परिचय: बांग्लादेश की महत्वाकांक्षी तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन परियोजना जून 2026 में एक बार फिर सुर्खियों में आ गई। 24 से 26 जून 2026 के बीच बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने इस परियोजना पर विस्तृत चर्चा की। यह परियोजना नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, भूमि पुनरुद्धार और आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़ी है तथा दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय कूटनीति का एक संवेदनशील विषय बन चुकी है।
तीस्ता नदी का भौगोलिक एवं रणनीतिक महत्व
तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश के बीच बहने वाली एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय (ट्रांसबाउंड्री) नदी है। इसका उद्गम हिमालय क्षेत्र में सिक्किम की त्सो ल्हामो झील के निकट होता है। यह नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल (जलपाईगुड़ी, कूचबिहार) से होकर बहती हुई बांग्लादेश में प्रवेश करती है और अंततः ब्रह्मपुत्र (जमुना) नदी में मिल जाती है। तीस्ता को ब्रह्मपुत्र की एक प्रमुख सहायक नदी माना जाता है। यह पूर्वी हिमालयी नदी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा उत्तरी पश्चिम बंगाल और उत्तरी बांग्लादेश की कृषि अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है।
जल बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कई वर्षों से चर्चा होती रही है। वर्ष 2011 में दोनों देशों के बीच जल बंटवारा समझौते का प्रारूप लगभग तैयार हो गया था, परंतु पश्चिम बंगाल की आपत्तियों के कारण यह समझौता आज तक अंतिम रूप नहीं ले सका। इसी कारण तीस्ता रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील नदी मानी जाती है।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
प्रस्तावित तीस्ता परियोजना का उद्देश्य नदी के अनियमित प्रवाह को नियंत्रित करना, बाढ़ एवं अपरदन से सुरक्षा प्रदान करना तथा भूमि का व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके प्रमुख घटक इस प्रकार हैं:
| कार्य | परिमाण |
|---|---|
| नदी तलछट की ड्रेजिंग | ~140 मिलियन घन मीटर |
| भूमि पुनरुद्धार | ~171 वर्ग किलोमीटर |
| पुराने तटबंधों की मरम्मत | 110 किलोमीटर |
| नए तटबंधों का निर्माण | 124 किलोमीटर |
| सड़क नेटवर्क | 224 किलोमीटर |
| जेट्टी सुविधाएं | 82 इकाई |
इन कार्यों का समग्र उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, नदी तट संरक्षण, परिवहन सुविधा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। नदी के दोनों किनारों पर विकसित होने वाली अवसंरचना से कृषि, मत्स्य पालन और औद्योगिक गतिविधियों को नया आधार मिलने की संभावना है।
चीन-बांग्लादेश सहयोग और भारत का दृष्टिकोण
चीन ने स्पष्ट किया है कि तीस्ता परियोजना में उसका सहयोग किसी तीसरे देश के विरुद्ध नहीं है और इसे बाहरी कारकों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। चीन ने जल संसाधन प्रबंधन में अपने अनुभव साझा करने तथा बांग्लादेश के जल विशेषज्ञों एवं अधिकारियों को चीन में प्रशिक्षण देने की पेशकश की है। 25 जून 2026 को दोनों देशों ने तीस्ता सहित अन्य नदियों के प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत के लिए यह घटनाक्रम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि तीस्ता बेसिन भारत के "सिलीगुड़ी कॉरिडोर" (चिकन नेक) के निकट स्थित है, जो पूर्वोत्तर भारत को शेष देश से जोड़ता है। इसी कारण भारत ने वर्ष 2024 में तीस्ता बेसिन के संरक्षण और तकनीकी सहयोग की पेशकश की थी, ताकि इस संवेदनशील क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और प्रभाव बनाए रखा जा सके।
परियोजना की पृष्ठभूमि
तीस्ता परियोजना का संबंध पहली बार वर्ष 2016 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) से जुड़ा था। बाद में जनवरी 2026 में प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान इस समझौते का विस्तार किया गया। जून 2026 की चर्चाओं ने इस परियोजना को क्रियान्वयन के एक नए चरण में पहुंचा दिया है।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य (Important Things to Remember)
