राजनीतिक समझौता भी आवश्यक हैं।
- उद्देश्य और साधन: सीमित सैन्य लक्ष्य और व्यापक राज्य-निर्माण के लक्ष्य अलग संसाधन तथा समय माँगते हैं।
- जवाबदेही: अभियान का आकलन नागरिक प्रभाव, परिणाम और वैधता के आधार पर भी करना चाहिए।
11. संधि और संगठन: उन्नत Prelims नोट्स
11.1 अनुच्छेदों का विस्तृत संबंध
- अनुच्छेद 1: विवादों का शांतिपूर्ण समाधान।
- अनुच्छेद 3: व्यक्तिगत तथा सामूहिक रक्षा क्षमता विकसित करना।
- अनुच्छेद 6: अनुच्छेद 5 के लिए भौगोलिक दायरा निर्धारित करता है; दुनिया में किसी भी स्थान की हर घटना पर स्वतः समान दायित्व नहीं मानें।
- अनुच्छेद 7: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी और UN Charter के दायित्व बने रहते हैं।
- अनुच्छेद 9: परिषद की स्थापना; अनुच्छेद 10: सर्वसम्मति से पात्र यूरोपीय देश को प्रवेश का निमंत्रण।
- संधि पर हस्ताक्षर: 4 अप्रैल 1949; प्रभावी होने की तारीख: 24 अगस्त 1949।
अनुच्छेद 5, UN Charter के अनुच्छेद 51 में मान्य व्यक्तिगत/सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार का उल्लेख करता है।
स्रोत: उत्तर अटलांटिक संधि।
11.2 राजनीतिक और सैन्य संस्थाएँ
- NAC: सर्वोच्च राजनीतिक निर्णय मंच; निर्णय सहमति पर आधारित।
- Military Committee: राजनीतिक नेतृत्व को सैन्य सलाह देने वाला वरिष्ठ सैन्य निकाय।
- Allied Command Operations (ACO): सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी; इसका मुख्यालय SHAPE, मॉन्स के निकट बेल्जियम में है।
- Allied Command Transformation (ACT): सैन्य क्षमताओं के परिवर्तन और अनुकूलन पर केंद्रित; नॉरफॉक, अमेरिका में स्थित।
Prelims trap: ब्रुसेल्स का राजनीतिक मुख्यालय और SHAPE का सैन्य मुख्यालय अलग हैं। स्रोत: SHAPE।
12. रणनीतिक अवधारणा और समसामयिक घटनाक्रम
12.1 Strategic Concept 2022
मैड्रिड में अपनाए गए 2022 दस्तावेज़ में तीन प्रमुख कार्य हैं:
- Deterrence and Defence: आक्रमण रोकना और रक्षा करना।
- Crisis Prevention and Management: संकट की रोकथाम तथा प्रबंधन।
- Cooperative Security: साझेदारियों से सुरक्षा सहयोग।
- रूस: NATO ने इसे सहयोगियों की सुरक्षा के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण और प्रत्यक्ष खतरे के रूप में वर्णित किया।
- चीन: उसकी नीतियों और महत्त्वाकांक्षाओं से जुड़े प्रणालीगत सुरक्षा प्रभावों को स्थान दिया गया।
- उत्तर लेखन में सावधानी: इन्हें NATO की आधिकारिक आकलन-भाषा के रूप में प्रस्तुत करें; रूस और चीन के लिए दस्तावेज़ की भाषा को एक जैसा न मानें।
स्रोत: NATO Strategic Concepts।
12.2 Hague Summit 2025: रक्षा निवेश
- 2035 तक लक्ष्य: रक्षा तथा संबंधित सुरक्षा निवेश पर सालाना GDP का 5%।
- कम-से-कम 3.5%: मुख्य रक्षा आवश्यकताओं पर।
- 1.5% तक: संबंधित अवसंरचना, नेटवर्क सुरक्षा, नागरिक तैयारी तथा अन्य व्यापक सुरक्षा निवेश पर।
- 2029: व्यय की दिशा और संतुलन की समीक्षा निर्धारित।
महत्त्वपूर्ण अंतर: 5% एक भविष्य की प्रतिबद्धता है, सभी देशों द्वारा पहले से हासिल व्यय नहीं। यह पूरा पैसा NATO के साझा बजट में जमा करने का नियम भी नहीं है।
