वर्तमान शहरी वर्गीकरण व्यवस्था
भारत में शहरी वर्गीकरण जनगणना एवं प्रशासनिक संरचना पर आधारित है, जिसमें दो प्रमुख श्रेणियां हैं — जनगणना नगर (Census Town) एवं वैधानिक नगर (Statutory Town)। जनगणना नगर वे क्षेत्र हैं जिनकी आबादी 5,000 से अधिक हो एवं जो जनसंख्या घनत्व तथा गैर-कृषि कार्यबल के मानक पूरे करते हों। वैधानिक नगर वे हैं जिन्हें राज्य सरकारें नगर निगम, नगर परिषद आदि के रूप में अधिसूचित करती हैं।
डिग्री ऑफ अर्बनाइजेशन फ्रेमवर्क
डिग्री ऑफ अर्बनाइजेशन (DEGURBA) एक सांख्यिकीय ढांचा है जिसे संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं बस्तियों को निर्मित क्षेत्र, जनसंख्या घनत्व एवं भौगोलिक निरंतरता के आधार पर वर्गीकृत करने हेतु उपयोग करती हैं। भारत में इसके संशोधित संस्करण से उन शहरी क्षेत्रों की पहचान की गई है जो प्रशासनिक सीमाओं से बाहर विकसित हो चुके हैं, जिससे वास्तविक शहरीकरण का सटीक आकलन संभव होता है।
कार्यात्मक शहरी बस्तियों की अवधारणा
कार्यात्मक शहरी बस्तियां वे क्षेत्र हैं जो निरंतर निर्मित संरचनाओं, आवागमन संबंधों, रोजगार केंद्रों एवं सेवा सुविधाओं के कारण शहरी रूप में कार्य करते हैं, भले ही प्रशासनिक रूप से शहर घोषित न हों। इनकी पहचान हेतु उपग्रह आधारित रात्रिकालीन प्रकाश (Night-Light) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कृत्रिम रोशनी के पैटर्न से शहरी विस्तार का आकलन होता है।
शहरी आबादी अनुमान में अंतर
राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (NIUA) ने केरल, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में सैकड़ों कार्यात्मक शहरी बस्तियां पहचानीं। DEGURBA आधारित अनुमान के अनुसार 2025 में भारत की लगभग 84% आबादी शहरी क्षेत्रों में थी, जबकि सरकार के आधिकारिक अनुमान में यह लगभग 36% है। यह बड़ा अंतर पारंपरिक एवं कार्यात्मक परिभाषाओं की भिन्नता दर्शाता है।
शहरों की टियर श्रेणीकरण: विस्तृत जानकारी
- वर्तमान टियर प्रणाली: टियर-1 से टियर-5 तक शहरों का वर्गीकरण विभिन्न नीतिगत उद्देश्यों हेतु; अब एक समान मानकीकृत ढांचा प्रस्तावित।
- लाभ: नया वर्गीकरण निवेश, अवसंरचना, सार्वजनिक सेवाओं एवं क्षेत्रीय नियोजन को अधिक प्रभावी बनाएगा।
- 74वां संविधान संशोधन (1992): शहरी स्थानीय निकायों (नगर पालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा दिया।
- संबंधित योजनाएं: स्मार्ट सिटी मिशन, AMRUT एवं PM आवास योजना (शहरी) शहरी नियोजन से जुड़ी हैं।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य (Important Things to Remember)
- नई श्रेणी "कार्यात्मक शहरी बस्तियां" प्रस्तावित (2026)।
- वर्तमान श्रेणियां: जनगणना नगर (5,000+ आबादी) एवं वैधानिक नगर।
- DEGURBA — UN का शहरी वर्गीकरण मॉडल; नाइट-लाइट तकनीक उपयोग।
- DEGURBA अनुमान: ~84% शहरी; आधिकारिक: ~36%।
- 74वां संविधान संशोधन (1992) ने शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया।
🎯 UPSC स्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्र.1: जनगणना नगर एवं वैधानिक नगर में क्या अंतर है?
उत्तर: जनगणना नगर वे क्षेत्र हैं जो 5,000+ आबादी, उच्च घनत्व एवं प्रमुख गैर-कृषि कार्यबल के सांख्यिकीय मानक पूरे करते हैं पर जिनमें शहरी स्थानीय निकाय नहीं होता। वैधानिक नगर वे हैं जिन्हें राज्य सरकार नगर निगम/परिषद के रूप में औपचारिक रूप से अधिसूचित करती है एवं जिनका निर्वाचित शहरी प्रशासन होता है।
प्र.2: शहरीकरण के सटीक मापन के लिए नाइट-लाइट उपग्रह तकनीक क्यों उपयोगी है?
उत्तर: नाइट-लाइट तकनीक रात्रिकालीन कृत्रिम रोशनी की तीव्रता एवं निरंतरता का विश्लेषण कर आर्थिक गतिविधि एवं निर्मित-क्षेत्र विस्तार का वस्तुनिष्ठ संकेत देती है। यह प्रशासनिक सीमाओं से स्वतंत्र होकर वास्तविक शहरी फैलाव को पकड़ती है, जिससे नीति-निर्माण एवं संसाधन-आवंटन अधिक सटीक होता है।
📝 वन डे एग्जाम हेतु 5 MCQs
- जनगणना नगर हेतु न्यूनतम आबादी कितनी है? (A) 1,000 (B) 5,000 (C) 10,000 (D) 20,000 — उत्तर: (B) 5,000
- DEGURBA ढांचा किसके द्वारा उपयोग होता है? (A) WTO (B) संयुक्त राष्ट्र (C) IMF (D) WHO — उत्तर: (B) संयुक्त राष्ट्र
- कार्यात्मक शहरी बस्तियों की पहचान किस तकनीक से हो रही है? (A) ड्रोन (B) नाइट-लाइट उपग्रह (C) GPS (D) रडार — उत्तर: (B) नाइट-लाइट उपग्रह
- DEGURBA अनुसार 2025 में भारत की कितनी आबादी शहरी थी? (A) 36% (B) 50% (C) 84% (D) 65% — उत्तर: (C) ~84%
- शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन ने दिया? (A) 73वां (B) 74वां (C) 42वां (D) 44वां — उत्तर: (B) 74वां