- तीस्ता नदी एक ट्रांसबाउंड्री नदी है जो सिक्किम → पश्चिम बंगाल → बांग्लादेश से बहती है।
- उद्गम: सिक्किम की त्सो ल्हामो झील; यह ब्रह्मपुत्र (जमुना) की सहायक नदी है।
- पहला एमओयू: 2016, विस्तार: जनवरी 2026।
- परियोजना: 140 मिलियन घन मीटर ड्रेजिंग, 171 वर्ग किमी भूमि पुनरुद्धार।
- 2011 का तीस्ता जल बंटवारा समझौता पश्चिम बंगाल की आपत्ति के कारण लंबित है।
- परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के निकट होने से भारत के लिए रणनीतिक रूप से संवेदनशील है।
🎯 UPSC स्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1: तीस्ता नदी जल बंटवारे का मुद्दा भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक स्थायी चुनौती क्यों बना हुआ है? विश्लेषण कीजिए।
उत्तर: तीस्ता विवाद की जड़ संघीय ढांचे और जल की उपलब्धता में है। 2011 में प्रस्तावित समझौते को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने राज्य के किसानों के हितों का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया, जिससे केंद्र की विदेश नीति और राज्य के घरेलू हितों के बीच टकराव सामने आया (सहकारी संघवाद की चुनौती)। शुष्क मौसम में नदी का घटता प्रवाह दोनों देशों की कृषि आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाता। चीन का बढ़ता हस्तक्षेप इसे भू-राजनीतिक आयाम भी देता है, जिससे यह केवल जल प्रबंधन नहीं बल्कि क्षेत्रीय प्रभाव की प्रतिस्पर्धा का विषय बन गया है।
प्रश्न 2: पड़ोसी देशों में चीन की 'जल कूटनीति' (Water Diplomacy) भारत की सुरक्षा एवं विदेश नीति के लिए किस प्रकार चुनौती प्रस्तुत करती है?
उत्तर: चीन बुनियादी ढांचा वित्तपोषण और तकनीकी सहयोग के माध्यम से दक्षिण एशियाई देशों में प्रभाव बढ़ा रहा है। तीस्ता परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट होने से भारत के पूर्वोत्तर संपर्क मार्ग के लिए संवेदनशील है। इससे भारत को 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति को और सक्रिय बनाने, समय पर वित्तीय एवं तकनीकी सहायता देने तथा बांग्लादेश के साथ विश्वास आधारित संबंध मजबूत करने की आवश्यकता है।
📝 वन डे एग्जाम हेतु 5 MCQs
- तीस्ता नदी का उद्गम किस राज्य में होता है?
(a) पश्चिम बंगाल (b) असम (c) सिक्किम (d) अरुणाचल प्रदेश
उत्तर: (c) सिक्किम - तीस्ता नदी अंततः किस प्रमुख नदी में मिलती है?
(a) गंगा (b) ब्रह्मपुत्र (जमुना) (c) महानदी (d) पद्मा
उत्तर: (b) ब्रह्मपुत्र (जमुना) - तीस्ता परियोजना से संबंधित पहला एमओयू किस वर्ष हस्ताक्षरित हुआ?
(a) 2011 (b) 2016 (c) 2020 (d) 2024
उत्तर: (b) 2016 - तीस्ता परियोजना में हाल ही में किस देश ने बांग्लादेश के साथ सहयोग बढ़ाया?
(a) जापान (b) अमेरिका (c) चीन (d) रूस
उत्तर: (c) चीन - "ट्रांसबाउंड्री नदी" से तात्पर्य है—
(a) पर्वतीय नदी (b) मौसमी नदी (c) एक या अधिक देशों की सीमा पार करने वाली नदी (d) भूमिगत नदी
उत्तर: (c) एक या अधिक देशों की सीमा पार करने वाली नदी
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. तीस्ता नदी कहां से कहां तक बहती है?
तीस्ता सिक्किम से निकलकर पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है और ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है।
Q2. तीस्ता परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
बाढ़ नियंत्रण, नदी तट संरक्षण, भूमि पुनरुद्धार और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य है।
Q3. तीस्ता जल बंटवारा समझौता अब तक क्यों नहीं हुआ?
2011 में प्रस्तावित समझौता पश्चिम बंगाल की आपत्तियों के कारण अंतिम रूप नहीं ले सका।
Q4. इस परियोजना में चीन की भूमिका क्या है?
चीन तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और संभावित वित्तपोषण के माध्यम से बांग्लादेश की सहायता कर रहा है।
Q5. यह परियोजना भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
तीस्ता बेसिन रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट है, इसलिए यह भारत की सुरक्षा और कूटनीति की दृष्टि से संवेदनशील है।
स्रोत आधार: करेंट अफेयर्स 27 जून 2026। यह लेख प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PCS, SSC) की तैयारी हेतु शैक्षिक उद्देश्य से तैयार किया गया है।