ISRO ने गगनयान के लिए SOLVE का पहला ग्राउंड टेस्ट किया
विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 20 जुलाई 2026
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 3 जुलाई 2026 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा की स्टैटिक टेस्ट फैसिलिटी में अपने SOLVE (Sub-Orbital Launch Vehicle for Experiments) के ठोस मोटर का पहला ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक किया। यह परीक्षण गगनयान क्रू मॉड्यूल के अवरोहण (deceleration) एवं पैराशूट तंत्र के एकीकृत परीक्षण की दिशा में भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि है।
SOLVE एक कॉम्पैक्ट परीक्षण यान है जिसे क्रू मॉड्यूल को 10 से 17 किमी की ऊँचाई तक ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके बाद मॉड्यूल अलग होकर समुद्र में उतरने से पूर्व नियंत्रित अवरोहण के लिए 10 पैराशूट की श्रृंखला खोलता है। इससे ISRO पूर्ण कक्षीय मिशन के बिना ही पैराशूट-आधारित रिकवरी प्रणाली का किफायती परीक्षण कर सकता है।
तकनीकी दृष्टि से SOLVE का ठोस चरण ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) के स्ट्रैप-ऑन मोटर पर आधारित है। संशोधित विन्यास में धीमी बर्न-रेट प्रोपेलेंट तथा सेकेंडरी इंजेक्शन थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल वाला सीधा नोज़ल शामिल है, जो परीक्षण उड़ान को स्थिर एवं नियंत्रित बनाता है।
गगनयान भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका क्रू मॉड्यूल वायुमंडलीय पुनःप्रवेश एवं समुद्री रिकवरी के लिए पैराशूट-आधारित अवरोहण प्रणाली का उपयोग करता है। पहला मानवरहित गगनयान मिशन, जो पहले 2026 की पहली तिमाही हेतु निर्धारित था, अब वर्ष में बाद में अपेक्षित है।
रणनीतिक एवं आर्थिक दृष्टि से यह परीक्षण भारत को आत्मनिर्भर मानव अंतरिक्ष क्षमता की ओर ले जाता है, जिससे उपग्रह, रक्षा एवं वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र में रोज़गार तथा तकनीकी नेतृत्व बढ़ता है। स्वदेशी परीक्षण-यान विकास से मिशन लागत घटती है और भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर मज़बूत होती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
- ◆SOLVE का पूरा नाम Sub-Orbital Launch Vehicle for Experiments है।
- ◆पहला ग्राउंड टेस्ट 3 जुलाई 2026 को SDSC श्रीहरिकोटा में हुआ।
- ◆SOLVE का ठोस चरण PSLV के स्ट्रैप-ऑन मोटर पर आधारित है।
- ◆यह क्रू मॉड्यूल को 10–17 किमी ऊँचाई तक ले जाता है।
- ◆रिकवरी हेतु 10 पैराशूट की श्रृंखला प्रयोग होती है।
- ◆गगनयान भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम है।
- ◆परीक्षण ISRO द्वारा गगनयान पैराशूट तंत्र सत्यापन हेतु किया गया।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।
प्रश्न 1. ISRO द्वारा परीक्षित SOLVE का पूरा नाम क्या है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – Sub-Orbital Launch Vehicle for Experiments
व्याख्या: SOLVE एक सब-ऑर्बिटल परीक्षण यान है जो प्रयोगों हेतु प्रयुक्त होता है।
प्रश्न 2. SOLVE का पहला ग्राउंड टेस्ट कहाँ हुआ?
उत्तर देखें
उत्तर: B – SDSC श्रीहरिकोटा
व्याख्या: परीक्षण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र की स्टैटिक टेस्ट फैसिलिटी में हुआ।
प्रश्न 3. SOLVE का ठोस चरण किस यान के मोटर पर आधारित है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – PSLV स्ट्रैप-ऑन
व्याख्या: संशोधित PSLV स्ट्रैप-ऑन मोटर को SOLVE के ठोस चरण हेतु अनुकूलित किया गया।
प्रश्न 4. क्रू मॉड्यूल को SOLVE किस ऊँचाई तक ले जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – 10–17 किमी
व्याख्या: इस ऊँचाई पर मॉड्यूल अलग होकर पैराशूट अवरोहण परीक्षण करता है।
प्रश्न 5. रिकवरी हेतु कितने पैराशूट की श्रृंखला प्रयोग होती है?
उत्तर देखें
उत्तर: C – 10
व्याख्या: क्रू मॉड्यूल के नियंत्रित अवरोहण हेतु 10 पैराशूट की श्रृंखला खुलती है।
प्रश्न 6. गगनयान किस प्रकार का कार्यक्रम है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान
व्याख्या: गगनयान भारत का पहला मानवयुक्त (crewed) अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है।
प्रश्न 7. SOLVE परीक्षण मुख्यतः किसके सत्यापन हेतु है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – पैराशूट/अवरोहण तंत्र
व्याख्या: यह क्रू मॉड्यूल की पैराशूट-आधारित रिकवरी प्रणाली का परीक्षण करता है।
प्रश्न 8. SOLVE जैसे सब-ऑर्बिटल परीक्षण यान का प्रमुख लाभ क्या है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – पूर्ण कक्षीय मिशन के बिना किफायती प्रणाली-परीक्षण
व्याख्या: सब-ऑर्बिटल परीक्षण कम लागत में महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों की जाँच संभव बनाते हैं।
प्रश्न 9. SOLVE में प्रयुक्त थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल किससे संबंधित है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – यान की दिशा/स्थिरता नियंत्रण
व्याख्या: सेकेंडरी इंजेक्शन TVC नोज़ल के माध्यम से उड़ान की दिशा नियंत्रित करता है।
प्रश्न 10. गगनयान की सफलता भारत के लिए किस दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है?
उत्तर देखें
उत्तर: B – आत्मनिर्भर मानव अंतरिक्ष क्षमता एवं अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था
व्याख्या: यह भारत को स्वदेशी मानव-अंतरिक्ष तकनीक एवं वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व प्रदान करता है।
UPSC / RPSC प्रासंगिकता
- ➜Prelims: SOLVE, गगनयान, PSLV, SDSC श्रीहरिकोटा जैसे तथ्य।
- ➜Mains GS-III: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, स्वदेशीकरण एवं S&T विकास।
- ➜Economy/Security: अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, रक्षा एवं रणनीतिक क्षमता।
- ➜Geography/S&T: प्रक्षेपण केंद्र, कक्षा एवं पुनःप्रवेश तकनीक।
UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न
भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम "गगनयान" में SOLVE जैसे सब-ऑर्बिटल परीक्षण यानों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए तथा स्वदेशी अंतरिक्ष क्षमता के सामरिक एवं आर्थिक महत्व पर चर्चा कीजिए।
(250 शब्द, 15 अंक)
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