विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने संशोधित तोशाखाना नियम, 2024 के अंतर्गत लगभग 300 आधिकारिक उपहारों को सार्वजनिक ई-नीलामी के लिए प्रस्तुत किया है। यह नीलामी 8 जून 2026 से 30 जून 2026 तक चली। इसका मुख्य उद्देश्य आधिकारिक उपहारों के निपटान को पारदर्शी बनाना तथा प्राप्त राशि को सरकारी राजस्व में जमा करना है।
तोशाखाना क्या है?
तोशाखाना (Toshakhana) एक आधिकारिक व्यवस्था है जिसके अंतर्गत सार्वजनिक पदाधिकारियों को विदेश यात्राओं, राजनयिक बैठकों एवं अन्य सरकारी अवसरों पर प्राप्त उपहारों का संग्रह, मूल्यांकन एवं निपटान किया जाता है। भारत में तोशाखाना अनुभाग विदेश मंत्रालय के स्थापना प्रभाग (Establishment Division) के अधीन कार्य करता है। 'तोशाखाना' शब्द फारसी मूल का है जिसका अर्थ है 'खजाना घर' या 'उपहारों का भंडार'। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी अधिकारियों को मिले महंगे उपहार व्यक्तिगत संपत्ति न बनकर राज्य की संपत्ति के रूप में दर्ज हों।
ई-नीलामी में शामिल प्रमुख वस्तुएं
इस नीलामी में अनेक मूल्यवान एवं ऐतिहासिक वस्तुएं शामिल रहीं, जिनमें प्रमुख हैं:
- रोलेक्स यॉट मास्टर II घड़ियां
- ओमान से प्राप्त चांदी की कटार
- सोने के आभूषण एवं प्राचीन चांदी के डिब्बे
- एप्पल मैकबुक प्रो
वस्तुओं की शुरुआती कीमत ₹2,385 से आरंभ हुई, जबकि कुछ दुर्लभ वस्तुओं का मूल्य ₹17 लाख से ₹19 लाख तक निर्धारित किया गया।
नीलामी प्रक्रिया एवं राजस्व
यह ई-नीलामी विदेश मंत्रालय के तोशाखाना ऑक्शन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित की गई। इच्छुक नागरिक निर्धारित अवधि में ऑनलाइन बोली लगाकर इन वस्तुओं की खरीद में भाग ले सकते थे। नीलामी से प्राप्त पूरी राशि भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा की जाएगी। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार यह केंद्र सरकार का प्रमुख कोष है, जिसमें सरकार की अधिकांश आय जमा होती है तथा जिससे संसद की स्वीकृति के बिना धन नहीं निकाला जा सकता।
वर्तमान एवं भविष्य की नीलामी
वर्तमान चरण में मुख्यतः विदेश सचिव एवं उससे नीचे के स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को विदेश यात्राओं तथा राजनयिक कार्यक्रमों में प्राप्त उपहार शामिल किए गए। विदेश मंत्रालय ने भविष्य में एक अलग नीलामी चरण की योजना बनाई है, जिसमें पूर्व विदेश मंत्रियों को प्राप्त आधिकारिक उपहार शामिल किए जाएंगे। यह पहल सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को मजबूत करती है।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य (Important Things to Remember)
- नीलामी का आधार: संशोधित तोशाखाना नियम, 2024।
- अवधि: 8 जून – 30 जून 2026; कुल लगभग 300 उपहार।
- तोशाखाना अनुभाग विदेश मंत्रालय के स्थापना प्रभाग के अधीन।
- प्राप्त राशि संचित निधि (अनुच्छेद 266) में जमा होगी।
- मूल्य सीमा: ₹2,385 से ₹19 लाख तक।
- उद्देश्य: पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सरकारी राजस्व में वृद्धि।
🎯 UPSC स्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1: तोशाखाना व्यवस्था क्या है तथा इसका प्रशासनिक महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: तोशाखाना वह सरकारी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत सार्वजनिक पदाधिकारियों को आधिकारिक अवसरों पर मिले उपहारों का संग्रह, मूल्यांकन एवं निपटान होता है। यह विदेश मंत्रालय के स्थापना प्रभाग के अधीन कार्य करती है। इसका महत्व यह है कि यह महंगे उपहारों को व्यक्तिगत लाभ बनने से रोककर उन्हें राज्य की संपत्ति के रूप में दर्ज करती है, जिससे शासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
प्रश्न 2: भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: अनुच्छेद 266(1) के अंतर्गत गठित संचित निधि भारत सरकार का प्रमुख कोष है, जिसमें सभी राजस्व, ऋण एवं प्राप्तियाँ जमा होती हैं। इससे धन निकालने के लिए संसद की विधिक स्वीकृति आवश्यक है। तोशाखाना नीलामी से प्राप्त राशि भी इसी निधि में जमा होती है।
📝 वन डे एग्जाम हेतु 5 MCQs
1. तोशाखाना अनुभाग किस मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
(A) गृह मंत्रालय (B) वित्त मंत्रालय (C) विदेश मंत्रालय (D) रक्षा मंत्रालय
उत्तर: (C) विदेश मंत्रालय
2. तोशाखाना नीलामी से प्राप्त राशि कहाँ जमा होती है?
(A) आकस्मिकता निधि (B) संचित निधि (C) लोक लेखा (D) PM राहत कोष
उत्तर: (B) संचित निधि
3. संचित निधि का उल्लेख किस अनुच्छेद में है?
(A) 110 (B) 112 (C) 266 (D) 280
उत्तर: (C) अनुच्छेद 266
4. यह नीलामी किस नियम के तहत आयोजित हुई?
(A) तोशाखाना नियम 2024 (B) उपहार नियम 1964 (C) सेवा नियम 2016 (D) संपत्ति नियम 2020
उत्तर: (A) संशोधित तोशाखाना नियम, 2024
5. तोशाखाना अनुभाग विदेश मंत्रालय के किस प्रभाग के अधीन है?
(A) पासपोर्ट प्रभाग (B) स्थापना प्रभाग (C) प्रोटोकॉल प्रभाग (D) कांसुलर प्रभाग
उत्तर: (B) स्थापना प्रभाग
📚 यह लेख शैक्षिक उद्देश्य से करेंट अफेयर्स की जानकारी प्रदान करता है। स्रोत संदर्भ: GKToday (26 जून 2026)।