पिछड़ता शहर: मुंबई और मानसून — शहरी बाढ़ एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विश्लेषण

विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | जुलाई 2026

मुंबई में शहरीकरण की गति उसके आधारभूत ढाँचे के उन्नयन से कहीं तेज़ है, और यही असंतुलन हर मानसून में शहर को जलभराव के संकट में धकेल देता है। जुलाई 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून पश्चिमी भारत पर अत्यधिक सक्रिय रहा — नमी से लदी दक्षिण-पश्चिमी हवाओं ने पश्चिमी घाट और कोंकण तट पर तीव्र वर्षा की, जबकि अपतटीय मौसम प्रणालियों ने अतिरिक्त नमी मुंबई की ओर मोड़ दी।

शहरी बाढ़ में वर्षा की कुल मात्रा से अधिक उसकी तीव्रता निर्णायक होती है। मुंबई कुछ घंटों में हुई मध्यम वर्षा को तो सोख लेता है, परन्तु कुछ ही घंटों में हुई कई सौ मिलीमीटर वर्षा को उसकी जल-निकासी संभाल नहीं पाती। इस बार भारी वर्षा ने नासिक सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों में नदी-जलग्रहण क्षेत्रों को लबालब कर दिया, और जब यह वर्षा उच्च ज्वार से मेल खाई तो तूफानी जल-निकासी की दक्षता घट गई तथा जलभराव और गंभीर हो गया।

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे व मुंबई–गोवा राजमार्ग का बंद होना और मुंबई–अहमदाबाद एक्सप्रेसवे पर भारी जलभराव यह दर्शाता है कि रैखिक (लीनियर) इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ कितनी संवेदनशील हैं। प्राकृतिक आपदा का प्रभाव किस सहजता से एक के बाद एक जुड़ती हुई (कैस्केडिंग) विफलताओं में बदल जाता है, यह इन घटनाओं से स्पष्ट होता है।

मुंबई मूलतः पुनर्ग्रहीत भूमि, पूर्व दलदल, ज्वारीय समतल और निचले तटीय क्षेत्रों पर बसा प्रायद्वीप है — इसी कारण जब वर्षा उच्च ज्वार के साथ मेल खाती है तो बाढ़ का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। दशकों के अनियोजित शहरीकरण ने जल को ज़मीन में सोखने के बजाय बहने को प्रोत्साहित किया है, जिससे नालों पर उनकी अभिकल्पित (डिज़ाइन) क्षमता से अधिक भार पड़ता है।

2005 की विनाशकारी बाढ़ के बाद, जब 24 घंटे में लगभग 944 मिमी वर्षा हुई थी, मुंबई ने BRIMSTOWAD परियोजना आरम्भ की — नालों का चौड़ीकरण, पम्पिंग स्टेशन की स्थापना और मानसून-पूर्व गाद-सफ़ाई। किन्तु इनमें से कई कार्य आज भी अधूरे हैं, और कुछ पूर्ण सुधार मानसून की उन पुरानी धारणाओं पर आधारित हैं जिन्हें जलवायु परिवर्तन ने अप्रासंगिक बना दिया है।

व्यापक दृष्टि से मुंबई का संकट भारत के अधिकांश महानगरों की साझा चुनौती का प्रतीक है — जलवायु परिवर्तन से बढ़ती अतिवृष्टि, आर्द्रभूमि व प्राकृतिक जल-निकासी का अतिक्रमण, तथा जोखिम-सूचित शहरी नियोजन का अभाव। समाधान के लिए स्पंज-सिटी अवधारणा, आर्द्रभूमि संरक्षण, आधुनिक पूर्व-चेतावनी प्रणाली और जलवायु-अनुकूल अवसंरचना को नीति के केंद्र में लाना अनिवार्य है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)