स्रोत: NATO रक्षा निवेश विवरण।
12.3 विश्लेषण का प्रश्न
अधिक व्यय से क्षमता तभी बढ़ेगी जब उत्पादन, खरीद, प्रशिक्षण और संयुक्त संचालन सुधरें। GDP का अनुपात एक संकेतक है; वास्तविक सैन्य तैयारी का पूर्ण माप नहीं।
13. NATO का महत्त्व, चुनौतियाँ और आलोचनात्मक मूल्यांकन
यह खंड Mains के लिए विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
13.1 महत्त्व
- सुरक्षा आश्वासन: छोटे सदस्य देशों के लिए सामूहिक क्षमता का भरोसा।
- संयुक्त संचालन: साझा प्रशिक्षण, मानक और योजना विभिन्न सेनाओं को साथ काम करने में मदद करते हैं।
- अटलांटिक पार संपर्क: अमेरिका-कनाडा और यूरोप के बीच नियमित सुरक्षा परामर्श।
- अनुकूलन: पारंपरिक रक्षा के साथ साइबर, अवसंरचना और आपूर्ति-संबंधी जोखिमों पर ध्यान देने की क्षमता।
13.2 चुनौतियाँ और प्रतितर्क
- विस्तार बनाम स्थिरता: समर्थक इसे संप्रभु देशों की पसंद मानते हैं; आलोचनात्मक विश्लेषण में प्रतिद्वंद्वी की खतरे की धारणा और जवाबी सैन्यीकरण भी देखें।
- बोझ-साझेदारी: खर्च, क्षमता और जोखिम का असमान वितरण राजनीतिक तनाव पैदा कर सकता है।
- सहमति की कठिनाई: अलग राष्ट्रीय हित संयुक्त प्रतिक्रिया की गति और सीमा को प्रभावित कर सकते हैं।
- अमेरिका पर निर्भरता: यूरोपीय क्षमता बढ़ाने और अटलांटिक सहयोग बनाए रखने के बीच संतुलन की आवश्यकता।
- संसाधन की अवसर-लागत: रक्षा व्यय बढ़ने पर सामाजिक निवेश और वित्तीय स्थिरता पर भी विचार आवश्यक है।
- संकट के फैलने का जोखिम: प्रतिरोध मजबूत करते समय अनपेक्षित टकराव, गलत आकलन और escalation को नियंत्रित करना जरूरी है।
13.3 आगे की राह
- रक्षा और कूटनीति साथ: प्रभावी क्षमता के साथ संवाद तथा संकट-संचार बनाए रखना।
- परिणाम आधारित निवेश: केवल खर्च की मात्रा के बजाय तत्परता, उत्पादन और समन्वय पर जोर।
- वैधता और जवाबदेही: अंतरराष्ट्रीय कानून, नागरिक संरक्षण और स्पष्ट अभियान उद्देश्यों को महत्त्व।
14. भारत के हित और रणनीतिक विकल्प
14.1 रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ
रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार स्वतंत्र निर्णय लेना है। इसे सभी देशों से समान दूरी या हर मुद्दे पर तटस्थता मानना गलत होगा। भारत की विदेश नीति में निर्णय की स्वतंत्रता का महत्त्व विदेश मंत्रालय के विवरण में भी स्पष्ट है।
14.2 भारत पर संभावित प्रभाव: विश्लेषण
- रक्षा विविधीकरण: NATO सदस्य देशों से तकनीक और रक्षा सहयोग अवसर दे सकते हैं; सहयोग को औपचारिक गठबंधन सदस्यता से अलग रखें।
- रूस और पश्चिम के साथ संबंध: यूरोपीय तनाव भारत की रक्षा आपूर्ति, ऊर्जा और कूटनीतिक प्राथमिकताओं में जटिल संतुलन पैदा कर सकता है।
- आर्थिक प्रभाव: लंबे संघर्ष ऊर्जा कीमतों, व्यापार मार्गों और आपूर्ति शृंखलाओं पर असर डाल सकते हैं।
- हिंद-प्रशांत: यूरोपीय तथा एशियाई सुरक्षा में बढ़ते संबंध भारत के लिए सहयोग के अवसर और प्रतिस्पर्धी अपेक्षाएँ, दोनों पैदा कर सकते हैं।
14.3 क्या Quad को “एशियाई NATO” कह सकते हैं?
