राज्यसभा में नियम 267 क्या है? अर्थ, प्रक्रिया एवं महत्व

विकास सर द्वारा, संस्थापक एवं वरिष्ठ फैकल्टी – Cosmo Classes | 23 जुलाई 2026

जुलाई 2026 में नियम 267 एक बार फिर चर्चा में आ गया, क्योंकि विपक्षी सदस्यों ने राज्यसभा में बार-बार इसका सहारा लिया। सरल शब्दों में, यह नियम राज्यसभा की कार्य-संचालन एवं प्रक्रिया नियमावली में शामिल एक प्रक्रियात्मक प्रावधान है, जो किसी सदस्य को यह अनुरोध करने की अनुमति देता है कि दिन की निर्धारित कार्यसूची को स्थगित कर किसी अत्यावश्यक राष्ट्रीय मुद्दे पर तुरंत चर्चा कराई जाए। राज्यसभा भारतीय संसद का उच्च सदन है और इसके सभापति भारत के उपराष्ट्रपति होते हैं जो पदेन रूप में यह भूमिका निभाते हैं।

नियम 267 का मूल विचार ‘अत्यावश्यकता’ है। जो सदस्य मानता है कि किसी विषय पर सदन का तत्काल ध्यान आवश्यक है, वह निर्धारित कार्य को स्थगित करने के लिए नोटिस दे सकता है। परंतु यह कोई ऐसा अधिकार नहीं है जिसका प्रयोग सदस्य अपनी इच्छा से कर सके — यह नियम तभी लागू होता है जब सभापति औपचारिक रूप से नोटिस स्वीकार करें। इससे यह तय करने की शक्ति सभापति के पास रहती है कि कौन-सा मुद्दा इस असाधारण स्थगन के योग्य है।

प्रक्रिया की दृष्टि से, नियम 267 के अंतर्गत नोटिस सदस्यों द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं और फिर सभापति द्वारा उनकी जांच की जाती है। सभापति यह आकलन करते हैं कि क्या वह मुद्दा वास्तव में दिन के कार्य को बाधित करने योग्य है, और यदि नोटिस निर्धारित प्रारूप में नहीं है या प्रक्रियात्मक शर्तों को पूरा नहीं करता तो उसे अस्वीकार कर सकते हैं। चूंकि स्वीकृति विवेकाधीन है, इसलिए ऐतिहासिक रूप से इस नियम का प्रयोग बहुत कम हुआ है।

हालिया नोटिसों की लहर इसी प्रवृत्ति को दर्शाती है। 22 एवं 23 जुलाई 2026 को विपक्षी सदस्यों, जिनमें नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल थे, ने कथित NEET-UG 2026 पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में कथित संकट तथा छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा हेतु नियम 267 के अनेक नोटिस दिए। CPI सांसद संदोष कुमार पी और कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने भी नोटिस दिए।

नियम 267 को नियम 176 से अलग समझना आवश्यक है, जो पूरे दिन की कार्यसूची को स्थगित किए बिना अल्पकालिक चर्चा का प्रावधान देता है। यह अंतर महत्वपूर्ण है: नियम 267 निर्धारित कार्य को पूरी तरह बाधित करता है, इसीलिए सभापति इसे सतर्कता से देखते हैं। उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने इसके प्रयोग को ‘विरलतम में विरल’ अवसरों के लिए आरक्षित बताया था।

नियम 267 का सामरिक महत्व केवल प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। विपक्ष के लिए यह जवाबदेही स्थापित करने और असुविधाजनक मुद्दों को संसदीय अभिलेख में दर्ज कराने का साधन है। सरकार के लिए ऐसे नोटिस स्वीकार करना विधायी कार्यसूची पर नियंत्रण छोड़ने जैसा हो सकता है। इस नियम के अंतर्गत अंतिम बार अनुमत चर्चा नवंबर 2016 में विमुद्रीकरण पर हुई थी, जो सभापति मो. हामिद अंसारी के कार्यकाल में हुई।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)