  • ◆ शहरी बाढ़ में निर्णायक कारक: वर्षा की तीव्रता (मात्रा से अधिक)।
  • ◆ मुंबई की भौगोलिक कमज़ोरी: पुनर्ग्रहीत भूमि, दलदल व निचले तटीय क्षेत्र; उच्च ज्वार से जोखिम बढ़ता है।
  • ◆ 2005 मुंबई बाढ़: 24 घंटे में लगभग 944 मिमी वर्षा।
  • ◆ BRIMSTOWAD परियोजना: 2005 के बाद जल-निकासी सुधार हेतु आरम्भ, कई कार्य अधूरे।
  • ◆ कैस्केडिंग फेल्योर: एक्सप्रेसवे/राजमार्ग बंद होना रैखिक इंफ्रास्ट्रक्चर की संवेदनशीलता दर्शाता है।
  • ◆ मूल कारण: अनियोजित शहरीकरण व आर्द्रभूमि का अतिक्रमण।
  • ◆ समाधान की दिशा: स्पंज-सिटी, आर्द्रभूमि संरक्षण, पूर्व-चेतावनी प्रणाली, जलवायु-अनुकूल नियोजन।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।

प्रश्न 1मध्यम स्तर

शहरी बाढ़ में सर्वाधिक निर्णायक कारक क्या होता है?

(A) वर्षा की कुल मात्रा
(B) वर्षा की तीव्रता
(C) तापमान
(D) हवा की दिशा
उत्तर देखें

उत्तर: (B) वर्षा की तीव्रता

व्याख्या: शहरी क्षेत्रों में वर्षा की तीव्रता (कम समय में अधिक वर्षा) मात्रा से अधिक निर्णायक होती है।

प्रश्न 2मध्यम स्तर

मुंबई में बाढ़ का जोखिम किस स्थिति में कई गुना बढ़ जाता है?

(A) जब वर्षा उच्च ज्वार से मेल खाती है
(B) शीत ऋतु में
(C) सूखे में
(D) कम आर्द्रता पर
उत्तर देखें

उत्तर: (A) जब वर्षा उच्च ज्वार से मेल खाती है

व्याख्या: निचले तटीय शहर में वर्षा व उच्च ज्वार का मेल जल-निकासी को ठप कर देता है।

प्रश्न 3मध्यम स्तर

2005 की मुंबई बाढ़ में लगभग कितनी वर्षा 24 घंटे में हुई थी?

(A) 500 मिमी
(B) 700 मिमी
(C) 944 मिमी
(D) 1200 मिमी
उत्तर देखें

उत्तर: (C) 944 मिमी

व्याख्या: 2005 में मुंबई में 24 घंटे में लगभग 944 मिमी वर्षा दर्ज हुई थी।

प्रश्न 4मध्यम स्तर

2005 की बाढ़ के बाद मुंबई में कौन-सी जल-निकासी परियोजना आरम्भ हुई?

(A) नमामि गंगे
(B) BRIMSTOWAD
(C) अमृत
(D) स्मार्ट सिटी मिशन
उत्तर देखें

उत्तर: (B) BRIMSTOWAD

व्याख्या: BRIMSTOWAD परियोजना नालों के चौड़ीकरण व पम्पिंग स्टेशन हेतु आरम्भ की गई थी।

प्रश्न 5मध्यम स्तर

मुंबई की भौगोलिक भेद्यता का मुख्य कारण क्या है?

(A) यह पठार पर स्थित है
(B) यह पुनर्ग्रहीत भूमि व निचले तटीय क्षेत्रों पर बसा है
(C) यह मरुस्थल में है
(D) यह पर्वत शिखर पर है
उत्तर देखें

उत्तर: (B) यह पुनर्ग्रहीत भूमि व निचले तटीय क्षेत्रों पर बसा है

व्याख्या: मुंबई पुनर्ग्रहीत भूमि, दलदल व ज्वारीय समतल पर बसा प्रायद्वीप है।

प्रश्न 6मध्यम स्तर

एक्सप्रेसवे व राजमार्गों का एक साथ बंद होना किसका उदाहरण है?

(A) कैस्केडिंग (जुड़ती) विफलताएँ
(B) सूखा
(C) भूकंप
(D) हिमस्खलन
उत्तर देखें

उत्तर: (A) कैस्केडिंग (जुड़ती) विफलताएँ

व्याख्या: एक विफलता से जुड़ी अन्य विफलताएँ कैस्केडिंग फेल्योर कहलाती हैं।

प्रश्न 7मध्यम स्तर

अनियोजित शहरीकरण जल-निकासी को कैसे प्रभावित करता है?