- NATO: संधि आधारित गठबंधन और अनुच्छेद 5 की सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता।
- Quad: भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग मंच; NATO जैसी सामूहिक रक्षा संधि नहीं।
- निष्कर्ष: कुछ साझा हित होने से संस्थागत स्वरूप और दायित्व समान नहीं हो जाते।
संदर्भ: Quad के स्वरूप पर अमेरिकी विदेश विभाग का आधिकारिक विवरण।
14.4 भारत के लिए उत्तर का संतुलित निष्कर्ष
भारत के लिए उपयुक्त दृष्टिकोण है—मुद्दा आधारित सहयोग, रक्षा आपूर्ति का विविधीकरण, स्वदेशी क्षमता और स्वतंत्र निर्णय। यूरोपीय सुरक्षा को भारत के हितों से जोड़ें, लेकिन भारत को NATO सदस्य या अनुच्छेद 5 का लाभार्थी न लिखें।
15. UPSC Prelims अभ्यास: कथन आधारित प्रश्न
ये मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं; UPSC के वास्तविक पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं हैं।
प्रश्न 1: सामूहिक रक्षा
1. अनुच्छेद 4 परामर्श से संबंधित है।
2. अनुच्छेद 5 सभी सदस्यों की एक जैसी सैन्य कार्रवाई अनिवार्य करता है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। प्रत्येक सदस्य आवश्यक समझी गई कार्रवाई करता है; सहायता का स्वरूप समान होना अनिवार्य नहीं।
प्रश्न 2: संस्थागत स्वरूप
1. NATO संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसी है।
2. Quad में NATO के अनुच्छेद 5 जैसी सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: D। NATO स्वतंत्र संधि आधारित गठबंधन है; Quad की प्रकृति अलग है।
प्रश्न 3: सदस्यता
1. फिनलैंड स्वीडन से पहले NATO में शामिल हुआ।
2. भारत NATO का सदस्य है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। फिनलैंड 2023 और स्वीडन 2024 में शामिल हुए; भारत सदस्य नहीं है।
प्रश्न 4: रक्षा निवेश
1. Hague 2025 की 5% प्रतिबद्धता में व्यापक सुरक्षा निवेश भी शामिल है।
2. लक्ष्य का अर्थ यह है कि सभी सदस्यों ने 2025 में 5% व्यय प्राप्त कर लिया।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: A। प्रतिबद्धता 2035 तक की है; लक्ष्य और उपलब्धि अलग हैं।
प्रश्न 5: मुख्यालय
1. NATO का राजनीतिक मुख्यालय ब्रुसेल्स में है।
2. SHAPE मॉन्स के निकट बेल्जियम में है।
विकल्प: (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) दोनों (D) कोई नहीं।
उत्तर: C। राजनीतिक मुख्यालय और सैन्य कमान का स्थान अलग-अलग याद रखें।
16. UPSC Mains अभ्यास और मॉडल उत्तर
16.1 उत्तर-लेखन अभ्यास
- 150 शब्द: सामूहिक रक्षा और सामूहिक सुरक्षा में अंतर स्पष्ट करते हुए NATO की प्रासंगिकता समझाइए।
- 250 शब्द: “NATO का विस्तार सुरक्षा का आश्वासन भी है और सुरक्षा-दुविधा का कारण भी बन सकता है।” आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- 250 शब्द: बदलती यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के अवसरों और चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
16.2 मॉडल उत्तर: NATO विस्तार और सुरक्षा-दुविधा
भूमिका: NATO का विस्तार शीत युद्ध के बाद यूरोपीय सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण बदलाव है। इसका मूल्यांकन सदस्य देशों के सुरक्षा अधिकार और व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता, दोनों के आधार पर होना चाहिए।
सुरक्षा के पक्ष में तर्क: छोटे देशों के लिए सामूहिक रक्षा की प्रतिबद्धता संभावित आक्रमण की लागत बढ़ाती है। साझा प्रशिक्षण और योजना रक्षा क्षमता मजबूत कर सकते हैं। सदस्यता चाहने वाले देशों की संप्रभु पसंद तथा उनकी ऐतिहासिक असुरक्षाओं की उपेक्षा नहीं की जा सकती।
सुरक्षा-दुविधा: प्रतिद्वंद्वी बढ़ती सैन्य उपस्थिति को अपने लिए खतरा समझ सकता है। इसके जवाब में सैन्य तैनाती और हथियारों की होड़ बढ़े तो प्रतिरोध मजबूत होने के साथ दुर्घटनावश टकराव का जोखिम भी बढ़ता है। हालांकि यह तर्क किसी राज्य के आक्रमण को वैध नहीं बनाता।
सीमाएँ: गठबंधन की विश्वसनीयता केवल सदस्य संख्या पर निर्भर नहीं करती। क्षमता, संसाधन, राजनीतिक एकता और संकट के समय निर्णय लेने की गति भी निर्णायक हैं। अलग-अलग देशों की खतरे की धारणाएँ एक जैसी नहीं होतीं।
आगे की राह: रक्षा तैयारी के साथ पारदर्शिता, संकट-संचार और व्यवहार्य हथियार-नियंत्रण प्रयास आवश्यक हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून तथा राज्यों की संप्रभुता को आधार बनाना चाहिए।
निष्कर्ष: टिकाऊ सुरक्षा का लक्ष्य केवल गठबंधन को बड़ा करना नहीं, बल्कि आक्रमण रोकना और युद्ध की संभावना घटाना होना चाहिए। विश्वसनीय रक्षा तथा सक्रिय कूटनीति का संतुलन इस उद्देश्य को आगे बढ़ा सकता है।
16.3 उत्तर की गुणवत्ता जाँचें
- क्या भूमिका में प्रश्न की केंद्रीय अवधारणा स्पष्ट है?
- क्या तथ्य, संगठन का आधिकारिक दृष्टिकोण और अपना विश्लेषण अलग हैं?
- क्या दोनों पक्षों के तर्क तथा एक प्रासंगिक उदाहरण दिए हैं?
- क्या निष्कर्ष व्यावहारिक और प्रश्न के अनुरूप है?
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