नियम 267 राज्यसभा की कार्य-संचालन एवं प्रक्रिया नियमावली का भाग है।
राज्यसभा के सभापति पदेन रूप से भारत के उपराष्ट्रपति होते हैं।
यह नियम राष्ट्रीय महत्व के अत्यावश्यक विषय पर चर्चा हेतु दिन की कार्यसूची स्थगित करने के लिए है।
नियम 267 का नोटिस सभापति की स्वीकृति पर निर्भर है, यह स्वतः अधिकार नहीं है।
नियम 176 पूरे दिन की कार्यसूची स्थगित किए बिना अल्पकालिक चर्चा का प्रावधान देता है।
इस नियम के अंतर्गत अंतिम स्वीकृत चर्चा नवंबर 2016 में विमुद्रीकरण पर हुई थी।
उपसभापति हरिवंश ने इसके प्रयोग को ‘विरलतम में विरल’ घटना बताया।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

कुल 10 प्रश्न — 7 मध्यम स्तर एवं 3 UPSC/RPSC स्तर के।

मध्यम स्तर

Q1. नियम 267 भारतीय संसद के किस सदन से संबंधित है?

A. लोकसभा
B. राज्यसभा
C. दोनों सदन संयुक्त रूप से
D. राज्य विधान परिषद
उत्तर देखें
उत्तर: B – राज्यसभा
व्याख्या: नियम 267 राज्यसभा की कार्य-संचालन एवं प्रक्रिया नियमावली का भाग है।
मध्यम स्तर

Q2. राज्यसभा के पदेन सभापति कौन होते हैं?

A. भारत के राष्ट्रपति
B. प्रधानमंत्री
C. भारत के उपराष्ट्रपति
D. लोकसभा अध्यक्ष
उत्तर देखें
उत्तर: C – भारत के उपराष्ट्रपति
व्याख्या: अनुच्छेद 64 के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं।
मध्यम स्तर

Q3. नियम 267 के नोटिस का मुख्य उद्देश्य क्या है?

A. धन विधेयक पारित करना
B. अत्यावश्यक चर्चा हेतु दिन की कार्यसूची स्थगित करना
C. उपसभापति का चुनाव
D. अविश्वास प्रस्ताव लाना
उत्तर देखें
उत्तर: B – अत्यावश्यक चर्चा हेतु दिन की कार्यसूची स्थगित करना
व्याख्या: यह नियम तत्काल राष्ट्रीय महत्व के विषय पर चर्चा हेतु निर्धारित कार्यसूची को स्थगित करने की अनुमति देता है।
मध्यम स्तर

Q4. नियम 267 का नोटिस किसकी स्वीकृति के बाद ही उठाया जा सकता है?

A. प्रधानमंत्री
B. सभापति
C. सदस्यों के बहुमत
D. राष्ट्रपति
उत्तर देखें
उत्तर: B – सभापति
व्याख्या: नोटिस स्वीकार करना पूर्णतः सभापति के विवेक पर निर्भर है।
मध्यम स्तर

Q5. राज्यसभा का नियम 176 किससे संबंधित है?

A. महाभियोग
B. अल्पकालिक चर्चा
C. प्रश्नकाल
D. सदन का स्थगन
उत्तर देखें
उत्तर: B – अल्पकालिक चर्चा
व्याख्या: नियम 176 पूरे दिन की कार्यसूची स्थगित किए बिना अल्पकालिक चर्चा की अनुमति देता है।
मध्यम स्तर

Q6. नियम 267 के अंतर्गत अंतिम स्वीकृत चर्चा कब हुई थी?

A. नवंबर 2016
B. अगस्त 2019
C. जुलाई 2021
D. जनवरी 2023
उत्तर देखें
उत्तर: A – नवंबर 2016
व्याख्या: अंतिम स्वीकृत चर्चा नवंबर 2016 में विमुद्रीकरण पर हुई थी।
मध्यम स्तर

Q7. नियम 267 के प्रयोग को ‘विरलतम में विरल’ किसने बताया?