(A) जल-अवशोषण घटाकर बहाव बढ़ाता है
(B) वर्षा रोकता है
(C) ज्वार रोकता है
(D) कोई प्रभाव नहीं
उत्तर देखें

उत्तर: (A) जल-अवशोषण घटाकर बहाव बढ़ाता है

व्याख्या: पक्की सतहें जल को सोखने के बजाय बहाव बढ़ाती हैं, जिससे नालों पर भार बढ़ता है।

प्रश्न 8UPSC/RPSC स्तर

"स्पंज सिटी" (Sponge City) अवधारणा के संदर्भ में सर्वाधिक उपयुक्त कथन कौन-सा है?

(A) यह शहर को कंक्रीट से ढकने की योजना है
(B) यह वर्षा-जल को प्राकृतिक रूप से सोखने व संग्रहित करने पर बल देती है
(C) यह केवल बाँध निर्माण है
(D) इसका शहरी बाढ़ से कोई संबंध नहीं
उत्तर देखें

उत्तर: (B) यह वर्षा-जल को प्राकृतिक रूप से सोखने व संग्रहित करने पर बल देती है

व्याख्या: स्पंज-सिटी अवधारणा पारगम्य सतहों, आर्द्रभूमि व हरित अवसंरचना से जल-अवशोषण बढ़ाती है।

प्रश्न 9UPSC/RPSC स्तर

जलवायु परिवर्तन व शहरी नियोजन के संबंध में कौन-सा कथन सर्वाधिक सही है?

(A) पुरानी वर्षा-धारणाएँ अब भी पूर्णतः वैध हैं
(B) जलवायु परिवर्तन से अतिवृष्टि की आवृत्ति बढ़ने पर नियोजन धारणाओं का पुनरीक्षण आवश्यक है
(C) शहरी नियोजन का जलवायु से कोई संबंध नहीं
(D) जलवायु परिवर्तन केवल कृषि को प्रभावित करता है
उत्तर देखें

उत्तर: (B) जलवायु परिवर्तन से अतिवृष्टि की आवृत्ति बढ़ने पर नियोजन धारणाओं का पुनरीक्षण आवश्यक है

व्याख्या: बदलती जलवायु में पुरानी अभिकल्पना-धारणाएँ अपर्याप्त हो जाती हैं, अतः पुनरीक्षण आवश्यक है।

प्रश्न 10UPSC/RPSC स्तर

आर्द्रभूमि (Wetlands) संरक्षण शहरी बाढ़ प्रबंधन में क्यों महत्वपूर्ण है?

(A) ये प्राकृतिक जल-भंडारण व जल-निकासी बफ़र का कार्य करती हैं
(B) ये वर्षा बढ़ाती हैं
(C) इनका जल से कोई संबंध नहीं
(D) ये केवल पर्यटन हेतु हैं
उत्तर देखें

उत्तर: (A) ये प्राकृतिक जल-भंडारण व जल-निकासी बफ़र का कार्य करती हैं

व्याख्या: आर्द्रभूमियाँ अतिरिक्त जल को अस्थायी रूप से संग्रहित कर बाढ़ के शिखर को कम करती हैं।

UPSC / RPSC प्रासंगिकता

  • ➜ शहरी बाढ़, आपदा प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूलन (GS-3 आपदा प्रबंधन)।
  • ➜ मानसून तंत्र, पश्चिमी घाट एवं कोंकण की वर्षा (भूगोल, प्रारंभिक परीक्षा)।
  • ➜ शहरी नियोजन, आर्द्रभूमि संरक्षण एवं स्पंज-सिटी अवधारणा (GS-1/GS-3)।
  • ➜ अवसंरचना की भेद्यता एवं कैस्केडिंग विफलताएँ (GS-3)।

UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न

"भारत के महानगरों में बढ़ती शहरी बाढ़ मुख्यतः जलवायु परिवर्तन का नहीं, बल्कि दोषपूर्ण शहरी नियोजन का परिणाम है।" मुंबई के उदाहरण सहित इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए तथा उपयुक्त समाधान सुझाइए। (250 शब्द, 15 अंक)

📚 Cosmo Classes की अन्य महत्वपूर्ण कैटेगरी