आंध्र प्रदेश सरकार ने 26 जून 2026 को "उपचारित उपयोग किए गए जल के पुनः उपयोग की नीति, 2026" को मंजूरी दी। यह नीति राज्य के 123 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में लागू होगी एवं उपचारित अपशिष्ट जल के संग्रह, शोधन, आवंटन, मूल्य निर्धारण, निगरानी एवं पुनः उपयोग हेतु एक व्यापक ढांचा प्रदान करेगी। उद्देश्य स्वच्छ जल पर बढ़ते दबाव को कम कर शहरी जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

उपचारित अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग क्या है?

उपचारित अपशिष्ट जल वह सीवेज जल है जिसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में शुद्ध करने के बाद पीने योग्य उपयोग के बजाय अन्य कार्यों हेतु इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग औद्योगिक प्रक्रियाओं, निर्माण कार्यों, उद्यान सिंचाई, नगरपालिका सेवाओं, अग्निशमन, रेलवे यार्ड एवं बस डिपो जैसे गैर-पेय (Non-Potable) उद्देश्यों के लिए होता है। यह जल संरक्षण एवं सर्कुलर वाटर मैनेजमेंट को बढ़ावा देता है।

चरणबद्ध लक्ष्य एवं प्रमुख प्रावधान

नीति का क्रियान्वयन चरणबद्ध होगा — 2027 तक 20 ULBs, 2028 तक 40, 2029 तक 90 एवं 2030 तक सभी 123 ULBs में। 2030 तक शहरी जल की कुल मांग का कम से कम 20% उपचारित जल से पूरा करने का लक्ष्य है। उद्योगों के लिए 2028 तक 20% एवं 2030 तक 40% उपचारित जल का उपयोग अनिवार्य किया गया है।

उद्योगों एवं शहरी निकायों हेतु विशेष प्रावधान

यह नीति उन ताप विद्युत संयंत्रों पर भी लागू होगी जो किसी STP से 50 किमी के भीतर स्थित हैं। साथ ही 10 KLD से अधिक जल आवश्यकता वाले एवं ULB से 10 किमी के दायरे में स्थित उद्योगों को भी प्रावधानों का पालन करना होगा। उपचारित जल को एक व्यावसायिक वस्तु (Commodity) के रूप में मूल्य निर्धारित कर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ULBs को अतिरिक्त राजस्व एवं PPP आधारित अवसंरचना विकास संभव होगा। यह नीति स्वर्ण आंध्र विज़न 2047 के अनुरूप है।

📌 महत्वपूर्ण तथ्य (Important Things to Remember)

  • नीति मंजूरी: 26 जून 2026; लागू — 123 ULBs
  • क्रियान्वयन: 2027 → 20, 2028 → 40, 2029 → 90, 2030 → 123 ULBs
  • 2030 तक शहरी जल मांग का 20% उपचारित जल से।
  • उद्योग: 2028 तक 20%, 2030 तक 40% उपचारित जल अनिवार्य।
  • ताप विद्युत संयंत्र: STP से 50 किमी के भीतर पर लागू।
  • नीति स्वर्ण आंध्र विज़न 2047 के अनुरूप।

🎯 UPSC स्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1: उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग का जल सुरक्षा एवं सतत विकास में क्या महत्व है?

उत्तर: उपचारित जल का पुनः उपयोग स्वच्छ जल संसाधनों पर दबाव कम करता है, गैर-पेय आवश्यकताओं को पूरा करता है तथा सर्कुलर वाटर मैनेजमेंट को बढ़ावा देता है। यह शहरी जल सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन एवं SDG-6 (स्वच्छ जल एवं स्वच्छता) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देता है तथा जल के सतत उपयोग को सुनिश्चित करता है।

प्रश्न 2: शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) क्या हैं तथा जल प्रबंधन में इनकी भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: ULBs में नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर पंचायत शामिल हैं, जो 74वें संविधान संशोधन के अंतर्गत शहरी शासन की संस्थाएं हैं। जल आपूर्ति, सीवेज प्रबंधन एवं अपशिष्ट जल उपचार इनके प्रमुख कार्य हैं। उपचारित जल पुनः उपयोग नीति इन्हें राजस्व सृजन एवं सतत जल प्रबंधन का माध्यम प्रदान करती है।

📝 वन डे एग्जाम हेतु 5 MCQs

1. उपचारित अपशिष्ट जल पुनः उपयोग नीति 2026 किस राज्य ने मंजूर की?
(A) तेलंगाना (B) आंध्र प्रदेश (C) कर्नाटक (D) तमिलनाडु
उत्तर: (B) आंध्र प्रदेश

2. यह नीति कितने शहरी स्थानीय निकायों में लागू होगी?
(A) 100 (B) 110 (C) 123 (D) 150
उत्तर: (C) 123

3. 2030 तक उद्योगों के लिए कितना % उपचारित जल उपयोग अनिवार्य है?
(A) 20% (B) 30% (C) 40% (D) 50%
उत्तर: (C) 40%

4. STP का पूर्ण रूप क्या है?
(A) Standard Treatment Process (B) Sewage Treatment Plant (C) Surface Treatment Plant (D) Sludge Transfer Point
उत्तर: (B) Sewage Treatment Plant

5. यह नीति किस विज़न के अनुरूप है?
(A) विज़न 2030 (B) स्वर्ण आंध्र विज़न 2047 (C) अमृत 2.0 (D) जल जीवन मिशन
उत्तर: (B) स्वर्ण आंध्र विज़न 2047

📚 यह लेख शैक्षिक उद्देश्य से करेंट अफेयर्स की जानकारी प्रदान करता है। स्रोत संदर्भ: GKToday (26 जून 2026)।