A. जगदीप धनखड़
B. हरिवंश नारायण सिंह
C. मो. हामिद अंसारी
D. वेंकैया नायडू
उत्तर देखें
उत्तर: B – हरिवंश नारायण सिंह
व्याख्या: उपसभापति हरिवंश ने इसके प्रयोग को विरलतम में विरल अवसरों के लिए आरक्षित बताया।
UPSC/RPSC स्तर

Q8. निम्न में से कौन-सा कारण यह बताता है कि सभापति नियम 267 का प्रयोग बहुत सतर्कता से करते हैं?

A. इसके लिए संविधान संशोधन आवश्यक है
B. यह सदन के निर्धारित कार्य को पूरी तरह स्थगित कर देता है
C. यह केवल संयुक्त बैठक में लाया जा सकता है
D. यह स्वतः सदन भंग कर देता है
उत्तर देखें
उत्तर: B – यह सदन के निर्धारित कार्य को पूरी तरह स्थगित कर देता है
व्याख्या: चूंकि यह पूरे दिन की कार्यसूची बाधित करता है, इसलिए सभापति इसे केवल असाधारण स्थिति में स्वीकार करते हैं।
UPSC/RPSC स्तर

Q9. नियम 267 और नियम 176 के बीच सबसे सटीक अंतर कौन-सा है?

A. 267 लोकसभा में, 176 राज्यसभा में
B. 267 पूरी कार्यसूची स्थगित करता है व सभापति-स्वीकृत है; 176 बिना स्थगन के अल्प चर्चा देता है
C. 267 को राष्ट्रपति की स्वीकृति चाहिए; 176 को प्रधानमंत्री की
D. दोनों समान क्षेत्र व प्रभाव रखते हैं
उत्तर देखें
उत्तर: B – 267 पूरी कार्यसूची स्थगित करता है व सभापति-स्वीकृत है; 176 बिना स्थगन के अल्प चर्चा देता है
व्याख्या: मुख्य अंतर दायरे का है: नियम 267 निर्धारित कार्य पूरी तरह रोकता है जबकि नियम 176 कार्यसूची के भीतर सीमित चर्चा देता है।
UPSC/RPSC स्तर

Q10. विपक्ष द्वारा नियम 267 का बार-बार सहारा लेना मुख्यतः संसदीय कार्यप्रणाली के किस पहलू को दर्शाता है?

A. अध्यादेश बनाने की प्रक्रिया
B. विधायी जवाबदेही एवं कार्यसूची-निर्धारण का साधन
C. परिसीमन की प्रक्रिया
D. करों का संघीय वितरण
उत्तर देखें
उत्तर: B – विधायी जवाबदेही एवं कार्यसूची-निर्धारण का साधन
व्याख्या: विपक्ष इसका उपयोग जवाबदेही सुनिश्चित करने और अपने अनुसार अत्यावश्यक मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए करता है।

UPSC / RPSC प्रासंगिकता

➜ प्रारंभिक परीक्षा: संसदीय प्रक्रिया, प्रक्रिया नियमावली, राज्यसभा सभापति की भूमिका।
➜ मुख्य परीक्षा GS-II: संसद एवं राज्य विधानमंडल – संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन।
➜ शासन/राजव्यवस्था: विधायी जवाबदेही के उपकरण एवं सरकार-विपक्ष के अधिकारों में संतुलन।
➜ करेंट अफेयर्स लिंक: 2026 की परीक्षा-संबंधी विवादों में नियम 267 का प्रयोग।

UPSC मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक प्रश्न

राज्यसभा के नियम 267 को प्रायः ‘विरलतम में विरल’ प्रक्रियात्मक उपकरण कहा जाता है। विधायी जवाबदेही सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए, और चर्चा कीजिए कि सभापति में निहित व्यापक विवेकाधिकार उच्च सदन के विचार-विमर्शीय स्वरूप को सुदृढ़ करता है अथवा कमज़ोर।

(250 शब्द, 15 अंक)

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