गुजरात ने समरस विद्यासेतु ड्रॉपआउट अभियान शुरू किया
गुजरात ने 22 जुलाई 2026 को अहमदाबाद से राज्यव्यापी समरस विद्यासेतु मेगा अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य कक्षा 1 से 12 तक के 80,000 से अधिक स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वापस कक्षाओं में लाना है। यह अभियान राज्य के ‘शून्य ड्रॉपआउट’ लक्ष्य से जुड़ा है, जिसे औपचारिक स्कूल प्रणाली छोड़ चुके बच्चों के पुनः नामांकन, ट्रैकिंग व ठहराव के माध्यम से प्राप्त किया जाना है।
समरस विद्यासेतु ढांचे में कई हस्तक्षेप शामिल हैं: ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान, उन्हें पुनः नामांकित करना, माता-पिता से संपर्क व परामर्श, घर-घर दौरे, मार्गदर्शन तथा ब्रिज कोर्स चलाना। ब्रिज कोर्स विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि लंबे अंतराल के बाद लौटने वाले बच्चों को नियमित कक्षाओं में आत्मविश्वास से पुनः शामिल होने से पहले अकादमिक सहायता की आवश्यकता होती है।
यह अभियान गुजरात के व्यापक स्कूल-नामांकन तंत्र पर आधारित है। राज्य ने 25 जून 2026 को वडनगर के बी.एन. हाई स्कूल से अपने वार्षिक शाला प्रवेशोत्सव का 24वां संस्करण शुरू किया। शाला प्रवेशोत्सव राज्य का प्रमुख नामांकन अभियान है जो शैक्षणिक चक्र की शुरुआत में बच्चों को औपचारिक शिक्षा प्रणाली में लाता है।
प्रौद्योगिकी इस प्रयास का केंद्र बन गई है। शिक्षा विभाग ने गांधीनगर के विद्या समीक्षा केंद्र में एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम तैनात किया, जिसने 2026 में स्कूल छोड़ने के जोखिम वाले 1,18,234 विद्यार्थियों को चिह्नित किया। इसके साथ ही, चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम — 54,000 से अधिक स्कूलों के एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को कवर करने वाला ऑनलाइन मंच — ने 90,212 बच्चों का पुनः नामांकन किया और इसे अब अर्ली वार्निंग सिस्टम के साथ एकीकृत किया जा रहा है।
हालिया आंकड़े प्रगति व चुनौती दोनों को रेखांकित करते हैं। बैक टू स्कूल मिशन के तहत गुजरात ने 10 से 12 जुलाई 2026 के बीच 29,451 विद्यार्थियों का पुनः नामांकन किया, जिनमें 14,875 लड़के व 14,576 लड़कियां शामिल थीं, बनासकांठा एक प्रमुख फोकस जिला रहा। फिर भी UDISE+ 2025-26 आंकड़ों ने राज्य को माध्यमिक शिक्षा के लिए शिक्षा मंत्रालय के रेड ज़ोन में रखा, जिसमें 9.5 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत के मुकाबले 15.7 प्रतिशत ड्रॉपआउट दर रही।
इस अभियान का महत्व नामांकन संख्या से परे है। ड्रॉपआउट व शुद्ध नामांकन दर किसी शिक्षा प्रणाली के स्वास्थ्य के मूल संकेतक हैं, जिनका सीधा संबंध बाल अधिकार, लैंगिक समता, भावी रोजगार-योग्यता व दीर्घकालिक मानव-पूंजी निर्माण से है। अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसे डेटा-संचालित हस्तक्षेप साक्ष्य-आधारित शासन की ओर बदलाव दर्शाते हैं, जहां पूर्वानुमानित विश्लेषण किसी बच्चे के पूरी तरह स्कूल छोड़ने से पहले सहायता को लक्षित करने में मदद करता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
Q1. समरस विद्यासेतु मेगा अभियान किस राज्य ने शुरू किया?
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Q2. अभियान का मुख्य लक्ष्य क्या है?
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Q3. विद्या समीक्षा केंद्र किस शहर में स्थित है?
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Q4. इस अभियान में ब्रिज कोर्स का उद्देश्य क्या है?
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Q5. गुजरात का कौन-सा वार्षिक नामांकन अभियान इसका पूरक है?
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Q6. AI-आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम ने 2026 में कितने जोखिम वाले विद्यार्थी चिह्नित किए?
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Q7. UDISE+ 2025-26 के अनुसार गुजरात की माध्यमिक ड्रॉपआउट दर कितनी थी?
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Q8. स्कूलों में AI-आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम का उपयोग किस शासन प्रवृत्ति को सबसे अच्छे से दर्शाता है?
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Q9. ड्रॉपआउट व शुद्ध नामांकन दर को मूल शिक्षा संकेतक क्यों माना जाता है?
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Q10. गुजरात को माध्यमिक शिक्षा हेतु ‘रेड ज़ोन’ में रखा जाना मुख्यतः किसका संकेत है?
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UPSC / RPSC प्रासंगिकता
UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
भारत में स्कूल ड्रॉपआउट घटाने हेतु डेटा-संचालित हस्तक्षेप बढ़ते उपयोग में हैं। गुजरात के समरस विद्यासेतु अभियान व इसके AI-आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम के संदर्भ में, परीक्षण कीजिए कि प्रौद्योगिकी व साक्ष्य-आधारित शासन स्कूली शिक्षा में ठहराव को कैसे सुदृढ़ कर सकते हैं, साथ ही शेष चुनौतियों का उल्लेख कीजिए।
(250 शब्द, 15 अंक)
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